राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बयान के विरोध में सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की विज्ञप्ति
देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैसे संवैधानिक दायित्व वाले पद पर आसीन अजीत डोभाल द्वारा यह कहना कि “मंदिरों को लूटा गया और हम असहाय रहे”—भारत के इतिहास, उसकी जनता और उसके दीर्घ संघर्षों का घोर अपमान है। इस कथन के माध्यम से भारत के गौरवशाली इतिहास में देश की जनता को असहाय और निष्क्रिय समाज के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो तथ्यात्मक रूप से भी गलत है और राजनीतिक रूप से खतरनाक भी।
भारत का इतिहास प्रतिरोध, संघर्ष, सामाजिक-सांस्कृतिक पुनर्निर्माण और आत्मसम्मान की रक्षा का इतिहास रहा है। विदेशी आक्रमणों और लूट के विरुद्ध जन-प्रतिरोध, विद्रोह, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अंततः औपनिवेशिक सत्ता को परास्त कर स्वतंत्रता प्राप्त करना—ये सब प्रमाण हैं कि भारत कभी असहाय नहीं रहा। ऐसे बयान उन अनगिनत लोगों के बलिदान और संघर्षों का उपहास हैं।

इतिहास को इस प्रकार प्रस्तुत कर युवाओं को बदला लेने के लिए तैयार होने को कहना अपने ही देश के भीतर युद्ध जैसी मानसिकता पैदा करने का प्रयास है। यह समाज में स्थायी तनाव, भय और विभाजन को बढ़ावा देगा तथा युवाओं को अपने भविष्य, शिक्षा, रोज़गार और देश की वास्तविक प्रगति से भटकाएगा । हमें समझना चाहिए कि बदले और प्रतिशोध की भाषा युवाओं को शांति, अहिंसा, सह-अस्तित्व और लोकतांत्रिक विवेक जैसे मूल भारतीय मूल्यों से दूर ले जाती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर इस तरह की बयानबाज़ी न तो देश को सुरक्षित बनाएगी है और न ही समाज को मजबूत करेगी। इसके विपरीत, यह संविधान, कानून के शासन और सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा है।
हम मांग करते हैं कि
संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इतिहास और समाज के प्रति जिम्मेदार एवं संतुलित भाषा का प्रयोग करें।
युवाओं को नफरत और बदले की राजनीति में झोंकने के बजाय उन्हें विकास, रोजगार और सामाजिक समरसता की दिशा में प्रेरित किया जाए।
भारत की शक्ति बदले में नहीं, न्याय, संघर्ष, शांति और लोकतांत्रिक चेतना में निहित है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और समाज को भीतर से बाँटना राष्ट्रहित के विरुद्ध है।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337