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रेलवे भर्ती घोटाले में लालू यादव के करीबी भोला यादव गिरफ्तार

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पटना : रेलवे भर्ती घोटाले में 13 साल बाद पहली गिरफ्तारी भोला यादव के रूप में हुई है। 2004-2009 के बीच लालू यादव जब रेल मंत्री थे तो भोला यादव ओएसडी यानी विशेष कार्य अधिकारी) थे। कहा जा रहा है कि सीबीआई को शक है कि भोला यादव ही पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड हैं। जब लालू यादव रेल मंत्री थे तो बिहार के एक और नेता का जलवा दिल्ली के रेल मंत्रालय में कायम रहता था। वो थे लालू यादव के सहायक निजी सचिव विनोद श्रीवास्तव। फरवरी 2022 में जब लालू यादव को चारा घोटाले (डोरंडा कोषागार) में दोषी ठहराया गया तो विनोद फूट-फूटकर रोने लगे थे। विनोद श्रीवास्तव लंबे समय तक लालू यादव निजी सहायक भी रहे हैं। लालू यादव के साथ साए की तरह रहते थे। खैर, लालू यादव के बहुत सारे ‘हनुमानों’ में से फिलहाल भोला यादव को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। उन पर लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप है।

लालू यादव के सबसे बड़े राज़दार भोला यादव!
लालू यादव और उनके परिवार के जानने वाले भोला यादव को भोला बाबू कहते हैं। मीडिया में आमतौर पर उन्हें लालू का ‘हनुमान’ कहा जाता है। आरजेडी सुप्रीमो के साथ घर से एयरपोर्ट और अस्पताल से लेकर जेल के गेट तक भोला यादव व्हील चेयर पकड़े दिखते थे। पिछले दिनों जब लालू यादव पटना से रांची गए तो उनके साथ परिवार के सदस्य के तौर पर सिर्फ भोला यादव ही गए थे। बाद में आरजेडी चीफ को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लालू परिवार और 10 सर्कुलर रोड में भोला बाबू की क्या हैसियत होगी? लालू यादव के सभी सुख सुविधा का ख्याल भोला यादव रखते हैं। लालू यादव की सेवा में किए किसी भी काम को छोटा नहीं मानते, बल्कि कर्तव्य समझकर निभाते हैं। भोला यादव की बात को राबड़ी, तेजस्वी और तेज प्रताप भी नहीं काटते हैं। भोला यादव की सियासी और निजी जिंदगी की बात करें तो दरभंगा जिले के कपछाही गांव के रहनेवाले हैं। मगध विश्वविद्यालय से गणित में स्नातकोत्तर हैं और पटना के पास फतुहा के एक कॉलेज में गेस्ट लेक्चरर हैं। आरजेडी में राष्ट्रीय महासचिव की हैसियत रखनेवाले भोला बाबू दरभंगा के बहादुरपुर से विधायक थे, मगर 2020 चुनाव में हार गए।
मोतिहारी वाले श्रीवास्तवजी का जलवा भी कम नहीं था
भोला यादव से पहले लालू यादव के साथ साए की तरह विनोद श्रीवास्तव रहते थे। मोतिहारी वाले श्रीवास्तवजी की पहुंच लालू यादव की रसोई घर तक थी। दिल्ली से लेकर पटना तक विनोद श्रीवास्तव मैनेज करते थे। फाइल का पूरा गुणा-गणित मुंहजबानी याद रखते थे। बाद में यही काम भोला यादव करने लगे। जून 2021 में राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जगदानन्द सिंह ने उनको (विनोद श्रीवास्तव) वरिष्ठ नेता बताते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत किया था। विनोद श्रीवास्तव मोतिहारी लोकसभा क्षेत्र से राजद के उम्मीदवार भी रह चुके हैं। तब पार्टी की ओर से बताया गया था कि लालू प्रसाद जब रेल मंत्री थे तो वे उनके निजी सचिव थे। लालू यादव के उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ने विनोद श्रीवास्तव को शुभकामनाएं दी थी। लालू यादव और विनोद के संबंध कितना निजी है, इस बात से अंदाजा लगाए जा सकते हैं कि जब फरवरी 2022 में जब लालू यादव को चारा घोटाले (डोरंडा कोषागार) में दोषी ठहराया गया को फूट-फूटकर रांची कोर्ट में ही रोने लगे। जिस लालू यादव का जलवा उन्होंने देखा था, अब उनकी बेचारगी उनसे देखी नहीं जा रही थी। लालू यादव के हेलीकॉप्टर से लेकर कार तक में विनोद श्रीवास्तव की मौजूदगी रहती थी। दिल्ली हो या पटना अगर लालू यादव तक मेसेज पहुंचानी हो तो विनोद श्रीवास्तव काम के साबित होते थे।
लालू के समय रेलवे भर्ती घोटाले को कैसे दिया गया अंजाम?
दरअसल, जब लालू यादव रेल मंत्री बने तो (2004-2009) रेलवे में ये नियम था कि फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों की बहाली जीएम यानी महाप्रबंधक) अपने स्तर पर कर सकते थे। जिसमें पोर्टर से लेकर कई तरह की नौकरियां आती थीं। रेलवे में कुल 16 जीएम होते हैं। ऐस में आरोप है कि लालू यादव और उनकी ‘टीम’ ने इसी लूप होल्स का फायदा उठाया। पटना सहित बिहार के अलग-अलग जिलों में फोर्थ ग्रेड की नौकरी चाहनेवालों से जमीनें लिखवाई गई। उसके बदले नौकरियां दिलाई गईं। ऐसा आरोप है कि भोला यादव ने लालू यादव के ओएसडी रहते हुए सबकुछ मैनेज किया। अलग-अलग लोगों के नामों पर जमीनें लिखवाई गई। उसका हिसाब-किताब भी भोला बाबू ने ही रखा। बाद में जमीनों को लालू परिवार के नाम पर ट्रांसफर कराने की जिम्मेदारी भी भोला यादव ही अपने स्तर से देख रहे थे। कहा जाता कि रेलवे में जीएम की दस्तखत से दर्जनों लोगों की नौकरियां लालू यादव ने जमीन के बदले लगवाई, इसी की पड़ताल सीबीआई कर रही है। अब इस केस में पहली गिरफ्तारी भोला यादव की हुई है। मामले में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी और दोनों बेटियां मीसा और हेमा यादव आरोपी हैं। इसका मतलब ये हुआ कि रेलवे भर्ती घोटाले की फांस राबड़ी देवी, मीसा भारती और हेमा यादव तक पहुंच चुकी है।

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