भारत में रसोई गैस की मांग लगातार तेजी से बढ़ रही है. उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों के बावजूद LPG की कमी पूरी नहीं हो पा रही है. अनुमान है कि आने वाले समय में भी चाहिए देश को बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ेगा यह स्थिति भारत की ऊर्जा जरूरतों और आयात पर निर्भरता को उजागर करती है.
भारत में रसोई गैस की बढ़ती मांग के बीच एक बड़ी चुनौती सामने आई है. उत्पादन में भारी बढ़ोतरी के बावजूद देश को हर महीने बड़ी मात्रा में LPG आयात करना पड़ेगा. अनुमान के मुताबिक, 50 फीसदी तक घरेलू उत्पादन बढ़ने के बाद भी भारत को हर महीने करीब 29 से 34 LPG टैंकरों की जरूरत बनी रहेगी.
बढ़ती मांग के सामने कमजोर उत्पादन
सरकार का अनुमान है कि FY27 तक देश में LPG की मांग करीब 2.9 मिलियन टन प्रति माह पहुंच सकती है. हालांकि, उत्पादन में 30 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद भी करीब 1.4 मिलियन टन की कमी बनी रहेगी. वहीं अगर उत्पादन 50 फीसदी तक भी बढ़ जाए, तब भी 1.34 मिलियन टन से ज्यादा LPG आयात करनी पड़ेगी. यह स्थिति दिखाती है कि भारत की निर्भरता अभी लंबे समय तक आयात पर बनी रहेगी.
दो दशकों में खपत में जबरदस्त उछाल
पिछले 20 सालों में भारत में LPG की खपत में जबरदस्त वृद्धि हुई है. 1998-99 में जहां खपत करीब 5.35 लाख टन प्रति माह थी, वहीं अब यह बढ़कर 3.13 मिलियन टन से ज्यादा हो गई है. इस बढ़ोतरी के पीछे सरकार की योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और बढ़ती घरेलू पहुंच प्रमुख कारण हैं. हालांकि उत्पादन इस रफ्तार से नहीं बढ़ पाया, जिससे अंतर लगातार बढ़ता गया.
आयात पर निर्भरता और बढ़ा जोखिम
भारत का LPG आयात मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के देशों जैसे यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत पर निर्भर है. इससे भू-राजनीतिक जोखिम भी बढ़ जाता है. ऐसे में अब भारत को अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए स्रोतों की ओर रुख करना होगा, ताकि सप्लाई सुरक्षित और स्थिर बनी रहे.

