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इंदौर के CSP बीएस परिहार ने रीवा के दत्तारे आश्रम में करेंगे एंबुलेंस दान

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इंदौर

कोरोना संक्रमण में पुलिस के कई रूप सामने आए हैं। पुलिस अफसर और जवान लगातार संक्रमण के दौरान चौराहों पर तैनात रहे। इस दौरान संक्रमित भी हुए, लेकिन पुुलिस सेवाभाव से पीछे नहीं हटी। कई पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी गरीब लोगों को भोजन कराते रहे। एक बार फिर इंदौर के सीएसपी बीएस परिहार ने मानव सेवा की एक अनूठी मिसाल पेश की है। इंदौर से 700 किलोमीटर दूर एक आश्रम में वह 4 लाख की लागत से बनी एंबुलेंस को दान कर रहे।

सीएसपी बीएस परिहार ने बताया दूसरी लहर में कहीं ना कहीं हमें यह बता दिया कि ऑक्सीजन की कमी से कई व्यक्तियों को इस कोराेना ने मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद तीसरी लहर के लिए अब सभी को जन सहयोग और अपने और से इसकी तैयारी में जुट ना होगा। जन सहयोग और दान की भावना के आधार पर यदि हम अभिषेक तीसरी लहर की तैयारी कर लेंगे तो आने वाले समय में हमें इन संसाधनों को जुटाने में कठिनाई नहीं होगी।

सीएसपी ने कहा कि उनके पिता स्व. सर्व कामराज सिंह एक पुलिस अधिकारी थे और रिटायर होने के बाद वह मानव सेवा में जुट गए थे। रीवा श्री दत्तात्रेय आश्रम में यह एंबुलेंस दान की जाएगी।

शहर के तीन पुलिस वालों के उदाहरण जिन्होंने की थी अनूठी मिसाल पेश

पहला उदाहरण – 2020 में था सब बंद फिर भी बच्चे की जिद की पूरी

तहजीब काज़ी

पिछले वर्ष ऐसा ही वाक्या विजयनगर टीआई के साथ हुआ। ड्यूटी के दौरान एक बच्चे ने उन्हें कॉल किया और रोते हुए चिप्स की फरमाइश कर दी थी। टीआई ने जब चिप्स के पैकेट घर पहुंचाए तो बच्चे ने थैंक्स कहते हुए आइसक्रीम की डिमांड कर दी। बच्चे की इस मासूमियत पर टीआई और पूरा स्टाफ हंस दिया था। विजयनगर थाने क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति का कॉल आया। उसने फोन पर कहा कि उनका बच्चा बहुत छोटा है और घर से बाहर जाने की जिद कर रहा है। उसे चिप्स खाना है, अब मैं क्या करूं। इस पर थाना प्रभारी तहजीब काजी ने पहले तो माता-पिता को समझाया, लेकिन बच्चे को रोता देख उन्होंने बच्चे से भी बात की। बच्चे को समझाना मुश्किल था, तो उन्होंने थाने के जवान को बच्चे का घर तलाश कर चिप्स पहुंचाने को कहा। इसके बाद जवानों ने काफी खोज के बाद बच्चे तक चिप्स पहुंचाया। बच्चे के परिजन ने थाना प्रभारी और उसकी टीम को धन्यवाद कहा।

दूसरा उदाहरण – शहर का डांसिंग कॉप घर पहुंचाया था खाना

रंजीत सिंह

पूरे मध्यप्रदेश में डांसिंग कॉप के नाम से जाने वाला रंजीत सिंह में पलासिया इलाके की चंद्रलोक काॅलोनी में रहने वाले इंवेंट आर्गेनाइजर विनय शर्मा की पत्नी बिंदिया शर्मा की कोरोना रिपोर्ट पाॅजिटिव आई थी । उन्हें राधास्वामी सत्संग भवन के कोविड सेंटर में भर्ती कराया गया था। इसके बाद मां को लेकर उनका 8 साल का बेटा मोहक उदास हो गया था। उसने मां को घर लाने की जिद पकड़ ली थी । उसने खाना तक छोड़ दिया। पिता व अन्य परिजन के लाख समझाने के बाद भी वह नहीं माना। यह बात मां को पता चली, तो उसने बेटे को मनाने के कई जतन किए, लेकिन वह नहीं माना। इस पर उसके फेवरेट कांस्टेबल रंजीत का नंबर लेकर बेटे को खाने के लिए मनाने की गुहार की थी । ट्रैफिक कांस्टेबल ने घर जाकर बच्चे को बाकायदा खाना दिया था और यह भी वादा किया था कि कोई भी जरूरत हो तो तुरंत फोन लगाए वह मदद के लिए तैयार रहेगा ।

तीसरा उदाहरण – ट्रैफिक जवान ने परेशान युवक के ई रिक्शा को अपनी बाइक से बांधकर 11 किमी तक खींचा

सुमंत

एलआईजी चौराहे पर रात को ड्यूटी कर रहे ट्रैफिककर्मी ने देखा कि एक ई रिक्शा चालक काफी देर से परेशान है। सुमंत सिंह ने उससे चर्चा की। ई-रिक्शा वाले ने बताया कि बैटरी खराब हो गई है। एक रिक्शा वाले से मदद मांगी तो 500 रुपए मांग रहा है। इतने तो 3 दिन में भी नहीं कमा पाया हूं। इस पर सुमंत सिंह ने कहा थोड़ी देर रुको, ड्यूटी खत्म होने पर कुछ करता हूं। आधे घंटे बाद सुमंत ने देखा तो पाया कि रिक्शावाला वहीं खड़ा है। इसके बाद उन्हाेंने अपनी बाइक से ई-रिक्शा काे बांधकर चालक के घर पहुंचाया था।

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