इंदौर
बुजुर्गों से पशुओं जैसा बर्ताव कर नगर निगम ने इंदौर को देश-दुनिया में शर्मिंदा कर दिया। बुजुर्गों से ऐसी अमानवीयता हमारी संस्कृति नहीं है। इंदौर की असल पहचान तो हमेशा से बुजुर्गों, पारिवारिक धरोहर को सहेजने की रही है। इसीलिए हमारे शहर में ऐसे वृद्धाश्रम मौजूद हैं, जहां बुजुर्गों को सभी तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। 24 घंटे उनका ख्याल रखा जा रहा है, जहां बुजुर्ग पूरी तरह स्वस्थ हैं। वे मजे से रहते हैं। हंसते हैं, खिलखिलाते हैं।
आस्था वृद्धाश्रम : 26 साल से बुजुर्गों की देखभाल कर रहा
कल्याण मित्र समिति द्वारा परदेशीपुरा में पिछले 26 सालों से संचालित आस्था वृद्धाश्रम में फिलहाल 70 बुजुर्ग रह रहे हैं। सचिव डीएस उपाध्याय कहते हैं जनता कर्फ्यू के दिन से ही आश्रम बाहरी लोगों के लिए बंद है। तीन महीने तक न कोई बाहर गया न बाहर से अंदर आया। स्टाफ को भी परिवार सहित भीतर ही रखा, ताकि व्यवस्थाएं बनी रहे। यही वजह रही कि कोरोना संक्रमण यहां से दूर रहा। यह प्रदेश का एकमात्र वृद्धाश्रम है, जहां पूरी तरह बिस्तर पर ही जीवनयापन करने को मजबूर वृद्धों की भी सेवा की जाती है। आज भी करीब पांच-सात बुजुर्ग ऐसे हैं, जिनके सभी काम पलंग पर ही किए जाते हैं।
दशरथ सेवाश्रम : खेलकूद और मनोरंजन, सबका जन्मदिन, त्योहार भी यहां मनाते हैं
गोल्ड कॉइन सेवा ट्रस्ट द्वारा चाणक्यपुरी में साल 2017 से दशरथ सेवाश्रम चलाया जा रहा है। यह देश का पहला ऐसा वृद्धाश्रम है, जिसे गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आईएसओ प्रमाण पत्र भी मिल चुका है। संस्था के दिनेश मानधन्या कहते हैं 35 बुजुर्गों को रहने, खाने, डॉक्टरी इलाज, दवाई, खेलकूद, व्यायाम, मनोरंजन सहित सभी सुविधाएं दी जा रही हैं। हर कमरे में एसी लगे हैं। गीजर, वाटर कूलर-हीटर, दवाइयों की किट, हॉट वाटर बैग की सुविधा है। जन्मदिन, वर्षगांठ सहित सभी त्योहार मनाए जाते हैं। ट्रस्ट के संजय अग्रवाल बताते हैं प्रमुख सदस्य आश्रम को आर्थिक सहयोग भी देते हैं।

