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जय स्तंभ के मूल स्वरूप को बचाने चलेगा जन जागरण अभियान

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हर शाम दीप प्रज्वलित करके अलख जगायेंगे जन संगठन
ऐतिहासिक जय स्तंभ को नहीं , वहां के अतिक्रमण को हटाए प्रशासन  

रीवा . समदड़िया बिल्डर्स को लाभ पहुंचाने के लिए ऐतिहासिक जय स्तंभ को हटाने के दुष्चक्र को कभी भी अंतिम रूप दिया जा सकता है । जय स्तंभ को हटाने की पूर्व तैयारी के तहत उसकी प्रतिकृति स्थानीय पद्मधर पार्क में तैयार कर ली गई है । यह भारी विडंबना है कि इस सवाल को लेकर चुने हुए जनप्रतिनिधियों की जुबान पर ताला लगा हुआ है , वहीं पृथक विंध्य प्रदेश का राग अलापने वालों को भी ऐतिहासिक जय स्तंभ के साथ होने जा रहे क्रूर खिलवाड़ का मुद्दा नजर नहीं आ रहा है . शहर की ऐतिहासिक पहचान जय स्तंभ क्षेत्र में न तो यातायात संकेतक है , न ही यातायात पुलिस मौजूद रहती है । सन 1957 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शताब्दी समारोह के अवसर पर बीहर नदी के छोटी पुल के पास पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 7 पर जय स्तंभ स्थापित किया गया था । जय स्तंभ रीवा शहर की शान और ऐतिहासिक धरोहर है , जिसका इसी स्थान पर महत्व है।
यदि जयस्तंभ की सोने की प्रतिकृति भी बना दी जाए तो भी वह इस ऐतिहासिक जयस्तंभ की जगह नहीं ले सकती है । यह बहुत आपत्तिजनक बात है कि ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव एवं उनके संरक्षण करने के बजाय कथित विकास के नाम पर व्यवसायिक हितों को साधने के लिए जय स्तंभ की ऐतिहासिक पहचान कथन की जा रही है । करीब 64 साल पहले जय स्तंभ भारत सरकार की पहल पर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाया गया था . यहां शुरू से भारी भरकम वाहनों का आवागमन हमेशा रहता था लेकिन इसके चलते कभी कोई व्यवधान और दिक्कत नहीं आई । इधर बाईपास बनने के बाद राष्ट्रीय मार्ग की स्थिति बदल गई है । इस जय स्तंभ में एक छोटा सरोवर और फव्वारा भी है , जिसकी अनदेखी लंबे समय से होती आ रही है । वहीं शहर के दूसरे चौराहों में शानदार फव्वारे चल रहे हैं । कुछ साल पहले जय स्तंभ के सामने ही जेपी सीमेंट के द्वारा अपने प्रचार प्रसार के लिए एक नकली जय स्तंभ भी स्थापित कर दिया गया । जिसका विरोध होने के बावजूद उसे आज तक नहीं हटाया गया , वहीं इधर मूल जयस्तंभ की पहचान को ही नष्ट किया जा रहा है । सिरमौर चौराहा , कॉलेज चौराहा , अस्पताल चौराहा पर भारी भरकम आवागमन रहता है वहां भी बड़ी रोटरी है इसके बावजूद उसे सुरक्षित रखते हुए यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक जयस्तंभ को यातायात व्यवस्था के नाम पर हटाने के दुष्चक्र को अंतिम रूप दिया जाने वाला है। कॉलेज चौराहा सिरमौर चौराहा और अस्पताल चौराहे की रोटरी काफी बड़ी है लेकिन वहां ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू होने के कारण यातायात व्यवस्था सुगम रहती है । वहीं जय स्तंभ को गलत तरीके से हटाने वहां की रोटरी को बहाना बनाया जा रहा है । इस बात से शासन-प्रशासन का विरोधाभासी चरित्र स्पष्ट रूप से उजागर हो गया है।
चौराहों पर चारों दिशाओं से वाहन आते हैं , जिसे नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस एवं स्वचालित संकेतक काम करते हैं । दुनिया का कोई भी चौराहा ऐसा नहीं होगा जहां जाम न लगे , उसी जाम को व्यवस्थित रूप से सही करने के लिए यातायात पुलिस काम करती है । यातायात व्यवस्था के बहाने जय स्तंभ को हटाया जाना सरासर गलत होगा । शासन प्रशासन को जय स्तंभ क्षेत्र का अतिक्रमण हटाकर उसके ऐतिहासिक स्वरूप को बरकरार रखना चाहिए । देश के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीक में रूप में स्थापित जय स्तंभ को सुरक्षित रखते हुए यातायात व्यवस्था को कैसे सुगम बनाया जाए शासन को इस बात पर विशेष गौर करना चाहिए ।
राष्ट्रीय एकता अखंडता एवं स्वतंत्रता के प्रतीक जय स्तंभ के मूल स्वरूप को बचाने के लिए जन संगठनों के द्वारा जन जागरण अभियान चलाया जाएगा और हर शाम वहां दीप प्रज्वलित करके अलख जगायेंगे । जो लोग देश के आजादी के आंदोलन के इतिहास के साथ खिलवाड़ करेंगे , उन्हें इसकी सजा जरूर मिलेगी और देश गद्दारों को कभी माफ नहीं करेगा ।

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