इंदौर
हिंदी फिल्म इतिहास के हरफन मौला और जिंदादिल गायक, अभिनेता निर्माता रहे किशोर का 92वी जयंती है। इंदौर से किशोर कुमार का गहरा नाता है, यहीं के क्रिश्चन कालेज से अपनी उच्च शिक्षा ख़त्म कर किशोर कुमार गांगुली ने माया नगरी मुंबई का रुख किया था। जिसके बाद फिल्म जगत में अपने हुनर की ऐसी चमक छोडी कि आज भी दीवानगी का आलम देखते ही बनता है।
आज हिंदी फिल्म जगत के सबसे जिंदादिल और हरफन मौला कलाकार किशोर कुमार का जन्मदिन है।खंडवा के प्लीडर कुंजालाल गांगुली के बेटे किशोर कुमार ने 11 जुलाई 1946 को इंदौर के क्रिश्चियन कालेज में एडमिशन लेने के लिए पहुंचे थे। तभी से किशोर और इंदौर की यादो का सिलसिला आज भी चल रहा है। क्रिश्चियन कॉलेज का कमरा नंबर चार, हॉस्टल की गैलरी, उनके बैठने की बेंच और वो इमली का पेड़ सब कुछ वहीँ है। जहाँ कभी किशोर कुमार के तराने गूंजते थे । जिस इमली के पेड़ के नीचे बैठकर किशोर दा ने पांच रुपैया बारह आना गाना लिखा था वह पेड़ आज भी क्रिश्चियन कॉलेज में मौजूद है।किशोर दा के हॉस्टल के कमरे में तबला, ढोलक हारमोनियम तो नजर आते थे लेकिन उनकी यादें आज भी इन दरख़्तों और दीवारों में गूंजती है।
क्रिश्चियन कॉलेज के हॉस्टल का कमरा
क्रिश्चियन काॅलेज होस्टल का कमरा नंबर चार, काका की कैंटीन और इमली का पेड़…। यह के शिक्षक बताये है कि कॉलेज में कैंटीन चलाने वाले काका से किशोर कुमार उधारी में पोहे-जलेबी लेते थे। उधारी के पैसे मांगने के लिए काका हमेशा कहते थे, भैय्या मेरा पांच रुपया बारह आना तो दे दे… मारेगा काका, मारेगा भैया….। काका के बोलने के अंदाज को ही किशोर कुमार ने गीत में ढाल दिया था।
कॉलेज समय की कुछ यादे
पांच रुपैया बारा आना…, धीरे से जाना तू खटियन में रे खटमल…., जैसे गीत उन्होंने कॉलेज के समय ही तैयार कर लिए थे।
20 रुपए में छात्रावास
कॉलेज के छात्रावास में कमरा नं. 4 में रहने वाले किशोर कुमार का कमरा ही नहीं पूरे छात्रावास में उनकी कई यादें अभी भी संजोई हुई हैं, मगर अब यह धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो चुका है। उस समय कमरे का किराया 20 रुपए प्रतिवर्ष था। इस एक कमरे में उनके साथ भाई कल्याण गांगुली (अनूप कुमार) दोनों साथ-साथ ही रहते थे।
टेबल को बनाया तबला
क्लास रूम में शिक्षक की अनुपस्थिति में किशोर कुमार अलग ही मूड में आ जाते थे। वह पढ़ाई की टेबल को ही तबला बनाकर थाप देना शुरू कर देते थे। टेबल भी तबले जैसी बजने लगती थी। ऐसे में उनके आसपास दोस्तों का जमावड़ा लग जाया करता था। फिर देखते ही देखते दौर शुरू हो जाता था किशोर के गीतों पर नाचने-गाने का।
कॉलेज के एडमिश की रसीदे
खंडवा स्कूल से किशोर दा का तबादले का प्रमाण पत्र

