*घटना भोपाल से सांची के बीच की, मृतक दूध डेरी का व्यवसायी*
*आखिर सांप्रदायिकता के नाम पर कब तक निर्दोष लोगों को मारा जाता रहेगा, संविधान का शासन रहेगा भी या नहीं*
मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले में कथित गोरक्षकों के एक समूह द्वारा बेरहमी से पीटे जाने के बाद एक मुस्लिम युवक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। यह जानकारी सांची पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) में दी गई है।
एक बेहद परेशान करने वाली घटना में, जुनैद कुरैशी नामक एक मुस्लिम युवक को कथित तौर पर गाय ले जाने के संदेह में बजरंग दल के सदस्यों वाली भीड़ द्वारा बेरहमी से हमला किए जाने के बाद घायल अवस्था में मौत हो गई। एक अन्य युवक अरमान की हालत गंभीर बनी हुई है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। यह हमला 5 जून को सांची और रायसेन के बीच मेहगांव के पास हुआ, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया और भारत में बढ़ती सतर्कता हिंसा पर नई चिंताएँ पैदा हो गईं।
पीड़ितों के परिवारों के अनुसार, जुनैद और अरमान अपने वैध डेयरी व्यवसाय के तहत छह गायों को धनोरा से सिरोज ले जा रहे थे, जब उन्हें 20-25 लोगों की भीड़ ने रोक लिया, जिसका कथित तौर पर बजरंग दल के कार्यकर्ता चंदन यादव और चंदन कुशवाहा ने नेतृत्व किया था।
परिवार के सदस्यों का दावा है कि दोनों को पहले विदिशा पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में मेहगांव के पास एक सुनसान जगह पर ले जाया गया, जहाँ उन्हें पूरी रात पीटा गया। हमलावरों ने कथित तौर पर मारपीट के दौरान पीड़ितों से 2 लाख रुपये भी लूट लिए।
करीब 24 घंटे बाद दोनों युवकों को विदिशा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जुनैद की मौत हो गई, जबकि अरमान की हालत गंभीर बनी हुई है।
भोपाल के जिंसी में डेयरी चलाने वाले और सिरोज निवासी जुनैद पिछले दो सालों से वैध व्यवसाय चला रहे थे। अरमान श्यामपुर के मूल निवासी हैं। पत्रकारों से बात करते हुए जुनैद के भाई जैद कुरैशी और अरमान के पिता जफर उद्दीन ने बजरंग दल के सदस्यों पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया। एक रिश्तेदार मोहम्मद अशरफ ने कहा कि पीड़ित वैध डेयरी गतिविधियों में शामिल थे और उनका अवैध गाय परिवहन से कोई संबंध नहीं था।
रायसेन एसडीओपी प्रतिभा शर्मा ने पुष्टि की कि 10-15 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, और तीन व्यक्तियों- ध्रुव चतुर्वेदी, गगन दुबे (दोनों विदिशा से) और रामपाल राजपूत (करारिया से) को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों के खिलाफ कथित तौर पर पशु क्रूरता, मारपीट और अवैध परिवहन से जुड़े पहले के रिकॉर्ड हैं।
अधिकारी बजरंग दल के सदस्यों की कथित संलिप्तता, साथ ही कथित लूटपाट और हिरासत में दुर्व्यवहार की जांच कर रहे हैं। यह मामला हाल ही में भारत भर में गौरक्षकों से जुड़ी हिंसक घटनाओं की श्रृंखला में शामिल हो गया है, जिसमें अक्सर मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया जाता है। अधिकांश भारतीय राज्यों में गौहत्या और परिवहन को विनियमित या प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन मानवाधिकार समूहों ने लंबे समय से भीड़ के न्याय और दंड से मुक्ति के खिलाफ चेतावनी दी है।
जैसे-जैसे जांच जारी है, नागरिक समाज समूहों और राजनीतिक नेताओं ने मामले में गहन जांच और त्वरित न्याय की मांग की है, तथा अधिकारियों से हिंसा पर रोक लगाने और कानून के शासन को बनाए रखने का आग्रह किया है।
यह घटना 5 जून की शाम विदिशा-कोहदी रोड के पास स्थित मेहंगावा गांव के एक स्कूल के नज़दीक हुई। पीड़ितों की पहचान जुनैद खान और उसके साथी अरमान के रूप में हुई है, जो कथित रूप से मवेशियों को ले जा रहे थे। तभी 10 से 15 लोगों के समूह ने उन्हें रोका और हमला कर दिया।
हमलावरों ने उन पर रात में 6 से 10 गायों को ले जाने का आरोप लगाकर बर्बर तरीके से पीटा। यह हमला एक मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया गया और सोशल मीडिया पर साझा किया गया। बाद में दोनों को पुलिस की मदद से भोपाल के हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया। जुनैद को वेंटिलेटर पर रखा गया।
करीब दो हफ्तों तक ज़िंदगी और मौत से जूझने के बाद जुनैद की 17 जून की सुबह मौत हो गई। अरमान की हालत अब भी नाज़ुक बनी हुई है।
घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में ध्रुव चतुर्वेदी नामक व्यक्ति, जो खुद को एक गोरक्षा समूह का सदस्य बता रहा है, ने कहा, “हमें जानकारी मिली कि मेहंगांव मंदिर के पास गायें बंधी हैं। जब हमने गाड़ी का पीछा किया तो हम पर पथराव किया गया। हमने अपनी जान जोखिम में डालकर गायों को बचाया।”
एक अन्य वीडियो में चतुर्वेदी और पुलिस अधिकारी आनंदीलाल सूर्यवंशी के बीच बहस देखी जा सकती है, जिसमें अधिकारी ने उसे कानून हाथ में लेने पर फटकार लगाई। अधिकारी ने कहा, “तुमने जो अपने ड्राइवर को मारा — वह गलत था।”
FIR में यह भी उल्लेख है कि हमलावरों ने पीड़ितों के फोन छीन लिए और पिटाई का वीडियो भी बनाया। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को अस्पताल ले गई।
एनडीटीवी से बात करते हुए जुनैद के पिता ने कहा, “मेरा बेटा बेगुनाह था। वह मजदूरी करता था। अगर वह गायें ले भी जा रहा था, तो इसकी जांच क्यों नहीं की गई? भीड़ को किसने मारने का अधिकार दिया? हम किस तरह का देश बनते जा रहे हैं?”
परिवार के अनुसार, जुनैद पशु व्यापारी था और अरमान 4-5 जून को उसकी मदद करने गया था।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें 302 (हत्या), 296 (दंगा), 126(2), 115(2), 109(3)(5), और 400 (संगठित अपराध) शामिल हैं। हालांकि, BNS की धारा 103(2), जो पांच या अधिक लोगों द्वारा की गई हत्या के लिए सज़ा का प्रावधान करती है, को FIR में शामिल नहीं किया गया है, जबकि वीडियो और चश्मदीद गवाहों से मॉब लिंचिंग के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
पुलिस ने अब तक तीन से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 10 से अधिक अब भी फरार हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है…
बता दें कि कथित गोरक्षकों द्वारा पशु व्यापारियों पर हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी महीने हैदराबाद के डुंडीगल में उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब गोरक्षकों ने मवेशी व्यापारियों पर जानलेवा हमला किया।
सियासत डेली की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापारी बैलों को एक वाहन में शहर ले जा रहे थे, तभी गांधी मैसम्मा के पास गोरक्षकों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने वाहन चालक और व्यापारियों को ज़बरन बाहर निकाला और बुरी तरह पीटा। हमले के बाद गोरक्षकों ने स्थानीय पुलिस को सूचना दी और पुलिस की मौजूदगी में भी दोनों व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। बाद में दोनों को थाने ले जाया गया।
वहीं, द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले के अतरौली कस्बे में बीते 24 मई को चार मुस्लिम युवकों को रास्ते में रोककर हिंदुत्व समर्थकों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा। पीड़ितों की पहचान अर्बाज़, अकील, क़दीम और मुन्ना ख़ान के रूप में हुई, जो सभी अतरौली के निवासी हैं।
हमले के वीडियो कई बार सोशल मीडिया पर साझा किए जा चुके हैं। आरोप है कि भीड़ ने चारों को कपड़े उतरवाकर नुकीले हथियारों, ईंटों, डंडों और लोहे की छड़ों से हमला किया।
स्थानीय पुलिस ने चारों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया। इनमें से तीन की हालत नाज़ुक थी। अकील के पिता सलीम ख़ान ने कहा, “मैं उनके ज़ख्मों का बयान नहीं कर सकता। आप वीडियो देख सकते हैं। मेरा बेटा ज़िंदगी और मौत से लड़ रहा है।”

