ईरान पर अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। कई देशों की ओर से इस पर प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ देशों ने अमेरिका और इस्राइल की आलोचना की, तो कुछ ने कूटनीति का रास्ता अपनाने और संघर्ष रोकने की अपील की। वहीं, कुछ देशों ने इस्राइल-अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन भी किया है। पढ़िए रिपोर्ट-
मिडिल ईस्ट में हालात अचानक बेहद विस्फोटक हो गए हैं. शनिवार सुबह अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया, जिसे कई रिपोर्ट्स में महीनों की जॉइंट प्लानिंग का नतीजा बताया जा रहा है. शुरुआती हमलों में तेहरान समेत कई बड़े शहरों में धमाके सुने गए और दावा किया गया कि हमले ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर किए गए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को ‘मेसिव और जारी’ बताया और ईरानी जनता से अपनी सरकार गिराने तक की अपील कर दी. इसके तुरंत बाद ईरान ने जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए. ईरान ने न केवल इजरायल बल्कि UAE, सऊदी अरब, बहरीन समेत 8 देशों को टारगेट किया है जिससे पूरा क्षेत्र युद्ध जैसे हालात में पहुंच गया है.
इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर के ऑफिस और ठिकानों को सीधा निशाना बनाया गया है. हालांकि उनकी स्थिति को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है. दूसरी ओर ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई सीनियर कमांडरों के मारे जाने की खबर सामने आ रही है.
ईरान ने कैसे किया जवाबी हमला?
हमले के कुछ घंटों के भीतर ईरान ने मिसाइल और ड्रोन दागे, जिनका निशाना इजरायल और मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकाने बने. बहरीन, कतर और यूएई जैसे देशों में धमाकों की खबरें आईं, जबकि कुछ जगहों पर एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिए गए.
ईरानी मीडिया के हवाले से दावा किया गया कि दक्षिणी ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर हमले में कई छात्राओं की मौत हुई. वहीं यूएई के अबू धाबी में मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत की खबर भी सामने आई है.
ट्रंप ने क्यों दी ‘रेजीम चेंज’ की खुली चेतावनी?
हमलों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने वीडियो संदेश में कहा कि यह ईरान की सैन्य ताकत और मिसाइल ढांचे को खत्म करने का मिशन है. उन्होंने ईरानी नागरिकों से कहा कि ‘अपनी सरकार अपने हाथ में लें’, जिससे साफ संकेत मिला कि ऑपरेशन का मकसद सत्ता परिवर्तन भी हो सकता है.
अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने का आरोप लगाते रहे हैं, जबकि तेहरान इसे शांतिपूर्ण कार्यक्रम बताता है. हाल की बातचीत विफल रहने के बाद तनाव तेजी से बढ़ा और आखिरकार सैन्य कार्रवाई तक पहुंच गया.
पूरे मिडिल ईस्ट पर क्या असर पड़ा?
संघर्ष का असर सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा. कई देशों ने एयरस्पेस बंद कर दिया, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें डायवर्ट हुईं और अमेरिकी दूतावासों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी. इससे वैश्विक ट्रैवल और तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि यह मल्टी-डे ऑपरेशन हो सकता है, यानी आने वाले दिनों में हमले जारी रह सकते हैं. इजरायल ने भी साफ किया है कि शुरुआती हमलों का आकलन अभी जारी है. दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी ठिकानों और हितों को ‘वैध निशाना’ घोषित कर दिया है, जिससे बड़े क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ गया है.
रूस ने इस्राइल और अमेरिका से की हमले रोकने की अपील
रूस ने अमेरिका और इस्राइल से ईरान में तुरंत हमले रोकने की अपील की। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उन्हें मौजूदा स्थिति से राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान के रास्ते पर लौटना चाहिए। मंत्रालय ने एक बयान में कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन गैर-जिम्मेदार कार्रवाई का निष्पक्ष आकलन करना चाहिए, जो पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर करने का खतरा पैदा कर रही हैं। रूस पहले की तरह अंतरराष्ट्रीय कानून, आपसी सम्मान और हितों के संतुलन के आधार पर शांतिपूर्ण समाधान खोजने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार है।
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता: फिलीपींस राष्ट्रपति
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच वहां रह रहे फिलीपीनी नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय और प्रवासी श्रमिक विभाग को प्रभावित इलाकों में नागरिकों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2024 में क्षेत्र में करीब 21 लाख फिलीपीनी कामगार मौजूद बताए गए थे। बेल्जियम के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
बेल्जियम ने कहा, ईरानी जनता को अपनी सरकार के फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए। बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्सिम प्रेवो ने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि कूटनीतिक प्रयास पहले किसी बातचीत से समधान तक नहीं पहुंच पाए।
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं इस्राइल के हमले: नॉर्वे
नॉर्वे ने कहा कि इस्राइल के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ने कहा, इस्राइल इसे एहतियात के तौर पर किया गया हमला बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एहतियात के तौर पर हमले तभी सही माने जाते हैं, जब खतरा तुरंत और स्पष्ट रूप से सामने हो।
ईरान के साथ खड़ा हुआ पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरान पर हुए हमलों की आलोचना की। उन्होंने तनाव को तुरंत रोकने और संकट के शांतिपूर्ण, बातचीत के जरिये समाधान के लिए दोबारा कूटनीति शुरू करने की अपील की।
इंडोनेशिया ने मध्यस्थता की पेशकश की
इंडोनेशिया के विदेश मंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो वाॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद कराने के लिए तैयार हैं। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होने से पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ा है, जिस पर इंडोनेशिया को बेहद अफसोस है। इंडोनेशिया ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद व कूटनीति को प्राथमिकता देने की अपील की है।
अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई एकतरफा: स्पेनिश पीएम
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाई को एकतरफा कदम बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में सांचेज ने कहा कि ऐसी कार्रवाई वैश्विक व्यवस्था को और अस्थिर तथा टकरावपूर्ण बना सकती है। हालांकि उन्होंने ईरान सरकार और रिवोल्यूशनरी गार्ड की गतिविधियों को भी स्वीकार्य नहीं बताया। स्पेन ने सभी पक्षों से तुरंत तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह सम्मान करने की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत और शांतिपूर्ण रास्ते से ही संभव है।
ओमानी विदेश मंत्री ने ट्रंप की आलोचना की
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की। अलबुसैदी हमलों से पहले अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्था नहीं कर रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, सक्रिय और गंभीर वार्ता को एक बार फिर कमजोर किया गया है। उन्होंने कहा, मैं अमेरिका से गुजारिश करता हूं कि वह इसमें और न फंसे। यह आपकी लड़ाई नहीं है।
कनाडा के पीएम कार्नी ने अमेरिका का समर्थन किया
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और उनकी विदेश मंत्री अनीता आनंद ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने एक संयुक्त बयान में कहा, कनाडा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और उसके शासन को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए और खतरा बनने से रोकने के लिए अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन करता है।
ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने क्या कहा?
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन करती है। अल्बनीज ने एक बयान में कहा, हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और ईरान को अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करते हैं।
क्यूबा के विदेश मंत्री ने की अमेरिका-इस्राइल की आलोचना
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पर्रिला ने अमेरिका और इस्राइल के हमलों की आलोचना की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ये गैर-जिम्मेदाराना काम अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को भंग करते हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून व संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन करते हैं।
पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर करीब से रख रहे नजर: जापान
जापान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एसिया के हालात का जापान पर बहुत असर पड़ सकता है, जिसमें उर्जा सुरक्षा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जापानी सरकार चिंतित है और इस बदलते घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही है।

