सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा हाल में दिए गए रिश्वत संबंधी बयान पर गहरी चिंता व्यक्त करती है। उनका यह बयान देश की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर करता है। उन्होंने यह बयान देकर आखिरकार एक सर्वविदित सच्चाई को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है।
पार्टी का स्पष्ट मत है कि देश में नीचे से ऊपर तक, लगभग हर स्तर पर भ्रष्टाचार जगजाहिर है और इसका सामना देश के नागरिकों को रोजमर्रा के जीवन में करना पड़ता है। सरकारी दफ्तरों से लेकर नीतिगत फैसलों तक, भ्रष्टाचार एक आम अनुभव बन चुका है। दुखद बात यह है कि इस रोग की सबके ज़्यादा क़ीमत गरीब और असहाय लोगों को चुकानी पड़ती है। ऐसे में जब स्वयं एक केंद्रीय मंत्री सार्वजनिक रूप से इस सच्चाई को स्वीकार करता है, तो यह साधारण घटना नहीं रह जाती।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि इस बयान पर सरकार की चुप्पी महज उदासीनता नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के इस तंत्र की स्वीकार्यता और उसे दिए जा रहे संरक्षण का संकेत देती है। यह चुप्पी इस संदेह को और गहरा करती है कि इसमें प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता है तथा यह सरकार की मंशा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
इस संदर्भ में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ‘न खाऊँगा, न खाने दूँगा’ की लुभावनी राजनीतिक घोषणा करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सार्वजनिक स्वीकारोक्ति के बाद भ्रष्टाचार के पूरे तंत्र के खात्मे के लिए कोई ठोस और गंभीर कदम उठाते हैं या फिर यह बयान भी प्रधानमंत्री मोदी की खामोशी में दब कर रह जाता है।
पार्टी मांग करती है कि सरकार इस पर बयान दे और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार अपने दावों को अंजाम देने के लिए ऐसे ठोस कदम उठाए जिसका असर दिखाई दे। इस मामले में सरकार के चुप्पी साधने से काम नहीं चलेगा, जनता को जवाब चाहिए।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
*जीतन राम मांझी का रिश्वत संबंधी बयान गंभीर, मोदी सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध ठोस व असरदार कदम उठाए’ -SPI*

