महू।कम संख्या में होने के बावजूद अपनी उद्यमशीलता के कारण महू के सामाजिक राजनीतिक और आर्थिक जीवन पर अत्यंत प्रभाव रखने वाले महेश्वरी समाज के पंचों के चुनाव भारी गहमागहमी के बीच संपन्न हुए। 5 पंचों के पद के लिए 11 उम्मीदवार चुनाव लड़े थे इनमें से विजय झंवर ने खुद को सरेंडर कर लिया था। निर्वाचन अधिकारी शेखर बुंदेल एडवोकेट की घोषणा के अनुसार दिनेश सोडाणी(68 मत), पुरुषोत्तम लोया(67), रमेश चंद्र सोनी(67), अमित बियानी(63) और ओम प्रकाश माहेश्वरी(63) पंच के रूप में निर्वाचित हुए। इन चुनाव में अघोषित रूप से 2 पैनल मैदान में थी। लोया, सोनी और बियाणी पैनल को चुनौती देने के लिए नरेश माहेश्वरी, दिनेश सोडाणी और चंदू लड्ढा की पैनल मैदान में थी। सत्तारूढ़ पैनल यानी लोया, सोनी पैनल के तीन प्रत्याशी पुरुषोत्तम रोया, रमेश चंद्र सोनी और ओमप्रकाश महेश्वरी चुनाव जीते। जबकि नरेश महेश्वरी चंदू लड्ढा पैनल की ओर से दिनेश सोडाणी और अमित बियाणी चुनाव जीते। इन चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी देखने को मिली। समाज में चर्चा थी कि लोया, सोनी पैनल के कर्ता-धर्ताओं ने विजय सोडाणी को हरवा दिया जिन्हें पैनल संचालक माना जा रहा था। विजय सोडाणी की हार चौंकाने वाली रही, क्योंकि वे समाज के प्रमुख मठाधीश माने जाते हैं। सत्तारूढ़ लोया, सोनी पैनल को परोक्ष रूप से नरोत्तम माहेश्वरी, दीपक जाजू, अनंत बियाणी जैसी हस्तियों का समर्थन हासिल था। इसके बावजूद इस पैनल का प्रदर्शन इतना प्रभावशाली नहीं रहा। वैसे निर्वाचित पंचों के जीतने पर समाज में हर्ष है। महेश्वरी समाज के बड़े उद्योगपति और नेता अशोक नवाल इस चुनाव से पूरी तरह अदृश्य थे। यहां तक कि वे वोट देने भी नहीं आए। इन चुनावों में 122 माहेश्वरी परिवारों में से प्रत्येक का एक वोट था। केवल 1 वोट नहीं गिरा जबकि 121 मतदाताओं ने मतदान किया। विजय सोडाणी के अलावा सुरेश चंद्र लड्ढा, प्रकाश महेश्वरी, नंदकिशोर टवानी और मनीष बियाणी भी चुनाव हारे। इस चुनाव में किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और शांतिपूर्ण वातावरण में समाज के चुनाव संपन्न हुए लेकिन पता चला है कि विजय सोढ़ानी के एक समर्थक ने बियानी परिवार के एक सदस्य को खुले तौर पर कहा कि उन्होंने विजय भैया को चुनाव हरवाया है।
अत्यंत गौरवशाली इतिहास
भारत और दुनिया में माहेश्वरियों के एक लाख चार हजार परिवार हैं, इनमें में साक्षरता शत प्रतिशत है।स्त्री शिक्षा के दृष्टि से भी यह समाज अत्यंत जागृत है। संख्या में इतने कम होने के बावजूद भारत की जीडीपी में माहेश्वरी समाज का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। इस उद्यमशील समाज के कारण आज भारत में लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है।सर्वे सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामया इस बोध वाक्य पर समाज चलता है। माहेश्वरी जाति की उत्पत्ति भगवान शिव की महान कृपा-आशीर्वाद से ही हुई है इसलिए ‘श्री शिव परिवार’ (भगवान शिवजी, माता पार्वतीजी, देवसेनापति कुमार श्री कार्तिकेयजी एवं प्रथमपूज्य देवता श्री गणेशजी) को माहेश्वरियों के कुलदेवता / कुलदैवत माना जाता है।ई.स. पूर्व 3133 में जब भगवान महेश जी और देवी महेश्वरी जी (माता पार्वती) के कृपा से ‘माहेश्वरी’ समाज की उत्पत्ति हुई थी तब भगवान महेश जी ने महर्षि पराशर, सारस्वत, ग्वाला, गौतम, श्रृंगी, दाधीच इन छः ऋषियों को माहेश्वरीयों का गुरु बनाया और उनको माहेश्वरीयों को मार्गदर्शित करने का दायित्व सौपा l कालांतर में इन गुरुओं ने ऋषि भारद्वाज को भी माहेश्वरी गुरु पद प्रदान किया जिससे माहेश्वरी गुरुओं की संख्या सात हो गई जिन्हे माहेश्वरीयों में सप्तर्षि कहा जाता है l भारत के राजस्थान राज्य में आने वाले मारवाड़ क्षेत्र से सम्बद्ध होने के कारण इन्हें मारवाड़ी भी कहा जाता है। इस समाज ने घनश्यामदास बिरला, गुज्जरमल मोदी, जमनालाल बजाज, कमलापत सिंघानिया, दुगार्प्रसाद मांडिल्य जैसे उद्योगपति दिए वही विक्रम साराभाई, डीसी कोठारी,डॉ आत्माराम जैसे वैज्ञानिक दिए और मैथिलीशरण गुप्त जैसे साहित्यकार दिए। राजनीतिज्ञ श्याम जाजू, उद्योगपति आदित्य बिरला, भारतीय महिला क्रिकेट खिलाड़ी स्मृति मानधना, जाने-माने मोटिवेटर संदीप माहेश्वरी, साहित्यिक एवं चिंतक शरद गोपीदास बागड़ी, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रधान न्यायाधीश आरसी लाहोटी, बॉलीवुड सिंगर और समाजसेविका पलक मुछाल, समाजसेवी डॉ. अभय बंग और रानी बंग, फ्यूचर ग्रुप के फाउंडर किशोर बियानी, पद्मश्री राजश्री बिड़ला (बिर्ला), हिंदुस्तान टाइम्स की मालिक शोभा भरतकिया, पद्मश्री बंसीलाल राठी, व्हिडिओकॉन उद्योग समूह के वेणुगोपाल धूत, मिस नेपाल-2017 निकिता चांडक (नेपाल), अमेरिका के ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी (यूएच) की चांसलर रेणू खटोड़ जैसे हस्तियां समाज ने दी है।
– लोककांत महूकर
महू माहेश्वरी समाज के चुनाव में दिलचस्प उलटफेर

