भोपाल. देश में पहली बार मध्य प्रदेश में चलने-फिरने में लाचार बुजुर्गों के लिए ‘होप’ नाम से घर पर इलाज देने की शुरूआत हुई है. नेशनल हेल्थ मिशन ने होम बेस्ड प्रोग्राम फॉर एल्डरली यानी ‘होप’ योजना शुरू की है. इसमें नर्सिंग स्टाफ घर जाकर बुजुर्गों की जांच और इलाज कर रहा है. स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में अभी प्रदेश भर में एक लाख बुजु्र्गों का चयन किया गया है. राजधानी भोपाल और इंदौर समेत राज्य के 6 शहरों से योजना की शुरुआत की गई है.
भोपाल के इंद्रपुरी इलाके में रहने वाले 84 साल के श्याम मिश्रा ने कई साल पहले जब अपना घर बनाया था, तो नाम रखा था आशियान एवेन्यू. उस वक्त भरा पूरा परिवार था. बीते सालों में पत्नी की मौत हो गई. तीन बेटों में से एक बेटा भी वक्त के पहले दुनिया छोड़ गया. एक बेटे ने नौकरी के लिए भोपाल छोड़ दिया. एक बेटा दिनभर रोजी-रोटी के लिए घर से बाहर रहता है. जाहिर तौर पर श्याम निहायत अकेले हैं. मध्य प्रदेश में एनएचएम की तरफ से इस योजना के लिए एक लाख बुजुर्ग चुने गए हैं, जिनके घर जाकर एनएचएम की हेल्थ टीम इलाज करती है. आसरा एवेन्यू में रहने वाले 84 साल के श्याम मिश्रा के पास हेल्थ टीम आई है. उन्होंने कहा कि इनका आना बहुत अच्छा लगता है. मेरा पूरा ख्याल रखते हैं. परिवार में लड़का है, कोई नहीं है. घर में उम्मीद बंधती है. इससे इन्सपायर होते हैं. 95 साल की अजब बाई चतुर्वेदी के लिए भी NHM की HOPE टीम उम्मीद की किरण लेकर आई है.
बुजुर्गों की जिंदगी में आशा का संचार मकसद
मध्य प्रदेश में एनएचएम की मैनेजिंग डायरेक्टर सलोनी सिडाना के मुताबिक, HOPE का मकसद बीमार या चलने-फिरने में लाचार बुजुर्गों की जिंदगी में आशा का संचार करना है. होम बेस्ड प्रोग्राम फॉर एल्डरली यानी HOPE लेकिन अगर आप इसका हिन्दी अनुवाद करेंगे, तो इसका मतलब आशा है. आशा हमारे स्वास्थ्य विभाग की सबसे मजबूत कार्यकर्ता है बल्कि एक व्यक्ति के जीवन में भी आशा का बहुत महत्व है. जैसा नाम बताता है कि वो बुजुर्ग जो हेल्थ केयर सेंटर तक नहीं आ सकते हैं, हम उन तक बीच-बीच में पहुंचकर कि उनका स्वास्थ्य कैसा है, क्या परेशानी हैं, खासतौर पर वो जो बेड पर हैं, उनकी अगर टर्मिनल इलनेस है, हम उनकी केयर कर पाएं, यह पूरे प्रोग्राम का उद्देश्य है.
आम बजट में दिया गया महत्व
इस बार के बजट में भी गेरियाट्रिक केयर को बहुत महत्व दिया गया है. मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां यह प्रोग्राम शुरू किया गया है. अभी भोपाल, इंदौर, रीवा, ग्वालियर, उज्जैन जैसे अर्बन 6 जिलों में शुरू किया है क्योंकि अर्बन एरिया में न्यूक्लियर फैमिली होने से हमारा गेरियाट्रिक केयर ज्यादा उपेक्षित है. ग्रामीण इलाकों में जॉइंट फैमिली हैं, तो कोई न कोई केयर करने वाला होता है. आगे हम डिविजनल हेडक्वाटर्स वाले सारे जिलों को कवर करेंगे. धीरे-धीरे सारे जिलों के शहरी इलाकों में यह प्रोग्राम शुरू करेंगे.
