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कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से भाजपा-कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा

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रीवा. अंतरराष्ट्रीय कवि डॉ. कुमार विश्वास शनिवार को अपनी कविताओं से रीवावासियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। एनसीसी ग्राउंड में आयोजित सेंट्रल एकैडमी के जुबली उत्सव में उन्होंने न केवल श्रोताओं का दिल जीता, बल्कि चुटेले अंदाज में सरकार पर तंज भी कसे।

कुमार विश्वास ने एमपी में आए चीतों व कांग्रेस के विधायकों से दोबारा बनी बीजेपी सरकार पर कहा, जख्म भर जाएंगे तुम मिलो तो सही। इशारों में बयां कि शिवराज व नरोत्तम सरकार बनने से पहले जब ङ्क्षसधिया को देखते थे तो यही गाते थे। उन्होंने अपनी कविताओं से भाजपा-कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी को याद किया। कहा, सफेद शेरों की भूमि जहां भगवान राम के पदचिह्न आज भी मौजूद हंै, उन्हें मैं प्रणाम करता हूं। फिर बोले-रीवा में सड़क की हालत कितनी सुधर गई हैं। पहले मध्य प्रदेश की सीमा प्रारंभ होते ही सड़कें खत्म हो जाती थीं।

पढ़ी सर्वमान्य कविता

कुमार विश्वास की कविताओं में लोग देर रात तक झूमते रहे। लोगों की मांग पर उन्होंने कोई दीवान कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को सिर्फ बादल समझाता…अपनी सर्वमान्य कविता पढ़ी तो काफी देर तक तालियां गूंजती रहीं और लोग भी अपना सुर मिलाते रहे।

कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी

कुमार विश्वास अपनी इस रचना-मंै अपने गीत गजलों से उसे पैगाम करता हूं, उसी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूं से समां बांध दिया। इसके बाद मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है, कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है। यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों में आंसू है, जो तू समझे तो मोती हैं, जो न समझे तो पानी है जैसी कई कविताएं पढकऱ श्रोताओं को गदगद कर दिया है।

कवि संपत सरल व हेमंत पाण्डेय ने भी दी प्रस्तुति

इस दौरान प्रख्यात कवि संपत सरल व हेमंत पाण्डेय ने भी अपनी यादगार प्रस्तुति दी। सांसद जनार्दन मिश्रा, पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, महापौर अजय मिश्रा बाबा, विधायक नागेन्द्र ङ्क्षसह, केपी त्रिपाठी, कलेक्टर मनोज पुष्प, एसपी नवनीत भसीन, डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी सहित विद्यालय के अध्यापक, छात्र-छात्राएं व नगर के लोग मौजूद रहे।

कुमार विश्वास को सुनने बाहर भी भीड़
शहर के एनसीसी ग्राउंड में आयोजित सेंट्रल स्कूल के जुबली सेलेब्रेशन में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय कवि कुमार विश्वास को सुनने और उनको देखने के लिए भारी भीड़ जमा हो गई थी। मैदान के बार लगे बैरीकेट के पास भी भारी संख्या में उनकी कविताएं सुनने के लिए शहर के लोग जुटे रहे। इस दौरान संपत सरल ने भी श्रोताओं को निरास नहीं किया और अपनी बेहतर प्रस्तुति दी।

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