न्यायाधीश को न्याय नहीं , तो फिर न्याय की बात कहां होगी : अजय खरे
रीवा । देश की सर्वोच्च अदालत में पहली बार एक साथ नौ जजों की नियुक्ति जिसमें 3 महिलाएं भी हैं को ऐतिहासिक बताया गया है , वहीं दूसरी ओर भारतीय न्याय व्यवस्था में दीपक तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ हो रही है । सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन नौ जजों की नियुक्ति के समय उच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ मुख्य न्यायाधीश ए एस ओका को चुना लेकिन अगले वरिष्ठ मुख्य न्यायाधीश अकील कुरेशी को मौका नहीं दिया । सर्वोच्च अदालत की कॉलेजियम में रहे न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन का शुरू से आग्रह रहा कि जस्टिस कुरैशी को पदोन्नत किया जाना चाहिए , इसके चलते सितंबर 2019 के बाद से लगभग दो साल तक उच्चतम न्यायालय में नियुक्तियों पर रोक लगी रही । इधर जस्टिस नरीमन के 13 अगस्त 2021 को सेवानिवृत्त होने के बाद के सप्ताह में नौ न्यायाधीशों के नामों की मौजूदा सूची को पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने मंजूरी दी थी , उसमें न्यायमूर्ति अकील कुरैशी का नाम शामिल नहीं किया गया था।
इस बार , कॉलेजियम का ध्यान वरिष्ठता की तुलना में विविधता पर अधिक रहा , चार जजों- तीन महिलाओं और हाशिए के समुदायों के दो व्यक्तियों को पदोन्नत किया गया है , वहीं एक पद खाली है । जस्टिस अकील कुरेशी हमेशा संवैधानिक अधिकारों के लिए खड़े रहने वाले मेधावी जज हैं । उनकी योग्यता पर कोई सवाल नहीं रहा है । जस्टिस कुरेशी का होम बार , गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन हमेशा उनके पीछे खड़ा रहा है और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी पदोन्नति के लिए एक याचिका दायर करने की हद तक चला गया है । आखिरकार त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अकील कुरेशी को कब न्याय मिलेगा । यदि जस्टिस अकील कुरेशी को समय पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति दी जाती तो वह आगे चलकर सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश भी बनते । हाईकोर्ट के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है जबकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है । यदि न्यायमूर्ति अकील कुरेशी को पदोन्नति नहीं मिलती है तो वह है 7 मार्च 2022 को सेवानिवृत्त हो जाएंगे । सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की स्थिति में उनकी सेवानिवृत्ति आयु 7 मार्च 2025 होगी । वरिष्ठ होने के बावजूद जस्टिस अकील कुरेशी को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति न देने से इतिहास में कलंक लग चुका है । सुप्रीम कोर्ट में अभी एक न्यायाधीश का पद रिक्त है । जरा भी शर्म बची हो तो वरिष्ठता क्रम में अग्रणी त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी को तत्काल प्रभाव से सुप्रीम कोर्ट में शपथ दिलाई जानी चाहिए । यदि न्यायाधीशों को ही न्याय नहीं मिलेगा तो फिर न्याय की बात कहां होगी ?
दूसरा क्रम होने के बावजूद न्यायमूर्ति अकील कुरैशी को पदोन्नति से वंचित रखा गया

