कल तक की डेडलाइन… सरकार के प्रपोजल को खारिज कर किसानों ने दिया ये अल्टीमेटम
किसान आंदोलन के बीच सरकार ने रविवार को चौथे दौर की बातचीत में किसानों को कुछ फसलों पर MSP देने का प्रस्ताव दिया। किसानों ने सरकार के इस को खारिज कर दिया है। किसान संगठनों ने सोमवार देर शाम शंभू बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र के प्रस्ताव को खारिज करते हुए अपनी आगे की रणनीति बताई। किसानों ने कहा कि हमने किसान संगठनों के साथ बैठक कर सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा की। सरकार ने जो प्रस्ताव दिया है उसमें कुछ दम नहीं है। इस प्रस्ताव से किसानों का कोई फायदा नहीं होगा। इसके साथ ही किसानों ने सरकार को मंगलवार तक का अल्टीमेटम दिया है। किसानों ने कहा है कि वे 21 फरवरी को दिल्ली कूच करेंगे।किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि करार नहीं है। सरकार एमएसपी की पूरी कानूनी गारंटी दे। 21 फरवरी की सुबह 11 बजे दिल्ली कूच किया जाएगा।
‘MSP पर गारंटी देने से नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ’
शंभू बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसान नेताओं ने कहा कि हमने किसान संगठनों के साथ बैठक कर सरकार के प्रस्ताव पर फैसला लिया है। सरकार के प्रपोजल में कुछ नजर नहीं आ रहा। अगर इसे ध्यान से देखेंगे तो केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर सरकार MSP की गारंटी देती है, तो हमारा डेढ़ लाख करोड़ रुपये खर्च होगा। लेकिन संस्था के अनुसार, अगर सरकार सभी फसलों पर MSP देती है तो इसमें एक लाख 75 हजार करोड़ रुपये में काम चल सकता है। अगर सरकार इतना पैसा लगा रही है, तो सभी फसलों पर MSP देनी चाहिए।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा, हमारी सरकार बाहर से 1.75 लाख करोड़ रुपये का वनस्पति तेल मंगाती है। ये बीमारी का कारण बन रहा है। अगर यही रुपया देश के किसानों को MSP देने के लिए खर्च करे, तो इससे काम बन जाएगा। यानी सरकार पर अलग से कोई बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने ये कहा कि वह कुछ फसलों पर MSP देंगे। लेकिन उसकी भी कई सीमाएं। इन सभी बातों से यह निकलकर आता है कि इससे किसानों का कोई फायदा नहीं है। हमारी मांग है कि सरकार 23 फसलों पर MSP की घोषणा करे। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर हमने फैसला किया है कि ये सरकार का प्रस्ताव किसानों के हक में नहीं है इसलिए हम इसे खारिज करते हैं।
‘केंद्र सरकार की नीयत में खोट’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि हमने सरकार के प्रस्ताव को ठीक से समझा। सरकार की नीयत में खोट है। अगर उनकी नियत साफ होती, तो वे ऐसा न करते। हमरा पॉइंट क्लियर है हमें सभी फसलों पर MSP गारंटी चाहिए। अब सरकार को बताना है कि वो कर्ज माफी के मामले में क्या फैसला कर रही है। दूसरा सरकार के मंत्री बैठक का जो समय देते हैं उससे 3-4 घंटे बाद आते हैं। इससे से समझ में आता है कि सरकार किसानों को लेकर सीरियस नहीं है।
पंजाब सरकार पर भी उठाए सवाल
इसके अलावा पंढेर ने कहा कि कल बॉर्डर पर हमारे एक किसान साथी शहीद हुए। पंजाब सरकार का अभी तक उसे लेकर कोई बयान सामने नहीं आया है। न ही उनका पार्थिव शरीर मिला है। हमारी मांग है कि सरकार उनके परिवार को उचित मुआवजा और एक सरकारी नौकरी दे। पंजाब में जिस तरह से सात जिलों में इंटरनेट बंद किए गए हैं, उन्हें इसके बारे में स्पष्ट करना चाहिए। पंजाब में इंटरनेट बंद नहीं होना चाहिए। इससे बच्चों की पढ़ाई को नुकसान हो रहा है।
’21 फरवरी को करेंगे दिल्ली कूच’
किसानों ने अपनी अगली रणनीति बताते हुए कहा कि हम 21 फरवरी को दोपहर 11 बजे दिल्ली कूच करेंगे। हम सरकार से अपील करते हैं कि हमारी मांगो मान लें। जब आप बैरिकेडिंग लगाकर रोका जा रहा है। हम भी इसी देश के नागरिक हैं, हमें शांति से आंदोलन करने दिया जाए। अभी आगे की कोई मीटिंग नहीं है। हालांकि हम बातचीत के लिए हमेशा सरकार हैं। किसान नेताओं ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि हमें शांति से आंदोलन करना है। वहीं हम सरकार से कहना चाहेंगे कि हमारी मांगों को मानें या फिर शांति से आंदोलन से करने दें।
कालाजार मुक्त हुआ भारत, स्वास्थ्य मंत्रालय ने 15 साल की समीक्षा रिपोर्ट तैयार की
एक लंबी लड़ाई के बाद भारत कालाजार मुक्त हो गया है। साल 2023 में 140 करोड़ की आबादी पर केवल 583 मामले सामने आए जो वैश्विक मानकों के अनुसार, रोग उन्मूलन की स्थिति है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने यह स्वीकार किया है कि भारत में अब कालाजार का संक्रमण काबू में है। पिछले वर्ष बांग्लादेश कालाजार मुक्त हुआ था। बांग्लादेश के बाद भारत ऐसा करने वाला दूसरा देश बन गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते 15 साल की समीक्षा रिपोर्ट में बताया है कि 10 हजार की आबादी पर अगर मरीजों की संख्या एक से नीचे रहती है तो उस स्थिति को रोग मुक्त माना जाता है। भारत में 31 दिसंबर 2023 तक कुल 583 मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ा वैश्विक मानक को पूरा करता है। साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और बंगाल के 633 ब्लॉक में 99 फीसदी अब रोग मुक्त हैं। मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि भारत को बहुत जल्द कालाजार रोग उन्मूलन का प्रमाणपत्र हासिल होगा।
कई साल की लड़ाई के बाद सफलता
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव मांझी के मुताबिक, कई साल की लड़ाई के बाद भारत को अब सफलता मिली है। इस बीमारी से मुक्त होने के लिए साल 2014 से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल चार सर्वाधिक प्रभावित वाले राज्य हैं, जहां एक समय पहले तक हजारों लोगों की सालाना इस बीमारी से मौत हुई। केंद्र सरकार ने साल 2023 तक रोग मुक्ति का लक्ष्य रखा जिसे 31 दिसंबर 2023 को हासिल किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण स्त्रोत की पहचान करने और प्रसार को रोकने के लिए माइक्रो स्तर पर काम किया गया। इसका नतीजा यह रहा कि 633 स्थानिक ब्लॉक में प्रति 10 हजार पर एक से कम मामले पहुंचे हैं। भारत में 2022 से अब तक कालाजार से एक भी रोगी की मौत नहीं हुई है।
आंकड़े बढ़ाते गए हौसला
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि हर साल जैसे-जैसे नए मामलों की संख्या कम होती दिखाई दी तो स्वास्थ्य कर्मचारियों के हौसला भी बढ़ता गया। 2015 में 8,500 मामले व पांच मौत हुईं। 2016 में 6,249 मामले, 2017 में 5,758 और 2018 में 4,386 मरीज मिले। 2019 और 2020 में एक भी मरीज की मौत नहीं हुई, लेकिन कोरोना के चलते नए मरीजों की पहचान काफी प्रभावित हुई। इसके बाद 2021 में 1,267 मामले सामने आए लेकिन इसके बाद से नए मरीजों की संख्या एक हजार से नीचे है।
2026 में पूरा दक्षिण पूर्व एशिया हो सकता है मुक्त
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कालाजार के खिलाफ किए प्रयासों से एक दशक में दक्षिण पूर्व एशिया में इसके मामले 95% घटे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सभी 11 सदस्यों को 2026 तक कालाजार मुक्त करने के लिए रूपरेखा भी पेश की गई।
केरल सरकार को सर्वोच्च अदालत की दो टूक, कहा- कर्ज सीमा के खिलाफ अंतरिम आदेश संभव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्ज लेने की सीमा के खिलाफ केरल सरकार की याचिका पर वह राज्य सरकार के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत ने केरल सरकार से इस इसको लेकर मानसिक रूप से तैयार रहने का सुझाव दिया।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब केरल सरकार ने उसे बताया कि 15 फरवरी को केंद्र के साथ उसकी बैठक बेनतीजा रही। पीठ ने कहा, यह शुद्ध रूप से वित्तीय मामला है और इसमें कोई अदालत कितना हस्तक्षेप कर सकती है। वह भी अंतरिम आदेश के जरिये। सुनवाई की शुरुआत में केरल सरकार के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, उधार लेने के लिए, वे हमें पहले मुकदमा वापस लेने के लिए कह रहे हैं और फिर वे विचार करेंगे। क्या हमें अपने वित्तीय अधिकारों के लिए मुकदमा दायर करने के लिए दंडित किया जाएगा। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमन ने सिब्बल के आरोप का खंडन किया और उधार लेने के लिए दी गई सहमति के आंकड़े देते हुए कहा कि केंद्र ने दिशा-निर्देशों से परे जाकर उन्हें उधार लेने की अनुमति दी। केरल देश का एकमात्र राज्य नहीं है। हम वित्त आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। अब, हम यह भी कह रहे हैं कि हम आपको दिशा-निर्देशों से परे उधार लेने की अनुमति देंगे लेकिन आप बात नहीं कर सकते और मुकदमा नहीं कर सकते।
मराठों को मिल सकता है 12% तक आरक्षण, आज लग सकती है मुहर, मसौदा तैयार
महाराष्ट्र में चार दशक पुराने संघर्ष को खत्म करने के लिए मराठों को 10 से 12 फीसदी आरक्षण दिया जा सकता है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार ने इसके लिए मसौदा तैयार कर लिया, जिस पर मंगलवार को होने वाले राज्य विधानमंडल के एक दिवसीय विशेष सत्र में मुहर लग सकती है।
मराठों को आरक्षण की मांग पर लगातार कायम असंतोष के बीच बुलाए गए राज्य विधानमंडल के विशेष सत्र की शुरुआत राज्यपाल रमेश बैस के अभिभाषण से होगी। फिर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट सदन में पेश की जाएगी। इसमें मराठों को पिछड़ा घोषित कर आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। ब्यूरो
अंदरखाने खबर है कि राज्य सरकार ने मराठा आरक्षण का मसौदा तैयार कर लिया है और विधानमंडल में पेश होने से पहले मंगलवार को सुबह राज्य कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी जाएगी।
मसौदे में उन त्रुटियों को दूर कर लिया गया है जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को खारिज कर दिया था। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को कहा कि मराठा समाज को टिकाऊ और कानून के दायरे में आरक्षण देने के लिए विधानमंडल का विशेष सत्र आयोजित किया गया है। ओबीसी या अन्य समुदायों के आरक्षण को नुकसान पहुंचाए बिना मराठा समुदाय को आरक्षण दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि हम ऐसा आरक्षण देंगें जो मनोज जरांगे को स्वीकार हो या न हो लेकिन मराठों को स्वीकार होगा।
एकमत से समर्थन करें मराठा विधायक: मनोज जरांगे
मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने सोमवार को सभी मराठा विधायकों से अपील की कि एकमत से आरक्षण का समर्थन करें। अगर, आरक्षण को लेकर समाज के विधायकों ने आवाज नहीं उठाई तो समझा जाएगा कि वे मराठा विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण में सगे संबंधियों का जिक्र होना चाहिए। अगर, इसका कार्यान्वयन नहीं हुआ तो 21 फरवरी से नए तरीके से आंदोलन शुरू करेंगे।
राहुल गांधी की राजनीति: राम और शिव से हुई शुरुआत, अब सामाजिक न्याय को लेकर माहौल बनाने की है कोशिश
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सामाजिक न्याय यात्रा के जरिये यूपी में कांग्रेस की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने की कोशिश में हैं। वह काशी में धर्म की बात करते हैं तो प्रयागराज में आर्थिक विकास की। अमेठी पहुंचने पर उनका फोकस सामाजिक न्याय हो जाता है। वह भीड़ को भागीदारी का सपना दिखाकर अपना बनाने की कोशिश करते हैं। अब उनकी आगे की यात्रा भी सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
राहुल की यात्रा यूपी में बहुरंगी है। वह वाराणसी में राम को याद करते हैं, खुद को शिवभक्त बताते हैं। शिव मंदिर में तस्वीर न लेने की बात बार-बार दोहराते हैं। राम मंदिर के उद्घाटन के बहाने भाजपा को घेरते हैं और राष्ट्रपति को नहीं बुलाने के बहाने दलितों के प्रति भेदभाव का मुद्दा उठाते हैं। प्रयागराज में किसानों के बकाया, कर्जमाफी का जिक्र करते हुए भगोड़े उद्योगपतियों की याद दिलाते हैं। सोमवार को प्रतापगढ़ और अमेठी में वह पूरी तरह सामाजिक न्याय की बात करने लगते हैं। समर्थन में जुटी भीड़ को भरोसा दिलाते हैं कि पिछड़ों और दलितों को उनकी हिस्सेदारी के आधार पर नौकरी से लेकर हर जगह भागीदारी दी जाएगी। सियासी जानकारों का कहना है कि यह अनायास नहीं है। राहुल सोची समझी रणनीति के तहत भीड़ का मिजाज देकर अपनी बात रख रहे हैं। धर्म, अर्थ और सामाजिक न्याय के कॉकटेल के जरिये सियासी पकड़ बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश सिंह कहते हैं कि राहुल सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना के जरिये नए सिरे से मंडल बनाम कमंडल की लड़ाई को धार देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके तरकश में अब सिर्फ सामाजिक न्याय का तीर ही बचा है। अमेठी और रायबरेली की सियासत पर निरंतर नजरें रखने वाले पत्रकार राज खन्ना का मानना है कि राहुल मतदाताओं के मिजाज को समझ रहे हैं। पिछले 40 साल में गांधी परिवार ने अमेठी और रायबरेली के लिए बहुत कुछ किया है लेकिन यहां के मतदाताओं से संवाद कायम करने में चूक गए। अब राहुल सामाजिक न्याय के बहाने पिछड़ों एवं दलितों को खुद की ओर आकर्षित करने की कोशिश में जुटे हैं।
61 हजार करोड़ से 10 लाख करोड़ पहुंचा निवेश, यूपी के बजट से डेढ़ गुना बड़ा है रहा इस बार का आकार
भूमि पूजन समारोह के जरिये उत्तर प्रदेश ने साबित किया है कि इच्छा शक्ति हो तो सबकुछ संभव है। इसी के दम पर पहले भूमि पूजन में जहां 61 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया था, वहीं चौथे भूमि पूजन में ये बढ़कर रकम 10 लाख करोड़ रुपये हो गया। जो यूपी के बजट लगभग 7.36 लाख करोड़ रुपये का करीब डेढ़ गुना है। वहीं, निवेश की रफ्तार की बात करें तो पहले और चौथे भूमि पूजन समारोह में करीब 15 गुना की वृद्धि है।
विकास का रास्ता निवेश से ही होकर गुजरता है। गुजरात हो या महाराष्ट्र, तेलंगाना हो या पश्चिम बंगाल… निवेशकों के दम पर ही ये राज्य फलफूल रहे हैं। यूपी ने भी इसे समझा और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए नीतियों से लेकर सुविधाओं तक में व्यापक बदलाव किए। वर्ष 2017 में योगी सरकार आई और अगले ही साल 2018 में वैश्विक निवेशक सम्मेलन किया। इसमें चार लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए। इन्हें धरातल पर उतारने के लिए देश में पहली बार भूमि पूजन समारोह का ‘कॉन्सेप्ट’ पेश किया गया। इसके जरिये उद्योगों को उत्सव का माहौल दिया गया। उद्योगपतियों को अतिथि देवो भव: की तर्ज पर अति विशिष्ट मेहमान का दर्जा दिया गया। नतीजा भी सामने है, चार लाख करोड़ से बढ़कर एमओयू 40 लाख करोड़ रुपये यानी दस गुना ज्यादा हो गए।
भूमि पूजन समारोह पर एक नजर
पहला भूमि पूजन समारोह : 29 जुलाई 2018 को आयोजित किया गया। इसमें 61,847 करोड़ रुपये की 81 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। दो लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला।
दूसरा भूमि पूजन समारोह : 28 जुलाई 2019 को हुए समारोह में 290 परियोजनाएं धरातल पर उतारी गईं। इनमें करीब 65,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। करीब 2.6 लाख लोगों के लिए रोजगार के रास्ते खुले।
तीसरा भूमि पूजन समारोह : कोविड काल की वजह से इसका आयोजन 3 जून 2022 में किया गया। तमाम विपरीत स्थितियों के बावजूद 1,406 परियोजनाओं का शिलान्यास हुआ। इसके जरिये 80 हजार करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरा। पांच लाख से ज्यादा रोजगार सृजित हुए।
चौथा भूमि पूजन समारोह : 20 व 21 फरवरी 2024 को हो रहे इस समारोह ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लगभग 10.11 लाख करोड़ रुपये की 14 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। इनके जरिये करीब 34 लाख रोजगार सृजन की राह खुली।
निवेशक बोल- सरकार से है सहयोग की उम्मीद
दिल्ली से आए निवेशक विवेक कुमार कहते हैं, हमारी कंपनी यूपी में निवेश कर रही है। माहौल देखकर लग रहा है कि यूपी का भविष्य उज्ज्वल है। निवेश सार्थक होगा, यही सोचकर पैसा लगा रहा हूं। सरकार सहयोग करेगी, यह मुझे पूरी उम्मीद है। ऐसे ही मेरठ से आए राजीव गोयल कहते हैं, मैं होटल इंडस्ट्री में निवेश कर रहा हूं। अयोध्या, नोएडा में होटल शृंखला तैयार कर रहा हूं। माहौल देखकर लग रहा है कि मेरा निवेश रंग लाएगा। इस समय यूपी पर्यटन का हब बना है, इससे होटल इंडस्ट्री में निवेश बेहतर रहेगा। गोरखपुर से आई दीपा सिंह कहती हैं कि पीएम से लेकर सीएम तक सभी ने यहां माहौल बेहतर बनाया है। कार्यक्रम को देखकर निवेश करने का मेरा निश्चय और मजबूत हो गया है।
मुख्य पंडाल दे रहा बेहतर तकनीक की गवाही
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में बनाया गया शानदार बड़ा पंडाल यूपी में विकसित हो रही तकनीक की गवाही दे रहा है। यह पंडाल शिप कंटेनर शीट से तैयार किया गया है। इसे कंटेनर का ही रूप दिया गया जिसमें यूपी के विकास की गाथा को भी बेहतर तरीके से उकेरा गया है। नए निवेशकों को नई चीजों के बारे में जानकारी मिली तो कई नई तकनीकों से भी रूबरू कराया गया।
धार्मिक जगहों के लिए खुला खजाना, अयोध्या, काशी सहित आठ जगहों को 86 हजार करोड़

भूमि पूजन समारोह (जीबीसी) में सोमवार को प्रदेश के धार्मिक शहरों में भी निवेश परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। इसमें अयोध्या, काशी और मथुरा में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की निवेश परियोजनाएं शामिल हैं। इन शहरों समेत प्रदेश के सभी आठ धार्मिक स्थलों में 86 हजार करोड़ रुपये से लगभग 500 परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा। इससे लगभग ढाई लाख लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
निवेश परियोजनाओं में सरकार का फोकस प्रमुख धार्मिक शहरों पर भी हैं। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के निर्माण और अयोध्या धाम में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद निवेशक भी इन शहरों में काफी रुचि दिखा रहे हैं। जीबीसी में सिर्फ अयोध्या, काशी व मथुरा के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ है। इसमें काशी में 15,314 करोड़ रुपये से 124 प्रोजेक्ट, मथुरा में 13,487 करोड़ रुपये से 81 और अयोध्या में 10,156 करोड़ से 146 प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
अयोध्या में सिर्फ पर्यटन विभाग के जरिये 3,500 करोड़ के निवेश से 142 होटल, रिसॉर्ट व गेस्ट हाउस का निर्माण कराया जाएगा। वहीं, आवास विभाग के जरिये 3,409 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। अयोध्या में सभी विभागों के 146 प्रोजेक्ट से लगभग 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसी तरह वाराणसी में विभिन्न विभागों की 124 प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेंगे। इनमें सर्वाधिक पर्यटन व हॉस्पिटालिटी सेक्टर के हैं। इससे करीब 43 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
मथुरा में 81 प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए भूमि पूजन हुआ है। प्रदेश सरकार यहां 150 करोड़ से मथुरा-वृंदावन कॉरिडोर का निर्माण भी कराने जा रही है। इससे वहां निवेशकों व पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होगी और लगभग 30 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर मिलेंगे। इसी तरह कुशीनगर में 1,152 करोड़, प्रयागराज में 9,619 करोड़, चित्रकूट में 7,047 करोड़, नैमिषारण्य तीर्थक्षेत्र के लिए सीतापुर में 21,801 करोड़ और मिर्जापुर में 7358 करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरेगा।
वहीं, वर्ष 2025 में प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ के मद्देनजर वहां निवेश परियोजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें कुछ प्रमुख होटल व कई अन्य परियोजनाएं भी हैं।
सुल्तानपुर कोर्ट में पेश होंगे राहुल गांधी, वहां से जाएंगे रायबरेली
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को कोर्ट में पेश होंगे। सोमवार को उनके अधिवक्ता की ओर से आत्मसमर्पण और जमानत अर्जी कोर्ट में दाखिल की गई। इस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। कोतवाली देहात थाने के हनुमानगंज निवासी जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्र ने चार अगस्त 2018 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ कोर्ट में परिवाद दायर किया था। विजय मिश्र का आरोप है कि 15 जुलाई 2018 को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इससे उनकी भावनाएं आहत हुई थीं।
परिवादी के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने बताया कि कोर्ट ने परिवादी व अन्य गवाहों का बयान दर्ज करने के बाद 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को तलब करने का आदेश दिया था। सोमवार को राहुल गांधी के अधिवक्ता केपी शुक्ल ने आत्मसमर्पण व जमानत अर्जी के साथ ही मौका अर्जी देकर कहा कि भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल होने के कारण राहुल गांधी कोर्ट में हाजिर नहीं हो सकते हैं। उन्होंने मामले में मंगलवार को सुनवाई करने का अनुरोध किया। एमपी-एमएलए की विशेष कोर्ट के मजिस्ट्रेट योगेश कुमार यादव ने जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए मंगलवार की तिथि नियत कर दी है।
10:30 बजे दीवानी न्यायालय पहुंचेंगे राहुल : अंसारी
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शकील अंसारी ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को विमान से सुबह 10 बजे अमहट हवाई अड्डे पर उतरेंगे। वहां से वे चार पहिया वाहन से 10:30 बजे दीवानी न्यायालय पहुंचेंगे। कोर्ट में पेशी के बाद वे रायबरेली के लिए वापस लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने इसकी जानकारी सोमवार को अमेठी में दी है।
पुलिस अधिकारी मॉनीटरिंग में जुटे
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कोर्ट में हाजिर होने को लेकर सोमवार से ही पुलिस के आला अधिकारी मॉनीटरिंग करने में जुट गए हैं। सीओ सिटी शिवम मिश्र ने पुलिसकर्मियों के साथ कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों के वकीलों से भी राहुल गांधी की पेशी को लेकर जानकारी जुटाई है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सामाजिक न्याय यात्रा के जरिये यूपी में कांग्रेस की बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने की कोशिश में हैं। वह काशी में धर्म की बात करते हैं तो प्रयागराज में आर्थिक विकास की। अमेठी पहुंचने पर उनका फोकस सामाजिक न्याय हो जाता है। वह भीड़ को भागीदारी का सपना दिखाकर अपना बनाने की कोशिश करते हैं। अब उनकी आगे की यात्रा भी सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।
राहुल की यात्रा यूपी में बहुरंगी है। वह वाराणसी में राम को याद करते हैं, खुद को शिवभक्त बताते हैं। शिव मंदिर में तस्वीर न लेने की बात बार-बार दोहराते हैं। राम मंदिर के उद्घाटन के बहाने भाजपा को घेरते हैं और राष्ट्रपति को नहीं बुलाने के बहाने दलितों के प्रति भेदभाव का मुद्दा उठाते हैं। प्रयागराज में किसानों के बकाया, कर्जमाफी का जिक्र करते हुए भगोड़े उद्योगपतियों की याद दिलाते हैं। सोमवार को प्रतापगढ़ और अमेठी में वह पूरी तरह सामाजिक न्याय की बात करने लगते हैं। समर्थन में जुटी भीड़ को भरोसा दिलाते हैं कि पिछड़ों और दलितों को उनकी हिस्सेदारी के आधार पर नौकरी से लेकर हर जगह भागीदारी दी जाएगी। सियासी जानकारों का कहना है कि यह अनायास नहीं है। राहुल सोची समझी रणनीति के तहत भीड़ का मिजाज देकर अपनी बात रख रहे हैं। धर्म, अर्थ और सामाजिक न्याय के कॉकटेल के जरिये सियासी पकड़ बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश सिंह कहते हैं कि राहुल सामाजिक न्याय और जातीय जनगणना के जरिये नए सिरे से मंडल बनाम कमंडल की लड़ाई को धार देने की कोशिश कर रहे हैं। उनके तरकश में अब सिर्फ सामाजिक न्याय का तीर ही बचा है। अमेठी और रायबरेली की सियासत पर निरंतर नजरें रखने वाले पत्रकार राज खन्ना का मानना है कि राहुल मतदाताओं के मिजाज को समझ रहे हैं। पिछले 40 साल में गांधी परिवार ने अमेठी और रायबरेली के लिए बहुत कुछ किया है लेकिन यहां के मतदाताओं से संवाद कायम करने में चूक गए। अब राहुल सामाजिक न्याय के बहाने पिछड़ों एवं दलितों को खुद की ओर आकर्षित करने की कोशिश में जुटे हैं।
युद्धाभ्यास से पहले नौसेना ने दिखाई ताकत, आसमान से बरसाए गोले, समुद्री चरण का अभ्यास 24 से
भारतीय नौसेना विशाखापट्टनम में अब तक के सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसेना अभ्यास ‘मिलन-2024’ का आयोजन कर रही है। 16 से 27 फरवरी तक चलने वाले अभ्यास में 50 देशों की नौसेनाएं भाग लेंगी। नौसेना अभ्यास का 12वां संस्करण दो प्राथमिक चरणों में आयोजित होगा, पहला- बंदरगाह में तो दूसरा समुद्र में।
भारतीय नौसेना ने सोमवार शाम पूर्वी नौसेना कमान (ईएनसी) की मेजबानी में एक ऑपरेशनल डेमो रिहर्सल आयोजित किया। इस दौरान नौसेना के लड़ाकू विमानों ने आसमान से गोले बरसाए। इस कार्रवाई ने दुनिया के सामने भारतीय नौसेना का लाोहा मनवा दिया।
पनडुब्बी और सतह रोधी सहित अन्य युद्ध अभ्यास
अभ्यास का बंदरगाह चरण 19 से 23 फरवरी तक है। विभिन्न जटिल अभ्यास और युद्धाभ्यास वाला समुद्री चरण 24 से 27 फरवरी तक होगा। नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि औपचारिक उद्घाटन समारोह बुधवार को होगा। बंदरगाह चरण में उद्घाटन समारोह, अंतरराष्ट्रीय सिटी परेड, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सेमिनार, मिलान टेक एक्सपो और टेबल टॉप अभ्यास सहित अन्य शामिल हैं। समुद्री चरण के दौरान नौसेनाएं उन्नत वायु रक्षा, पनडुब्बी रोधी और सतह रोधी युद्ध अभ्यास करेंगी। हवाई और सतही लक्ष्यों पर गनरी शूट, युद्धाभ्यास भी होगा।
इन देशों की नौसेनाएं हुईं शामिल
नौ दिवसीय यह अभ्यास लाल सागर में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर बढ़ती वैश्विक चिंताओं समेत अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल के बीच हो रहा है। 27 फरवरी तक चलने वाले मिलन अभ्यास के 12वें संस्करण में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलयेशिया समेत अन्य देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इसका मकसद समान विचारधारा वाले देशों के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। यह अभ्यास मित्र देशों से 15 युद्धपोतों और एक समुद्री गश्ती विमान के आगमन के साथ सोमवार को शुरू हुआ। भारतीय नौसेना से विमानवाहक पोत विक्रांत और विक्रमादित्य समेत करीब 20 पोत और मिग 29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और पी-8आई लंबी दूरी के समुद्री टोही और पनडुब्बी रोधी युद्धक विमान सहित लगभग 50 विमान अभ्यास में भाग ले रहे हैं। मिलन एक द्विवार्षिक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास है जो भारत की ‘लुक ईस्ट’ नीति के अनुरूप इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड की भागीदारी के साथ 1995 में शुरू हुआ था।
लग्जरी सामान बनाने वाली दुनिया की शीर्ष-100 कंपनियों में छह भारतीय, डेलॉय ने जारी की सूची
लग्जरी उत्पाद बनाने वाली दुनिया की शीर्ष-100 कंपनियों में छह भारतीय कंपनियां भी अपनी जगह बनाने में कामयाब रही हैं। इन छह कंपनियों में मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स और टाइटन के साथ चार अन्य भारतीय आभूषण निर्माता कंपनियां भी शामिल हैं। डेलॉय की सोमवार को जारी ‘वैश्विक लग्जरी सामान सूची-2023’ में 19वें स्थान पर काबिज मालाबार गोल्ड अग्रणी घरेलू कंपनी है।
पहली बार इसे सूची में जगह मिली है। टाटा समूह की इकाई टाइटन कंपनी 24वें स्थान पर है। विविध क्षेत्रों में काम करने वाली फ्रांस की लग्जरी कंपनी एलवीएमएच इस सूची में शीर्ष स्थान पर काबिज है। पीवीएच कॉर्प दूसरे और रिचमोंट तीसरे स्थान पर है।
घरेलू लग्जरी बाजार में महत्वपूर्ण वृद्धि
डेलॉय ने रिपोर्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे बढ़ रही है, उपभोक्ताओं में प्राथमिकताएं विकसित हो रही हैं। देश के लग्जरी बाजार में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी जा रही है, जो घरेलू ब्रांड की वैश्विक पहचान में योगदान दे रही है। देश में लग्जरी उत्पादों की मांग और बढ़ने की उम्मीद है। इससे घरेलू ब्रांड को वैश्विक स्तर पर उभरने के पर्याप्त अवसर मिलेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की शीर्ष-100 लग्जरी उत्पाद विक्रेताओं ने 2023 में कुल 347 अरब डॉलर का कारोबार किया। यह सालाना आधार पर 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी है। 347 अरब डॉलर के कुल कारोबार में एलवीएमएच की हिस्सेदारी 31 फीसदी है।
शीर्ष-10 का 63 फीसदी बाजार पर कब्जा
डेलॉय के मुताबिक, लग्जरी उत्पाद बनाने वाली दुनिया की शीर्ष-10 कंपनियों का 63 फीसदी बाजार पर कब्जा है।
सालाना आधार पर इनकी बिक्री में 23 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। शीर्ष-100 कंपनियों के कुल शुद्ध लाभ में इनकी हिस्सेदारी 76.4 फीसदी है।
दो हजार से अधिक नौकरियां देगी टेस्ला पावर इंडिया
बैटरी बनाने वाली कंपनी टेस्ला पावर इंडिया अपनी विस्तार योजनाओं के तहत विभिन्न क्षेत्रों में दो हजार से अधिक कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना बना रही है। कंपनी ने सोमवार को कहा कि इस भर्ती अभियान में बिक्री, इंजीनियरिंग, परिचालन, विपणन व समर्थन कार्यों से जुड़े पद शामिल होंगे। इससे युवाओं के लिए नौकरी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। कंपनी के एमडी कविंदर खुराना ने कहा कि हम भारत में कारोबार विस्तार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
NCPCR प्रमुख प्रियांक कानूनगो ने राज्य में मैप्ड और अनमैप्ड मदरसों को लेकर बिहार के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है।
असम में हो रहे ‘खेलो इंडिया गेम्स’ में पीएम मोदी का संबोधन
असम में हो रहे ‘खेलो इंडिया गेम्स’ के लिए अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “…मैं इस इवेंट में हिस्सा लेने आए सभी खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। देश के कोने-कोने से आए आप सभी खिलाड़ियो ने गुवाहाटी में एक भारत श्रेष्ठ भारत की भव्य तस्वीर बना दी है। आप जमकर खेलिए, डटकर खेलिए। खुद जीतिए और अपनी टीम को भी जिताइए… हारेंगे तो भी यहां से बहुत कुछ सीखकर जाएंगे।”
किसानों ने सरकार को दिया 21 फरवरी तक का अल्टीमेटम
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सरकार के पास 21 फरवरी तक का समय है। सरकार को सोचना और समझना चाहिए कि ये दो चीजें (तिलहन और बाजरा) (खरीद के लिए) बहुत महत्वपूर्ण हैं। जैसे उन्होंने दालों, मक्का और कपास का उल्लेख किया, उन्हें इन दोनों फसलों को भी शामिल करना चाहिए। अगर इन दोनों को शामिल नहीं किया गया तो हमें इस बारे में फिर से सोचना होगा…कल हमने फैसला लिया कि अगर 21 फरवरी तक सरकार नहीं मानी तो हरियाणा भी आंदोलन में शामिल होगा।’
चंद मिनटों में राख हो गए कई आशियाने… रुला रही दिल्ली के नेब सराय में लगी भीषण आग
दिल्ली के नेब सराय इलाके में आज दिन में अचानक झुग्गियों में आग लग गई और देखते ही देखते आधा दर्जन से ज्यादा झुगियां आग की चपेट में आकर धू-धू कर जलने लगी। लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को मामले की सूचना दी। मौके पर अलग-अलग फायर स्टेशनों से आग बुझाने के लिए दमकल की 8 गाड़ियां पहुंचीं। असिस्टेंट डिविजनल अफसर राजेश शुक्ला, स्टेशन ऑफीसर मनोज मेहलावत, बद्री प्रसाद मीणा सहित लगभग 40 फायर कर्मियों की टीम ने आग बुझाना शुरू किया। तकरीबन एक घंटे के अंदर में आग पर काबू पाया गया।
दिल्ली विधानसभा में भाजपा पर जमकर बरसे सीएम केजरीवाल
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आज विधानसभा में कहा कि गरीब घरों से आने वाले हजारों सिविल डिफेंस वॉलैंटियर्स जो बस मार्शल के रूप में आधा काम कर रहे थे, जिस तरह से उन्हें निकाला गया है, हम उस पर चर्चा करना और प्रस्ताव लाना चाहते हैं। हमारी बिधुड़ी जी से यही निवेदन है कि वो तैयारी करके आयें कि उन बच्चों के लिए आप LG साहब से क्या करवा सकते हैं और सरकार क्या कर सकती है। दिल्ली में 10 लाख से ज़्यादा लोगों के पानी के ज़्यादा बिल आए हैं। इन्हें ठीक करने की हम योजना लाए हैं। ये लोग उसे भी लागू नहीं करने दे रहे। पर चिंता मत करना, पहले की तरह इसे भी लागू करवाएंगे
कल्कि धाम के मंच से खूब तारीफ, आखिर प्रियंका के ‘गुरु’ रहे प्रमोद कृष्णम पर क्यों फिदा PM मोदी?
पीएम नरेंद्र मोदी ने कल्कि धाम के शिलान्यास समारोह में आचार्य प्रमोद कृष्णम की खूब तारीफ की। कल्कि मंदिर को लेकर आचार्य कृष्णम ने काफी संघर्ष किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके संघर्षों की खूब तारीफ की। प्रियंका गांधी के गुरु की तारीफपर अब सवाल उठने लगे हैं।
दुनिया में सबसे खास है संभल का कल्कि धाम मंदिर
संभल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज संभल में कल्कि धाम मंदिर का शिलान्यास कर रहे हैं। यह मंदिर संभल के एंकरा कंबोह इलाके में बनने जा रहा है। इस मंदिर को सफेद और भगवा रंग से सजाया जा रहा है। अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद यह मंदिर सबसे ज्यादा चर्चा में था। आचार्य प्रमोद कृष्णम श्री कल्कि धाम निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। पीएम मोदी उन्हीं के आमंत्रण पर आ रहे हैं। प्रमोद कृष्ण को हाल ही में कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों’ कर आरोप लगाकर छह साल के लिए पार्टी से निकाला है।