उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के प्रतिभाशाली युवा एंजल चकमा की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि देश में बढ़ते नस्लीय भेदभाव, क्षेत्रीय उपेक्षा और प्रशासनिक असंवेदनशीलता का भयावह उदाहरण है। देहरादून जैसे शैक्षिक और प्रशासनिक केंद्र में इस तरह की घटना का होना यह दर्शाता है कि नस्लीय घृणा और “बाहरी” बताकर अपमान करने की प्रवृत्ति कितनी गहराई तक समाज में पैठ बना चुकी है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि एंजल चकमा पर हुआ हमला और उससे उसकी मृत्यु देश में बने उस सामाजिक माहौल की उपज है, जिसमें पूर्वोत्तर और आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले नागरिकों को राजधानी दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बार-बार अपमान, भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति संविधान में निहित समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है। जिस क्षेत्र में यह घटना घटी, वहाँ लंबे समय से प्रभावी प्रशासन, संवेदनशील पुलिसिंग और सामाजिक सुरक्षा की कमी स्पष्ट दिखाई देती है। पार्टी इस तथ्य पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करती है कि ऐसी घटनाओं में अक्सर प्राथमिकी, निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई में देरी होती है, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाता और दोषियों का मनोबल बढ़ता है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मानती है कि भारत की एकता और लोकतंत्र की नींव विविधता के सम्मान पर टिकी है। अत: सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) मांग करती है एंजल चकमा की मौत की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक जांच कराई जाए, सभी दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा, सुरक्षा और पुनर्वास प्रदान किया जाए, देश में बढ़ते नस्लीय एवं क्षेत्रीय भेदभाव पर सख्ती से रोक लगाने हेतु प्रभावी कानूनों को लागू किया जाए तथा पुलिस व प्रशासन के लिए अनिवार्य संवेदनशीलता-प्रशिक्षण शुरू किया जाए तथा उपेक्षित और सीमावर्ती क्षेत्रों सहित शहरी केंद्रों में भी कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337
*‘देश में बढ़ती नस्लीय हिंसा चिंता का विषय’ – सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)*

