तेहरान. ईरान एक बार फिर फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है. दावा तो यहां तक किया जा रहा कि इस बार वह पानी के नीचे घातक बारूदी सुरंगें बिछाई जा रही हैं. यह हरकत ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार बार अटैक की धमकी दे रहे हैं. ईरान की यह रणनीति वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा पैदा करती है. एक्सपर्ट कह रहे कि यह सबकुछ देखकर अमेरिकी सेना कांप उठती है.समंदर की लहरों के नीचे ईरान एक ऐसा खामोश मौत का जाल बुन रहा है, जिससे न केवल पेंटागन बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में खौफ पैदा हो गया है. फारस की खाड़ी में ईरान द्वारा बिछाई जा रही बारूदी सुरंगें अब वैश्विक शिपिंग और तेल मार्गों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई हैं. यह सैन्य अभ्यास सीधे तौर पर ट्रंप की सेना और पश्चिमी सहयोगियों को एक कड़ा संदेश है कि अगर खाड़ी में तनाव बढ़ा, तो समंदर में बिछा बारूद पूरी दुनिया में तेल की कीमतों का ‘विस्फोट’ कर देगा.
यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने इस तरह की रणनीति अपनाई है. 1980-1988 के ईरान-इराक युद्ध के बाद से ही यह खतरा वैश्विक शिपिंग और तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा है. उस समय ईरान ने वास्तव में शिपिंग मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाई थीं. तत्कालीन रॉयल नेवी के बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाजों को उन्हें साफ करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी, जिससे उन्हें ईरान की इस क्षमता का सीधा अनुभव हुआ था.
होर्मुज स्ट्रेट खतरे में
बीबीसी फारसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच स्थित संकरा होर्मुज स्ट्रेट दुनियाभर के व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है. दुनिया का नेचुरल गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत और विश्व के तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा हर साल इसी रास्ते से होकर गुजरता है. इस रणनीतिक मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने से वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर निश्चित रूप से गंभीर असर पड़ेगा.
ईरानी नौसेना का अभ्यास: तेजी से बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान नौसेना में तेजी से बारूदी सुरंगें बिछाने का अभ्यास कर रहा है. यह दर्शाता है कि ईरान की सैन्य योजना में यह एक महत्वपूर्ण घटक है और वह इस क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है. यदि ईरान ऐसे किसी भी कदम को अंजाम देता है, तो इसके वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं. दुनिया भर की सरकारें और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं.

