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इप्टा की “ढाई आख़र प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” प्रारंभ

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लोक न्रत्य नाटिका, कबीर भजनो की हुई मनमोहक प्रस्तुति*
*पांच राज्यों से होती हुई यात्रा का 22 मई को इन्दौर में होगा समापन
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*रायपुर।*  आज़ादी के 75वें वर्ष के अवसर पर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) प्रेम, दया, करुणा, बंधुत्व, समता और न्याय से परिपूर्ण हिंदुस्तान के स्वप्न को समर्पित “ढाई आख़र प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” निकाल रहा है। यात्रा का शुभारंभ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में  रैली, कबीर भजनो, छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति के ” नाचा ” लोकगायन व गम्मत (नाटक) की दमदार प्रस्तुति के साथ हुआ। 


नगर निगम उद्यान परिसर में इप्टा के राष्ट्रीय सचिव राकेश वेदा ने सांस्कृतिक यात्रा के बारे में बताया कि आज़ादी के 75 साल के मौके पर निकलने वाली ‘‘ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा’’ स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान विकसित हुए समता ,न्याय , बंधुत्व धर्म निरपेक्षता आपसी भाईचारा के उन मूल्यों के तलाश की कोशिश है, जो वर्तमान में नफ़रत, वर्चस्व और दंभ के कोलाहल में डूब से गये हैं। हालांकि ये मुल्य हमारे घोषित संवैधानिक आदर्शों, गांधीजी के प्रार्थनाओं और आंबेडकर की प्रतिज्ञाओं में  अभी भी चमक रहे हैं। इन्हीं का दामन पकड़कर देश के किसान, मजदूर, लेखक, कलाकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता गांधी की अंहिसा और भगत सिंह के अदम्य शौर्य के सहारे  संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में डटे हैं।यह यात्रा उन तमाम शहीदों, समाज सुधारकों एवं भक्ति आंदोलन और सूफ़ीवाद के पुरोधाओं का सादर स्मरण है, जिन्होंने भाषा, जाति, लिंग और धार्मिक पहचान से इतर मानव मुक्ति एवं लोगों से प्रेम को अपना एकमात्र आदर्श घोषित किया था। प्रेम  उम्मीद जगाता है, बंधुत्व, समता और न्याय की पैरोकारी करता है, प्रेम  कबीर बनकर पाखंड पर प्रहार करता है, प्रेम  भाषा, धर्म, जाति नहीं देखता और इन पहचानों से मुक्त होकर धर्मनिरपेक्षता का आदर्श बन जाता है।             इप्टा के राष्ट्रीय सचिव मंडल के सदस्य शैलेन्द्र ने कहा कि इप्टा जिंदगी के गीत और उम्मीद का प्रतीक है।  जब इतिहास के इस दौर में चारों और वैचारिक अँधेरा छाया हो तो ऐसे समय में मुहब्बत और अमन के गीत गाने की जरूरत है।  राजेश अवस्थी ने अपने संबोधन में कहा कि इस नाउम्मीद के दौर में इप्टा की यात्रा उम्मीद और प्रेम का पैगाम है। 
आयोजन में निसार के निर्देशन में नाचा थियेटर के कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के प्रतीक गम्मत की प्रस्तुति दी,जिसे दर्शकों ने बहुत पसंद किया।
    *सांस्कृतिक रैली निकली*
  इप्टा के साथ ही, प्रलेस, जलेस सहित अनेक सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े  लेखक, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता, संस्कृतिकर्मी, पत्रकार, विध्यार्थीयों सहित शहर के वरिष्ठ नागरिक रैली में शामिल हुए । रैली का समापन मुक्ताकाशी मंच परिसर में हुआ। वहां कबीर भजनो के विख्यात गायक पद्मश्री प्रहलादसिंह टिपानिया ने इप्टा के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राकेश वेदा ने कहा कि आज राहुल सांक्रृत्यायन का जन्मदिन,और प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना का दिन भी है।विख्यात कलाकार चार्ली चैप्लिन ने कहा था कि ” कला जनता के नाम प्रेम पत्र है..इसे आगे बढ़़ा कर यह कहना होगा कि कला हर उस सत्ता के खिलाफ अभियोग पत्र भी है जो नफरत फैलाती है।        कार्यक्रम का संचालन करते हुए इप्टा रायपुर के ईश्वर सिंह दोस्त ने कहा कि वर्तमान में देश को तोड़ने के प्रयास हो रहे हैं। इन्सानियत और प्रेम की बात कहना खतरनाक हो गया है।  इप्टा छत्तीसगढ़ अध्यक्ष मणिमय मुखर्जी ने आभार प्रदर्शित किया।   *पांच राज्यों में पहुंचेगी यात्रा*
इप्टा द्वारा आयोजित यह सांस्कृतिक यात्रा भाईचारा और अमन का संदेश देते हुए 9 अप्रैल को रायपुर से शुरू होकर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से होती हुई झारखण्ड, बिहार, उत्तरप्रदेश होते हुए मध्यप्रदेश के विभिन्न नगरों में पहुंचेगी। इंदौर में 22 मई को यात्रा का समापन होगा। यात्रा के दौरान 250 से अधिक स्थानों पर नाटक, कविता, गीत, गजल, पोस्टर, नृत्य, संगीत, एवं अन्य कलाओं से जुड़े कार्यक्रम होंगे।


*इन्दौर से यात्रा वाहन को बिदाई*
 सांस्कृतिक यात्रा के वाहन को इंदौर में इप्टा कलाकारों द्वारा विदाई दी गई। इस अवसर पर जया मेहता, बीनू शरीफ़, विनीत तिवारी, गुलरेज़ ख़ान, विजय दलाल, हरनाम सिंह, प्रणय, देव , गोपाल पटेल, तिलकराज जाट, विशाल यादव, चेतन, दीपक सोलंकी, ध्रुवनारायण, सुनीता (पटना), जहाँआरा (पुणे), धन्नूलाल सिन्हा (भोपाल) उपस्थित थे।
 हरनाम सिंह

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