भोपाल। २८ सितम्बर २००७ को तत्कालीन भारतीय जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री के नाते आज के मोदी मंत्रिमण्डल में सदस्य के रूप में केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रहालद पटेल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के द्वारा अपनी पहचान छुपाकर जो डम्पर खरीदी का मामला उजागर किया था उसके बाद उन्होंने जो पत्र शिवराज सिंह चौहान को जो पत्र लिखे थे उन्हीं में से एक पत्र में उन्होंने लिखा था कि ”आप स्वयं भ्रष्टाचार के जनक हैं, आपके विकास का ढोल भूखों की भूख तो समाप्त भले ही नहीं कर पा रही हो भ्रष्टाचारियों को संरक्षण जरूर कर रहा है” इसके साथ ही उन्होंने उसी पत्र में यह भी लिखा था कि ”अब झूठ बोलना, आर्थिक अपराधियों को खुला संरक्षण दे रहा है” यही नहीं इसी पत्र में पटेल ने शिवराज सिंह को लिखा था कि ”दिनांक २४ सितम्बर २००७ को जो चालान ईओब्डल्यू द्वारा विशेष न्यायाधीश सी भावे की अदालत में पेश करते समय आरएस मोहंती को कैसे छोड़ दिया? इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार आपके संरक्षण में शायद सप्ताहभर में निर्दोष साबित कर दिया जाएगा लेकिन आपको जवाब देने होंगे,
मुख्य सचिव को निलंबित कर अपनी पीठ थपथपाने वाले शिवराज सिंह मोहंती के पक्ष में शपथ पत्र देने वाली घटना में किसको दोषी मानते हैं” हालांकि तत्कालीन भारतीय जनशक्ति के राष्ट्रीय महामंत्री के बतौर लिखे गये ऐसे कई पत्रों का जवाब पटेल को नहीं मिले हों लेकिन वर्ष २००७ से लेकर आज तक इन सवालों के जवाब की प्रतीक्षा में प्रहलाद पटेल भले ही न हों लेकिन इस प्रदेश का जनमानस आज भी प्रहलाद पटेल द्वारा किये गये इन सवालों के जवाबों की खोज में लगा हुआ है क्योंकि वर्षों बाद भी राज्य में वर्ष २००७ में प्रहलाद पटेल द्वारा लिखे गये पत्र में जो सवाल खड़े किये गये थे वही स्थिति आज भी इस प्रदेश में व्याप्त है और वही सब हो रहा है जिन सबको लेकर प्रहलाद पटेल ने सवाल खड़े किए थे वर्षों बाद भी आज मुख्यमंत्री के नाम पर मुख्यमंत्री निवास के नाम से जुड़े लोगों के नाम पर भारी भरकम राशि लेने की खबरें हमेशा सुर्खियों में रहती हैं तो सवाल यह उठता है कि आखिरकार मुख्यमंत्री के नाम पर कौन ले रहा है इस लाख टके के सवाल का जवाब की खोज में हर कोई लगा हुआ है कि आखिर वह कौन है जो मुख्यमंत्री के नाम पर इस तरह से लेनदेन धड़ल्ले से कर रहे हैं इससे यह साबित हो जाता है कि प्रहलाद पटेल ने वर्ष २००७ में जो पत्र मुख्यमंत्री के नाम लिखा था उसमें यह सवाल खड़ा किया था कि ”आप स्वयं भ्रष्टाचार के जनक हैं” इस तरह की खबरें सुर्खियों में रहकर लोगों द्वारा चटखारे करते देख हर किसी के मन में यही सवाल उठता है कि आखिर कौन है जो मुख्यमंत्री के नाम पर लेनदेन कर रहा है, यही नहीं हाल ही में यह खबर भी बड़ी सुर्खियों में है जिसमें एक पूर्व मंत्री की सिफारिश पर एक आईएएस अधिकारी जिनके बारे में लोकसभा में देश के प्रधानमंत्री ने बाबू शब्द का उपयोग कर यह स्पष्ट कर दिया कि बाबू (आईएएस अधिकारी) जो करे वही सही है क्योंकि वह सबसे अधिक ताकतवर होता है, तभी तो इस प्रदेश के एक आईएएस अधिकारी ने अपने पावर दिखाते हुए अपने चहेते को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हस्ताक्षर करवाने के बाद अपने मातहत की मनचाही पदस्थापना कर डाली इसी खबर के साथ-साथ यह खबर भी सुर्खियों में है कि इस सारे मामले में मुख्यमंत्री निवास में एक ताकतवर शख्स को मोटी रकम दी गई थी? उसी के साथ आईएएस अफसर ने मोटी रकम झटकने का खेल भी खेला ऐसी एक नहीं अनेकों मुख्यमंत्री निवास के शक्तिशाली शख्स से जुड़ी लेनदेन की खबरें लोग चटकारे लेकर हमेशा तरह-तरह की चर्चाएं करते नजर आते हैं जिन्हें सुनकर आमजन यही सोचता है कि ऐसा कौन सा शक्तिाशाली शख्स है जो मुख्यमंत्री के नाम पर इस तरह का लेनदेन करता रहता है इन दिनों मुख्यमंत्री से जुड़े महिला एवं बाल विकास विभाग में हुए २१ अधिकारियों के तबादले और उन्हीं २१ अधिकारियों में से एक श्रीमती रेखा अग्रवाल क्षेत्रीय समन्वयक उप संचालक महिला एवं बाल विकास का स्थानान्तरण आदेश देर रात २१ अधिकारियों के साथ निकाला गया था लेकिन दूसरे दिन दोपहर तक उनका स्थानान्तरण निरस्त होकर ग्वालियर महिला बाल विकास विभाग की संचालक स्वाति मीणा नायक के द्वारा आदेश जारी किये जाने को लेकर भी तमाम तरह की चर्चाएं लोग विभाग में चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं और इस तरह के स्थानान्तरण में बदलाव को देखते हुए लोगों को प्रदेश में १५ वर्षों के सत्ता के वनवास के बाद कांग्रेस की १५ महीने की बनी कमलनाथ सरकार की याद आ जाती है जिसमें रात ढाई बजे मुख्य सचिव के हस्ताक्षर कराकर आदेश जारी होते थे और दूसरे दिन दोपहर और शाम तक निरस्त हो जाते थे इसी तरह की कमलनाथ सरकार की कार्यशैली के चलते भाजपा के नेता और स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा उसे तबादला उद्योग का नाम तो दिया ही गया था साथ ही वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल को दलाली का अड्डा कमलनाथ द्वारा बनाने के आरोप आज भी लगाये जा रहे हैं जिन रेखा अग्रवाल का स्थानान्तरण आदेश निकलने के दूसरे दिन दोपहर तक निरस्त हुआ वह भी उस स्थिति में जब दतिया में सक्षम अधिकारी नहीं है और उस जिले के विभाग की कमान ऐसे व्यक्ति के हाथों में है जो इसके लिये सक्षम भी नहीं है।
शिवराज सरकार में एक नहीं ऐसे महिला बाल विकास विभाग में कई कारनामे सुनने में आ रहे हैं तो साथ ही विभाग की मुखिया और विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर कई अधिारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और एक मई तबादले के लिये निर्धारित तिथि होने के बाद भी इस तरह के महिला बाल विकास विभाग के २१ अधिकारियों का तबादला होना भी संदेह के घेरे में तो आ ही रहा है साथ ही इस तरह के हुए तबादले को लोग भजकलदारम् की परम्परा को बढ़ावा देने की बात करते नजर आ रहे हैं कुल मिलाकर वर्ष २००७ को तत्कालीन भारतीय जनशक्ति के राष्ट्रीय महामंत्री प्रहलाद पटेल के बतौर के द्वारा शिवराज सिंह को लिखे गये पत्र के सवालों को लोग यही मानकर चल रहे हैं कि यह परम्परा आज भी इस प्रदेश में बदस्तूर चल रही है जिसके चलते जहां कमलनाथ की सरकार में कांग्रेसी नेताओं द्वारा बड़े-बड़े काउंटर खोलकर धन वसूली की जाती है तो वहीं पार्टी के सुपर चीफ मिनिस्टर के चहेते कम्प्यूटर बाबा रेत के घाटों पर जाकर एक-एक दो-दो लाख रुपये तक की वसूली की चर्चाएं पूर्व कमलनाथ सरकार के दौरान खूब सुनी जाती रहती थीं लेकिन सवाल यह है कि जिस भाजपा के नेता और स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा पूर्व कमलनाथ सरकार को भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जाता रहा हो और आज भी लगाया जाता रहा है उसी भाजपा की सत्ता के मुखिया होने के नाते जहां उनके निवास में शक्तिशाली शख्स के द्वारा लोगों से भजकलदारम् की परम्परा को जारी रखने की चर्चायें लोग चटखारे लेकर करते नजर आते हैं लेकिन उनके इन चर्चाओं के माध्यम से उठाये गये प्रहलाद पटेल की तरह पूछे गये सवालों के जवाब आज तक नहीं मिल पा रहे हैं कि आखिर वह कौन शक्तिशाली व्यक्ति है जो मुख्यमंत्री के नाम पर इस तरह के भजकलदारम् की प्रथा को अपनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है

