इंदौर
सीबीआई ने इंदौर की एसबीआई की ब्रांच मैनेजर स्वीटी सुनेरिया और उसके पति आशीष सलूजा के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। स्वीटी ने 11.84 करोड़ रुपए की हेराफेरी की थी। अलग-अलग एफडी पर लोन लेकर पैसों को शेयर मार्केट में इन्वेस्ट कर दिया था। महिला की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने प्रदेश में चार अलग-अलग जगह छापा भी मारा। लेकिन आरोपी का पता नहीं चला। छापे के दौरान सीबीआई को कई फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं।
तत्कालीन बैंक मैनेजर स्वीटी सुनेरिया ने वर्ष 2018 से 2021 के दौरान 18 लोगों की एफडी के बदले ओडी अकाउंट खोलकर यह फर्जीवाड़ा किया। बैंक के ग्राहक को जब इसका पता चला, तो उसने शिकायत की।
क्या होता है ओवरड्राफ्ट (ओडी) खाता
बैंक का कोई भी ग्राहक अपनी जमा पूंजी पर 80% या 90 % तक लोन ले सकता है, जिसे बैंकिंग भाषा में ओडी अकाउंट कहा जाता है। इसके बदले ग्राहक की एफडी पर बैंक द्वारा कुछ ब्याज दिया जाता है, तो वहीं इस पर ब्याज भी लिया जाता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति 2 लाख रुपए बैंक में एफडी जमा करता है, तो उसके एवज में वह 1.80 हजार तक की ओडी (लोन) ले सकता है। इसमें बैंक द्वारा जहां एफडी पर 6% ब्याज ग्राहक को दिया जाता है। वहीं, उस एफडी को बिना तोड़े वो ग्राहक अपनी ही एफडी पर 80% तक लोन ले सकता है। उसे बैंक भाषा में ओडी खाता कहा जाता है। इस ओडी में ग्राहक को 8% ब्याज देना होता है।
3 करोड़ की धोखाधड़ी कर चुकी है महिला बैंक मैनेजर
कुछ महीनों पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की सियागंज शाखा की प्रबंधक रहीं श्वेता सुराईवाला सहित कर्मचारी कौस्तुभ सिंगारे के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मामले में दोनों ने 49 खातों से तीन करोड़ रुपए निकाल लिए थे। खाताधारक कैश जमा कराने आते, लेकिन उनके खातों में जमा ना करते हुए दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। बाद में उन खातों से दोनों निकाल लेते थे। यही नहीं पर्सनल लोन, वाहन और होम लोन भी अधूरे दस्तावेजों पर जारी कर दिए गए थे। होम लोन के मामले तो ऐसे भी सामने आए, जिनमें आवेदक को ही नहीं पता कि उनके नाम लोन जारी हो गया है।
एसपी धनंजय शाह के मुताबिक निरीक्षक लीना मारोठ को इस केस की जांच सौंपी गई थी। खाताधारकों के द्वारा शिकायत की गई थी कि मैनेजर श्वेता और कौस्तुभ खातों से राशि हड़प रहे हैं। आए दिन इस बात को लेकर बैंक में विवाद भी होते रहते हैं। शिकायत के बाद प्रकरण को जांच में लिया गया था ।
जांच की तो पता चला कि खातों में एंट्री ही सही से नहीं होती थी। लोन के मामलों में भी श्वेता काफी गड़बड़ी करती थी। कमीशन लेकर अधूरे दस्तावेजों पर ही लोन जारी कर दिए। पर्सनल लोन के लिए अनजान लोगों के दस्तावेज हासिल कर उनके नाम पर लोन जारी कर दिए गए थे।

