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*सितंबर में भी  जम्मू-कश्मीर, श्रीनगर, बडगाम, पंपोर, अवंतीपोरा, पूलवामा में भारी बारिश का अलर्ट*

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अगर अगस्‍त की मूसलाधार बारिश से आपका जीना मुश्किल हो गया है तो जरा अपनी कुर्सी की पेटी बांध लें. सितंबर में भी लोगों को बाढ़, भूस्‍खलन से राहत नहीं मिलने वाली है. जम्‍मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ता जा रहा है. श्रीनगर, बडगाम और दक्षिण कश्मीर के पंपोर, अवंतीपोरा व पूलवामा के कुछ हिस्सों में भारी से तेज बारिश और हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से पुरानी बिजली की तारों, पेड़ों और ढीले ढांचे से दूर रहने और डल झील सहित सभी जलाशयों में शिकारा व नाव चलाने से परहेज़ करने की अपील की है.

109 परसेंट ज्‍यादा होगी बारिश
देशभर में सितंबर में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई जा रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के निदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने बताया कि सितंबर में औसत 167.9 मिमी बारिश की तुलना में 109% या उससे अधिक बारिश हो सकती है. अधिकांश हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश होगी, जबकि पूर्वोत्तर, कुछ दक्षिणी और पश्चिमोत्तर हिस्सों में अपेक्षाकृत कम बारिश दर्ज हो सकती है.

उत्‍तराखंड से राजस्‍थान तक अलर्ट
महापात्रा ने चेतावनी दी कि भारी बारिश के कारण नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं. उत्तराखंड में भूस्खलन और तेज़ बाढ़ का खतरा है, जबकि दक्षिण हरियाणा, दिल्ली और उत्तर राजस्थान में भी प्रभाव पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि कई नदियां उत्तराखंड में जन्म लेती हैं, इसलिए भारी बारिश से नदियों में जलस्तर बढ़ सकता है और नीचे के शहरों व कस्बों में बाढ़ आ सकती है.

औसत से ज्‍यादा हो चुकी बारिश
जून से अगस्त तक भारत में 743.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जो औसत से 6% अधिक है. अगस्त में उत्तर-पश्चिम भारत में असामान्य रूप से अधिक बारिश हुई, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में भी सामान्य से 31% अधिक वर्षा दर्ज की गई. लगातार पश्चिमी विक्षेप और सक्रिय मानसून ने यह अतिरिक्त बारिश सुनिश्चित की.

जल सोत्र से दूर रहने की सलाह
पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में जलप्रलय और भूस्खलन जैसी घटनाओं से भारी क्षति हुई. IMD ने बताया कि जुलाई और अगस्त में पश्चिमी हिमालय और आसपास के मैदानों में लगातार सक्रिय बारिश और चार कम दबाव प्रणालियों के कारण अत्यधिक वर्षा हुई. सभी राज्यों में मौसम की यह सक्रियता सावधानी और सतर्कता की मांग करती है. नागरिकों को भारी वर्षा और बाढ़ की परिस्थितियों में सुरक्षित स्थानों पर रहने, पानी के निकायों से दूर रहने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है.

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