नई दिल्ली
राज्यसभा में गुरुवार को तब ठहाके लगने लगे, जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया के तुरंत बाद दिग्विजय सिंह का नाम चर्चा में हिस्सा लेने के लिए पुकारा गया। ठहाकों के बीच सभापति एम वेंकैया नायडू ने चुटकी ली, बोले- ‘मैंने कुछ परिवर्तन तो किया नहीं। लिस्ट में जो नाम आए, उसी के हिसाब से मैंने आपका नाम पुकारा।’ इस पर दिग्विजय सिंह भी मुस्कुरा दिए।
दिग्विजय बोले- माननीय सिंधिया जी को बधाई
- सभापति की बात सुनने के बाद दिग्विजय ने कहा, ‘माननीय सिंधिया जी को बधाई देता हूं। जितने अच्छे ढंग से वे यूपीए सरकार का पक्ष रखते थे, उतने ही अच्छे ढंग से उन्होंने एनडीए सरकार का पक्ष रखा। वाह जी महाराज वाह, वाह जी महाराज वाह!’
- इतना सुनते ही ज्योतिरादित्य भी मुस्कुराने लगे। उन्होंने दिग्विजय से कहा, ‘सब आपका आशीर्वाद है।’ दिग्विजय ने भी तुरंत जवाब दिया। हाथ उठाकर बोले- ‘आशीर्वाद हमेशा रहेगा। आप जिस पार्टी में रहें, हमारा आशीर्वाद आपके साथ था, आपके साथ है और रहेगा।’
- दरअसल, राज्यसभा में राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव और किसानों के मुद्दे पर लगातार दूसरे दिन चर्चा हो रही थी। चर्चा में दिग्विजय का नंबर आने से ठीक पहले ज्योतिरादित्य ने यह कहकर अपनी बात खत्म की थी कि कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत का जो सपना अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था, उसे मोदी सरकार ने पूरा करके दिखाया है।
- इस पर दिग्विजय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का कानून जब आप लाए तो किसी भी तरह से कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत नजर नहीं आई। क्या आतंकवाद खत्म हो गया?
दिग्विजय ने कहा- किसानों से बातचीत का जिम्मा राजनाथ को देना था
- दिग्विजय ने राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल के नाम पर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, ‘किसानों से चर्चा करने के लिए सरकार ने कृषि मंत्री को लगाया। साथ में पीयूष गोयल को लगाया। पीयूष गोयल का किसानों से क्या लेना-देना है?’
- इसके बाद दिग्विजय ने हाथ घुमा-घुमाकर कहा, ‘राजनाथ सिंह को रखना चाहिए था। राजनाथ सिंह किसान आंदोलन के पक्ष में रहते थे। उन्होंने कहा था कि किसान चाहे कांग्रेस का हो या भाजपा का, हम उसका साथ देंगे। राजनाथ सिंह ने पंजाब में केसरिया पगड़ी लगाकर कहा था कि हम किसानों का साथ देंगे। फिर पीयूष गोयल कैसे किसानों का प्रतिनिधित्व करेंगे?’
सिंधिया बोले- भारत ने कोरोना के बाउंसर को बाउंड्री के पार भेजा
सिंधिया ने चर्चा के दौरान कहा कि कोरोना एक अदृश्य शत्रु था। दुनिया में करोड़ों लोग संक्रमित हुए। 20 लाख जानें गईं, लेकिन भारत ने कोरोना के बाउंसर को शॉट लगाकर बाउंड्री पार करा दिया। अभी एवरेज ग्लोबल रिकवरी रेट 70% है। भारत में यह सबसे ज्यादा 97% है। कोरोना की दूसरी लहर भारत को छू भी नहीं पाई, क्योंकि नेतृत्व ने सही समय पर सही फैसले लिए।
‘जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी’
सिंधिया ने पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार की मुख्यमंत्रियों को लिखी एक चिट्ठी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस चिट्ठी में पवार ने निजी निवेश को जरूरी बताया था। हमें जुबान बदलने की आदत बदलनी होगी। देश के साथ यह खिलवाड़ कब तक चलेगा।
देवेगौड़ा बोले- हिंसा के लिए किसान जिम्मेदार नहीं
पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस सांसद एचडी देवेगौड़ा ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर जो हुआ, हम उसकी निंदा करते हैं, लेकिन इसके लिए किसान जिम्मेदार नहीं हैं। उन्हें इसकी सजा नहीं दी जानी चाहिए। कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां हिंसा की। यह राज्य का विषय है, इसलिए इस मुद्दे पर राज्य सरकार की राय भी लेनी चाहिए। धरने की जगह के आसपास कंक्रीट की दीवार बनाकर मदद नहीं मिलेगी। सरकार को यह मसला शांति से सुलझाना होगा।
राजद के सांसद मनोज कुमार ने किसानों का मुद्दा उठाया
राज्यसभा में गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही किसानों का मुद्दा उठा। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि बिहार देशभर में लेबर सप्लाई करने वाला राज्य बन गया है। यहां मिनिमम सपोर्ट प्राइज खत्म होने के बाद किसान खेतिहर मजदूर बन गए। आप चाहते हैं कि पंजाब और हरियाणा के किसान भी उनकी तरह हो जाएं।
झा ने एक कविता भी पढ़ी…
‘यदि देश की सुरक्षा यही होती है कि बिना जमीर होना जिंदगी के लिए शर्त बन जाए, आंख की पुतली में हां के सिवाय कोई भी शब्द अश्लील हो और मन बदकार पलों के सामने दंडवत झुका रहे तो हमें देश की सुरक्षा से खतरा है।’

