वेस्ट एशिया में जारी भीषण जंग अब दुनिया की बर्बादी का कारण बन रही है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के 13वें दिन खाड़ी देशों में तीन और बड़े कार्गो शिप्स पर हमला हुआ है. इस हमले के बाद ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के करीब पहुंच गई हैं. भारत सहित एशिया के कई देशों में एनर्जी संकट गहरा गया है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर पड़ रहा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का असर अब ग्लोबल ट्रेड और एनर्जी मार्केट पर साफ दिखने लगा है. युद्ध के 13वें दिन खाड़ी क्षेत्र में तीन और कार्गो जहाजों पर हमले की खबर सामने आई है. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. तेल बाजार में यह उछाल तब आया जब 32 देशों ने मार्केट को शांत करने के लिए करीब 40 करोड़ बैरल तेल रिजर्व जारी करने का फैसला किया था. इसके बावजूद निवेशकों की चिंता कम नहीं हुई है. शिपिंग कंपनियां अब खाड़ी क्षेत्र में जहाज भेजने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम कर रही हैं. कई अंतरराष्ट्रीय रूट भी अस्थायी रूप से बदले जा रहे हैं.
ईरान युद्ध लाइव अपडेट्स
- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने पर अमेरिका को आर्थिक फायदा होता है. लेकिन ट्रंप के अनुसार इससे भी ज्यादा जरूरी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाकर मिडिल ईस्ट और दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि वह कभी भी ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे

- ईरान के खिलाफ जारी युद्ध के बीच इजरायली अधिकारियों ने बंद कमरे की चर्चाओं में स्वीकार किया है कि इस संघर्ष से ईरान की धार्मिक सरकार गिर जाएगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार लगातार बमबारी के बावजूद ईरान में किसी बड़े जनविद्रोह के संकेत नहीं दिख रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही युद्ध जल्द खत्म होने की संभावना जताई हो, लेकिन इजरायली आकलन अलग है. अधिकारियों का मानना है कि फिलहाल वाशिंगटन इस संघर्ष को खत्म करने के निर्देश देने के करीब भी नहीं है.
- रूसी रोसाटॉम स्टेट कॉर्पोरेशन के प्रमुख एलेक्सी लिखाचेव ने कहा, ‘उत्तरी समुद्री मार्ग पर चीन और भारत के साथ सहयोग बढ़ रहा है. दक्षिण कोरिया भी इसमें शामिल हो रहा है.’
- ईरान समर्थक हैकर्स ने अमेरिकी मेडिकल डिवाइस निर्माता कंपनी स्ट्राइकर पर साइबर हमला किया है. इस हमले से कंपनी के माइक्रोसॉफ्ट सिस्टम में ग्लोबल नेटवर्क डिसरप्शन पैदा हो गया. कंपनी ने बयान में कहा कि फिलहाल रैनसमवेयर या मालवेयर के संकेत नहीं मिले हैं और घटना को कंट्रोल में माना जा रहा है. कंपनी की टीमें हमले के प्रभाव का आकलन कर रही हैं. साथ ही ग्राहकों और पार्टनर्स को सेवाएं जारी रखने के लिए बिजनेस कंटिन्युटी प्लान सक्रिय कर दिया गया है. CNN ने इस साइबर हमले की जानकारी दी है.