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मुक्तिधामों में अस्थियों का अंबार, निगम सामाजिक संस्थाओं की मदद से नदी में करेगा विसर्जित

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इंदौर

हिंदू परंपरा के अनुसार व्यक्ति की मौत होने के बाद उसकी अस्थियों को जल में प्रवाहित करने से मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। लेकिन कोरोना काल में यह इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। इंदौर के मुक्तिधामों में अस्थि कलश रखने के लिए जगह नहीं बची है। अस्थियां मुक्तिधाम में इधर-उधर पड़ी हुई हैं।

इस मामले की शिकायत हुई तो निगम कर्मचारियों को फटकार लगाई गई, जिसके चलते अब अस्थियों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है, वहीं दूसरी और निगम शहर की सामाजिक संस्थाओं की मदद से अस्थियों का नदी में विसर्जन की तैयारी में जुटा है ।

कोरोना आपदा के दौर में जिला प्रशासन के आंकड़ों से भले ही श्मशान के आंकड़े मेल न खा रहे हो। लेकिन श्मशान घाट में दाह संस्कार के बाद बड़ी संख्या में अस्थियों की पोटलियां बता रही है कि मृतकों की संख्या सैकड़ों में होगी। पश्चिम क्षेत्र के पंचकुइया मुक्ति धाम में इन दोनों अस्थियों का अंबार सा लगा हुआ है। मृतकों के परिजन को बीमारी का डर है तो कोई परिवारिक विवाद के चलते अस्थियां नहीं ले जा रहा है और जहां अस्थियां रखवाई जाती है, वहां हर दिन संख्या बढ़ती जा रही है। अस्थि गृह की देखभाल करने वाले व्यक्ति से बात की तो उनका कहना था कि कई लोग अस्थियां ले जाना भूल जाते हैं तो कई लोग सालों बाद आते हैं।

शिवनारायण भावसार, मुक्तिधाम कर्मचारी

बीमारी के डर से भी कई लोग अस्थियां लेने नहीं आ रहे हैं। उनका मानना है कि बीमारी के चले जाने व जनता कर्फ्यू के बाद इन अस्थियों का विसर्जन किया जाएगा। अस्थि गृह में करीबन 500 से 800 लोगों की अस्थियां रखी हुई है। रखरखाव की अलग व्यवस्था अस्थियों की बढ़ती संख्या से चिंता बनी हुई है। इस वजह से मुक्तिधाम के संचालकों को आने वाले दिनों में अस्थियों के रखरखाव के लिए अलग से व्यवस्था करना पड़ सकती है।

अधिकारियों के मुताबिक एक दर्जन से अधिक मुक्तिधामों पर पिछले दिनों हुए अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां इकट्ठा हो गई थी, जो यहां-वहां लापरवाह और बदहाल हालत में पड़ी थी। इस बारे में जब शिकायत मिली तो अधिकारियों ने कर्मचारियों को फटकार लगाकर अस्थियों को सुरक्षित स्थानों पर रखवाया। कई लोगों के परिजन अंतिम संस्कार के बाद अस्थियां लेने ही नहीं पहुंचे, जिसके कारण यह स्थितियां बनी है। अब नगर निगम शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों से चर्चा कर रहा है और उनकी मदद से ऐसी अस्थियों का विसर्जन नर्मदा में किया जाएगा।

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