अयोध्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने कहा है कि 23 जनवरी की सुबह से सभी के लिए राम मंदिर खुला है, मतलब जो भी आएंगे वे भगवान राम के दर्शन कर सकते हैं। उधर दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में शीतलहर और कोहरे का प्रकोप जारी है। कोहरे की वजह से कई ट्रेनें प्रभावित हैं। वहीं दिल्ली-नोएडा में एक बार फिर से प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। प्रदूषण की वजह से ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू कर दी गई हैं।
2024 में भी संभावनाएं बेहतर नहीं, ताइवान के चुनाव परिणामों के बाद बहुत कुछ दांव पर
जहां तक वैश्विक दृष्टिकोण का सवाल है, यदि 2023 एक मुश्किल वर्ष था, तो 2024 में भी संभावनाएं बेहतर नहीं दिख रही हैं। जैसा कि हम साफ देख सकते हैं, ऐसा लगता है कि दुनिया कम सुरक्षित होगी, क्योंकि तनाव के कई और कारण सामने आने वाले हैं। भू-रणनीतिक नजरिये से उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आती। यूक्रेन युद्ध में फिलहाल गतिरोध दिखाई दे रहा है, लेकिन यह ‘महत्वपूर्ण मोड़’ पर प्रतीत होता है। दो वर्षों के संघर्ष के बाद रूस और पश्चिम, दोनों थके हुए दिखाई देते हैं, जिससे इसके खत्म होने के कुछ संकेत दिखाई देते हैं। रणनीतिकारों को चिंता है कि एक या दूसरा पक्ष मामले को बढ़ाने का फैसला कर सकता है और युद्ध को अपने पक्ष में निपटाने के लिए और भी अधिक खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है, जैसे अंतिम हथियार के रूप में परमाणु हथियारों का। इस बीच यूक्रेन के नेता लगातार भड़काऊ बयान दे रहे हैं, जिससे संघर्ष की आग और भड़क रही है।
इस्राइल-हमास संघर्ष एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो रहा है, जिसमें परोक्ष रूप से एक तरफ इस्राइल, अमेरिका और पश्चिम है, तो दूसरी तरफ पूरा अरब जगत है। स्थिति बेहद विस्फोटक होती जा रही है, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है कि कोई भी पक्ष विवेकपूर्ण आवाजों को सुन रहा है या समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है।
तनी ही खतरनाक स्थिति पश्चिम एशिया में है। इस्राइल-हमास संघर्ष एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो रहा है, जिसमें परोक्ष रूप से एक तरफ इस्राइल, अमेरिका और पश्चिम है, तो दूसरी तरफ पूरा अरब जगत है। स्थिति बेहद विस्फोटक होती जा रही है, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं है कि कोई भी पक्ष विवेकपूर्ण आवाजों को सुन रहा है या समाधान तलाशने की कोशिश कर रहा है। ज्यादा से ज्यादा देश खुलेआम इस्राइल पर नरसंहार का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इस्राइल के मौजूदा नेता पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है। भारत जैसे देश, जिन्हें आम तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभानी चाहिए, खुद को हाशिये पर पाते हैं।
उपरोक्त दोनों क्षेत्रों के मुकाबले हिंद-प्रशांत क्षेत्र ज्यादा शांत लग सकता है, लेकिन ताइवान का मुद्दा जिस तरह बढ़ रहा है, उसमें इसके तीसरे विश्वयुद्ध में बदलने की बड़ी आशंका है। अब तक हालांकि चीन ने संयम दिखाया था, लेकिन ताइवान में कट्टर चीन विरोधी के चुनाव जीतने के बाद चीन न सिर्फ ज्यादा आक्रामक हुआ है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए और भी आक्रामक हो सकता है कि ताइवान उसकी नाक के नीचे एक शत्रुतापूर्ण क्षेत्र न बन जाए। यह संघर्ष इतना बड़ा और जटिल है, जो विभिन्न देशों को चीन समर्थक या चीन विरोधी बनने के लिए मजबूर कर रहा है।
हालांकि एशिया के अधिकांश देश इस संघर्ष में नहीं पड़ना चाहेंगे। भारत भले ही चीन समर्थक या चीन-विरोधी रुख न अपनाना चाहे, लेकिन इस मामले में उसकी स्थिति बेहद असहज हो सकती है। लेकिन चीन को लगता है कि क्वाड का सदस्य होने, और चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद में शामिल होने के कारण भारत प्रबल चीन-विरोधी और अमेरिका समर्थक है। यह स्थिति पहले से ही भारत को अधिकांश अन्य एशियाई देशों, खासकर दक्षिण पूर्व व पूर्वी एशिया के देशों के साथ मुश्किल में डाल रही है, जिससे भारत निश्चित रूप से बचना चाहेगा।
ऐसे में जब अधिकांश देशों के लिए वैश्विक दृष्टिकोण उतना अच्छा नहीं दिखता है, तब भारत का भी बहुत कुछ दांव पर है, क्योंकि तटस्थता और गुटनिरपेक्षता की उसकी नीति सवालों के घेरे में है। कई देशों द्वारा गुटनिरपेक्षता को एक विफल सिद्धांत के रूप में देखा जाने लगा है, जो हाल के वर्षों में तेज आर्थिक प्रगति करने वाले भारत के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में, विदेशी संबंधों के मामले में 2024 भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
चीन भी इसी तरह की दुविधा में हो सकता है, क्योंकि उसकी सैन्य शक्ति बरकरार रहने के बावजूद चीनी अर्थव्यवस्था जिस कठिन दौर से गुजर रही है, वह एशियाई क्षेत्र में भी अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन को चुनौती देने की उसकी क्षमता को सीमित कर देती है। भारत के नजरिये से एक खतरा यह है कि ऐसी स्थिति में चीन भारत-चीन सीमा पर विवाद को फिर से बढ़ाने जैसी ध्यान भटकाने वाली रणनीति का सहारा ले सकता है, ताकि यह प्रदर्शित कर सके कि वह अब भी अपनी ताकत दिखा सकता है।
फिर भी भारत के लिए वर्ष 2024 में कुछ हिस्सों के लिए अच्छा हो सकता है। इस साल के अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी के लिए अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं, लेकिन चुनाव के बाद का परिदृश्य ज्यादा संतोषजनक नहीं हो सकता है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के बीच दूरियां न केवल बढ़ रही हैं, बल्कि तीव्र आंतरिक कलह और अशांति की आशंकाएं भी पैदा हो रही हैं। इसके अलावा, हालांकि आतंकी हमलों जैसा बड़े पैमाने पर हिंसा का कोई खतरा नहीं दिखता है, लेकिन मणिपुर जैसे परिधीय इलाके अशांत बने हुए हैं। इससे पहले की इस धारणा की दोबारा पुनरावृत्ति हो सकती है कि दिल्ली और देश के सीमावर्ती इलाकों के बीच दूरी बनी हुई है और शायद अधिक व्यापक हो सकती है।
इसलिए स्थिति पर सावधानी से नजर रखनी होगी, क्योंकि माहौल अत्यधिक तनावपूर्ण है। सतही शांति मौजूद भावनाओं की तीव्रता को छिपा देती है। इसके अलावा भी कुछ पहलू हैं, जिन पर सावधानी पूर्वक विचार करने की जरूरत है। जैसे, इस तर्क के साथ कि अनुच्छेद 370 एक संक्रमणकालीन प्रावधान था, लिहाजा उक्त अनुच्छेद को निरस्त करने की राष्ट्रपति की शक्ति को बरकरार रखने वाले सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले से उत्पन्न स्थिति को कैसे नियंत्रित किया जाता है, यह देखना होगा, जिससे कि इसे देशव्यापी आंदोलन का एक आधार बनने से रोका जा सके।
इस तथ्य पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि सामाजिक समूहों को विभाजित करने के लिए सोशल इंजीनियरिंग और सामाजिक विखंडन का किस हद तक उपयोग किया जा रहा है; लेकिन आम चिंता के प्रमुख मुद्दों पर बहुत कम बहस हो रही है या कोई बहस नहीं हो रही। इसके अलावा, यह भी आशंका है कि इस बार के चुनाव में कुछ समूहों की ताकत और गतिशीलता बढ़ाकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) चुनाव परिणामों को निर्धारित करने में एक बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अंतरिम बजट से उम्मीदें,छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग को मिलेगी राहत

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा एक फरवरी को पेश किए जाने वाले अंतरिम बजट को फिलहाल अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिस साल लोकसभा चुनाव होते हैं, उस वर्ष दो बजट आते हैं, अंतरिम बजट और पूर्ण बजट। सामान्यतया अंतरिम बजट में नई सरकार बनने तक की व्यय जरूरतें पूरी करने का उद्देश्य होता है।वेतनभोगी वर्ग के लाखों छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग की शिकायत है कि चालू वित्त वर्ष के बजट में उन्हें टैक्स संबंधी राहत नहीं मिली। ऐसे में, अब महंगाई वृद्धि के कारण उन्हें कुछ आयकर राहत की अपेक्षा है। राहत देने के लिए अनुकूल आधार भी हैं।
वित्तमंत्री ने कहा है कि अंतरिम बजट लेखानुदान होगा। पूर्ण बजट के आगामी जुलाई में आने की संभावना है। अंतरिम बजट में लोकलुभावन योजनाओं को शामिल नहीं किया जाएगा। पर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर वित्तमंत्री कुछ जरूरी राहत दे सकती हैं। वर्ष 2019 के अंतरिम बजट में भी किसान सम्मान निधि व आयकर राहत देने के लिए जरूरी प्रावधान किए गए थे। चूंकि विगत दिसंबर में राज्यों के उत्साहजनक चुनावी नतीजों में कल्याणकारी योजनाओं की भूमिका थी, ऐसे में, वित्तमंत्री आमजन के हितार्थ कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक व आर्थिक कल्याण की योजनाओं के साथ छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग को राहत देने के लिए कुछ जरूरी प्रावधान कर सकती हैं।
वेतनभोगी वर्ग के लाखों छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग की शिकायत है कि चालू वित्त वर्ष के बजट में उन्हें टैक्स संबंधी राहत नहीं मिली। ऐसे में, अब महंगाई वृद्धि के कारण उन्हें कुछ आयकर राहत की अपेक्षा है। राहत देने के लिए अनुकूल आधार भी हैं। हाल ही में एसबीआई की रिसर्च विंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2014 से 2022 के दौरान रिटर्न भरने वाले आयकरदाताओं की संख्या और आयकर प्राप्ति में भारी वृद्धि हुई है। विगत 31 दिसंबर तक आयकर रिटर्न रिकॉर्ड 8.18 करोड़ का स्तर पार कर चुका था। पिछले आठ साल में आयकर रिटर्न भरने वाले दोगुने हुए हैं और आय की असमानता में भी कमी आई है। वित्त वर्ष 2014 से 2022 के दौरान व्यक्तिगत आय असमानता 0.472 प्रतिशत से घटकर 0.402 फीसदी रह गई। इस दौरान 3.5 लाख रुपये के कम आय वाले समूह से 36.3 फीसदी लोग उच्च आय वाले समूह में शामिल हुए। पिछले एक दशक से आयकर कानून में सुधार से आयकरदाताओं को सुविधा तो मिली ही, उनकी संख्या बढ़ाने में भी मदद मिली। इन सुधारों में करदाताओं के लिए पहचान रहित अपील व्यवस्था, करदाता चार्टर और पहचान रहित समीक्षा (फेसलेस असेसमेंट) जैसे बड़े आयकर सुधार प्रमुख हैं। ऐसे ही नॉन फाइलर्स, मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमए) के जरिये ऐसे लोगों की पहचान की जाती है, जिन्होंने हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन किया, पर आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया।
आयकर विभाग ने आय व लेन-देन के आधार पर प्रोजेक्ट इनसाइट भी लॉन्च किया है, जिसका लक्ष्य स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देना, गैर-अनुपालन को रोकना और लोगों को कर देने के लिए प्रेरित करना है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए देश की वित्तीय सेहत अच्छी है। आयकर व जीएसटी का रिकॉर्ड स्तर पर संग्रहण हुआ है। राजकोषीय घाटे को बजट लक्ष्य के मुताबिक जीडीपी के 5.9 तक नियंत्रित रखा गया है।
वेतनभोगी वर्ग द्वारा अंतरिम बजट में राहत की अपेक्षा इसलिए भी न्यायसंगत है, क्योंकि वे ईमानदारीपूर्वक पेशेवरों व कारोबारी करदाताओं के वर्ग से ज्यादा आयकर चुकाते हैं। असंगठित या अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोग या तो आयकर न देने का प्रयास करते हैं या बहुत कम आयकर देते हैं। वर्ष 2022-23 में सिर्फ 2.24 करोड़ लोगों ने आयकर दिया। यानी कुल आबादी के 1.60 फीसदी लोग ही आयकरदाता हैं। शून्य आयकर देयता वाले आईटी रिटर्न की संख्या भी बढ़कर 2022-23 में 5.16 करोड़ हो गई। इनमें अधिकांश रिटर्न वे हैं, जो उद्योग-कारोबार व पेशेवर आयकरदाताओं से संबंधित हैं।
ऐसे में, आयकर न देने वाले और कम कर देने वाले लोगों की आमदनी का सही मूल्यांकन कर और उन्हें चिह्नित कर अपेक्षित आयकर चुकाने के लिए बाध्य किए जाने संबंधी कर सुधार भी अंतरिम बजट में अपेक्षित हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि वित्तमंत्री अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए छोटे आयकरदाताओं व मध्यवर्ग को राहत देंगी। इससे इस वर्ग की क्रयशक्ति में वृद्धि नई मांग का निर्माण करेगी और अर्थव्यवस्था गतिशील होगी।
देश में हर साल 36 फीसदी बढ़ रहे हैं स्टार्टअप, 47% ऐसे जहां कम से कम एक महिला निदेशक
यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या में भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है। भारत में यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या इस समय 100 से ज्यादा है। साथ ही इनमें वृद्धि हो रही है। जब भी किसी स्टार्टअप का वैल्यूएशन एक अरब डॉलर से ज्यादा हो जाता है तो उसे यूनिकॉर्न स्टार्टअप कहा जाता है।
स्टार्टअप के लिए भारत दुनियाभर में तीसरा सबसे आर्कषक देश है। शानदार स्टार्टअप इकोसिस्टम के चलते भारत में हर साल 36 फीसदी की दर से स्टार्टअप बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र सबसे आगे है। 2023 में 36 हजार से ज्यादा स्टार्टअप को मान्यता दी गई।
उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुसार, 31 अक्तूबर 2023 तक देश में 1,14,902 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं। 47 फीसदी स्टार्टअप ऐसे हैं, जहां कम से कम एक महिला निदेशक जरूर हैं। नवाचार को बढ़ावा देने और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 16 जनवरी 2016 को स्टार्टअप इंडिया पहल शुरुआत की गई थी। भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले 6 वर्षों में और मजबूत हुआ है। भारत वैज्ञानिक प्रकाशनों (साइंटिफिक पब्लिकेशन) की गुणवत्ता में शीर्ष पर, नवाचार गुणवत्ता में दूसरे स्थान और यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या में तीसरे स्थान पर है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि से जुड़े स्टार्टअप भी अच्छा कर रहे हैं। स्टार्टअप्स इंडिया सीड फंडिंग स्कीम (एसआईएसएफएस) के तहत भारत सरकार ने नए स्टार्टअप को आर्थिक प्रोत्साहन देने के लिए 2021-22 से अगले 4 वर्षों के लिए 945 करोड़ मंजूर किए हैं।
2025 तक यूनिकॉर्न की संख्या होगी 150 से ज्यादा
यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या में भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है। भारत में यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या इस समय 100 से ज्यादा है। साथ ही इनमें वृद्धि हो रही है। जब भी किसी स्टार्टअप का वैल्यूएशन एक अरब डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) से ज्यादा हो जाता है तो उसे यूनिकॉर्न स्टार्टअप कहा जाता है। उम्मीद जताई गई है कि 2025 तक भारत में यूनिकॉर्न स्टार्टअप की संख्या 150 से ज्यादा होगी।
भारतीय स्टार्टअप की कुल पूंजी 150 अरब डॉलर
2030 तक भारतीय स्टार्टअप्स की कुल पूंजी 300 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। वतर्मान में यह करीब 150 अरब डॉलर है।
झटकों के बाद भी भारत की बुनियाद मजबूत, 7.3% रह सकती है आर्थिक वृद्धि दर
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की सदस्य आशिमा गोयल ने कहा कि 2020 के बाद से गंभीर बाहरी झटकों का सामना करने के बावजूद भारत की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। आर्थिक विविधता, पर्याप्त भंडार और व्यवहार्य सुधारों ने नीतियों को महंगाई से निपटने में सक्षम बनाया है। गोयल ने कहा, इस साल महंगाई आरबीआई के चार फीसदी के लक्ष्य पर पहुंच सकती है। 2020 के बाद से गंभीर बाहरी झटके (रूस-यूक्रेन युद्ध, इस्राइल-हमास युद्ध, तेल की कीमतें, हूती हमले) देखने को मिले हैं।
गोयल ने कहा, इस साल महंगाई आरबीआई के चार फीसदी के लक्ष्य पर पहुंच सकती है। 2020 के बाद से गंभीर बाहरी झटके (रूस-यूक्रेन युद्ध, इस्राइल-हमास युद्ध, तेल की कीमतें, हूती हमले) देखने को मिले हैं। इनके बावजूद इस दौरान भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत हुई है। इन कारकों के कारण रुपया भी स्थिर रहा है। जैसे-जैसे अधिक से अधिक कंपनियां और उपभोक्ता महंगाई लक्ष्य को आत्मसात कर रहे हैं, मुझे लगता है कि 2024 में महंगाई चार फीसदी के करीब पहुंच जाएगी।
बौखलाया ड्रैगन छोटे देशों से एक चीन नीति का करवा रहा समर्थन, ताइवान पर दावा मजबूत करने का है इरादा
ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव में लोकतंत्र समर्थक दल की जीत के बाद चीन बौखला गया है। उसने ताइवान पर अपने दावे को मजबूत करने के लिए छोटे दलों पर दबाव बनाकर एक चीन सिद्धांत पर समर्थन हासिल करना शुरू कर दिया है।ताइवान के उप विदेश मंत्री तेइन चुंग-क्वांग ने भी नाउरू के साथ संबंध तोड़ने की बात कही है। सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि वह ताइवान के साथ संबंध तोड़ रही है और चीन के साथ राजनयिक संबंध फिर से शुरू करने का विचार कर रही है।
हाल के दिनों में नेपाल, मालदीव, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाखस्तान, इंडोनेशिया, ईरान, वियतनाम व ताजीकिस्तान समेत कई देश एक चीन सिद्धांत के समर्थन का एलान कर चुके हैं। इस कड़ी में सोमवार को प्रशांत महासागर के द्वीपीय राष्ट्र नाउरू ने ताइवान से राजनयिक संबंध समाप्त कर चीन के साथ फिर से शुरू करने का एलान किया है।
ताइवान के उप विदेश मंत्री तेइन चुंग-क्वांग ने भी नाउरू के साथ संबंध तोड़ने की बात कही है। सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि वह ताइवान के साथ संबंध तोड़ रही है और चीन के साथ राजनयिक संबंध फिर से शुरू करने का विचार कर रही है।
घोषणा से नाउरू के राजदूत अचंभित
इस घोषणा ने ताइवान में नाउरू के राजदूत जार्डन केफास को अचंभित कर दिया है। उन्होंने कहा, मुझे कुछ भी नहीं कहना है। मेरी सरकार ने इसकी घोषणा की है। मुझसे कहा गया है कि सामान पैक करो, निकलो। उधर, चीन ने नाउरू के फैसले का स्वागत किया है।
केवल 12 देशों की मान्यता
वही, नाउरू के इस कदम के बाद ताइवान के पास ग्वाटेमाला, पराग्वे, इस्वातिनी, पलाऊ और मार्शल द्वीप समेत केवल 12 देशों की मान्यता रह जाएगी।
मुट्ठी भर देशों पर छींटाकशी जारी रखेगा चीन
चीन हमेशा दावा करता है कि ताइवान उसका है। इसी को लेकर विवाद जारी है। चुनाव से पहले ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों ने कहा था कि चीन उन मुट्ठी भर देशों पर छींटाकशी जारी रख सकता है, जिनके ताइपे के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध हैं। बता दें, ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के लाई चिंग-ते ने शनिवार को राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया और वह 20 मई को पदभार ग्रहण करेंगे। चुनाव से पहले चीन ने लाई को खतरनाक अलगाववादी कहा था।
पिछले साल होंडुरास ने छोड़ा था ताइवान का साथ
इससे पहले, पिछले साल मार्च में होंडुरास ने ताइवान के साथ संबंध समाप्त करने के बाद चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए थे। होंडुरास के साथ संबंधों को लेकर यह घोषणा ऐसे समय में की गई थी।होंडुरास ने कहा था, ‘ताइवान चीनी क्षेत्र का एक अविभाज्य हिस्सा है और होंडुरास सरकार ने राजनयिक संबंधों को समाप्त करने के बारे में ताइवान को सूचित किया है। उसने ताइवान के साथ कोई आधिकारिक संबंध या संपर्क स्थापित नहीं करने का संकल्प लिया।’ ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वु ने बताया था कि ताइवान ने ‘अपनी संप्रभुता एवं गरिमा की रक्षा’ के लिए होंडुरास के साथ अपने संबंधों को समाप्त कर लिया है। दोनों पक्षों के बीच संबंध 80 वर्ष से अधिक समय तक रहे।
मालदीव के बहाने हिंद-प्रशांत में दबदबा चाहता है चीन, रणनीतिक रूप से अहम है भारत का दक्षिणी छोर
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के चीन प्रेम ने उन्हें अपने ही देश के हितों का ‘भस्मासुर’ बना दिया है। भारत व मालदीव के बीच हमेशा से मधुर संबंध रहे हैं, लेकिन चीन मालदीव को झूठे सपने दिखाकर हिंद-प्रशांत में अपनी आक्रामकता व दबदबे को बढ़ाना चाहता है।भारत के दक्षिणी छोर पर स्थित द्विपीय देश मालदीव रणनीतिक रूप से काफी अहम है। मालदीव हिंद महासागर के व्यस्ततम समुद्री मार्ग के किनारे पर स्थित है, जिसके जरिये चीन 80 प्रतिशत तेल का आयात करता है।
अब बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में मालदीव को शामिल करके चीन पाकिस्तान की तरह उसे कर्ज के जाल में फंसाना चाहता है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, मालदीव के पास चीन का 1.37 अरब डॉलर का कर्ज है, जो उसके कुल कर्ज का 20 प्रतिशत है।
मालदीव की संप्रभुता का चीन करता है पूरा समर्थन : मुइज्जू
चीन यात्रा की खुमारी में डूबे मुइज्जू ने बीजिंग के साथ अपने देश के रणनीतक संबंधों की तारीफ करते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन, मालदीव की संप्रभुता का पूरा समर्थन करता है। चीन ने 1972 में राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद से मालदीव के विकास में सहायता प्रदान की है। चीन की बीआरआई द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले गई है।
चावल, सब्जी व दवा तक उपलब्ध कराता है भारत
मालदीव के लोगों के लिए भारत किस प्रकार मददगार है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां के लोग चावल, सब्जी व दवा से लेकर चिकित्सा व मानवीय मदद के लिए नई दिल्ली पर निर्भर हैं। यहां तक कि वर्ष 1998 में भारत ने तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल गयूम का तख्तापलट करने के प्रयास को विफल करने के लिए सेना भी भेजी थी। हालांकि, इसके तुरंत बाद सैनिकों को वापस बुला लिया गया था।
चीन के इशारे पर फैलाई गई भारत विरोधी हवा
भारतीय मदद के महत्व से शायद ही कोई मालदीववासी मुंह मोड़े, लेकिन हाल के वर्षों में मालदीव में भारत विरोधी हवा फैलाई गई। चीन की शह पर दुष्प्रचार किया गया कि भारत मालदीव की घरेलू राजनीति में दखल देता है। मुइज्जू ने तो राष्ट्रपति चुनाव भी इसी दुष्प्रचार के दम पर जीता। उन्होंने चुनाव के दौरान मालदीव की संप्रभुता को मुद्दा बनाते हुए भारतीय सेना को वापस भेजने का वादा किया था। बता दें कि 70 भारतीय सैनिकों की वापसी के लिए उन्होंने 15 मार्च की अंतिम तिथि तय कर दी है।
करण-आयुष्मान संभालेंगे फिल्मफेयर अवॉर्ड के मेजबानी की कमान
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों और तकनीशियनों को सम्मानित करने के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार वापस आ गए हैं। इस साल, गुजरात टूरिज्म के साथ 69वें हुंडई फिल्मफेयर अवार्ड्स 2024 का आयोजन गुजरात के गांधीनगर में किया जाएगा, जिसमें सितारों का जमावड़ा होगा। इस रोमांचक शाम की शुरुआत में, फिल्मफेयर ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें करण जौहर, वरुण धवन और जान्हवी कपूर उपस्थित थे।
करण जौहर ने मजाक करते हुए शुरुआत की, “यह 69वां फिल्मफेयर पुरस्कार है। यह वरुण का पसंदीदा होगा क्योंकि यह 69वां संस्करण है।” उन्होंने आगे कहा, “अगले साल, यह 70वां होगा जो मेरा पसंदीदा होगा क्योंकि 7 मेरा भाग्यशाली नंबर है। इसलिए, मैं बहुत उस्ताहित हूं कि मैं इस बिल्कुल शानदार क्षण की मेजबानी करूंगा, गुजरात जाऊंगा और संस्कृति, परंपरा और अब सशक्तिकरण और आर्थिक विकास की भूमि पर जश्न मनाऊंगा। यह इसे सर्वश्रेष्ठ स्थान बनाता है क्योंकि सिनेमा दो चीजें हैं – हमारी संस्कृति को सेल्युलाइड पर प्रदर्शित करना और सिनेमा हॉल में भारी आर्थिक विकास और यही गुजरात का प्रतीक है।
वरुण धवन ने अपनी पहली फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर रिलीज होने के कुछ महीनों बाद 2013 में पहली बार प्रदर्शन करने के बारे में बात करना शुरू किया। करण जौहर द्वारा निर्देशित, इस फिल्म से आलिया भट्ट और सिद्धार्थ मल्होत्रा के अभिनय करियर की भी शुरुआत की। दिलचस्प बात यह है कि उस साल विक्की डोनर के लिए आयुष्मान खुराना ने पुरस्कार जीता था। इस पर करण ने चुटकी लेते हुए कहा, “उस साल वरुण, सिड और आलिया ने डेब्यू किया था और उनमें से किसी ने भी पहला पुरस्कार नहीं जीता।” इस पर वरुण ने कहा, “आयुष्मान जीत गए और वह इसके हकदार थे।”
इसके बाद करण जौहर ने फिल्मफेयर के साथ अपने लंबे जुड़ाव के बारे में बात की, “मैंने फिल्मफेयर अवॉर्ड्स की वजह से होस्टिंग शुरू की। साल 2001 में मुझसे मेजबानी करने के लिए कहा गया और मैंने मेजबानी की। यह मेरा पहली बार था जब मैं किसी समारोह की मेजबानी कर रहा था। यहीं से एक मेजबान के रूप में मेरी यात्रा शुरू हुई। इसलिए, फिल्मफेयर से मेरा भावनात्मक लगाव है।” इस दौरान जान्हवी कपूर ने भी फिल्मफेयर को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए थे।
पहले दिन, 27 जनवरी को कार्यक्रम महात्मा मंदिर कन्वेंशन और प्रदर्शनी केंद्र, गांधीनगर में आयोजित किया जाएगा। इसमें शांतनु और निखिल द्वारा क्यूरेटेड फैशन शो, पार्थिव गोहिल द्वारा लाइव प्रदर्शन और तकनीकी पुरस्कार शामिल होंगे। बाद की मेजबानी अपारशक्ति खुराना करेंगे। 28 तारीख को अवॉर्ड सेरेमनी होगी, जिसे करण जौहर और आयुष्मान खुराना होस्ट करेंगे।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू में बावे वाली माता मंदिर में स्वच्छता अभियान में भाग लिया।
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से मुलाकात की।
तेहरान में अपने ईरानी समकक्ष के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “…मैं आप सभी के साथ साझा करना चाहता हूं कि भारत सरकार ने हमारी नई शिक्षा नीति में फ़ारसी को भारत की 9 शास्त्रीय भाषाओं में से एक के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है।”
सबरीमाला मंदिर में ‘मकर ज्योति’ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने कहा, “23 जनवरी की सुबह से सभी के लिए राम मंदिर खुला है, मतलब जो भी आएंगे वे भगवान राम के दर्शन कर सकते हैं।”
दिल्ली : अब हर विधानसभा में होगा सुंदर कांड का पाठ…विधायक से लेकर पार्षद होंगे शामिल
अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन से पहले दिल्ली में भी भक्ति की बयार बहने जा रही है। दिल्ली की सभी विधानसभाओं में अब हर महीने के पहले मंगलवार को सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा। दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के सभी विधायक, पार्षद भव्य सुंदरकांड पाठ का आयोजन करेंगे। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम दिल्ली के सभी निवासियों को सुंदरकांड पाठ में शामिल होने का निमंत्रण देते हैं।
तमिलनाडु: अवनियापुरम जल्लीकट्टू के दौरान दो पुलिस कर्मियों सहित 45 लोग घायल हो गए और 9 लोगों को आगे के इलाज के लिए मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में रेफर किया गया।
निजी कंपनी में जॉब करने वाली NRI महिला से दुष्कर्म, सीईओ के खिलाफ मामला दर्ज
दिल्ली की एक निजी कंपनी में कार्यरत एनआरआई महिला से कथित तौर पर दुष्कर्म करने के लिए कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।पुलिस के मुताबिक, घटना नई दिल्ली जिले के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित पांच सितारा एक होटल में 14 सितंबर 2023 को हुई। पुलिस ने बताया कि भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक ने शनिवार रात को शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ चाणक्यपुरी थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह कंपनी में सहायक महाप्रबंधक के रूप में काम करती थी, जिसमें आरोपी सीईओ के पद पर था। शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपी उसके एक रिश्तेदार का परिचित था और उसने ही पीड़िता को नौकरी दिलाने में मदद की थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।