लखनऊ
राजधानी लखनऊ में सोमवार को किसान महापंचायत हुई। इसमें लखीमपुर हिंसा का मुद्दा प्रमुखता से उठा गया। मंच पर हिंसा में मृत किसानों के परिवारों को सम्मानित भी किया गया। योगेंद्र यादव ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री को अहंकार की बीमारी लगी है। इसका इलाज जनता ही करती है। बंगाल ने छोटा सा इंजेक्शन दिया था। अब सबसे बड़ा इंजेक्शन लगाना पड़ेगा और वह उत्तर प्रदेश का चुनाव होगा।
वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार मंत्री अजय मिश्र टेनी को हीरो बनाना चाहती है। उसको हम आगरा की जेल में हीरो बनाएंगे। उसने किसानों की हत्या की, वह भी आतंकवादी है। टिकैत ने कहा कि सरकार MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) गारंटी कानून और अन्य मुद्दों पर बातचीत कर ले, नहीं तो हम जाने वाले नहीं है। आने वाले 17 कानून हमारे टारगेट हैं। 26 को हमारा ट्रैक्टर मार्च का प्रोग्राम है। 29 से 2 दिसंबर तक कानून वापस होगा। हम मुकदमों का हिसाब लेकर गांव नहीं जाना चाहते हैं। हम दिल्ली में ही हिसाब कर गांव जाएंगे। सरकार और एलआईयू के लोग बता दें कि हम बातचीत के जरिए हल चाहते हैं।
महापंचायत में राकेश टिकैत व अन्य नेता।
टिकैत ने और यह कहा
- पीएम कहते हैं कि MSP पर हमने कमिटी बनाई, लेकिन झूठ बोलते हैं। 2011 में कमिटी बनी थी।
- उस समय नरेंद्र मोदी उस कमिटी के अध्यक्ष थे। तब रिपोर्ट दिया था कि MSP बने।
- आज भी पीएमओ में वह रिपोर्ट है। अब अपने ही रिपोर्ट को पीएम मोदी लागू करें।
- 1967 में 3 क्विंटल गेंहू में एक तोला सोना मिलता था। आज भी 3 क्विंटल गेहूं में एक तोला सोना दे दें।
- हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हमने संघर्ष विराम की कोई घोषणा नहीं की है। यह घोषणा उन्होंने की है।
- हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे। मंडियों को बेचा जा रहा है। यह देश को बेचने का काम करेंगे। हिंदू मुस्लिम को लड़ाने का काम करेंगे।
महापंचायत में किसानों ने कहा कि हम लखनऊ पंचायत करने पहुंचे तो योगी जी गोरखपुर चले गए।
अपडेट्स…
- किसान नेता डॉक्टर दर्शन पाल सिंह ने कहा कि डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि हरियाणा-पंजाब में भाजपा के मंत्री-नेता प्रोग्राम नहीं करने पा रहे हैं। यूपी में भी 2022 में भाजपा को सबक सिखाएं। अभी आपने तानाशाही सरकार को एक कदम पीछे धकेला है, जो पिछले 8 सालों से अपने फैसलों से एक इंच भी पीछे नहीं हटा।
- अतुल कुमार अंजान ने कहा कि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र कहते हैं कि सरकार फिर इस बिल को ला सकती है। मतलब हमारे साथ धोखा हो सकता है। हम खेती का कंपनीकरण नहीं होने देंगे। हमारा अगला पड़ाव बनारस होगा। मोदी का वह कारखाना जहां से वो वोट लेकर संसद में आए है।
- लखीमपुर हिंसा में मृतक किसानों के परिवारों को महापंचायत पर बैठाया गया। यहां उन्हें सम्मानित किया गया। साथ ही मंत्री अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी का मुद्दा उठाया गया।
- संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने कहा कि यूपी में धान की खरीद, डीएपी, अन्ना जानवर से होने वाले नुकसान को दैवीय आपदा में शामिल किया जाए। हमारी महीनों की रखवाली कुछ मिनटों में खत्म हो जाती है। कृषि काम के लिए बिजली मुफ्त, किसानों का कर्ज माफ हो।
- शिव कुमार कक्का ने कहा कि सत्याग्रह में सच की जीत होती है। हम पर आतंकवादी, देशद्रोही समेत बहुत आरोप लगाए। 26 जनवरी के बाद मीडिया ने हमको रातों-रात गद्दार साबित कर दिया। अन्नदाता तिरंगे का अपमान नहीं करते।
- अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले ने कहा कि हम 700 किसानों की शहादत का बदला लेंगे। यह बदला 2022 और 2024 में भाजपा की हार से लिया जाएगा। तीनों कानूनों की वापसी अंबानी और अडानी की हार है।
- अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव हन्नान मौलाना ने कहा कि देश के 90 करोड़ किसानों ने एक साल आंदोलन चलाया। इस आंदोलन में 700 लोगों ने अपनी शहादत दी, अगर 7000 भी शहीद हो गए तो भी हम वापस नहीं जाएंगे। जब तक हम जीत नहीं जाते।
- उन्होंने कहा कि पहले बिना किसी से पूछे कानून को लागू किया और बिना बात किए वापस लिया। यह लोकतांत्रिक सरकार है? ऐसी सरकार नहीं चाहिए। नो वोट फॉर बीजेपी। यह संयुक्त किसान मोर्चा का ऐलान है। बीजेपी ने हमारे साथ गद्दारी किया है।
- जगमोहन सिंह ने कहा कि लखनऊ रैली इस बात का ऐलान करती है कि अगर कातिलों का साथ दिया आप (मोदी-योगी) होंगे ना आपकी कुर्सी होगी।
- रविंद्र सिंह ने कहा कि दिल्ली का यूपी से होकर रास्ता जाता है। हम अपनी मांगों को जनता के बीच ले जाएंगे।
- जोगिंदर सिंह उग्राहा ने कहा कि लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा का मुख्य दोषी अजय मिश्रा टेनी का परिवार है। शर्म आनी चाहिए ऐसे आदमी का लखनऊ के अंदर सम्मान किया जाता है।
- ओडिशा के किसान नेता हिमांशु तिवारी ने लखीमपुर हिंसा का मुद्दा उठाया। कहा- मंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त किया जाए।
- सोशल एक्टिविस्ट एसआर दारापुरी ने कहा कि आदिवासी और वनवासियों को जमीन देने के लिए 2006 में कानून बना था, जितने भी दावे किए थे उसमें से 81% दावे सरकार की तरफ से खारिज कर दिए गए।
- देवरिया के किसान सतीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में साल 2022 में बदलाव होने जा रहा है। बदलाव का रास्ता लखनऊ की किसान महापंचायत तय करेगी। हमने अपने आंदोलन की ताकत दिखा दी है। सरकार का घमंड चकनाचूर हो गया है
मंच पर सभी बड़े किसान नेता पहुंच चुके हैं।
एक साल में जितने घटनाक्रम हुए, उस पर बात करे सरकार
इससे पहले मीडिया से बातचीत करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि एक साल में जितने भी घटनाक्रम हुए उन पर सरकार बात करे और एक स्पष्ट पत्र जारी करे। ये आज देश की संपत्ति, मंडियों की जमीनों को बेच रहे हैं, उस पर कौन बात करेगा। ये आंदोलन एक साल से चल रहा है। ये आंदोलन सिर्फ तीन कृषि कानून पर नहीं है, इसके साथ MSP और बिजली अमेंडमेंट बिल भी है। जब तक बातचीत नहीं होगी तब तक किसान वापस नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि उन किसानों का क्या जो आंदोलन में शहीद हो गए? शहीद किसानों के लिए स्मारक बनवाया जाए। गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र को बर्खास्त किया जाए। सरकार से टेबल पर बैठकर बातचीत के बाद ही घर वापसी होगी।
राकेश टिकैत ने असदुद्दीन ओवैसी के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि CAA कानून वापसी हो वरना यूपी को शाहीन बाग बना देंगे। टिकैत ने कहा कि ओवैसी और भाजपा के बीच चाचा-भतीजा वाली बॉन्डिग है। उन्हें इस बारे में टीवी पर बात नहीं करनी चाहिए, वे सीधे पूछ सकते हैं।
200 से ज्यादा किसान संगठन शामिल
बताया जा रहा है कि इस आंदोलन में अब तक छोटे-बड़े दौ सौ से ज्यादा किसान संगठन शामिल हैं। सभी लोग संयुक्त किसान मोर्चा के तहत एक मंच पर आ चुके हैं। रैली में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड समेत कई राज्यों के लोग शामिल होने के लिए पहुंचे हैं।

