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*मध्य प्रदेश समाचार:फिर विवाद में दिग्विजय सिंह,इतिहास रचने की तैयारी में इंदौर, नंबर वन बनना तय,छतरपुर में पुल टूटने से टूटी उम्मीदें!गर्भ में बच्चों की मौत, भय के साए में प्रेग्नेंट,यूरिया के लिए सड़क पर अन्नदाता!,इंदौर में चोरी के शक में माॅब लिंचिंग,पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया पर रोक*

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इतिहास रचने की तैयारी में इंदौर, नंबर वन बनना तय

गुरुवार सुबह दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छ सर्वेक्षण साल 2024 के परिणाम घोषित होंगे। यहां सात साल से लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना जा रहा इंदौर एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। अंकों के मामले में इंदौर का इस बार भी पहले नंबर पर आना लगभग तय है।

सात साल से लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर चुना जा रहा इंदौर एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। गुरुवार सुबह दिल्ली के विज्ञान भवन में स्वच्छ सर्वेक्षण (Swachh Survekshan) साल 2024 के परिणाम घोषित होंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इंदौर शहर को सम्मानित करेंगी। अंकों के मामले में इंदौर का इस बार भी पहले नंबर पर आना लगभग तय है। इंदौर को इस सर्वेक्षण में सुपर लीग में शामिल किया गया है। सुपर लीग में सिर्फ उन्हीं 23 शहरों को शामिल किया गया है, जो अब तक हुए सर्वेक्षणों में पहले, दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे हैं।

काफी आगे निकल चुका इंदौर

अब इंदौर मार्गदर्शक की भूमिका में है और अन्य शहरों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाएगा।सुपर लीग में शामिल 23 शहरों में भी इंदौर के अंक सबसे ज्यादा हैं।कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निगमायुक्त शिवम वर्मा की अगुवाई में नगर निगम की टीम दिल्ली पहुंच चुकी है।टीम में 18 सदस्य हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव इजराइल से सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचेंगे।

लगातार सात साल से टॉप पर है इंदौर

फिर विवाद में दिग्विजय सिंह, नमाज और कांवड़ यात्रा का फोटो शेयर कर कहा- एक देश दो कानून

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर कांवड़ यात्रा और नमाज की तुलना करते हुए एक देश-दो कानून लिखा। भाजपा ने इसे हिंदू विरोधी बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने तुष्टीकरण और सनातन धर्म पर चोट का आरोप लगाया। पोस्ट से सियासी माहौल गरमा गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लैटफार्म एक्स पर नमाज और कांवड़ यात्रा के फोटो शेयर कर लिखा कि एक देश-दो कानून। अब इस पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, तस्वीर शेयर कर कांग्रेस यह बताना चाह रही है कि कांवड़ यात्रा सड़क पर निकल रही है तो पुलिस सहयोग कर रही है, जबकि नमाज पढ़ने वालों से बदसलूकी की जा रही है।

दिग्विजय सिंह पर हिंदू विरोधी होने का आरोप

नमाज वाली तस्वीर दिल्ली की बताई जा रही है। भाजपा ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी और दिग्विजय सिंह पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह हमेशा हिंदू धर्म और त्योहारों को निशाना बनाते रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान और एक खास समुदाय के प्रति सहानुभूति दिखाई है, इसलिए लोग उन्हें मौलाना दिग्विजय सिंह कहते हैं।

तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप

भाजपा के प्रदेश मंत्री राहुल कोठारी ने कहा, दिग्विजय सिंह द्वारा बार-बार सनातन धर्म की आस्था पर चोट करना कोई नई बात नहीं है। कांवड़ यात्रा को लेकर उनकी टिप्पणी तुष्टीकरण की राजनीति है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि हम जाति और समाज आधारित राजनीति नहीं करते। जाति आधारित राजनीति ने हमेशा देश को बांटा है।

पुल टूटने से टूटी उम्मीदें! छतरपुर में नदी तैरकर गई 3 महिलाओं के गर्भ में बच्चों की मौत, भय के साए में प्रेग्नेंट

 छतरपुर जिले में पुखराय नदी पर बना अस्थाई पुल टूटने से 12 गांवों का संपर्क टूटने से हालात बिगड़ गए हैं। नदी पार कर इलाज कराने गई महिलाओं के गर्भ में बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने कंपनी को नोटिस और स्वास्थ्य टीम भेजने के आदेश दिए हैं।

छतरपुर जिले की पुखराय नदी पर बना अस्थाई पुल बारिश में टूट कर बह गया। इसके चलते पलकोहा, ढोड़न, खरयानी समेत 12 गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। पुल टूटने से ऐसे हालात हो गए हैं कि ग्रामीण लोग जान जोखिम में डालकर नाव या तैरकर नदी तैरकर पार कर रहे हैं।

इस संकट का सबसे भीषण असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ा है। पुल टूटने से स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। इस हालत में समय पर इलाज मिलना अब बेहद मुश्किल हो गया है। मेडिकल फेसिलिटी के अभाव में दो महिलाओं के गर्भ में पल रहे नवजातों की मौत हो गई।

गर्भवती ने खोया मासूम

पलकोहा गांव के अरविंद आदिवासी ने बताया कि उनकी पत्नी लक्ष्मी आदिवासी पांच माह की गर्भवती थीं। अचानक पेट में दर्द होने पर वह इलाज के लिए निकले लेकिन टूटा हुआ पुल रास्ता रोक चुका था। मजबूरी में नदी तैरकर पार की गई और मीठा स्वास्थ्य केंद्र से पन्ना अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी गर्भपात हो गया। अरविंद की आंखों में आंसू थे। वह कहते हैं, ‘अगर पुल होता, तो शायद हमारा बच्चा आज जिंदा होता।’

भय के साए में प्रेग्नेंट महिलाएं

55 वर्षीय सुमित्रा यादव की बहू के साथ भी ऐसी ही घटना हुई। उनकी बहू को प्रसव पीड़ा हुई, लेकिन नदी उफान पर थी। वैकल्पिक रास्ते से कई घंटे बाद छतरपुर अस्पताल पहुंचे, जहां ऑपरेशन से जुड़वा मृत बच्चों का जन्म हुआ। गांव की रजनी, उषा और गुमता आदिवासी जैसी कई महिलाएं भी गर्भवती हैं, जो लगातार डर में जी रही हैं। उन्हें न समय पर जांच मिल रही है, न दवाएं और न ही टीकाकरण। गांव तक स्वास्थ्यकर्मी या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।

पवन सेन, जो ग्रामीणों की नदी पार करवाने में मदद कर रहे हैं, बताते हैं कि पुखराय नदी पर पहले एक पुराना पुल था। इसे एलसीसी कंपनी ने तोड़ा और जो अस्थाई पुल बनाया वह बारिश में बह गया। उन्होंने इस बात का कोई इंतजाम नहीं किया कि ग्रामीण कैसे पार जाएंगे।

कलेक्टर ने संज्ञान लिया

छतरपुर के अपर कलेक्टर मिलिंद नागदेवने इस मामले को गंभीर माना है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गठित कर जल्द ही प्रभावित गांवों में भेजी जाएगी और गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। साथ ही एलसीसी कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि यह लापरवाही क्यों हुई।

यूरिया के लिए सड़क पर अन्नदाता! रात से लाइन में लगे किसान फिर भी नहीं मिली खाद, अब आंदोलन की चेतावनी

छिंदवाड़ाः जिले में यूरिया की किल्लत ने किसानों को सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। यूरिया की मांग बढ़ने और सप्लाई धीमी होने के कारण किसान सुबह 4 बजे से ही वितरण केंद्रों पर कतार में लग रहे हैं। इसके बाद भी खाद नहीं मिलने पर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने चक्का जाम कर दिया।

दरअसल, बुधवार को परासिया रोड पर यूरिया खत्म हो जाने से नाराज किसानों ने चक्का जाम कर प्रदर्शन किया। करीब आधा घंटा तक परासिया रोड पर आवागमन बाधित रहा। किसानों ने आरोप लगाया कि यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। इससे छोटे किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है।

किसानों के साथ महिलाएं भी लाइन में

मार्कफेड के वितरण केंद्रों पर पुरुषों के साथ महिलाएं भी सुबह-सुबह से कतार में खड़ी नजर आईं। किसानों का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से वे यूरिया के लिए परेशान हो रहे हैं। सुबह 5 बजे से लाइन में लगकर भी खाद नहीं मिल रही, जिससे उनकी फसलें सूखने की कगार पर हैं।

रातभर खड़े रहने के बाद खाली हाथ

किसानों ने कहा कि सुबह 4 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन जब नंबर आता है तो कहते हैं खाद खत्म हो गई है। ये सरासर अन्याय है। छोटे किसानों को यूरिया नहीं मिल रहा, लेकिन बाहर लोग खुलेआम कालाबाजारी कर रहे हैं। प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। “हम रोज लाइन में खड़े होते हैं, फिर भी खाद नहीं मिल रही। आखिर कब तक ऐसा चलेगा?महिलाएं भी खेत छोड़कर लाइन में लगी हैं, फिर भी यूरिया नहीं मिल रहा।” कलेक्टर साहब से मांग करते हैं कि इस संकट का समाधान जल्द किया जाए, वरना आंदोलन करेंगे।

पहली क्लास 5 में या 6 साल में? उम्र को लेकर राज्य-केंद्र के नियम भिड़े, हाईकोर्ट ने MP बोर्ड और CBSE से मांगा जवाब

 मध्य प्रदेश में पहली कक्षा में बच्चों के एडमिशन को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन गई है। राज्य सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अलग-अलग नियमों के कारण पैरेंट्स के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दरअसल, सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन की ओर से याचिका दायर की गई है। एसोसिएशन की तरफ से वकील गौरव छाबड़ा ने कोर्ट में दलील दी। उन्होंने कहा कि सीबीएसई के नियमों के मुताबिक केवल वही बच्चे पहली कक्षा में प्रवेश के योग्य हैं, जिनकी उम्र 1 अप्रैल तक 6 वर्ष पूरी हो जाती है। यह नियम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लागू किया गया है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने मार्च में एक आदेश जारी कर कहा है कि 30 सितंबर तक 6 साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को भी पहली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकता है।

ट्रांसफर होने पर पढ़ाई होगी प्रभावित

इन दोनों नियमों में लगभग 6 महीने का अंतर है, जो बच्चों के भविष्य के लिए उलझन की स्थिति पैदा कर रहा है। वकील ने तर्क दिया कि यदि कोई बच्चा एक साल की पढ़ाई के बाद दूसरे राज्य में ट्रांसफर होता है। तब उसे फिर से कक्षा एक में पढ़ना पड़ सकता है। यह स्थिति बच्चों की पढ़ाई में बाधा डालने वाली है।

सीबीएसई स्कूलों ने रखा अपना पक्ष

पहली क्लास में बच्चों के एडमिशन को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के दो नियम के चलते समस्या हो रही है। और सीबीएसई मान्यता प्राप्त स्कूलों की स्थिति बिगड़ रही है। इसलिए सीबीएसई स्कूलों के संगठन एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड सीबीएसई स्कूल सोसायटी की ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर सुनवाई हुई। इसमें दो सरकरों के दो नियमों से होने वाली परेशानी को ऐशोशियन ने कोर्ट के सामने रखा।

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के शिक्षा सचिव, सीबीएसई के अध्यक्ष, मप्र शासन, राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक और इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है। सभी से 6 वीक में जवाब मांगा गया है।

इंदौर में चोरी के शक में माॅब लिंचिंग,परिजनों ने थाने में शव रखकर जताया विरोध

इंदौर के आजाद नगर में माॅब लिंचिंग में एक युवक की जान चली गई। चोर होने के शक में चौकीदार और मजदूरों ने युवक को मार कर अधमरा कर दिया और एक पेट्रोल पंप के पास फेंक दिया। लोगों ने घायल अवस्था में युवक को देखा और अस्पताल में भर्ती कराया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित मृतक के परिजनों ने शव थाने के सामने लाकर रख दिया। उनकी मांग थी कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाए।ब्रिज पर काम करने वाले मजदूरों और चौकीदार को लगा कि युवक चोरी करने आया है। उमेंद्र ने विरोध किया तो मजदूरों ने मिलकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। उसके हाथ, पैर और पेट में गंभीर चोटें आईं।

आजाद नगर क्षेत्र में निर्माणाधीन ब्रिज के समीप उमेंद्र सिंह ठाकुर घूम रहा था। ब्रिज पर काम करने वाले मजदूरों और चौकीदार को लगा कि युवक चोरी करने आया है। उमेंद्र ने विरोध किया तो मजदूरों ने मिलकर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। उसके हाथ, पैर और पेट में गंभीर चोटें आईं। जब वह घायल हो गया तो मजदूर उसे पेट्रोल पंप के समीप लेटा कर भाग गए। लोगों ने घायल को देखा तो पुलिस को सूचना दी। शरीर पर चोट के निशान देख अफसरों को शंका हुई। उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि उमेंद्र के साथ मजदूरों ने मारपीट की है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया।

परिजनों ने किया प्रदर्शन
शव यात्रा निकालने के दौरान परिजन शव को आजाद नगर थाने ले गए। वहां उन्होंने शव को रखा और जमीन पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। पुलिस अफसरों ने जैसे-तैसे उन्हें समझाया। इसके बाद परिजन शव को अंत्येष्टि के लिए ले गए। उमेंद्र के परिवार में मां के अलावा दो भाई हैं। पिता की मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि इंदौर के चंदन नगर क्षेत्र में पंद्रह दिन पहले भी एक नाबालिग के अपहरण के शक में भीड़ ने मारपीट कर युवक की हत्या कर दी थी।

पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया पर रोक, HC ने कहा- पागलपन वाली नीतियां कौन बनाता है

मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दीपक खोत की विशेष युगलपीठ ने प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- ‘पैरामेडिकल कॉलेजों को मान्यता प्राप्त होने से पहले ही कोर्स प्रारंभ कर दिया गया। ऐसी पागलपन जैसी नीतियां कौन बनाता है’? याचिका पर अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की गई है।

ला स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा नर्सिंग कॉलेजों में गड़बड़ियों के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पूर्व में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया था। इसमें कहा गया था कि नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में भी अनियमितताएं हो रही हैं। एमपी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2023-24 एवं 2024-25 की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से दी जा रही है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्ध सरकारी और निजी पैरामेडिकल कॉलेज बिना वैध मान्यता के छात्रों को दाखिला दे रहे हैं। नर्सिंग घोटाले की सीबीआई जांच में जिन कॉलेजों को ‘अनसूटेबल’ बताया गया था, उन्हीं भवनों में पैरामेडिकल कॉलेज भी संचालित हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान न्यायालय को यह भी अवगत कराया गया कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन अध्यक्ष हैं। कोर्ट ने चेयरमैन और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाते हुए याचिका को संज्ञान में लेकर सुनवाई के आदेश दिए।

बुधवार को हुई सुनवाई में बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 और 2024-25 समाप्त होने के बाद भी प्रदेश के 150 से अधिक पैरामेडिकल कॉलेजों को वर्ष 2025 में मान्यता और प्रवेश की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय पैरामेडिकल काउंसिल को भंग कर दिया गया था, जिसे बाद में कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कर पुनः बहाल किया गया।

नवाई के बाद युगलपीठ ने कहा, ‘ऐसी नीतियां कौन बनाता है? मान्यता मिलने से पहले ही कोर्स शुरू कर देना किस तरह की प्रक्रिया है? यह पागलपन है’। कोर्ट ने कहा कि जिन कॉलेजों ने छात्रों से अवैध रूप से फीस ली है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। न्यायालय ने फिलहाल मान्यता और दाखिले पर रोक लगाते हुए अगली सुनवाई 24 जुलाई को नर्सिंग मामलों के साथ करने के निर्देश दिए हैं।

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