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ताजा समाचार -ईरान के एयरस्ट्राइक से बौखलाया पाकिस्तान,छह हजार सुरक्षाकर्मियों ने गंवाई जान,

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 भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगामी उपचुनाव के लिए दारा सिंह चौहान को अपना उम्मीदवार बनाया है। उधर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के रोहिणी इलाके में सुंदरकांड पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद के संबंध में मस्जिद का निरीक्षण करने के लिए आयुक्त नियुक्त करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी। 

आंतकवाद के कारण अब तक छह हजार सुरक्षाकर्मियों ने गंवाई जान, जेके डीजीपी ने दी जानकारी

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर-आर स्वैन ने मंगलवार को एक आंतकवाद से जुड़ा एक आंकड़ा जारी किए। उन्होंने बताया कि आंतकवाद से संबंधित घटनाओं में ड्यूटी के दौरान अबतक करीब छह हजार सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। इनमें 1600 से अधिक शहीद जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान हैं। स्वैन ने कहा कि आंकड़े देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आर-आर स्वैन ने मंगलवार को कहा कि आंकड़े देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 

रघुबर दास की बड़ी छावनी…यह सैनिक नहीं, संतों का है ठिकाना, चक्रवर्ती सम्राट के महल जैसा

60 फीट ऊंची दीवारें। किसी चक्रवर्ती सम्राट के महल जैसी। लाल किले जैसे पत्थर से बनीं दीवारों के बीच पिलर और शिखर वाली दीवार से भी ऊंचा गेट। स्टील वाले दरवाजे और भीतर बड़ा सा आंगन। फिर चहारदीवारी से सटकर बने छोटे-छोटे कमरे और बीच में बड़ी सी इमारत। यह अयोध्या की बड़ी छावनी है।  

साधु चरित सुभ चरित कपासू। 
निरस बिसद गुनमय फल जासू।। 

यानी, संतों का चरित्र कपास के चरित्र के समान शुभ है, जिसका फल नीरस, विशद और गुणमय होता है।

60 फीट ऊंची दीवारें। किसी चक्रवर्ती सम्राट के महल जैसी। लाल किले जैसे पत्थर से बनीं दीवारों के बीच पिलर और शिखर वाली दीवार से भी ऊंचा गेट। स्टील वाले दरवाजे और भीतर बड़ा सा आंगन। फिर चहारदीवारी से सटकर बने छोटे-छोटे कमरे और बीच में बड़ी सी इमारत। यह अयोध्या की बड़ी छावनी है। 

यहां के महंत जगदीश दास महाराज 15 साल के थे, जब घर छोड़ा था। 14 साल वृंदावन में एक आश्रम में सेवा की और 28 साल की उम्र में उनके गुरु के निधन के बाद उन्हें यहां बुलाकर गद्दी पर बैठा दिया गया। वह कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार से थे और छावनी का प्रमुख कान्यकुब्ज होना जरूरी है। महाराज कहते हैं अगर कोई और ब्राह्मण इस गद्दी पर बैठा भी, तो धड़ाम से गिर जाएगा, निभ नहीं पाएगा। वो खुद को बीस बिसवा बताते हुए सर्वश्रेष्ठ ब्राह्मण होने का दावा भी करते हैं।

अयोध्या की बाकी छावनी, मंदिर, मठों के गद्दीनशीन, महंत, महाराज और पुजारियों के साथ सिक्योरिटी और गार्ड चलते हैं। लेकिन अकेली यही छावनी है, जहां एक भी गार्ड नहीं। 
बड़ी छावनी वाले महंत कहते हैं, हम बाहर घूमेंगे तो द्वेष होगा, किसी के बारे में अच्छा बुरा निकलेगा। फिर दुश्मनी होगी। गार्ड की जरूरत पड़ेगी। लेकिन यहां के महाराज तो पिछले 30 साल से छावनी के बाहर नहीं गए हैं। उन्हें लगता है बाकी अखाड़ों-छावनियों के झगड़े इसलिए हैं क्योंकि वहां भाई-भतीजों को उत्तराधिकारी बना दिया जाता है। 

वह कहते हैं, उनके यहां एक परिवार, भाई-भतीजा तो दूर छावनी की गद्दी पर बैठे अब तक के 6 महाराज अलग-अलग 6 जिलों के हैं। हमारी छावनी में कभी झगड़े नहीं हुए और पुलिस-थाने की जरूरत नहीं पड़ी। हालांकि बड़ी छावनी के पास अयोध्या में सबसे ज्यादा जमीन है और उससे जुड़े कई केस अदालत में लंिबत हैं। यूं भी अयोध्या के कोर्ट में सबसे ज्यादा केस मंदिर-मठों के ही हैं। यहां मठ, महंत, मनी और मर्डर की लंबी कहानी है। पर इसी सबसे बचने के लिए महाराज जगदीश दास ने 13 साल के कौशलेंद्र को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। वह उसे छावनी चलाने के तौर-तरीके लिखा-पढ़ा और सिखा रहे हैं। वह न तो उनका भतीजा है, न ही रिश्तेदार। फिलहाल उसके हिस्से छावनी के हजार देवी देवताओं के विग्रह वाले हजारा मंदिर में और 400 साल पुराने सनातन भगवान की सेवा करने का काम है।

बड़ी छावनी बनने की कहानी भी कम अद्भुत नहीं। यहां के सबसे पहले महाराज रघुबर दास को अंग्रेजी फौज ने जबरदस्ती पकड़कर अपने यहां सैनिक बना लिया था। एक बार रामनवमी पर वह सरयू स्नान करने गए। वहां ध्यान लगाकर बैठे तो समय का पता नहीं चला। जब छावनी लौटे तो देखा उनके नाम पर तो कोई ड्यूटी कर रहा था। रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर भी थे और जब वह सरयू तट पर बैठे थे, तब रघुबर दास बनकर कोई अंग्रेजी सेना के गोले दाग रहा था। वह समझ गए कि यह उनके प्रभु श्रीराम हैं। उसी दिन वह नौकरी छोड़कर यहां आ गए और संतों के लिए छावनी बना दी।

इस छावनी के नियम कायदे थोड़े ज्यादा कठिन हैं। रात दस बजे दरवाजा बंद हो जाता है। मोजे-जूते साथ रहते हैं, इसलिए ठंड में भी नंगे पैर जाना होता है। महंत खुद भी मोजे नहीं पहनते और बर्फ से ठंडे संगमरमर की जमीन पर खुले पैर चलते-फिरते हैं। सुशील शर्मा 27 साल से महाराज जी की सेवा कर रहे हैं। पहले सरकारी नौकरी करते थे। कहते हैं अयोध्या में इतनी गरीबी थी कि संतों का कोई ठिकाना नहीं था। अन्न को तरसते थे। इसलिए रघुबर दास जैसे संतों ने छावनी बनाई जहां संतों की सेवा ही धर्म है और पूजा भी।

अयोध्या में चार छावनी हैं। तपस्वी जी की छावनी, रघुनाथ दासजी की बड़ी छावनी, मणिराम दासजी की छोटी छावनी व नयाघाट पर तुलसीदास की छावनी। इनमें वर्षों पहले हजारों संत रहते थे। आजकल मणिराम की छावनी में सबसे ज्यादा 500 संत रहते हैं। बाकी तीनों में 100-200 संत। वैसे तो सारे देश में छावनी में सैनिक रहते हैं, लेकिन अयोध्या में यह संतों का ठिकाना है।

ईरान के एयरस्ट्राइक से बौखलाया पाकिस्तान, कहा- इस कार्रवाई का अंजाम बुरा भी हो सकता है

ईरान ने पाकिस्तान में घुसकर बलोच उग्रवादी संगठन जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने भी हमले की पुष्टी की। पाकिस्तान ने कहा कि हमले में दो बच्चों की मौत हुई है। वहीं, तीन लोग घायल हो गए हैं।  पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 50 किलोमीटर अंदर घुसकर कार्रवाई की है। उन्होंने बलूचिस्तान के पंजगुर जिले की एक मस्जिद को भी नष्ट कर दिया।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने हमारे हवाईक्षेत्र का उल्लंघन किया है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। पाकिस्तान में हमले के कारण दो मासूमों की मौत हो गई। जबकि, तीन लड़कियां घायल हो गईं। पाकिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन अस्वीकार्य है। ईरान को मालूम होना चाहिए कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। पाकिस्तान हमेशा कहता है कि आतंकवाद सभी देशों के लिए एक साझा खतरा है। इसके लिए मिलकर कार्रवाई की जा सकती है। एकतरफा कार्रवाई अच्छे पड़ोसी के लक्षण नहीं है। यह कार्रवाई द्विपक्षीय विश्वास को गंभीर रूप से कमजोर बनाता है। 

पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 50 किलोमीटर अंदर घुसकर कार्रवाई की है। उन्होंने बलूचिस्तान के पंजगुर जिले की एक मस्जिद को भी नष्ट कर दिया। 

2012 में हुआ जैश अल-अदल का गठन 
अरिपोर्ट के अनुसार, जैश अल-अदल का गठन 2012 में हुआ था, जिसे ईरान आतंकवादी संगठन मानता है। ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित यह एक सुन्नी आतंकवादी समूह है। पिछले कुछ वर्षों में जैश अल-अदल ने ईरानी सुरक्षा बलों पर कई हमले किए हैं। दिसंबर में जैश अल-अदल ने सिस्तान-बलूचिस्तान में एक पुलिस चौकी पर हमले की जिम्मेदारी ली, जिसमें 11 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी।

एक दिन पहले इराक-सीरिया पर भी हमला
एक दिन पहले, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इराक के उत्तरी शहर एरिबल के पास स्थित इस्राइल की मोसाद एजेंसी पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। साथ ही गार्ड्स ने सीरिया में भी इस्लामिक स्टेट आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की थी।  आंतकी समूहों आईएस की सभाओं को तबाह करने के लिए भी ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। हमले के कारण चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए, जिन्हें पास के ही अस्पताल में ले जाया गया है। 

एरिबल स्थित अमेरिका दूतावस के पास भी विस्फोट
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इराक के एरिबल शहर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के नजदीक भी कई विस्फोट हुए थे। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ही हमलों की जिम्मेदारी ली थी। सूत्रों के मुताबिक, बमबारी बेहद हिंसक थी, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास आठ स्थानों को निशाना बनाया गया था। कुछ सूत्रों की मानें तो एरिबल हवाई अड्डे के पास भी इराक ने तीन ड्रोन मार गिराए गए थे। हवाईयात्रियों को एरिबल हवाईअड्डे पर ही रोक दिया गया था।

 

अयोध्या में लता मंगेशकर चौक के पास दीवारों पर रामायण की कलाकृतियां बनाई गई।

सरयू घाट पर ‘दीपोत्सव’ मनाया जा रहा है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के रोहिणी इलाके में सुंदरकांड पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए।

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