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किसान पंचायत ने किया सोनगढ़ सत्याग्रह आंदोलन का समर्थन,सरकार किसानों को 6000 रूपये देकर 36,000 रूपये वसूल रही है

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किसान संघर्ष समिति की 292वीं किसान पंचायत संपन्न*
*लखीमपुर खीरी कांड के चश्मदीद गवाह हरदीप सिंह पर जानलेवा हमला निंदनीय है

आज किसान संघर्ष समिति की 292 वीं ऑनलाइन किसान पंचायत किसान संघर्ष के अध्यक्ष, पूर्व विधायक डॉ सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। किसान पंचायत को मध्य प्रदेश के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। किसान पंचायत को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि भारत में अंग्रेजो के शासनकाल में जमींदारी प्रथा जैसी किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों ने सक्रिय रूप लंबे समय तक आंदोलन चलाकर सफलता प्राप्त की थी।भूमि सुधार कानून बनवाए और लागू करवाए थे। आज भी नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर के नेतृत्व में नर्मदा घाटी के विस्थापितों का संघर्ष 36 वर्षों से लगातार चल रहा है । किसान संघर्ष समिति 25 वर्षों से गरीब, मजदूर, महिला, आदिवासी के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रही है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 380 दिन तक चले किसान आंदोलन में 715 किसानों ने अपनी शहादत देकर तीन कृषि कानून वापस कराए है। सरकार के एमएसपी की कमेटी गठन करने के लिखित आश्वासन के बाद किसान आंदोलन स्थगित किया गया था। लेकिन 4 माह बीत जाने बाद भी एम एस पी पर कमेटी का गठन नही किया गया। उन्होंने कहा कि संघर्ष में हमारे साथियों ने बड़ी कुर्बानी देकर जीत हासिल की है।
किसान पंचायत में शामिल विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने लखीमपुर खीरी कांड के चश्मदीद गवाह हरदीप सिंह पर जानलेवा हमले की कड़ी निंदा करते हुए हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।
विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने किसान पंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के आव्हान पर “एमएसपी कानूनी गारंटी दो सप्ताह” के तहत 11 से 17 अप्रैल तक सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन, बैठकें, गोष्ठियां आयोजित की जाएगी। 11 अप्रैल को रीवा में जल सत्याग्रह करके यात्रा की शुरुआत की गई तथा छिंदवाड़ा, इंदौर, सागर, सिवनी में विरोध प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे गए।
बड़वानी में नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा एम एस पी की कानूनी गारन्टी दो सम्मेलन आयोजित किया गया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि एम एस पी केवल 23 फसलों के लिए ही नहीं बल्कि फल, सब्जी, वनोपज, दूध, अंडा जैसे सभी कृषि उत्पादों के लिए तय की जानी चाहिए। एमएसपी तय करते समय आंशिक लागत (A2+FL) की जगह संपूर्ण लागत (C2+50%) के न्यूनतम स्तर पर रखी जानी चाहिए। एमएसपी की सिर्फ घोषणा कर देने मात्र से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत नही होगी बल्कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर किसान को पूरे उत्पाद का कम से कम एमएसपी के बराबर भाव मिले। यह योजना केवल सरकार के आश्वासनों पर ही निर्भर नहीं रहनी चाहिए बल्कि इसे मनरेगा और न्यूनतम मजदूरी की तरह कानूनी गारंटी की शक्ल दी जानी चाहिए ताकि एमएसपी नहीं मिलने पर किसान कोर्ट में जाकर मुआवजा वसूल कर सकें। क्योंकि सरकार के तमाम वादों और दावों के बावजूद भी किसान आर्थिक तौर पर पिछड़ता जा रहा है।आत्महत्याएं बढ़ रही हैं
मंदसौर कृषि मंडी में किसानों की लहसुन 100-200 रूपये क्विंटल बिक रही है। जिसमें उसकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।
1200 रूपये में मिलने वाली 50 किलोग्राम डीएपी खाद की बोरी पर 150 रूपये की बढ़ोतरी कर दी गयी है तथा NPK की एक बोरी जो 1290 रूपये में मिल रही थी, उसमे 110 रूपये प्रति बोरी बढ़ोतरी कर दी है। देश के किसान हर साल 1.20 लाख टन DAP खाद का प्रयोग करते है। डीएपी के दाम बढ़ने से किसानों पर 3,600 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। वहीं NPK के दाम बढ़ने के कारण 3,740 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इस तरह सरकार 6000 रूपये सम्मान निधि देकर किसानों से 36,000 रूपये वसूलने का काम कर रही है।
इंदौर में 186 किसानों का 2019 से पौने तीन करोड़ रुपया व्यापारियों पर बकाया है। उसका भुगतान भी नहीं हो रहा है। इंदौर कलेक्टर द्वारा दो बार मंडी निधि से भुगतान किए जाने का प्रस्ताव बनाकर भेजे जाने के बावजूद अभी तक भुगतान नहीं हुआ है।
वर्ष 2020 में नष्ट हुई फसल के फसल बीमा वितरण में भारी अनियमितता बरती गई। अधिकांश किसान फसल बीमा से वंचित हैं। मुलताई तहसील के 18 गांव के किसानों को फसल बीमा की राशि नहीं मिली है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने‌ सदन में डिफॉल्टर किसानों का ब्याज राज्य सरकार द्वारा भरने की बात कही थी लेकिन आज तक डिफॉल्टर किसानों की सूची कृषि विभाग और कॉपरेटिव बैक को नहीं मिली है। जिससे साफ जाहिर होता है कि सरकार किसानो को गुमराह कर रही है।
डूब क्षेत्र और अन्य प्रयोजन के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा भूमि-अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधान के अनुसार दिया जाना चाहिए।
सीधी-सिंगरौली जिले के आदिवासी विकास खंड कुसमी के सोनगढ़ गोपद नदी में बन रहे गोंड सिंचाई परियोजना के तहत वृहद बांध निर्माण के विरोध में प्रभावित ग्रामीणों का 48 दिन से अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन चल रहा है । किसान पंचायत ने सोनगढ़ में किसानों और आदिवासियों के सत्याग्रह का समर्थन किया।
किसान पंचायत को अ.भा.किसान सभा के प्र. महासचिव प्रहलाद दास बैरागी, नर्मदा बचाओ आंदोलन के देवीराम कनेरा, किसान जागृति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष इरफान ज़ाफरी, इंदौर से अ.भा.कि खेत मजदूर संगठन के राज्य कमेटी सदस्य सोनू शर्मा, छिंदवाड़ा से किसान संघर्ष समिति की उपाध्यक्ष एड आराधना भार्गव, इंदौर से इंदौर- मालवा क्षेत्र संयोजक रामस्वरूप मंत्री, सिवनी से किसान संघर्ष समिति के प्रदेश सचिव डॉ राजकुमार सनोडिया, सीधी- सिंगरौली के संयोजक निसार आलम अंसारी, सिंगरौली के जिलाध्यक्ष एड अशोक सिंह पैगाम, अलीराजपुर से किसंस के जिलाध्यक्ष नवनीत मंडलोई, मुलताई से किसंस के महामंत्री भागवत परिहार आदि ने संबोधित किया।

भागवत परिहार
कार्यालय प्रभारी,
किसान संघर्ष समिति मुलतापी 9752922320

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