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मजदूरों के साथ किसान मोर्चा बनाएगा एकता, अब बीजेपी और उसके सहयोगी नेताओं के बायकॉट की बारी

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सयुंक्त किसान मोर्चा द्वारा कई केंद्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर संघर्ष को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।राष्ट्र सेवा दल संगठन ने तीन कृषि कानून रद्द करने की मांग के लिए पूरे महाराष्ट्र में हस्ताक्षर अभियान में 6 लाख 75 हजार लोगों ने इन कानूनों को रद्द कराने के हस्ताक्षर किए। इस पत्र को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी को सौंपा गया।

आज उत्तराखंड के रुद्रपुर ने किसान महापंचायत का आयोजन किया गया जिसमें हज़ारों किसानों ने भाग लिया। किसान नेताओं ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में गाजीपुर मोर्चे पर पहुंचने की अपील की। इस दौरान किसान नेताओं ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सरकार इस देश की खेती को कुछ उद्योगपतियों के हाथों में देना चाहती है। किसान नेताओं ने कहा कि कोई भी किसान अपनी फसल न जलाए। किसान अपने खून पसीने से फसल को पालते हैं। सयुंक्त किसान मोर्चा सभी किसानों से अपील करता है कि आंदोलन और फसल दोनों को संभालना है और सयुंक्त किसान मोर्चा की अपील को ही अंतिम माना जाए।

किसान मोर्चा ने जानकारी दी है कि 15 मार्च को हसन खान मेवाती की शहादत दिवस पर संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में झिरका में बड़ी किसान पंचायत होगी जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के नेता शामिल होंगे और मेवात की बड़ी सख्सियत भी शिरकत करेंगी।बाबा गुरमीत सिंह डेरा कार सेवा शाहबाद और भाई सरदार रणधीर सिंह संगत ट्रस्ट के सहयोग से आंदोलन में शहीद हुए 20 परिवारों को एक एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है।

मोर्चा ने बताया कि लखीमपुर खीरी में किसानों ने भाजपा नेताओं का बॉयकॉट किया। नेताओं सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार इन कानूनों को वापस नहीं लेती और MSP पर कानून नहीं बनता तो भाजपा और उसके सहयोगियों के समस्त नेताओं का देशभर में बॉयकॉट किया जाएगा।

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