Site icon अग्नि आलोक

इंदौर में कुमार मंगलम बोले-नुकसान होने पर पापा की पहली यूनिट बंद करनी पड़ी…

Share

इंदौर

भास्कर उत्सव में शामिल होने के लिए बिड़ला समूह के चेयरमैन और मशहूर उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला इंदौर पहुंचे। सोमवार को उन्होंने मैरियट होटल में बिजनेस से जुड़े सवालों के जवाब दिए। साथ ही ‘जब माहौल तूफानी हो, तो कैसे संभालें बिजनेस की नौका’ विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने युवा आंत्रप्रेन्योर को भी बिजनेस संभालने के कई टिप्स दिए।

कार्यक्रम में जब उनसे पूछा गया कि आपने कोई कंपनी शुरू की, उसे बंद नहीं करना है ये नाक का सवाल नहीं रहा कभी? इस पर जवाब देते हुए बिड़ला ने कहा कि ‘प्रैक्टिकल एप्रोच रखना जरूरी है। करीब 25 साल पहले मैं बिजनेस में आया था। मेरे पिताजी ने कोलकाता में एक यूनिट लगाई थी। पिताजी को उस यूनिट से बहुत लगाव था, क्योंकि ये उनकी पहली यूनिट थी। उसमें हमें नुकसान होने लगा। हमने कोशिश भी की थी कि इसमें सुधार करें, लेकिन मैंने दादाजी से कहा कि इतना नुकसान हो रहा है। इसे चलाना मुश्किल है। इसे हमें बंद करना पड़ेगा या बेचना पड़ेगा। इसके बाद इमोशनल डिसीजन लेना पड़ा। फिर हमने वो यूनिट बेच दी। मेरी मां बहुत सपोर्टिव हैं। ऐसी कई सिचुएशन रही कि कठिन डिसीजन लेना पड़े।’

आगे पढ़िए उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला से दैनिक भास्कर समूह के डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल के सवाल-जवाब…

सवाल- CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) एक्टिविटी और बिजनेस को बैलेंस कैसे करते हैं?
जवाब- हम CSR पर बरसों से काम करते रहे हैं। हमारे लिए बिजनेस वर्किंग दो तरह की है। बिजनेस सिर्फ प्रॉफिट की बात नहीं होती है।

सवाल- 40 देशों में आपका कारोबार है। ग्लोबली यूक्रेन सहित अन्य देशों में जो वर्तमान परिस्थिति है। उसे कैसे देखते हैं?
जवाब- 30 सालों में ऐसे हालात नहीं देखे। युद्ध से ग्लोबल बिजनेस पर फर्क तो पड़ेगा ही। ऐसी स्थिति में हम रिस्क मैनेजमेंट करते हैं। ग्लोबल बिजनेस अगर आप चला रहे हैं तो ये सब देखना ही पड़ता है।

सवाल- आजकल स्टार्टअप का जमाना है। ओल्ड स्कूल आपका है और न्यू स्कूल खुल रहे हैं। कंपनी खड़ी करने में बरसों लगते हैं। परंतु आज 26 साल का लड़का भी स्टार्टअप शुरू कर जल्दी प्रोग्रेस कर लेता है। इसे कैसे देखते हैं?
जवाब- पिछले साल दो महीने इसी को समझने के लिए दिए थे कि कंज्यूमर की क्या जरूरत है, उसे कैसे पूरा किया जाए। युवाओं को अपने आइडिया पर भरोसा है। फंडिंग आसान हो गई है। फाइनेंस करने वाले बहुत मिल जाते हैं। कुछ लोग बहुत अच्छा कर रहे हैं। तकनीक को किस तरह से उपयोग करना है, ये जरूरी है। यंगस्टर्स बहुत अच्छा कर रहे हैं।

सवाल- युवा उद्यमियों के लिए कोई सुझाव?
जवाब- पेशनेट होना जरूरी है। जरूरी है कि हम इसके पीछे लगे रहें। इसी के साथ कंसिस्टेंसी भी जरूरी है। ऐसा नहीं हो कि कोई काम सिर्फ छह महीने करें। को-वर्क मतलब, वो टीम जो आपके साथ काम करती है, उसे कैसे हैंडल करते हैं ये भी जरूरी है। करेज होना चाहिए।

सवाल- आपके करियर में ऐसे मौके आए होंगे जब आपको करेज की जरूरत पड़ी होगी?
जवाब- बीते बरसों में ऐसे बहुत से घटनाक्रम हुए हैं। मैंने बहुत जल्दी बिजनेस स्टार्ट कर दिया था। जो आपकी ताकत है, वह है एजुकेशन। ये मैं कहना चाहूंगा कि बिजनेस फैमिली में डाइनिंग टेबल पर जो डिस्कस होता है वो ओरिएंटेशन रहती है। कई बार बड़ा प्रोजेक्ट किया आपने, उसमें समय लग गया। फाइनेंशियल स्थिति खराब हो गई हो। ये चीजें होती रहती हैं।

सवाल- हिंदुस्तान में मर्जर एक्वेजिशन देखने में आता है। ये कितना मुश्किल या सरल है?
जवाब- जो बिजनेस थे वो हमें लगा कि हम स्केल नहीं कर पाएंगे, उसे मर्ज किया। कुछ कंपनी बेच दी। लोगों को लगा कि ऐसा तो नहीं होता बिड़ला ग्रुप में, लेकिन थिंक चेंज। किसी कंपनी के ऑपरेशन आप एक्वायर करते हैं। वहां के लोग हमारी ग्रोथ बढ़ाते हैं। ये बहुत महत्वपूर्ण होता है।

कुमार मंगलम बिड़ला ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

सवाल- आपके ग्रुप में 20-30 साल से लोग काम कर रहे हैं। टेलैंट मैनेजमेंट कैसे करते हैं?
जवाब- बाबू कल्चर तो रहा नहीं अब, लेकिन ऐसा है कि हमारे लिए जो सबसे बड़ी संपत्ति है, वो हमारे लोग हैं। ये बैलेंस शीट पर दिखाई नहीं देते। हम लोगों की स्किल्स में इन्वेस्ट करते हैं। 4 हजार लोग हमारे साथ 20 साल से काम कर रहे हैं। हमारी वैल्यू है कमिटमेंट। कमिटमेंट का मीनिंग बहुत अलग होता है। अमेरिका, थाईलैंड, इंडिया में इसके मीनिंग अलग-अलग हैं।

सवाल- आपके बेटे ने क्रिकेट खेलने के लिए कहा। आपने कहा खेलो। आपने सपोर्ट किया। आपको कभी डर नहीं लगा कि ये क्रिकेट खेलते रहेगा तो धंधा कौन करेगा?
जवाब- पत्नी और मुझे ये लगा कि ये जरूरी है कि बच्चे को उसका पैशन फॉलो करने का मौका मिले। आप स्पोर्ट्स फील्ड में बहुत सी चीजें सीखते हैं। जैसे टीम वर्क। लाइफ में लर्निंग अलग-अलग प्रकार की होती है। टीम में कैसे एक-दूसरे के साथ इंटरेक्ट करते हैं, स्ट्रेस कैसे हैंडल करते हैं, ये सारी चीजें बिजनेस में भी जरूरी है। बेटा रणजी टीम का कैप्टन रहा। उसने बहुत मेहनत की। शहडोल रहा। मुंबई के बच्चों के लिए इतना आसान नहीं है। मैंने कहा कि मुझे मिलना है, आ रहा हूं। तो वो बोला पापा शहडोल में कहां मिलेंगे, कहां बात कर पाएंगे। मैं आ रहा हूं एक महीने के बाद फिर मिलेंगे।

सवाल- आजकल लोगों का वर्क और लाइफ बैलेंस नहीं हो रहा है। आप कैसे करते हैं?
जवाब- हम जिस तरह से चाहते हैं, वैसा होता नहीं है। नई डिमांड आ जाती है। बच्चे बड़े हो रहे हैं। काम, एक्सरसाइज। बच्चों के साथ बहुत टाइम। मैं अपनी हेल्थ पर इनवेस्ट करता हूं। मुझे रोज सुबह ऑफिस जाने की जल्दी रहती है।

सवाल- औद्योगिक घराने को राजनीतिक पार्टी से संबंध होने पर फायदा मिलता है?
जवाब- हम सभी पार्टी के फ्रैंड हैं। हमारी आइडियोलॉजी हो सकती है, लेकिन बिजनेस पॉइंट ऑफ व्यू से कोई पॉलिटिकल आइडियोलॉजी नहीं होती है।

सवाल- 10-12 घंटे आप ऑफिस में रहते हैं। उसके बाद क्या करते हैं?
जवाब- मैं ऑफिस से घर जाकर आधे घंटे अकेला रहता हूं। बच्चों के साथ फैमिली के साथ रहता हूं। काफी बड़ी फैमिली है हमारी। हम सब एक-दूसरे से इनवॉल्व हैं।

सवाल- आप कुमार मंगलम बिड़ला हैं। बड़े आदमी हैं। आप जमीन से कैसे जुड़े रहते हैं। आप सिक्योरिटी गार्ड नहीं रखते?
जवाब- मुझे सिक्योरिटी गार्ड की जरूरत नहीं है। आप मेरे फादर, ग्रैंड फादर से नहीं मिले। उनकी वजह से ये सब है। आप बचपन में जो देखते हैं, उसका बहुत फर्क पड़ता है।

सवाल- आपकी बिजनेस पॉलिसी अन्य बिजनेस ग्रुप से अलग कैसे होती है?
जवाब- हम लॉन्ग टर्म में बिल्ड करते हैं। एक क्वार्टर पर नहीं जाते हैं। लॉन्ग पीरियड ऑफ टाइम के लिए फैसले लेते हैं।

सवाल- चैलेंज को कैसे देखते हैं?
जवाब- रोज नए चैलेंज रहते हैं। वर्ल्ड इज मूविंग सो फास्ट। इसके लिए आपको हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।

सवाल- कम निवेश में बिजनेस बढ़ाने का क्या तरीका है?
जवाब- किस चीज का बिजनेस है, उसमें आपको पहले प्रॉफिट मॉडल फिगर आउट करना पड़ेगा।

सवाल- कंपनी में डिसीजन कैसे लें?
जवाब- कंपनी लोगों के द्वारा ही रन होती है, वो इसमें महत्वपूर्ण होते हैं।

कार्यक्रम में इंदौर सांसद शंकर लालवानी व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए।

सवाल- आपके चार्टर्ड एकाउंटेंट होने से बिजनेस में कैसे मदद मिली?
जवाब- मेरे पिताजी का मानना था कि CA और MBA अच्छा कॉम्बिनेशन है, क्योंकि ये बहुत अच्छी ग्राउंडिंग है। मैं दादाजी के पास गया कि आप कुछ भी करिए और CA के झंझट से निकालिए। तब CA लक की बात होती थी। पासिंग पर्सेंट बहुत कम रहता था। स्ट्रेस ज्यादा होता था। उस समय उस उम्र में आप फन करता चाहते हैं। एन्जॉय करना चाहते हैं, लेकिन CA में आपको अलग-अलग कंपनी में एक्सपोजर मिलेगा, इससे फायदा हुआ।

सवाल- आपको क्या लगता है सरकार को क्या करना चाहिए बिजनेस को एनकरेज करने के लिए?
जवाब- मैं कहना चाहूंगा कि ये सरकार जो कर सकती है, वो कर रही है। स्टार्टअप के लिए अच्छी सुविधाएं हैं। मेक इन इंडिया सहित अन्य स्कीम हैं।

सवाल- बिड़ला परिवार सौ वर्षों से व्यवसाय में लगा है। आज के युवा भ्रमित हैं कि वे बिजनेस करें कि जॉब में जाएं। क्या संदेश देंगे?
जवाब- इसमें मेरे हिसाब से कोई फॉर्मूला नहीं है। मैं चाहता हूं कि मैं जॉब करूं, आप चाहते हैं कि बिजनेस करें। जिसका जिस चीज में पैशन है, उसे वो करना चाहिए।

सवाल- आप अलग-अलग प्रकार के बिजनेस करते हैं। आप उनके साथ जस्टिस कैसे करते हैं?
जवाब- मेरा रोल है कि सारी चीजों को समझना कि कैसे हो रही है। कैश फ्लो का ध्यान रखना। हम नंबर वन कैसे बनें। ये ज्यादा लीडरशिप, अंडरस्टैंडिंग के बारे में ज्यादा है। ऐसा क्या करने की जरूरत है कि बिजनेस आपको प्रॉफिट दे। स्केल दे। हर बिजनेस की डिमांड अलग-अलग होती है।

सवाल- बिजनेस टीम पर डिपेंड करता है। कैसे उसे साथ लेकर बिजनेस करें?
जवाब- एक चीज महत्वपूर्ण है कि ऐसे ग्रुप में काम करें जो एथिकल हो। हर व्यक्ति अपने करियर में आगे बढ़ना चाहता है। सेल्फ रिस्पेक्ट से ट्रीट करना बहुत जरूरी है। हमारे यहां पांच साल पहले जो सीनियर पॉजिशन पर आए हैं, मैं उन्हें पर्सनली नहीं जानता हूं। मैं उनकी फैमिली के बारे में नहीं जानता हूं लेकिन एक बॉन्डिंग है और सभी पेशनेट होकर काम करते हैं।

सवाल- ग्रोथ के बेसिक एलिमेंट क्या हैं?
जवाब- सिर्फ हार्ड वर्क।

कुमार मंगलम बिड़ला के बारे में

कुमार मंगलम बिड़ला का जन्म 14 जून 1967 को राजस्थान राज्य के एक मारवाड़ी व्यवसायी बिड़ला परिवार में हुआ था। चार्टर्ड अकाउंटेंट कुमार मंगलम बिड़ला ने लंदन बिजनेस स्कूल से एमबीए (MBA) की डिग्री हासिल की, जहां के वे एक मानद सदस्य भी हैं। बिड़ला और उनकी पत्नी, नीरजा कासलीवाल के तीन बच्चे अनन्याश्री, आर्यमन विक्रम और अद्वैतेषा हैं। उद्योगपति और आदित्य बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष कुमार मंगलम की भारतीय कंपनियों की सूची में ग्रैसिम, हिंडाल्को, अल्ट्राटेक सीमेंट, आदित्य बिरला नुवो, आइडिया सेल्युलर और आदित्य बिरला रिटेल शामिल हैं। वहीं कनाडा में आदित्य बिरला मिनिक्स के नाम से एक कंपनी का संचालन किया जाता है। वे बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स पिलानी) के कुलाधिपति भी हैं। वे विभिन्न नियामक और व्यावसायिक बोर्ड में कई महत्वपूर्ण और जिम्मेदार पदों पर रहे हैं और वर्तमान में भी हैं।

पिता के जाने के बाद ऐसे संभाला कारोबार

1995 में पिता की मृत्यु के बाद कारोबार का सारा भार कुमार मंगलम के कंधों पर आ गया। सिर्फ 28 साल की उम्र में इतने बड़े समूह की जिम्मेदारी संभालना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने व्यापार में आक्रामकता और व्यवहार में विनम्रता दिखाकर एक नया मुकाम हासिल किया। बीते 12 साल में भारत के बाहर उन्होंने 36 कंपनियों का अधिग्रहण कर आदित्य बिड़ला समूह को ग्लोबल लीडर के रूप में पहचान दी है।

Exit mobile version