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क्या मनोरंजन ही जनहित है?:फीफा के लिए केंद्र तो छपाक को राज्य ने दी राहत, कोरोना की दवा पर क्यों नहीं ?

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इंदौर

कोरोना के इलाज में लगने वाली दवाओं और उपकरण पर 12 फीसदी जीएसटी वसूल रही सरकार मनोरंजन पर ही मेहरबान रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार चाहे तो कोरोना की दवाओं में भी राहत के रास्ते ढूंढ सकती है, जैसा जीएसटी काउंसिल ने सितंबर 2019 में फीफा की मांग और खेल मंत्रालय के प्रस्ताव पर किया था।

अंडर 17 महिला फीफा वर्ल्ड कप के मैच के लिए सभी सर्विस प्रोवाइडर और टिकट को जीएसटी से छूट का नोटिफिकेशन जारी भी कर दिया था। हालांकि कोरोना के कारण मैच नहीं हो सके। मप्र सरकार फरवरी 2020 में थप्पड़ और जनवरी 20 में छपाक फिल्म को स्टेट जीएसटी से राहत देने के लिए रिफंड का प्रावधान लागू कर चुकी है। वैट के समय होलकर क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले कई मैचों को भी मनोरंजन कर से छूट दी गई।

टैक्स की दर 0.25 से 3% पर ला सकती है सरकार
वरिष्ठ कर सलाहकार आरएस गोयल का कहना है कि टैक्स की दर जीरो करने पर क्रेडिट का इश्यू आ सकता है, लेकिन दर कम कर राहत दी जाए तो इश्यू नहीं आएगा। जैसे फिनिशिंग के लिए बाहर से आकर फिर विदेशों काे जाने वाले डायमंड पर 0.25% टैक्स की दर है, सोने पर 3% की दर है।

जिसके पास दर कम करने के अधिकार, काउंसिल ने छह माह से बैठक ही नहीं की

जीएसटी काउंसिल की अक्टूबर के बाद कोई बैठक ही नहीं हुई, जबकि हर तीन माह में बैठक के प्रावधान है। जीएसटी इम्प्लीमेंटेशन कमेटी (जीआईसी) के पास अधिकार है कि वह नोटिफिकेशन जारी कर टैक्स में राहत दे सकती है। बाद में काउंसिल इसे एप्रूव कर सकता है। कोरोना की दूसरी लहर के पीक के आने के बाद भी किसी तरह की राहत नहीं दी गई।
छूट नहीं राहत के अधिकार रिफंड नीति से पूरे स्टेट जीएसटी कर सकते हैं माफ

जीएसटी लाॅ ड्राफ्ट कमेटी के पूर्व सदस्य सुदीप गुप्ता बताते हैं कि सरकार रिफंड की नीति से राहत दे सकती है। ग्राहक से टैक्स नहीं लेते हैं, कारोबारी, संस्था द्वारा जमा टैक्स रिफंड कर सकती है। अस्पताल यदि कोई दवा, मशीन खरीदते हैं या संस्थाएं दान करती हैं तो इन्हें स्टेट जीएसटी का हिस्सा रिफंड किया जा सकता है।

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