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राज्यसभा में राजा vs महाराजा:मोदी सरकार की तारीफ पर दिग्विजय ने सिंधिया की चुटकी ली, कहा- वाह जी महाराज वाह, हमारा आशीर्वाद आपके साथ

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नई दिल्ली

राज्यसभा में गुरुवार को तब ठहाके लगने लगे, जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के तुरंत बाद दिग्विजय सिंह का नाम चर्चा में हिस्सा लेने के लिए पुकारा गया। ठहाकों के बीच सभापति एम वेंकैया नायडू ने चुटकी ली, बोले- ‘मैंने कुछ परिवर्तन तो किया नहीं। लिस्ट में जो नाम आए, उसी के हिसाब से मैंने आपका नाम पुकारा।’ इस पर दिग्विजय सिंह भी मुस्कुरा दिए।

दिग्विजय बोले- माननीय सिंधिया जी को बधाई

दिग्विजय ने कहा- किसानों से बातचीत का जिम्मा राजनाथ को देना था

सिंधिया बोले- भारत ने कोरोना के बाउंसर को बाउंड्री के पार भेजा
सिंधिया ने चर्चा के दौरान कहा कि कोरोना एक अदृश्य शत्रु था। दुनिया में करोड़ों लोग संक्रमित हुए। 20 लाख जानें गईं, लेकिन भारत ने कोरोना के बाउंसर को शॉट लगाकर बाउंड्री पार करा दिया। अभी एवरेज ग्लोबल रिकवरी रेट 70% है। भारत में यह सबसे ज्यादा 97% है। कोरोना की दूसरी लहर भारत को छू भी नहीं पाई, क्योंकि नेतृत्व ने सही समय पर सही फैसले लिए।

‘जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी’
सिंधिया ने पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार की मुख्यमंत्रियों को लिखी एक चिट्‌ठी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस चिट्‌ठी में पवार ने निजी निवेश को जरूरी बताया था। हमें जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी। देश के साथ यह खिलवाड़ कब तक चलेगा।

देवेगौड़ा बोले- हिंसा के लिए किसान जिम्मेदार नहीं
पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस सांसद एचडी देवेगौड़ा ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर जो हुआ, हम उसकी निंदा करते हैं, लेकिन इसके लिए किसान जिम्मेदार नहीं हैं। उन्हें इसकी सजा नहीं दी जानी चाहिए। कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां हिंसा की। यह राज्य का विषय है, इसलिए इस मुद्दे पर राज्य सरकार की राय भी लेनी चाहिए। धरने की जगह के आसपास कंक्रीट की दीवार बनाकर मदद नहीं मिलेगी। सरकार को यह मसला शांति से सुलझाना होगा।

राजद के सांसद मनोज कुमार ने किसानों का मुद्दा उठाया
राज्यसभा में गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही किसानों का मुद्दा उठा। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि बिहार देशभर में लेबर सप्लाई करने वाला राज्य बन गया है। यहां मिनिमम सपोर्ट प्राइज खत्म होने के बाद किसान खेतिहर मजदूर बन गए। आप चाहते हैं कि पंजाब और हरियाणा के किसान भी उनकी तरह हो जाएं।

झा ने एक कविता भी पढ़ी…
‘यदि देश की सुरक्षा यही होती है कि बिना जमीर होना जिंदगी के लिए शर्त बन जाए, आंख की पुतली में हां के सिवाय कोई भी शब्द अश्लील हो और मन बदकार पलों के सामने दंडवत झुका रहे तो हमें देश की सुरक्षा से खतरा है।’

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