केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को दावा किया कि केंद्र में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनेगी।उत्तराखंड के हिंसाग्रस्त हल्द्वानी शहर के बाहरी इलाकों से कर्फ्यू हटा लिया गया है लेकिन बनभूलपुरा क्षेत्र में यह लागू रहेगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने 2023-24 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) जमा पर ब्याज दर शनिवार को 8.25 प्रतिशत तय की जो पिछले तीन साल में सर्वाधिक है।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े के खिलाफ धन शोधन का मामला दर्ज किया है।
भौतिक दुनिया के समानांतर एक ऐसा संस्कार जहां ‘सच’ है सब कुछ
गणितज्ञ जिन सवालों में अपनी पूरी जिंदगी खपा देते हैं, वे एक स्वतंत्र और कालातीत दुनिया का गूगल मैप हैं। भौतिक दुनिया के समानांतर यह एक ऐसी दुनिया है, जहां कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं है, सबकुछ बस ‘सच’ है। यह भगवान की दुनिया है।
सत्तर का हो गया हूं। हैरत की बात है कि मैं अब इस उम्र में कभी-कभी भगवान के बारे में सोचता हूं। हालांकि अपनी सफाई में यह जरूर कह सकता हूं कि भगवान के ये विचार मुझे इसलिए नहीं आते कि अपने अपरिहार्य अंत की ओर बढ़ते हुए मुझे इसकी जरूरत महसूस हो रही है या किसी संत, धर्म या पवित्र पुस्तक की प्रेरणा से यह हो रहा है। भगवान के विचार पर मैं दरअसल गणित के जरिये पहुंचा हूं। गणित और भगवान? गणित से मेरा अर्थ भी ठीक वही है, जो आप समझते हैं। अल्जेब्रा, ज्योमेट्री और कैलकुलस, यानी वही गणित, जो स्कूलों में पढ़ाई जाती है।
हालांकि गणित से मेरा लगाव कोई नया नहीं है। कई साल पहले जब मैं स्कूल में था, तभी मैंने गणित की गहराइयों में जाने का फैसला ले लिया था। आखिर मैं इस विषय को कैसे भूल सकता हूं? यही तो है, जिसकी मुहब्बत ने मुझे कलाओं से दूर करते हुए काफी क्रूर बना दिया था। मेरा मानना था कि अगर मैं गणित नहीं पढ़ूंगा तो इससे मेरी सोचने एवं समस्याओं के निदान ढूंढने और दुनिया को जटिल ढंग से देखने की क्षमता सीमित हो जाएगी। मैं यह भी सोचता था कि अगर मैं इस विषय को कुछ हद तक भी समझ लेता हूं तो मैं ज्यादा स्मार्ट हो सकूंगा। आश्चर्य है कि आज 70 साल की उम्र में भी गणित से अपना परिचय मुझे कम ही लगता है।
महसूस होता है कि मैं गणित की दुनिया में एक पर्यटक हूं। लेकिन मेरा अनुभव मुझे यह भरोसा दिलाता है कि भगवान खुद को गणित के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। हालांकि इस मामले में मेरा कोई निष्कर्ष नहीं है, लेकिन तमाम गणितज्ञ गणित और भगवान के बीच की कड़ी जरूर ढूंढते रहे हैं। यह कोई आज की बात नहीं है। छठी शताब्दी ईसा पूर्व में पाइथागोरस के बाद से ही गणित में भगवान को ढूंढने के प्रयास जारी हैं। कई गणितज्ञ मानते हैं कि गणित की प्रमेयों में देवत्व की झलक होती है। मसलन, न्यूटन का मानना था कि गणित ईश्वर के दिमाग में आने वाले विचारों का एक प्रकार है।
कुछ साधारण से रहस्य हैं, जो यह समझाने में मदद करते हैं कि ऐसा क्यों हो सकता है? सबसे महत्वपूर्ण रहस्य इस सवाल में निहित है कि गणित का निर्माण किया गया या उसकी खोज की गई? कुछ गणितज्ञों का मानना है कि गणित मनुष्य द्वारा आविष्कार की गई एक प्रणाली है, जो विशिष्ट प्रकार की विचार-प्रक्रिया के प्रति मनुष्य के आकर्षण से आकार लेती है। लेकिन बहुमत का मानना है कि गणित मनुष्य की विचार प्रक्रिया से स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में है और गणितज्ञ जिन सवालों में पूरी जिंदगी लगाते हैं, वे एक स्वतंत्र और कालातीत दुनिया का गूगल मैप हैं। भौतिक दुनिया के समानांतर यह एक ऐसी दुनिया है, जहां कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं है, सबकुछ बस ‘सच’ है। इस संबंध में कनाडाई गणितज्ञ रॉबर्ट लैंगलैंड्स का मानना है कि गणित पूर्ण नहीं है और इसकी प्रकृति को देखते हुए यह कभी हो भी नहीं पाएगी। गणित दरअसल अनंत को समझने की कोशिश करती है। यह भी संभव है कि गणित खुद ही अनंत हो।
प्राचीन काल से धर्मशास्त्री मानते रहे हैं कि अनंत होना भगवान का गुण है। यह भी माना जाता रहा है कि खुद सीमित होने की वजह से मनुष्य उस अनंत ईश्वर की कल्पना नहीं कर सकता। लेकिन उनके अनुसार मनुष्य को यह क्षमता दी गई है कि वह भगवान के स्वभाव को समझ सके। हालांकि धर्मशास्त्री हमेशा से ही भगवान पर एकाधिकार को लेकर थोड़े संवेदनशील रहे हैं। 1859 में लंदन में प्रकाशित ‘लीडर्स ऑफ द रिफॉर्मेशन’में जॉन टलच ने 1529 के एक सम्मेलन में एक विवाद पर थोड़ा चिढ़ते हुए मार्टिन लूथर के एक कथन को उद्धृत किया कि ‘मुझे आपके गणित से कोई लेना-देना नहीं।
भगवान गणित से ऊपर हैं।’19वीं शताब्दी के अंत में गणितज्ञ जॉर्ज कैंटर, जो सेट थ्योरी के जन्मदाता भी हैं, ने पाया कि अनंत का विचार भी स्थिर नहीं है। अनंत का विचार अंतरिक्ष की तरह है, जो निरंतर फैल रहा है। हर अनंत में हर पल कुछ जुड़ रहा है, जो उसे बड़ा अनंत बना रहा है। जाहिर है कि अनंतताएं भी असंख्य हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़ा भी जा सकता है। लेकिन अनंत की इस यात्रा में कोई व्यक्ति उस बिंदु पर पहुंच सकता है, जिसमें सभी अनंतताएं समाहित हों। कैंटर ने उस बिंदु के बारे में एक मित्र को लिखा, ‘यह बिंदु पूर्ण है, जो मानवीय समझ से बाहर है। यह ‘एक्टस प्यूरीसिमस’ है। यही भगवान है।’
जब मैं छोटा बच्चा था, तब भगवान के बारे में इतना नहीं सोचता था, जितना महसूस करता था। खासकर जब मैं परिवार के साथ जंगल में होता था, तब मुझे हर वक्त एक साथ चलने वाली सत्ता की मौजूदगी महसूस होती थी। जो भी चीजें मैं देखता, उनके पीछे उनके सार को महसूस करता था। तब इस अहसास को मैं समझ नहीं पाता था, लेकिन अब समझता हूं। इस अनुभव का नाम ‘व्यापकता’ है, जिसके बारे में मैंने आज तक किसी के साथ बात नहीं की है। व्यापकता का यह विचार दरअसल सर्वेश्वरवाद का चचेरा भाई है, जो मानता है कि ईश्वर सबमें है।
हालांकि मेरे स्कूल में सिखाया गया था कि भगवान किसी एक विलक्षण मनुष्य में और एक पवित्र पुस्तक में वास करता है। मैं भगवान को जंगल के अपने अनुभव से जोड़ता हूं। मैं गणित का इस मायने में आभारी हूं कि इसने मेरा परिचय भगवान से कराया। गणित मेरे लिए वह अप्रत्याशित स्रोत रहा, जिससे मुझे यह महसूस करने का एक विनम्र कारण मिला कि जीवन में जितना मैं विश्वास कर सकता हूं, जिंदगी उससे कहीं ज्यादा है। मैंने कहीं पढ़ा भी है कि मनुष्य के इतिहास में गणित सबसे लंबे समय से चला आ रहा मानवीय विचार है। भगवान की तरह गणित की दुनिया भी विस्मयकारी है।
हल्द्वानी हिंसा: हर तरफ आग, धुआं और भीड़ का शोर; न ऐसा मंजर देखा और न…अफसरों ने बताई आपबीती
कई बार मुश्किल हालात में काम किया है, कार्य के दौरान विरोध, आक्रोश का सामना भी किया है, पर आठ फरवरी को बनभूलपुरा के मलिक के बगीचा से लेकर थाने तक जो हुआ है, वह कभी नहीं भुलाया जा सकता। बनभूलपुरा थाने में हर तरफ आग, धुआं और हमलावर भीड़ का शोर था, तो वहीं मलिक के बगीचा और आसपास के इलाके में पुलिसकर्मी पर पत्थर बरसाते उपद्रवी थे। इन विषम परिस्थितियों में भी पुलिस और प्रशासन ने हालात पर काबू पा लिया। जिस समय थाने पर भीड़ ने हमला बोला, वहां कुमाऊं मंडल विकास निगम के जीएम एपी वाजपेयी, अपर पुलिस अधीक्षक अभिसूचना डॉ. हरीशलाल, एसडीएम प्रमोद आदि भी थाने में थे। इन सभी की जान संकट में फंस गई थी। पढ़िये मौके पर मौजूद रहे अफसरों की आपबीती…
कुमाऊं मंडल विकास निगम के जीएम एपी वाजपेयी का कहना है कि हल्द्वानी में यह मंजर देखना पड़ेगा, कभी सोचा नहीं था। हर तरफ आग, धुआं और अंधेरा था। आग जब ग्राउंड फ्लोर की तरफ फैल गई, तो हम दूसरी मंजिल पर पहुंच गए। इसी बीच थाने के पीछे की तरफ से दीवार को तोड़कर भी उपद्रवी घुसने की कोशिश करने लगे। सभी की जान संकट में थी, इन स्थितियों के बीच सभी को हौंसला बनाए रखना था। इसके अलावा मौजूद कर्मियों को हिम्मत भी बंधानी थी। पर करीब डेढ़ घंटे तक यह स्थिति रही। इसी बीच उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत भी कराते रहे। थाने के आगे जो आग लगी थी, उसके कारण भी वे अंदर नहीं आ सके। इसी बीच पहुंची पुलिस, प्रशासन की टीम ने मोर्चा संभाला और उपद्रवियों को खदेड़कर हालात पर काबू पाया।
पत्थर शरीर पर पड़ते रहे, पर न हिम्मत हारी न धैर्य खोया
सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह ने बताया कि कार्रवाई शुरू होने के साथ ही विरोध शुरू हो गया। लोगों को समझाने की कोशिश की गई। पर पुलिस ने बल प्रयोग नहीं किया। इस बीच पथराव तेज होने लगा। कर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी, वे अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई करते रहे। लोगों को समझाने का प्रयास किया गया कि वे कानून को हाथ में ले रहे हैं, यह गलत है। पथराव के बीच बार- बार लोगों का समझाने का प्रयास किया गया।
इसी बीच कई पुलिस और निगम कर्मी घायल हो गए। कई पत्थर उन्हें आकर लगे। रास्ते में वाहनों में आग लगा दी गई थी, कार्रवाई वाले स्थल से जैसे ही टीम को लेकर निकले तभी थाने को घेरने और आगजनी की सूचना मिली। इसके बाद वहां पर पहुंची। इसके बाद पुलिस, प्रशासन ने वहां के हालात को देखते हुए सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
झाबुआ में आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करेंगे पीएम मोदी, छठा विश्व कप जीतने उतरेगी U19 टीम इंडिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को मध्य प्रदेश के झाबुआ में आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। वे इस दौरान 7,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके अलावा, भारत के युवा क्रिकेटर रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल जीतकर रिकॉर्ड छठा आईसीसी अंडर-19 वनडे विश्व कप खिताब जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे। वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा तय समय से दस दिन पहले यानी 10 मार्च को समाप्त हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को मध्य प्रदेश के झाबुआ में आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करेंगे। वे इस दौरान 7,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। झाबुआ से पीएम मोदी पूरे देश की आदिवासी बहुल लोकसभा सीटों को टारगेट करेंगे।
झाबुआ प्रदेश में आदिवासी वर्ग की राजनीति का केंद्र रहा है। यहां से पीएम मोदी आसपास के जिलों धार, रतलाम और गुजरात व राजस्थान के आदिवासी इलाकों को भी प्रभावित करेंगे। इन इलाकों में भील और भिलाला आदिवासी आबादी निवास करती है। झाबुआ के पास की तीन लोकसभा सीटें आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं। इसी तरह गुजरात की दो और राजस्थान की दो सीटें भी आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं।
दो लाख महिलाओं को आहार अनुदान का वितरण
पीएम करीब दो लाख महिला लाभार्थियों को आहार अनुदान की मासिक किस्त का वितरण करेंगे। इसके तहत प्रदेश की विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह प्रदान किए जाते हैं। पीएम टंट्या मामा भील विवि की आधारशिला रखेंगे। 170 करोड़ की लागत से विकसित होने वाला यह विवि जनजातीय बहुल जिलों के युवाओं को खास सुविधाएं प्रदान करेगा। साथ ही प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत 559 गांवों के लिए 55.9 करोड़ रुपये जारी करेंगे।
छठा विश्व कप जीतने उतरेगी टीम इंडिया
भारत के युवा क्रिकेटर रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल जीतकर रिकॉर्ड छठा आईसीसी अंडर-19 वनडे विश्व कप खिताब जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे। इसके बाद कुछ के करियर को उड़ान भरने के लिए पंख मिलेंगे जबकि कुछ गुमनामी में चले जाएंगे।
टूर्नामेंट में अजेय है भारतीय टीम
सहारन की अगुवाई वाली मौजूदा टीम शुरू में इतनी शानदार नहीं दिख रही थी क्योंकि कुछ महीने पहले वह अंडर-19 एशिया कप के फाइनल में जगह बनाने में असफल रही थी, लेकिन यहां टीम फॉर्म में आ गई है। इस टूर्नामेंट 389 बनाने वाले सहारन टीम का प्रदर्शन प्रत्येक मैच में बेहतर होता गया और उसने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। बस सेमीफाइनल ही ऐसा था जिसमें उसने मेजबान दक्षिण अफ्रीका को महज एक विकेट से हराया। भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अभी तक एक भी मैच नहीं हारी है।
सरफराज के भाई मुशीर से अच्छी पारी की आस
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट टीम में शामिल सरफराज खान के छोटे भाई मुशीर खान कप्तान उदय के बाद सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं और एक उपयोगी बाएं हाथ के स्पिनर भी हैं। उनसे फाइनल में भी बड़ी पारी की उम्मीद रहेगी। दाएं हाथ के तेज गेंदबाज राज लिंबानी और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नमन तिवारी प्रभावी रहे हैं, लेकिन अगले स्तर के लिए तैयार नहीं हैं। लेकिन रविवार को उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इस स्तर के लिए काफी होगा।
2016 और 2020 के फाइनल में हारा था भारत :
भारत की अंडर-19 टीम ने 2012 और 2018 फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया था और इस चरण के खिताबी मैच में भी वह प्रबल दावेदार होगी। भारतीय टीम हमेशा आयु वर्ग के टूर्नामेंट में ‘पावरहाउस’ रही है और इस टूर्नामेंट में नौवीं बार फाइनल में पहुंचना इसका प्रमाण है। भारत की अंडर-19 टीम ने 2016 के बाद सभी फाइनल खेले हैं जिसमें से उसने 2018 और 2022 चरण में खिताब जीते जबकि 2016 और 2020 में उसे हार मिली।
ऑस्ट्रेलिया को कम आंकना होगा गलत
चाहे सीनियर टीम हो या जूनियर ऑस्ट्रेलिया को कम आंकना गलत होगा। पिछले साल 19 नवंबर को ऑस्ट्रेलियाई सीनियर टीम ने रोहित शर्मा की अगुवाई वाली सीनियर टीम को वनडे विश्व कप के फाइनल में हराकर भारतीय का दिल तोड़ दिया था। अब कप्तान उदय सहारन की अगुवाई वाली भारतीय टीम का ऑस्ट्रेलिया की टीम को हराकर खिताब जीतना सुखद होगा।
ऑस्ट्रेलिया ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान को करीबी मुकाबले में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। ऑस्ट्रेलिया के कप्तान ह्यू वेबगेन, सलामी बल्लेबाज हैरी डिक्सन, तेज गेंदबाज टॉम स्ट्रेकर और कैलम विडलर ने इस चरण के दौरान लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है जो भारत के लिए परेशानी बन सकते हैं।
फाइनल जीतने के लिए भारत को इन गलतियों से बचना होगा
- खराब क्षेत्ररक्षण: उदय की टीम खिताबी ट्रॉफी को जीतना चाहती है तो उसे क्षेत्ररक्षण अच्छा करना होगा। खराब क्षेत्ररक्षण जीता हुआ मैच भी हरवा सकता है।
- धीमी बल्लेबाजी: पिछले साल वनडे विश्व कप के फाइनल में रोहित की टीम ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धीमी बल्लेबाजी की थी। ऐसे में टीम बड़ा स्कोर नहीं बना पाई। जूनियर टीम को भी धीमी बल्लेबाजी से बचना होगा।
- मौका नहीं दें: ऑस्ट्रेलिया को बल्लेबाजी, गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण किसी भी विभाग में वापसी का मौका नहीं देना है। अगर ऑस्ट्रेलिया को वापसी का मौका दिया तो वह भारत को ट्रॉफी ले जाने नहीं देगा।
दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-11
ऑस्ट्रेलिया: ह्यू वेबगेन (कप्तान), हैरी डिक्सन, सैम कोनस्टास, हरजस सिंह, रेयान हिक्स (विकेटकीपर), ओलिवर पीक, टॉम कैंपबेल, राफेल मैकमिलन, टॉम स्ट्रेकर, महली बियर्डमैन, कैलम विडलर।
भारत: आदर्श सिंह, अर्शिन कुलकर्णी, मुशीर खान, उदय सहारन (कप्तान), प्रियांशु मोलिया, सचिन धस, अरावेली अवनीश (विकेटकीपर), मुरुगन अभिषेक, नमन तिवारी, राज लिम्बानी, सौम्य पांडे।
टीमें :
भारत: उदय सहारन (कप्तान), अर्शिन कुलकर्णी, आदर्श सिंह, रुद्र मयूर पटेल, सचिन धास, प्रियांशु मोलिया, मुशीर खान, अरावली अवनीश राव, सौम्य पांडे, मुरुगन अभिषेक, इनेश महाजन, धनुष गौड़ा, आराध्या शुक्ला, राज लिंबानी, नमन तिवारी।
ऑस्ट्रेलिया: ह्यू वेबगेन (कप्तान), लाचलान ऐटकेन, चार्ली एंडरसन, हरकीरत बाजवा, महली बियर्डमैन, टॉम कैंपबेल, हैरी डिक्सन, रेयान हिक्स, सैम कोनस्टास, राफेल मैकमिलन, ऐडन ओकोनोर, हरजस सिंह, टॉम स्ट्रेकर, कैलम विडलर और ओली पीक।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा पर तय समय से पहले लग सकता है विराम
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा तय समय से दस दिन पहले यानी 10 मार्च को समाप्त हो सकती है। गठबंधन का बिखरता कुनबा और लोकसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर यात्रा को तय समय से पहले ही समेटने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
पार्टी की ओर से हालांकि यह तर्क दिया जा रहा है कि यात्रा को 70 किलोमीटर प्रतिदिन तय करना था, जिसमें अब सौ किलोमीटर से ज्यादा का सफर प्रतिदिन तय किया जा रहा है। इसकी वजह से यात्रा अपने तय लक्ष्यों को जल्दी पूरा कर रही है। इसके तहत उत्तर प्रदेश में पार्टी अब 11 दिन के बजाय 6 से 7 दिन में ही अपनी यात्रा को समाप्त कर लेगी।
गठबंधन फार्मूला तय करने के लिए खरगे के साथ राहुल का होना जरूरी
पार्टी का मानना है कि गठबंधन को लेकर राष्ट्रीय गठबंधन समिति की तमाम बैठकों के बाद भी अब तक गठबंधन का फार्मूला तय नहीं हुआ है। इसलिए अब गठबंधन और सीट बंटवारे को अमली जामा पहनाने के लिए कांग्रेस को मल्लिकार्जुन खरगे के साथ राहुल गांधी का होना भी जरूरी है।
PTI की राष्ट्रपति से मांग- सरकार बनाने के लिए हमें बुलाया जाए
पाकिस्तान में सरकार बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दल संघर्ष कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने मांग की है कि राष्ट्रपति आरिफ अल्वी उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें क्योंकि नेशनल असेंबली में उनके पास सबसे अधिक सीटें हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल पाया है। इसलिए सभी दल जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने के प्रयास कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के नेता बैरिस्टर गौहर खान ने दावा किया है कि पीटीआई ने नेशनल असेंबली में 170 सीटों पर चुनाव जीता है। इसलिए राष्ट्रपति अल्वी पीटीआई को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें। उन्होंने कहा कि हमारा किसी से कोई झगड़ा नहीं है। हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हम आगे बढ़ेंगे। हम संविधान और कानून के अनुसार ही सरकार बनाएंगे। हालांकि, आधिकारी नतीजों के मुताबिक पीटीआई को 102 सीटें मिली हैं।
पाक सेना प्रमुख ने गठबंधन सरकार का किया आह्वान
इधर, पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने नवाज शरीफ का समर्थन किया। शनिवार को जनरल मुनीर ने सभी राजनीतिक दलों से गठबंधन सरकार बनाने का आह्वान किया। इससे पहले शुक्रवार को पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने सबसे अधिक सीट जीतने वाली पार्टी के रूप में जीत की घोषणा की थी। नवाज शरीफ ने लाहौर स्थित पार्टी कार्यालय में कहा कि हमारे पास खुद सरकार चलाने के लिए बहुमत नहीं है। इसलिए हम अन्य पार्टियों और उम्मीदवारों को हमारे साथ काम करने के लिए आमंत्रित करते हैं। पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शरीफ की पार्टी को बहुमत मिलने की संभावना थी, क्योंकि पीएमएलएन को ही सेना का आशीर्वाद मिला है।
मैं नफरत और विभाजन की राजनीति को खत्म करना चाहता हूं
इसके अलावा, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने शनिवार को कहा कि केंद्र के साथ-साथ पंजाब और बलूचिस्तान में भी उनकी पार्टी के समर्थन के बिना कोई सरकार नहीं बन सकती है। मैं नफरत और विभाजन की राजनीति को खत्म करना चाहता हूं। राजनीतिक स्थिरता के लिए गठबंधन सरकार का गठन किया जाना चाहिए।
देशव्यापी विरोध आंदोलन करेगी पीटीआई
पाकिस्तान में चुनाव परिणामों में हुई देरी के विरोध में पीटीआई ने रविवार को देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया। पीटीआई का कहना है कि वोटों की पवित्रता के लिए वह विरोध कर रहे हैं। पीटीआई की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन का फैसला किया गया। आज दो बजे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
एक आईडिए से खड़ी कर दी 64 हजार करोड़ रुपये की कंपनी

कहते हैं सफलता उन्हीं को मिलती है जो कभी हार नहीं मानते हैं। जिन लोगों के सपनों में जान होती है और खुद पर भरोसा होता है। वह एक न एक दिन सफलता जरूर हासिल कर लेते हैं। दुनिया में सफलता हर कोई पाना चाहता है, लेकिन बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जो इसके लिए कोशिश करना नहीं छोड़ते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ऑनलाइन ऐप ड्रीम 11 (Dream11) के फाउंडर और CEO हर्ष जैन ने। आज इस ऐप के बारे में देश का बच्चा-बच्चा जानता है। इस ऐप पर फैंटेसी क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल सहित तमाम खेल को लेकर सट्टेबाजी की जाती है, लेकिन, आज इस सफलता के मुकाम पर बैठी यह कंपनी कभी पाई-पाई को मोहताज थी। ड्रीम 11 के पीछे दो दोस्तों का हाथ है। हर्ष जैन ने अपने दोस्त भावित सेठ के साथ मिलकर ड्रीम 11 की शुरुआत की थी।
150 बार हुए रिजेक्ट
आज इस सफलता के मुकाम पर बैठी यह कंपनी कभी पाई-पाई को मोहताज थी और इसे बनाने वाले हर्ष और भावित सेठ के आइडिया को एक-दो बार नहीं सौ से ज्यादा बार सिरे से खारिज किया गया। उन्होंने पूरे 150 वेंचर्स के पास जाकर अपना आइडिया सुनाया और निवेश करने की गुहार लगाई। सभी ने उनके आइडिया को रिजेक्ट कर दिया। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और न ही अपने आइडिया को बदला। आखिरकार उन्हें एक निवेशक मिला और हर्ष का आइडिया अब एक स्टार्टअप के रूप में लोगों के सामने था। हर्ष का हौसला और भरोसा रंग लाया। आज उनकी कंपनी का मार्केट वैल्यू 64 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा है।
ऐसे हुई शुरुआत
आईपीएल की शुरुआत के दौरान साल 2008 में हर्ष और भावित ने ड्रीम 11 (Dream 11) के आइडिया पर काम करना शुरू किया था। हर्ष कंपनी में डिजाइन, टेक, प्रोडक्ट और मार्केटिंग का काम देख रहे थे तो भावित ऑपरेशन का काम संभाल रहे थे। कंपनी बनने के बाद शुरुआत में फंडिंग की काफी दिक्कत रही। हर्ष ने खुद कहा था कि साल 2012 के बाद उन्होंने कंपनी को फंड दिलाने के लिए 2 साल में करीब डेढ़ सौ वेंचर कैपिटलिस्ट से संपर्क किया। लेकिन सभी ने उनके आइडिया को सिरे से नकार दिया था। तमाम मुश्किलों और असफलताओं के बाद हर्ष और भावित की कंपनी को बड़ी सफलता उस वक्त मिली, जब उन्हें साल 2020 आईपीएल की स्पांसरशिप राइट मिले। इसके बाद से कंपनी का नाम बच्चे-बच्चे के जुंबा पर चढ़ गया। भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी की स्पांसरशिप भी ड्रीम 11 के पास ही है।
हर्ष जैन कौन हैं
ड्रीम 11 के फाउंडर हर्ष जैन का जन्म 1986 में महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ था। उनके पिता आनंद जैन, Jai Corp Ltd. के चेयरमैन हैं। उनकी मां का नाम सुषमा जैन है। हर्ष की स्कूली शिक्षा मुंबई में ही हुई, उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे अमेरिका चले गए। अमेरिका में हर्ष ने पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से 2007 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की और 2014 में कोलंबिया बिज़नेस स्कूल से एमबीए की पढ़ाई पूरी की। हर्ष को बचपन से ही खेलकूद में विशेष रूचि थी, यही आगे चलकर इनकी पहचान बन गई।
नीतीश कुमार के फ्लोर टेस्ट से पहले ‘खेल’ से तो तेजस्वी यादव भी डर गए,
बिहार में विधानसभा स्पीकर के मुद्दे पर बड़ा हंगामा मचा है। स्पीकर अवध बिहारी चौधरी के खिलाफ सत्ताधारी गठबंधन एनडीए ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। 12 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में मत विभाजन होना है। एनडीए के पास बहुमत है। प्रस्ताव पारित होने में कोई दिक्कत नहीं दिखती। फिर भी हंगामा इसलिए मचा है कि मौजूदा स्पीकर आसन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। वे कई तरह के पेंच फंसा रहे हैं। अव्वल तो उन्होंने बहुमत वाले एनडीए के प्रस्ताव के बावजूद इस्तीफा नहीं दिया। दूसरे मत विभाजन का सामना करने को ताल ठोक रहे हैं। तीसरा कि वे इस बात पर अड़े हैं कि मत विभाजन के दौरान आसन पर वही बैठेंगे। विधानसभा कार्य संचालन नियमावली में इस तरह का प्रावधान ही नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि वे आरजेडी के विधायक हैं। इसी नाते पिछली महागठबंधन सरकार ने उन्हें सर्वसम्मति से स्पीकर चुना था। अब एनडीए की सरकार है। जिस तरह वे अपनी पार्टी आरजेडी के चीफ लालू प्रसाद यादव से मिलते रहे हैं, उससे स्पीकर के रूप में उनकी निष्पक्षता भी संदिग्ध हो गई है। वैसे स्पीकर किसी भी दल का हो, उसकी नजर में सदन के अंदर सभी दल समान होते हैं। अवध बिहारी चौधरी के अड़े रहने और उनकी पार्टी आरजेडी के खेला होने के दावे से अब यह बात साफ है कि स्पीकर दलीय लड़ाई का किरदार बन गए हैं।
तेजस्वी यादव को सता रहा खुद ही ‘खेला’ का डर
इस प्रसंग में दिलचस्प बात यह है कि सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक की पार्टियां अपने-अपने विधायकों की दलीय निष्ठा पर संदेह करने लगी हैं। कांग्रेस ने अपने विधायकों को टूट के भय से हैदराबाद में छिपा दिया है तो भाजपा प्रशिक्षण के बहाने अपने विधायकों को दो दिन पहले ही बोधगया ले गई। जेडीयू अपने विधायकों पर चौकस नजर रख रहा है। यह सब इसलिए कि आरजेडी ने खेल करने की बात कही है। उसके संभावित खेल का पहला चरण सत्ताधारी खेमे के विधायकों को तोड़ना है। आरजेडी के नेता कहते हैं कि जेडीयू के 17 विधायक उसके साथ हैं। बीजेपी के भी कुछ विधायक साथ देने को तैयार हैं। महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस को अपने विधायकों के टूटने का खतरा है। खतरा स्वाभाविक है। पहले भी कांग्रेस टूटती रही है। उधर खुद राजद ने अपने विधायकों को तेजस्वी आवास में ही रोक लिया है। अब ये विधायक कल यानी 12 फरवरी को सीधे सदन में ही पहुंचेंगे। एक तरफ से ‘खेला’ का दावा करने वाले तेजस्वी यादव को अब खुद ही ‘खेल’ का डर सता रहा है।
संचालन नियमावली की बातें भी जान लें
विधायी मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय बताते हैं सत्ताधारी खेमे द्वारा विश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के बाद नैतिक रूप से स्पीकर को इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वे इस्तीफा नहीं दे रहे तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यपाल का अभिभाषण होंगा। तब तक अवध बिहारी चौधरी आसन पर बैठ सकते हैं। अभिभाषण के बाद अविश्वास प्रस्ताव सदन में पेश किया जाएगा। कम से कम 38 विधायक प्रस्ताव का समर्थन कर दें तो अविश्वास प्रस्ताव स्वीकृत हो जाएगा। उसके बाद अवध बिहारी चौधरी को आसन छोड़ देना पड़ेगा। तब आसन संभालेंगे डेप्युटी स्पीकर देवेश चंद्र ठाकुर। ठाकुर जेडीयू कोटे के हैं। उनके ही संचालन में मत विभाजन कराया जाएगा। यानी अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराने का दायित्व जेडीयू विधायक के हाथ में होगा। इसके बावजूद आरजेडी अपनी रणनीति में कामयाब हो जाता है और अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो पाता तो सरकार पर खतरा उत्पन्न हो जाएगा। उसे विश्वास मत हासिल करना है। पर, यह खेल आसान नहीं होगा। खेल तब आसन संभाल रहे देवेश चंद्र ठाकुर के जरिए एनडीए करा सकता है। अरुण पांडेय की नजर में सरकार पर खतरे की आशंका दूर-दूर तक नजर नहीं आती।
विधायकों के इधर-उधर होने का भय क्यों
दो-तीन महीने के अंदर ही लोकसभा का चुनाव होना है। जेडीयू और बीजेपी के कई विधायक लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते हैं। एनडीए में सीटों तकरीबन तय हैं। अब और स्कोप नहीं। दूसरी ओर आरजेडी के पास पर्याप्त सीटें हैं और वह किसी को टिकट का लालच दे सकता है। महागठबंधन में बांटने के लिए लोकसभा की 40 सीटें हैं। अभी लोकसभा में कांग्रेस का सिर्फ एक सांसद है। नीतीश के अलग हो जाने के बाद बांटने के लिए महागठबंधन को लीड करने वाले आरजेडी के पास 39 सीटें हैं। कई विधायकों की इच्छा लोकसभा चुनाव लड़ने की है। ऐसे में दो-चार तो इधर-उधर हो ही सकते हैं। तेजस्वी यादव अगर ऐलानिया खेला करने की बात कहते हैं तो जेडीयू के नेता भी यही कह रहे। किसके किस खेल खेल की तैयारी कैसी है, यह तो 12 फरवरी को ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन नीतीश कुमार के सामने शायद ही कोई विकट स्थिति पैदा होगी, यह तो पक्का है।
नीतीश कुमार के पास क्या-क्या हैं रास्ते
आरजेडी अगर नीतीश कुमार की सरकार गिराना चाहे भी तो ऐसा हो पाना संभव नहीं है। जानकार बताते हैं कि नीतीश कुमार की सरकार अगर स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर नाकाम हो जाती है तो उनके हथ में बड़ा हथियार विधानसभा भंग करने का है। वे विश्वासमत हासिल करने के बजाय तुरंत विधानसभा भंग कर सकते हैं। तब लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव भी हो सकते हैं। नीतीश पहले भी इसका संकेत देते रहे हैं। राज्यपाल की भी इस मामले में नजर जरूर रहेगी। संवैधानिक स्थिति उत्पन्न होने पर राज्य में गवर्नर रूल हो जाएगा। यह स्थिति भी एनडीए के लिए अनुकूल ही साबित होगी।
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लोकसभा चुनाव से पहले लागू होगा CAA, अमित शाह की दो टूक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का कहना है कि लोकसभा चुनाव पहले नागरिकता संशोधन कानून को लागू कर दिया जाएगा। एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि हमारे देश में अल्पसंख्यकों और विशेषकर हमारे मुस्लिम समुदाय को भड़काया जा रहा है। सीएए किसी की नागरिकता नहीं छीन सकता क्योंकि कानून में इसका कोई प्रावधान नहीं है। सीएए बांग्लादेश और पाकिस्तान में प्रताड़ित शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने वाला एक अधिनियम है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस पर सीएए लागू करने के अपने वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून कांग्रेस सरकार का वादा था। शाह ने कहा कि जब देश का विभाजन हुआ और उन देशों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ, तो कांग्रेस ने शरणार्थियों को आश्वासन दिया था कि भारत में उनका स्वागत है और उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। यह पहली बार है जब केंद्र सरकार के मंत्री की तरफ से नागरिकता संशोधन कानून को लेकर साफ तौर पर ये बात कही है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने दावा किया था कि नागरिकता संशोधन कानून एक सप्ताह के भीतर देश में लागू कर दिया जाएगा।
अयोध्या यात्रा को लेकर क्या बोले श्रीलंकाई सांसद नमल राजपक्षे
अपनी राम मंदिर यात्रा पर, श्रीलंकाई सांसद नमल राजपक्षे ने कहा, “हमें यहां आकर खुशी हुई…खासकर एक श्रीलंकाई होने के नाते, जो रामायण से जुड़ा हुआ है…यहां आना मेरे और मेरी पत्नी के लिए बहुत सम्मान की बात है और हम यहां आकर धन्य महसूस कर रहे हैं।”