Site icon अग्नि आलोक

कोरोना के बीच लोगों पर महंगाई की मार; मार्च में इसके 5.4% रहने का अनुमान

Share

नई दिल्ली

आगे कुआं, पीछे खाई यानी सभी तरफ परेशानी। कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते एक तरफ लोग डरे हुए हैं, तो दूसरी ओर महंगाई की मार से हाल बेहाल है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने में आग में घी का कम किया। देश की महंगाई पर रॉयटर्स ने एक सर्वे किया है। इसके मुताबिक, मार्च में महंगाई दर चार महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर रहने का अनुमान है। लॉकडाउन के चलते इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन भी फरवरी में 3% घटने की संभावना जताई गई है।

महंगाई 4.60% से 6.11% के बीच रहने का अनुमान
रॉयटर ने यह सर्वे 5 से 8 अप्रैल के बीच किया। इसमें 50 से ज्यादा इकोनॉमिस्ट शामिल हुए। सर्वे के मुताबिक, मार्च में महंगाई 5.40% पर रही। यह फरवरी माह में 5.03% पर थी। महंगाई को लेकर सर्वे में कहा गया कि इसकी दर 4.60% से 6.11% के बीच रह सकती है।

घबराहट में खरीदारी होने से आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने का जोखिम
ING के सीनियर इकोनॉमिस्ट प्रकाश सकपाल कहते हैं कि कुछ शहरों में लॉकडाउन हो गया है और कुछ दूसरे शहरों में भी ऐसा होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोग घबराहट में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने का भी जोखिम है।

महंगाई में बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाने-पीने के सामान के दाम में उछाल
स्कोटिया बैंक की एशिया पैसेफिक इकोनॉमिक्स हेड टुली मैकली कहती हैं कि भारत में कोर महंगाई कुछ समय से बढ़ी हुई है, लेकिन महंगाई में बढ़ोतरी खाने-पीने के सामान का दाम बढ़ने से हुई है। कोर महंगाई के आंकड़े में खाने-पीने के सामान और फ्यूल की महंगाई नहीं शामिल होती है। वहीं, RBI रिजर्व बैंक ने इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में महंगाई दर 5.2% तक जाने का अनुमान दिया है, जो उसकी 2% से 6% की टारगेट रेंज में है।

RBI के हाथ बंधे, ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए नहीं कर पा रहा रेट कट
महंगाई को देखते हुए रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने रेपो और रिवर्स रेपो रेट को जस का तस रहने दिया। जानकार मानते हैं कि लगातार बढ़ रहे कोरोना मामलों के बीच महंगाई में उछाल आने के डर से रिजर्व बैंक इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए रेट कट नहीं कर पा रहा है। दूसरी ओर दिसंबर तिमाही में GDP ग्रोथ हल्की सुधरी और 0.4% रही। उससे पहले जून और सितंबर तिमाही में यह लगातार दो बार निगेटिव ही रही थी, जिसे टेक्निकल रेसेशन भी कहा गया।

कोविड संकट काबू में आने तक ग्रोथ पर बना रहेगा रिजर्व बैंक का फोकस
सर्वे के मुताबिक, कोरोना के मामले बढ़ने से देश की आर्थिक गति भी प्रभावित हो सकती है। सकपाल कहते हैं कि महंगाई बढ़ी रह सकती है और जब तक कोविड संकट काबू में नहीं आ जाता रिजर्व बैंक का फोकस ग्रोथ पर बना रहेगा।

फरवरी में 3% घट सकती है औद्योगिक उत्पादन दर हालिया सर्वे में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) फरवरी में 3% घटने का अनुमान है। देश के कुल प्रोडक्शन में 40% हिस्सेदारी वाला इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट भी फरवरी में 4.6% घटा था। फरवरी में सभी आठ कोर इंडस्ट्री यानी कोयला, क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस, पेट्रोलियम रिफाइनरी प्रोडक्ट, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली के उत्पादन में गिरावट आई थी।

Exit mobile version