इजरायल-हमास के बीच युद्ध में एक नया मोड़ तब आ गया, जब इजरायल के अंदर ही असंतोष उजागर होने लगा. पहले वहां के सेना प्रमुख ने युद्ध के खिलाफ बयान दिया था और अब रविवार को इजरायल में हजारों लोगों ने देशभर में प्रदर्शन कर सड़कों को बंद कर दिया और एक दिन की हड़ताल की. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि गजा में बंधकों को छुड़ाने के लिए समझौता किया जाए.
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और 38 लोगों को गिरफ्तार किया. इन प्रदर्शनों का आयोजन बंधकों के परिवारों ने किया था. ये लोग सरकार के गाजा में नए सैन्य अभियान से नाराज हैं, क्योंकि इससे बचे हुए 50 बंधकों की जान को खतरा बढ़ सकता है. माना जा रहा है कि इनमें से केवल 20 ही अब जिंदा हैं

वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू किसी ऐसे समझौते के खिलाफ हैं जिसमें हमास सत्ता में बना रहे. उन्होंने कहा- ‘जो लोग बिना हमास को हराए युद्ध रोकना चाहते हैं, वे बंधकों की रिहाई में देरी कर रहे हैं और देश की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं.’ वहीं गाजा शहर से लोगों के विस्थापन को लेकर इजरायली पीएम अड़े हुए हैं. इसके लिए उन्होंने सुरक्षित सेंटर्स भी बनाने का दावा किया है, जिसमें वे लोगों को शिफ्ट करना चाहते हैं. वो बात अलग है कि संयुक्त राष्ट्र वहां के इंतजाम पर संतुष्ट नहीं हैं.
क्या हैं गाजा के हालात?
गाजा में रविवार को कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 9 लोग UN की सहायता पाने के इंतजार में खड़े थे. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कुपोषण के कारण दो बच्चों समेत 7 और लोगों की भी मौत हुई. इजरायली सेना गाजा के घनी आबादी वाले इलाकों में नया सैन्य अभियान शुरू करने वाली है, जिसके लिए हजारों रिजर्व सैनिकों को बुलाया जाएगा. हालांकि, लोगों को जिन इलाकों को सुरक्षित जोन बताया जा रहा है, वे भी पहले बमबारी की चपेट में आ चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि गाजा में भूख और कुपोषण अब तक के सबसे गंभीर स्तर पर हैं. मार्च से लगे पूरी तरह के प्रतिबंध के बाद अधिकांश सहायता बंद थी, लेकिन अब भी जो मदद मिल रही है, वह जरूरत से बहुत कम है.