जबलपुर
जबलपुर निवासी जस्टिस संजय यादव इलाहाबाद हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस होंगे। उनके नाम की अनुशंसा की गई है। एमपी हाईकोर्ट में रह चुके जस्टिस संजय यादव के कई फैसले नजीर बन चुके हैं। ट्रेनों में गर्भवती महिलाओं को लोअर बर्थ देने का फैसला हो या जबरिया बंद या स्ट्राइक करने वालों पर रोक लगाना हो। जस्टिस यादव हमेशा से जनहित के मुद्दों और उनकी तकलीफाें को लेकर सजग रहे हैं।
जस्टिस संजय यादव एमपी हाईकोर्ट के भी कार्यवाहक जस्टिस रह चुके हैं। यहीं से उनका तबादला कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में हुआ था। एमपी में महापौर चुनाव अप्रत्यक्ष कराने की सरकार की मंशा को उन्होंने खारिज कर दिया था। सनातन धर्म के पथ प्रदर्शक ग्रंथ श्रीमदभागवत् गीता की मीमांसा कर अध्यात्म की झलक भी वह दिखा ही चुके हैं। उनके कई फैसले आम लोगाें को राहत देने वाले साबित हुए हैं।
आंदोलन और जबरिया बंद पर लगा चुके हैं रोक
14 जनवरी 2012 को जस्टिस संजय यादव की सदस्यता वाली डबल बेंच ने अपने आदेश में साफ कर दिया कि राज्य सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों या संगठनों द्वारा भविष्य में जबरन बंद, स्ट्राइक, हड़ताल नहीं कर सकते। यह मूलभूत अधिकार नहीं है। बंद के दौरान शासकीय या निजी संपत्ति की क्षति होने पर संबंधित से वसूली का भी आदेश दिया था।
पीएम आवास में फोटो वाली टाइल्स लगाने पर लगा दी थी रोक
मप्र हाईकोर्ट ने 15 फरवरी को पीएम की तस्वीर वाली टाइल्स को लगाने पर रोक लगा दी थी। दरअसल, पीएम आवास में इस टाइल्स को लगाया जा रहा था। यही नहीं, 28 जनवरी 2012 में प्रदेश की कैथोलिक विशप परिषद द्वारा प्रदेश के सभी स्कूलों में अनिवार्य किए गए गीता सार को लेकर चुनाैती दी थी। इस पर जस्टिस यादव ने फैसले में कहा कि श्रीमदभागवत् गीता धर्म विशेष का ग्रंथ नहीं, वरन जीवन दर्शन है। इसमें नागरिकता का प्रशिक्षण मिलता है। न्यायिक नियंत्रण व सामाजिक सौहार्द्र का नैतिक संदेश देता है। रोक लगाने संबंधी मांग को खारिज कर दिया था।
गर्भवती महिलाओं को लोवर बर्थ देकर दी थी बड़ी राहत
जस्टिस संजय यादव ने 30 जुलाई 2020 को ट्रेनों की कई खामियों को लेकर एक अहम निर्णय दिया था। दरअसल जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र भेजकर ट्रेनों में यात्रियों के लिए कई खामियां गिनाई थीं। इसकी सुनवाई याचिका के रूप में की गई। आदेश में रेलवे को बर्थ की वरीयता के क्रम में विचार करने का आदेश देते हुए कहा था कि इसमें गर्भवती महिलाओं को, फिर सीनियर सिटीजन और उसके बाद वीवीआईपी को प्राथमिकता दें।
यूं रहा उप महाधिवक्ता से चीफ जस्टिस का सफर
जस्टिस संजय यादव ने 25 अगस्त 1986 को अधिवक्ता के तौर पर जबलपुर में एमपी हाईकोर्ट में अपने सफर की शुरूआत की। वह मप्र के उप महाधिवक्ता के रूप में भी कार्य किए। जस्टिस संजय यादव को 2 मार्च 2007 को मप्र हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। 15 जनवरी 2010 को स्थाई न्यायाधीश बनाया गया। 6 अक्टॅूबर 2019 से 02 नवंबर 2019 तक और 30 सितंबर 2020 से 02 जनवरी 2021 तक मप्र हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस रहे। सिविल, संवैधानिक व राजस्व मामलों के अधिवक्ता के रूप में वह प्रसिद्ध हैं।

