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*अपने खास समर्थक हरिनारायण यादव के माध्यम से कैलाश विजयवर्गीय की आईडीए पर कब्जे की तैयारी*

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इंदौर। इंदौर के बड़बोले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भले ही मीटिंग में सीएम से यह शिकायत करते रहें कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते, लेकिन धीरे-धीरे हर विभाग में उनका कब्जा होता जा रहा है। अब इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) पर पूरे कब्जे की तैयारी हो रही है। मंत्रीजी के खास समर्थक हरिनारायण यादव की जल्द ही ताजपोशी की बात कही जा रही है।

उल्लेखनीय है कि कई सालों के वनवास के बाद जब मंत्रीजी की मध्यप्रदेश में वापसी हुई तो उन्हें नगरीय प्रशासन जैसा महत्वपूर्ण विभाग मिला। इसके बाद से वे इंदौर के संगठन और प्रशासन में कब्जे की तैयारी में जुट गए थे। हालांकि इस बार मंत्रीजी को भारी राजनीतिक विरोध का भी सामना करना पड़ा। कई विधायकों ने मुख्यमंत्री तक शिकायत भी पहुंचाई फिर भी वे अपनी फितरत व जिद के सहारे धीरे-धीरे संगठन पर कब्जा करते रहे।

महापौर, नगर एवं जिला अध्यक्ष पद पर पहले ही कब्जा

भाजपा नगर और जिला संगठन में भी मंत्रीजी ने कब्जा जमा लिया। नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा मंत्रीजी के खास समर्थक हैं, वहीं जिला अध्यक्ष पर भी श्रवण चावड़ा के रूप मंत्रीजी का ही कब्जा रहा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर भी मंत्रीजी का जादू ऐसा चढ़ा कि उनके बिना कोई बड़ा फैसला नहीं होता। अब मंत्रीजी की तैयारी है कि निगम-मंडल तथा संगठन के अन्य पदों पर भी अपने ज्यादा से ज्यादा समर्थकों को किसी भी तरह से पद दिला दिया जाए।

आईडीए पर यादव की ताजपोशी की तैयारी

मंत्रीजी की नजर अब आईडीए पर है। इसके लिए उन्होंने अपने खास समर्थक हरियनारायण यादव का नाम आगे बढ़ाया है। यादव पहले भी आईडीए में रहे हैं। एक कार्यकाल में कुछ भी नहीं कर पाए और जब दूसरी बार मौका मिले तो आईडीए गए ही नहीं। मंत्रीजी की कृपा से यादव हाउसिंग बोर्ड में भी लंबे समय तक सक्रिय रहे। यादव कार्यकर्ताओं में भी उतने लोकप्रिय नहीं हैं, लेकिन मंत्रीजी के गाने के साथी हैं।

सीएम से रिश्तेदारी की निकली बात

मंत्रीजी ने हरिनारायण यादव के लिए अपनी कोशिशों में इस बार कोई कसर नहीं छोड़ी। भाजपा के सूत्र बताते हैं कि निशाना चूक न जाए, इसलिए सीएम से रिश्तेदारी निकालने की भी कोशिश की गई है। मंत्रीजी को लगा कि भले ही सारे दांव फेल हो जाएं, लेकिन रिश्तेदारी वाला दांव तो चलेगा ही। अब देखना यह है कि मंत्रीजी अपनी इस फितरत में कितना सफल हो पाते हैं।

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