इंदौर
इंदौर में अपर कलेक्टर की सरकारी गाड़ी लेकर सुरक्षाकर्मी एक दुकान पर पहुंचा। दुकान खुलवाई गई और साहब के लिए खरीदी की गई। आम जनता दुकान पर खरीदी करे या दुकान खोल ले तो उसे जेल भेज दिया जाता है। ऐसे में साहब को छूट देना लोगों को हजम नहीं हो रहा। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है।
इंदौर में दो दिन पहले गलियों में सब्जी बेचने वाले 208 लोगों को गिरफ्तार कर सेंट्रल जेल भेजा था। इन गरीबो का कसूर इतना था कि इन्होंने अपने परिवार को पालने के लिए गलियों ने घूमकर सिर्फ सब्जी बेच रहे थे।
ऐसे में इंदौर जेल रोड पर बुधवार दोपहर में अपर कलेक्टर की गाड़ी आकर रुकती है। उनका सुरक्षाकर्मी एक दुकान को खुलवाता है और उस पर से मोबाइल चार्जर लेकर वापस रवाना हो जाता है। नंबर से जानकरी निकाले जाने पर साफ हुआ कि यह गाड़ी इंदौर के अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर की है और सरकारी सुरक्षाकर्मी उनके लिए सामान ले गया।
मामले में अपर कलेक्टर बेड़ेकर ने बात की तो उनका कहना था कि मैंने दुकान तो नहीं खुलवाई। दुकान खुली हुई थी। मेरे फोन का कार्ड खराब हो गया था। मोबाइल चार्ज ही नहीं हो रहा था। बिना मोबाइल फोन के उच्च अधिकारियों और अन्य अधिकारियों से संपर्क करना मुश्किल था, इसलिए सैनिक को जेल रोड भेजा था।
अब सवाल ये उठता है कि क्या बिना अधिकारी के सुरक्षा कर्मी कहीं भी जा सकता है और किसी दुकान को खुलवा सकता है? जिस जेल रोड को पूरी तरह से बंद कर रखा है उस पर दुकान कैसे खुली हो सकती है।

