इंदौर। घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति में कुछ सुधार आया है, मगर कमर्शियल सिलेंडरों का टोटा जारी है, जिसके चलते होटल, रेस्टोरेंट से लेकर हर तरह के व्यवसाय पर मार पड़ रही है। यहां तक कि दूध का उत्पादन भी घट गया, क्योंकि इंदौर दुग्ध संघ को कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिसके चलते दूध उत्पादकों से खरीदी घट गई। 8 की बजाय 4 लाख लीटर दूध ही अभी लिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सबसे अधिक पीएनजी कनेक्शन इंदौर में ही दिए गए हैं।
प्रशासन ने अभी कमर्शियल सिलेंडरों की कमी के चलते बड़ी संख्या में पीएनजी कनेक्शन व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में करवाए हैं। छप्पन दुकान के अलावा कई कारखानों और होटल, रेस्टोरेंट से लेकर अन्य क्षेत्र में भी ये कनेक्शन दिलवाए गए, तो दूसरी तरफ डीजल, कोयला भट्टियों के अलावा इलेक्ट्रिक चूल्हों का भी इस्तेमाल घरों से लेकर दुकानों, कारखानों, दफ्तरों में होने लगा है। हालांकि लक्ष्य की तुलना में उतने पीएनजी कनेक्शन इंदौर सहित पूरे प्रदेश में अभी भी नहीं हुए हैं, जबकि केन्द्र के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने अधिक से अधिक पीएनजी कनेक्शनों को उपलब्ध करवाने के निर्देश राज्य सरकारों को भेज रखे हैं। बावजूद इसके सिर्फ इंदौर ही ऐसा जिला है जहां पर लगभग सवा लाभ आवासीय और व्यवसायिक पीएनजी कनेक्शन हुए हैं। जबकि प्रदेश की राजधानी भोपाल में ही मात्र 40 हजार कनेक्शन हैं, तो ग्वालियर में 63 हजार से अधिक कनेक्शन दिए गए। पूरे प्रदेश में पीएनजी कनेक्शनों को देने का आधा लक्ष्य भी पूरा नहीं हुआ और अब जब घरेलू सिलेंडरों का टोटा पड़ा तब पीएनजी कनेक्शनों की याद आई।
पूरे प्रदेश में लक्ष्य के मुताबिक 6 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन अब तक दे दिए जाना थे, जबकि इसकी तुलना में 50 फईसदी भी कनेक्शन नहीं हुए और कुल कनेक्शनों की संख्या पूरे प्रदेश में 2 लाख 94 हजार के आसपास बताई गई है। इंदौर में अब धड़ाधड़ पीएनजी कनेक्शन प्रशासन भी दिलवा रहा है। हालांकि इतनी संख्या में कनेक्शन देने में भी अवंतिका गैस को समय लगेगा और आवासीय कनेक्शनों की संख्या भी बढ़ रही है, जिसके चलते 15-20 दिन से लेकर एक महीने का समय बताया जा रहा है। जबकि घरेलू गैस सिलेंडरों की तुलना में पीएनजी ना सिर्फ सस्ती, सुविधाजनक और अनवरत सप्लाय के साथ मिलती है। ना तो सिलेंडर रखने और ना बुक कराने की कोई झंझट। दूसरी तरफ अन्य कारोबार की तरह इंदौर दुग्ध संघ को भी कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति ना होने से घाटा उठाना पड़ रहा है और 4 लाख लीटर रोजाना तक दूध का उत्पादन घट गया है।

