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*आईपीएस अकादमी पर इनकम टैक्स का छापा, 5 दिन की छानबीन में भी कुछ हाथ नहीं लगा विभाग को*

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 *आयकर विभाग के अधिकारियों को संदेह के कटघरे में*

*रामस्वरूप मंत्री* 

इंदौर।  प्रतिष्ठित आईपीएस अकादमी पर 5 दिन पूर्व इनकम टैक्स के ग्वालियर और भोपाल से जुड़े अधिकारी छानबीन के लिए पहुंचे थे। 5 दिन से लगातार कॉलेज के तमाम दस्तावेजों और पूछताछ के बावजूद इनकम टैक्स अधिकारियों के हाथ कोई पुख्ता कर चोरी के सबूत नहीं मिल पाए हैं । जिसके चलते अधिकारियों में कुछ झुंझलाहट  और हताशा भी दिखाई दी।

 मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर शहर में आईपीएस अकादमी में इनकम टैक्स की रेड पड़ी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आयकर विभाग के भोपाल और ग्वालियर से आए दो दर्जन से ज्यादा अफसर पिछले 5 दिनों से आईपीएस अकादमी में जमे हुए हैं ।5 दिन पूर्व यह अधिकारी बड़ी उम्मीद से आए थे की शिक्षा क्षेत्र में इस  नामी कॉलेज में छानबीन में उन्हें बहुत बड़ी कर चोरी का मामला मिल सकता है, लेकिन 5 दिन की पूछताछ और छानबीन के बाद भी सूत्रों का कहना है कि इनकम टैक्स विभाग के हाथ कुछ ज्यादा लगा नहीं है । अधिकारियों ने आते से ही तमाम कर्मचारियों के मोबाइल ले लिए थे तथा कर्मचारी और अधिकारियों की आवाजाही भी बंद कर दी थी हालांकि बाद में यह मोबाइल लौटा दिए गए लेकिन बताते हैं कि जिस उम्मीद से आयकर अधिकारी आए थे उनकी वह उम्मीद पूरी नहीं हुई है।

 गौरतलब है कि आईपीएस अकादमी की स्थापना शहर के प्रतिष्ठित इंजीनियर अचल चौधरी और बिल्डर योगेंद्र बाबा सहित उनके परिजनों ने की थी अपने अलग कॉन्सेप्ट के कारण जल्द ही आईपीएस अकादमी ने शिक्षा जगत में अपनी एक अलग पहचान बना ली हालांकि अचल चौधरी और योगेंद्र बाबा का नाम शहर के बड़े बिल्डरों में भी गिना जाता है । लेकिन आईपीएस अकादमी के जरिए शिक्षा जगत में जो प्रतिष्ठा हासिल की गई है वह अपने आप में एक उदाहरण है।

 बताया जाता है कि  दोनों विश्व प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान पर आयकर विभाग की जो छापेमारी की गई है वह एक सुनियोजित प्लान का हिस्सा दिखाई देता है ।

सूत्रों का यह भी कहना है कि आयकर विभाग के अधिकारियों ने न केवल कर्मचारियों से बल्कि कालेश्वर स्कूल से जुड़े छात्राओं से भी पूछताछ की और ऐसे सूत्र ढूंढने की कोशिश की जिससे असल चौधरी एवं उनके भागीदार कटघरे में आ सके लेकिन संभवत वे अपनी इस योजना में सफल नहीं हो पाए पूर्व में आयकर विभाग की छापेमारी और सर्वे की कार्रवाई हर कहीं एक-दो दिन में पूर्ण हो जाती है लेकिन आईपीएस अकादमी पर चल रही जांच और सर्वे की कार्रवाई पिछले 5 दिनों में भी पूरी नहीं हो पाई है ।

सूत्रों का कहना है कि आयकर विभाग की जांच के पीछे आयकर टीम  निश्चित रूप से कोई न कोई मकसद से आईपीएस अकैडमी पहुंची थी । जिन वाहनों में इनकम टैक्स के अधिकारी आईपीएस अकैडमी पहुंचे थे , उन में एक वाहन पर वर्तमान में सत्ता  दल का चुनाव चिन्ह भी लगा हुआ भी था । जिससे यह आशंका बलवती हुई है कि यह छापे की कार्रवाई किसी न किसी के इशारे पर की गई है । यह भी संभावना जताई जा रही है की संभव हो कि पिछले चुनाव के दौरान सत्ता पक्ष के कुछ लोगों ने आईपीएस के कर्ताधर्ताओं से चंदे की मांग की हो और वह पूरा नहीं होने पर सत्ता पक्ष के इशारे पर ही छापे की यह कार्रवाई हो ।

 अब यह तो भविष्य में आने वाली जानकारी ही बताएगी कि इनकम टैक्स के छापे की वजह क्या थी और किसके इशारे पर यह छापे लगाए गए । कॉलेज प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार 5 दिन की जांच पड़ताल और पूछताछ में भी जब छापा मार टीम को कोई सूत्र नहीं मिले जिससे यह सिद्ध किया जा सके की कॉलेज ने टैक्स चोरी की है ,तो फिर छापा लगाने पहुंचे इनकम टैक्स के अधिकारी अन्य तरह से कॉलेज प्रबंधन और कर्मचारियों को परेशान करने लगे । हालांकि छापेमार कार्रवाई के बाद से कॉलेज से बाहर बहुत कम खबर आ रही है, लेकिन जो भी आ रही है उसने आयकर विभाग के अधिकारियों को संदेह के कटघरे में खड़ा कर दिया है ।

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