पूंजीवादी प्रणाली में उत्पादन और वितरण समाजिक समानता, न्याय और पर्यावरण की सुरक्षा की बजाय निजी मुनाफे से संचालित होती है।निरंतर विकास इसकी चालक शक्ती है। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और विनाश पर अधारित विकास के कारण उन समुदायों को विस्थापित होना पङता है जो इस संसाधनों पर निर्भर हैं। केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से कृषि संकट बढा है। किसानों को आजतक एमएसपी नहीं मिलने से घाटा भुगतने के लिए मजबूर हैं। कृषि भूमि का जबरन अधिग्रहण किसानों के उपर आक्रमण साबित हो रहा है। नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर बांध से 50 हजार परिवारों का पुनर्वास तो हुआ है। परन्तु लगभग 1000 परिवारों का पुनर्वास और निर्माण कार्य बांकी है।अन्य बांध विस्थापितों खेती जमीन नहीं दिया जा रहा है। ऐसा क्यों? दूसरी ओर नर्मदा घाटी में बसनिया, राघवपुर, चिंकी,गंजाल – मोरंड आदि बांध और चुटका परमाणु बिजलीघर परियोजना कार्य को आगे बढाया जा रहा है।छिन्दवाङा में मध्यप्रदेश विधुत मंडल द्वारा वर्षो पहले किसानों से अधिग्रहित की गई भूमि अडानी को दे दिया गया है। लगभग 10 वर्ष पहले थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर निजी कम्पनियों ने प्रदेश के किसानों से हजारों हेक्टेयर जमीन कब्जा लिया है, परन्तु पावर प्लांट लगा नहीं है।सिंगरौली में नये कोयला ब्लॉक खनन से प्रभावित गांव वाले तीन महिनों से इस खनन का विरोध शांतिपूर्ण तरीके से कर रहे हैं। परन्तु प्रशासन गलत धारा लगा कर संघर्ष करने वाले लोगों को प्रताड़ित कर रही है।स्मार्ट सिटी के नाम पर शहरों में झुग्गी –
झोपड़ी को उजाङा जा रहा है।सेंचुरी मील मजदूरों की लङाई ने कम्पनी मालिक और सरकार की गठजोड़ का पोल खोल दिया है। सेंचुरी के अलावा विविध व्यवसाय में लगे श्रमिको को भी न्याय नहीं मिल रहा है।प्रदेश में 11 नये अभ्यारण्य प्रस्तावित किया गया है।जबकि पहले बने 10 राष्ट्रीय उद्यान और 25 अभ्यारण्य से 94 गांव के लगभग 5460 परिवार को पहले हटाया गया है और 109 गांव के 10438 परिवारों को हटाने की कार्यवाही जारी है। सरकार द्वारा 37 लाख हेक्टेयर बिगङे वन क्षेत्रों को पी.पी.पी मोड पर निजी कम्पनियों को देने का निर्णय किया गया है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का भी निजीकरण करने की प्रक्रिया जारी है। बक्सवाह हीरा खनन, केन- बेतबा लिंक और सिंगरौली कोयला खदानों के लिए 16 लाख पेङ काटे जाएंगे।
*उपरोक्त सभी मुद्दों पर दिनांक 19 जुलाई 2022 को गांधीभवन, भोपाल में प्रातः 10 बजे से जनसंसद कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसमें देश के न्यायविद, समाजशास्त्री,पर्यावरणविद,शिक्षाशास्त्री आदि लोग पेनल में उपस्थित रहेंगे।अतः आपसे अनुरोध है कि आप अपनी समस्याओं का ज्ञापन बिन्दुवार तैयार कर प्रभावितों के साथ अधिक से अधिक संख्या में महिला -पुरूष के साथ उपस्थित होवें।*
*निवेदक :-*
*मेधा पाटकर (नर्मदा बचाओ आंदोलन)*
*डॉक्टर सुनिलम एवं आराधना भार्गव(किसान संघर्ष समिति)*
*विजय कुमार (लोकतांत्रिक अधिकार मंच)*
*वासिद खाँन (एन.सी.एच.आर.ओ मध्यप्रदेश)*
*इरफान जाफरी (किसान जागृति संगठन)*
*अमूल्य निधी (जन स्वास्थ्य अभियान)*
*राज कुमार सिन्हा(बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ)*

