10 लाख से ज्यादा पौधे लगा चुका है वन विभाग और संस्थाये
इंदौर।इस बार मानसून आने के बाद से जुलाई माह में अब तक छुटपुट या थोड़ी -बहुत ,मतलब कभी- कभार होने वाली कोछोड़ कर , जैसी अनुमानित बारिश होना चाहिए थी वैसी नही होने के चलते अब तक लाखो पौधे लगा चुके वन विभाग के अधिकारियों के हाथ पैर फूलने लगे है।
इस मौसम में शुरुआती दौर में पर्यावरण दिवस से लेकर 15 जुलाई तक लाखो, पेड़- पौधे लगाए जा चुके है मगर बारिश की लगातार बेरुखी के चलते उन पर सूखने का खतरा मंडराने लगा है। इंदौर डीएफओ के अनुसार इस मौसम में विभाग को 20 लाख से ज्यादा पेड़ पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। अभी तक इंदौर, महू , मानपुर , चोरल मतलब चारो फारेस्ट रेंज में 10 लाख से ज्यादा पेड़- पौधे लगाए जा चुके है । इंदौर वन विभाग के सभी चारो फारेस्ट रेंजर ऑफिसर संगीता ठाकुर , ( इन्दौर) नयन पालवी ( महू) पप्पू सिंह चौहान( मानपुर ) और सचिन वर्मा ( चोरल) के अनुसार उनकी अपनी रेंज में अभी तक इतने पेड़ – पौधे लगाए जा चुके है। अनुमानित बारिश नही होने के कारण हजारो पौधे मुरझाने लगे है। यह देख कर अधिकारियों के माथे पर पसीना आने लगा है।

फारेस्ट रेंज इतने पौधे लगाए
इंदौर 3 लाख 50 हजार
महू 1 लाख से ज्यादा
मानपुर 1 लाख 50 हजार
चोरल 35000
इंदौर फारेस्ट रेंजर ठाकुर के अनुसार इंदौर शहर औऱ जंगल से आसपास गांव के इलाके में अभी तक 3 लाख 50 हजार पौधे लगाए जा चुके और अभी 2 लाख से ज्यादा पौधे और लगना बाकी है मगर बारिश नही होने के चलते विभाग परेशान है कि कंही उनकी मेहनत पर और इसके लिए खर्च की जाने वाली राशि पर पानी न फिर जाए।
एक पौधे पर लगभग 80 रुपये खर्च होते है।
एक पौधा 14 रुपये में तैयार होता है इसको पर्यावरण वानिकी से खरीदने के बाद, इन्हें लगाने के लिए गड्ढे खोदने , इन्हें लगवाने इनके लिए खाद्य की व्यवस्था करने के लिए प्रति पौधे लगभग 80 रुपये खर्च करना पड़ते है। ऐसे में अगर बारिश का संकट यू ही लगातार बना रहा तो लगाए गए पौधे मुरझा कर मर भी सकते है।
सामाजिक और अन्य संस्थाओं ने भी लगाए है हजारो पौधे
यह तो रही वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों पर संकट की बात मगर इस विभाग के अलावा कई सामाजिक और अन्य संस्थाओं ने भी हजारो की संख्या में पौधे लगाए है उन पर भी खतरा मंडराता नजर आ रहा है। पर्यावरण वानिकी के अधिकारी धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि उनके यंहा से वन विभाग के अलावा आईडीए सहित अन्य सरकारी विभाग कई संस्थाओं ने और समूहों ने लाखों पौधे खरीदे कर लगाए है।