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*डोनाल्ड ट्रंप के धोखे से घबराया जापान, चीन की ओर तेजी से तैनात कर रहा मिसाइलें*

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टोक्यो: डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ में राहत देने के नाम पर जापान पर 500 अरब डॉलर से ज्यादा अमेरिका में निवेश करने को कहा था। जिसके बाद जापान ने टैरिफ पर आगे बात करने के लिए अपने कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का वॉशिंगटन दौरा रद्द कर दिया है। यानि ट्रंप के टैरिफ ने अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक जापान, जो अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर है, उसे भी खतरे में डाल दिया है। जिसके बाद जापान ने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेते हुए लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की तैनाती को काफी तेजी से बढ़ा दिया है। जापान, चीन से लगती सीमाओं की तरफ और चीन से विवाद वाले हिस्सों में लंबी दूरी की मिसाइलों की तैनाती कर रहा है।जापानी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि नए कार्यक्रम के तहत घरेलू स्तर पर विकसित टाइप-12 एंटी-शिप मिसाइलों का पहला बैच मार्च 2026 तक जापान के दक्षिण-पश्चिमी कमुआमोटो प्रान्त में स्थित सेना के कैंप केंगुन में तैनात किया जाएगा। टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर है।

जापान के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की है। बयान में कहा गया है कि जापान ने काफी तेज रफ्तार से मिसाइलों की तैनाती की फैसला किया है और इसे तय समय से एक साल पहले पूरा कर लिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि मिसाइलों की तेज रफ्तार में तैनाती का फैसला अपनी मारक क्षमता को बढ़ाने के इरादे से लिया गया है।

जापान ने मिसाइलों की तैनाती की स्पीड को बढ़ाया
जापानी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि नए कार्यक्रम के तहत घरेलू स्तर पर विकसित टाइप-12 एंटी-शिप मिसाइलों का पहला बैच मार्च 2026 तक जापान के दक्षिण-पश्चिमी कमुआमोटो प्रान्त में स्थित सेना के कैंप केंगुन में तैनात किया जाएगा। टाइप-12 मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर है। जापान ये फैसला तब लिया है, जब चीन की नौसैनिक गतिविधियां जापान के द्वीपों के पास लगातार बढ़ रही हैं। जून में पहली बार जापान ने एक साथ दो चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर को अपने दक्षिणी द्वीपों के आसपास ऑपरेट करते देखा था। जापान सिर्फ चीन से ही नहीं, बल्कि उत्तर कोरिया और रूस से भी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।

उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर रहा है और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को का आक्रामक रुख भी टोक्यो के लिए चिंता की वजह बन गया है। यही वजह है कि जापान ने अपने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अपनी सेना नहीं बनाने की पुरानी नीति को खत्म कर दिया है और 2022 में उसने नई सुरक्षा रणनीति अपनाई थी। इसमें चीन को सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा बताया गया था और अमेरिकी गठबंधन के साथ अपनी सेना को और आक्रामक भूमिका देने का ऐलान किया गया। जापान अब अपनी रक्षा खर्च को 2027 तक जीडीपी के 2% तक बढ़ा रहा है, जबकि पहले यह सिर्फ 1% के आसपास था। जापान लंबी दूरी की मिसाइलें, एयर, सी-सर्फेस और अंडरवॉटर ड्रोन भी तैनात करने वाला है। जब तक स्वदेशी मिसाइलें पूरी तरह से तैनात नहीं हो जातीं, जापान अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों को भी तैनात करेगा, जिनकी डिलीवरी इसी साल शुरू हो जाएगी।

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