महाराष्ट्र में भादौ अमावस्या तक सावन मनाया जाता है। इसको लेकर जय महाकाल मंडल महाराष्ट्र ने अनूठी कावड़ यात्रा निकाली जा रही है, जिसमें कांवड़िए 11 क्विंटल वजन और 70 फीट लंबी कांवड़ लेकर चल रहे हैं…

खरगोन: निमाड़-मालवा में सावन मास खत्म हो गया है, लेकिन महाराष्ट्र में भादौ अमावस्या तक सावन मनाया जाता है। इसको लेकर जय महाकाल मंडल महाराष्ट्र ने अनूठी कावड़ यात्रा निकाली है। सावन माह में कई कावड़ यात्राएं कई निकलती है, लेकिन इस कावड़ यात्रा की बात अलग है। ये कांवड़िए 7 दिन में 300 किमी की दूरी तय कर अमरावती के पांढरी पहुंचेंगे।
मंडल ने 11 क्विंटल वजनी व 70 फीट लंबी कावड़ बनाई। इसे 90 कांवड़िए उठाकर ले जा रहे हैं। यात्रा में 700 से ज्यादा कावड़िए शामिल हैं। मंगलवार को ओंकारेश्वर से यात्रा की शुरूआत की। ये 3 से 4 किमी की दूरी तय कर बारी-बारी से कावड़ उठाते हैं। यात्रा सातवें दिन अमरावती के पांढरी पहुंचेगी। कुल दूरी करीब 300 किमी है।
गजानन और दयालेश्वर की झांकी
जय महाकाल मंडल महाराष्ट्र भक्ति से सराबोर और जयकारों के साथ निकाली जा रही इस अनूठी कांवड़ यात्र में सबसे आगे गणेश जी की झांकी है। इसके बाद 40 नर्मदा जल से भरे कलश, सेगांव के गजानंद महाराज की झांकी, ग्राम देवता दयालेश्वर महादेव का शिवलिंग और सबसे पीछे भोलेनाथ की झांकी सजाई गई है। यात्रा में 6 झांकियां शामिल हैं।
सात सालों से लगातार निकाल रहे कांवड़ यात्रा
यात्रा का संचालन कर रहे कमलेश सुंदरलाल पटेल ले बताया कि कुबरेश्वर धाम सीहोर गए थे। यह यात्रा पिछले सात वर्षों से निकाली जा रही है। इस बार 700 लोग शामिल हैं। यात्रा में 6 झांकियां, 3 डीजे, 7 ट्रक व अन्य वाहन भी हैं। चार टीमें बनाई गई हैं। ये अलग-अलग स्थानों पर बदलती रहती हैं। यात्रा का उद्देश्य देश में सुख, शांति व खुशहाली की कामना है। कावड़ियों के साथ वाहन भी चल रहे हैं। ये आगे जाकर भोजन, रुकने और अन्य इंतजाम करते हैं। उन्होंने बताया यात्रा के दौरान 6 पड़ाव होंगे।