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AI क्रांति का ग्लोबल हेडक्वार्टर बना भारत,दुन‍िया के द‍िग्‍गज नेताओं ने भारत का लोहा माना

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‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’में दुन‍िया ने भारत का लोहा माना. फ्रांस के राष्‍ट्पत‍ि मैक्रों हों या अल्‍फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई, डेमिस हस्साबिस हों या फ‍िर ऋष‍ि सुनक, दुनिया भर के दिग्गज नेताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भारत के AI क्षेत्र में बढ़ते कदमों की तारीफ की.

‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को आकार देने के लिए भारत से बेहतर कोई और जगह नहीं हो सकती…’ ऋषि सुनक के ये शब्द और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को दुनिया का ‘अद्वितीय’ मॉडल बताना, महज़ कूटनीतिक तारीफ नहीं, बल्कि ग्लोबल ऑर्डर में आए एक बड़े बदलाव का डॉक्‍यूमेंट है. ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में जो कुछ हुआ, उसने साफ कर द‍िया क‍ि यह केवल एक ग्लोबल इवेंट नहीं, बल्कि भारत की टेक्‍नोलॉजी सॉवरेन‍िटी का वैश्विक शंखनाद था, जिसकी गूंज पेरिस से लेकर न्यूयॉर्क तक सुनाई दी. इसमें शामिल दुन‍िया के द‍िग्‍गज नेताओं से लेकर टेक्‍नोलॉजी पर राज करने वाली कंपन‍ियों के सीईओ तक ने जो बातें कहीं, वह भारत की चमक बयां करती हैं….

आप खुद पढ़‍िए क‍िसने क्‍या कहा?

इमैनुएल मैक्रों, फ्रांस के राष्ट्रपति
भारत का AI मॉडल इसलिए अलग है क्योंकि यह देश की विशाल आबादी के लिए समाधान देता है. भारत ने वह डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है जो दुनिया में किसी और देश के पास नहीं है. 1.4 अरब लोगों की डिजिटल पहचान और हर महीने 20 अरब से अधिक यूपीआई लेनदेन इसका प्रमाण हैं. भारत हर साल लाखों एआई इंजीनियर तैयार कर रहा है. एआई के सुरक्षित और संप्रभु उपयोग की दिशा में भारत का ‘इंडिया स्टैक’ पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है

ऋष‍ि सुनक, ब्र‍िटेन के पूर्व पीएम
इंडिया स्टैक ने लोगों को दिखाया है कि टेक्नोलॉजी कैसे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में मदद कर सकती है. AI को अपनाने के लिए लोगों का भरोसा बहुत जरूरी है और जहां पश्चिमी देशों में निराशा बढ़ रही है, वहीं भारत में लगभग 10 में से 9 लोग AI को लेकर आशावादी हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य को आकार देने के लिए भारत सबसे सही जगह है और AI बदलाव पर चर्चा करने के लिए इससे बेहतर जगह कोई नहीं है.

सुंदर पिचाई, सीईओ, गूगल
भारत एआई के क्षेत्र में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है और यहां का टैलेंट पूल दुनिया में सबसे बेहतरीन है. हम भारत में 15 अरब डॉलर का निवेश कर रहे हैं और यहां एक फुल-स्टैक एआई हब स्थापित कर रहे हैं. भारत के पास एआई रिसर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और मास एडॉप्शन में एक ग्लोबल लीडर बनने की पूरी क्षमता है, जो दुनिया के लिए प्रेरणादायक है.

सैम ऑल्टमैन, सीईओ, OpenAI
AI दुनिया भर में काम और नौकरी पर गहरा असर डालेगा. हां, कुछ नौकरियां बदलेंगी या खत्म होंगी, पर हमारी कहानी यह है कि इंसान हमेशा नए अवसर ढूंढता है और मुझे विश्वास है कि हम नई भूमिकाएं और समृद्ध भविष्य भी बनाएंगे. भारत के पास AI में ‘फुल-स्टैक लीडर’ बनने की सभी मजबूत आधारभूत चीज़ें मौजूद हैं. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रतिभा और प्रतिबद्धता सब है. भारत वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास का नेतृत्व करने के लिए सबसे मजबूत स्थिति में है. एआई का लोकतंत्रीकरण ही आगे बढ़ने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है, जिससे इसके लाभ सभी तक पहुंच सकें. मेरा अनुमान है कि 2028 तक दुनिया की अधिकांश बौद्धिक क्षमता इंसानों के बाहर डेटा केंद्रों के भीतर होगी.

डारियो अमोदेई, सीईओ, एंथ्रोपिक
एआई में उन बीमारियों को ठीक करने की क्षमता है जो हजारों वर्षों से लाइलाज रही हैं और यह ग्लोबल साउथ सहित अरबों लोगों को गरीबी से बाहर निकाल सकता है. AI आने वाले वर्षों में इंसानों को पीछे छोड़ सकता है अगर हम जोखिमों को नहीं समझते. भारत में हम यह देखते हैं कि यह देश AI के अवसरों और खतरों के अध्ययन के लिए एक बड़ा टेस्टिंग हब बन सकता है. भारत वैश्विक AI मानकों और सुरक्षा नियमों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है और वह भी इनोवेशन और जिम्मेदारी दोनों के संतुलन के साथ.

डेमिस हस्साबिस, गूगल डीपमाइंड के सीईओ 
AI एक बड़ी शक्ति के रूप में काम कर रहा है, और यह मानवता के लिए 10 गुना परिवर्तनकारी हो सकता है. भारत इस बदलाव में प्रमुख भूमिका निभाने वाला है. AI का भविष्य काफी तेज़ी से बदल रहा है, और हम इसके विकास के लिए भारत के साथ साझेदारी कर रहे हैं. सही मार्गदर्शन और सहयोग से AI मानवता की भलाई के लिए कार्य कर सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विज्ञान और चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है. लेकिन इसके ल‍िए संवाद जरूरी है.

ब्रैड स्मिथ, प्रेसिडेंट, माइक्रोसॉफ्ट
ग्लोबल साउथ के लिए एआई के वादे और जिम्मेदारी को निभाने में भारत की भूमिका सबसे अहम है. भारत के पास न केवल शानदार एआई टैलेंट है, बल्कि इसे समाज की भलाई के लिए इस्तेमाल करने का एक मजबूत विजन भी है. यहां का डेवलपर इकोसिस्टम जिस तेजी से बढ़ रहा है, वह स्पष्ट करता है कि एआई का भविष्य बहुत हद तक भारत में ही लिखा जाएगा.

गाइ पार्मेलिन, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति
भारत की एआई यात्रा पूरी दुनिया के लिए एक सकारात्मक केस स्टडी है. भारत ने जिस तरह से अपनी विशाल आबादी के बीच तकनीकी समाधानों को सफलतापूर्वक लागू किया है, वह अद्भुत है. एआई इनोवेशन और इसके जिम्मेदार उपयोग को लेकर भारत का दृष्टिकोण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक नया मानदंड स्थापित कर रहा है. स्विट्जरलैंड इस दिशा में भारत के शानदार नेतृत्व का पूरा सम्मान करता है.

अंतोनियो गुटेरेस, यूएन महासच‍िव
AI एक बड़ी शक्ति बन सकता है, और हमें इसकी विकास प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार शासन तंत्र की आवश्यकता है. विकसित देशों को AI के सुरक्षित और समान वितरण के लिए विकासशील देशों में निवेश करना चाहिए ताकि AI का लाभ सभी तक पहुँच सके.

डिक शूफ, नीदरलैंड्स के पीएम
र‍िस्‍पांस‍िबल एआई के इस शिखर सम्मेलन में शामिल सभी देशों की सोच एक जैसी है. हम सभी मिलकर बहुत नज़दीकी सहयोग करना चाहते हैं ताकि जिम्मेदार एआई का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके और साथ ही एआई के अवसरों का पूरा लाभ उठाया जा सके. यह एक बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन है जिसे हमें अपनाना होगा, अगर हमने ऐसा नहीं किया, तो हम पीछे रह जाएंगे.

शेरिंग टोबगे, भूटान के प्रधानमंत्री
मैं भारत में इस ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का हिस्सा बनकर बेहद खुश हूं. यह पहली बार है जब ‘ग्लोबल साउथ’ में किसी एआई शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. भारत बहुत तेजी से तकनीकी विकास और एआई क्रांति का केंद्र बनता जा रहा है. भारत में आयोजित होने वाला यह समिट न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका प्रभाव भी वैश्विक है. यह पूरी दुनिया के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा और मैं इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस ऐतिहासिक अवसर पर आमंत्रित किया.

अलेक्जेंडर प्रोल, महासचिव, पीपुल्स पार्टी, ऑस्ट्रिया
प्रधानमंत्री मोदी के साथ इस शिखर सम्मेलन में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. हमने इस पर बहुत सार्थक चर्चा की है कि कैसे एआई का उपयोग जनसेवा और लोगों के लाभ के लिए किया जा सकता है. भारत और ऑस्ट्रिया के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग का यह सही रास्ता है. विशेष रूप से, यूरोपीय संघ और भारत के बीच संपन्न हुआ ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो दोनों पक्षों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति है. भारत की जीवंतता और ऊर्जा अद्भुत है और मुझे इस खूबसूरत देश से प्यार हो गया है.

वैलेंटाइन मकारोव, अध्यक्ष, रसोफ्ट (RUSSOFT) एसोसिएशन
भारत के साथ मेरा अनुभव 1995 से रहा है और आज हमारा सहयोग बहुत गहरा है. वर्तमान में भले ही अमेरिका और चीन एआई के दो विपरीत ध्रुव बने हुए हैं, लेकिन भारत में एआई लीडर बनने की तीव्र आकांक्षा और क्षमता है. यदि हम अपनी सर्वश्रेष्ठ शक्तियों को मिला दें और एक स‍िनर्जेट‍िक प्रभाव पैदा करें, तो मुझे पूरा विश्वास है कि भारत एआई के मामले में दुनिया के शीर्ष नेताओं में से एक बनकर उभरेगा. यह तालमेल वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को बदलने की ताकत रखता है.”

एन चंद्रशेखरन, चेयरमैन, टाटा संस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगली बड़ी बुनियादी संरचना है, जिसे मैं ‘इंटेलीजेंस का इंफ्रास्ट्रक्चर’ मानता हूं. भारत के पास डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जो मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है, वह हमें एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने का असीम आत्मविश्वास देता है. भारत एआई को अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने और दुनिया भर में इस तकनीक के सबसे बड़े और सफल उदाहरण पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

नंदन नीलेकणि, सह-संस्थापक, इन्फोसिस
आधार और यूपीआई जैसी डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के जरिए भारत ने दुनिया को दिखा दिया है कि हम तकनीक को कितने बड़े पैमाने पर लागू कर सकते हैं. अब यही काम हम एआई के साथ करने जा रहे हैं. भारत का नजरिया एआई को कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित रखने के बजाय इसे आम आदमी की भाषा और जरूरतों के हिसाब से ढालकर एक डिजिटल क्रांति लाने का है..

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