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ताजा समाचार – भारत में नए साल 2024 का आगाज, नई दिल्ली से लेकर गोवा तक जश्न में डूबे लोग,ब्लैक होल के राज जानने आज उड़ेगा एक्सपोसैट,ठंड जारी, अभी नहीं मिलेगी निजात

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भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के 841 नए मामले सामने आए हैं जो पिछले 227 दिनों में सबसे अधिक हैं। संक्रमण के उपचाराधीन मामले 4,309 हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि देश ‘विकसित भारत’ और आत्मनिर्भरता की भावना से ओत-प्रोत है तथा इस भावना एवं गति को 2024 में भी बनाए रखना है। सरकार ने प्रतिबंधित संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ के कनाडा में रह रहे सदस्य लखबीर सिंह उर्फ लांडा को आतंकवाद रोधी कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) सोमवार को पहले एक्स-रे पोलरिमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) के प्रक्षेपण से नववर्ष का स्वागत करने के लिए तैयार है जो ब्लैक होल जैसी खगोलीय रचनाओं के रहस्यों से पर्दा उठाएगा।

ठंड के बावजूद कम नहीं हुआ दिल्ली में लोगों का उत्साह, मंदिरों में नव वर्ष की पहली आरती

राजधानी के कई बड़े होटलों, रेस्त्रां व बार में नए साल का जश्न लंबा चला। आज नए साल के पहले दिन राजधानी के कई बड़े मंदिरों मे सवेरे की आरती के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुंचे हैं।  नए साल के स्वागत में दिल्लीवाले कल देर रात तक जमकर थिरके। राजधानी के कई बड़े होटलों, रेस्त्रां व बार में नए साल का जश्न लंबा चला। आज नए साल के पहले दिन राजधानी के कई बड़े मंदिरों मे सवेरे की आरती के लिए लोग बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। 

कल शाम को कनॉट प्लेस, इंडिया गेट समेत सभी बड़े बाजारों व पर्यटक स्थलों पर लोगों का हुजूम देखते ही बना। इसी तरह विभिन्न धार्मिक स्थलों पर भी नए साल का स्वागत भजनों व अपने-अपने तरीके से किया गया। दोपहर बाद से ही पुलिस कनॉट प्लेस आने वाले सभी प्रमुख मार्गों और अन्य पॉश इलाकों में जगह-जगह बैरीकेडिंग कर आने-जाने वाले चालकों की तलाशी लेती दिखी। किसी भी स्थान पर लोगों को भीड़ के रूप में इकट्ठा नहीं होने दिया जा रहा है।देर रात तक पुलिस के आला अधिकारी भी सड़कों पर गश्त करते दिखाई दे रही है। हमेशा की तरह कुछ युवाओं की टोलियों ने बाइक और कार में सवार होकर सड़कों पर जश्न मना रहे हैं। कुछ लोगों ने इंडिया गेट पर केक की तैयारियों में जुटे हैं।

र पर ही की पार्टी 
कोरोना के नए वेरिएंट के कारण सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए कुछ लोगों ने घर में अपने परिवार के साथ म्यूजिकल पार्टी का आयोजन किया। हालांकि कई लोग इस खास मौके को सेलिब्रेट करने के लिए होटल और रेस्त्रां विशेष डिनर करने बाहर भी निकले हैं, लेकिन इनकी संख्या कम रही। इंद्रपुरी निवासी राम नरेश ने बताया कि हर साल न्यू ईयर पार्टी बाहर अपने दोस्तों के साथ मनाते थे, लेकिन इस बार वह अपने परिवार के साथ दोस्तों को घर बुलाकर ही पार्टी कर रहे। उन्होंने बताया कि सारी तैयारियां हो गई हैं, घर में ही कई प्रकार के व्यंजन तैयार कर रहे हैं। 

देर शाम से शुरू हो गया बधाइयों का सिलसिला 
इंटरनेट के युग में नए वर्ष को लेकर बधाई देने में देर नहीं लगती। यही वजह है कि नववर्ष की पूर्व संध्या पर शाम ढलते ही बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया। एक-दूसरे को मैसेज कर नववर्ष में बेहतर स्वास्थ्य की कामना की।

2040 तक भारत होगा दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान

ओडिशा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत 2040 तक दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसके लिए योजना और तैयारी की जरूरत है। भारत के नंबर एक अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘स्किल्ड हब’ की कल्पना की गई है।इस पहल का मकसद नि:शुल्क कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाना है। कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को मजबूत कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उनके जीवन की दिशा को बदलने में सक्षम बनाता है।

इससे पूर्व धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के संबलपुर से राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की ‘स्किल्स ऑन व्हील्स’ पहल के तहत कौशल रथ को हरी झंडी दिखाई। कौशल रथ ‘कौशल भारत मिशन’ पहल को बढ़ावा देगा। साथ ही रथ देशभर में आकांक्षी और पिछड़े जिलों से गुजरेगा।

इस पहल का मकसद नि:शुल्क कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाना है। कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को मजबूत कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से उनके जीवन की दिशा को बदलने में सक्षम बनाता है।

अगले वर्ष पांच नई वंदे भारत का संगम नगरी को मिल सकता है तोहफा, रूट को लेकर चल रहा मंथन

अगले वर्ष प्रयागराज को पांच नई वंदे भारत एक्सप्रेस का तोहफा मिलेगा। खास बात यह है कि इसमें से चार वंदे भारत प्रयागराज से ही शुरू होंगी। इसमें से सहारनपुर वंदे भारत चलाए जाने का एलान रेलमंत्री पहले ही कर चुके हैं। जो वंदे भारत शुरू होगी उसमें चित्रकूट-कानपुर-प्रयागराज-अयोध्या वंदे भारत भी प्रस्तावित है।प्रयागराज में वर्तमान समय दो जोड़ी वंदे भारत ट्रेन का संचालन हो रहा है। दोनों ही वंदे भारत वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चल रही हैं। इसी कड़ी में अब वर्ष 2024 में प्रयागराज को पांच जोड़ी और वंदे भारत ट्रेनों की सौगात मिल सकती है। 

प्रयागराज में वर्तमान समय दो जोड़ी वंदे भारत ट्रेन का संचालन हो रहा है। दोनों ही वंदे भारत वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चल रही हैं। इसी कड़ी में अब वर्ष 2024 में प्रयागराज को पांच जोड़ी और वंदे भारत ट्रेनों की सौगात मिल सकती है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा पिछले वर्ष ही सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में सहारनपुर से प्रयागराज के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलाए जाने का एलान किया जा चुका है।

इसके रूट पर मंथन चल रहा है। इसके अलावा मेरठ से लखनऊ होकर प्रयागराज के लिए एक और वंदे भारत प्रस्तावित है। वहीं प्रयागराज से आगरा के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलाए जाने का प्रस्ताव उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन द्वारा पिछले वर्ष भेजा जा चुका है। इस ट्रेन का भी संचालन वर्ष 2024 के शुरूआती छह माह में होना तय है। वहीं गोरखपुर से लखनऊ के बीच चल रही वंदे भारत का प्रयागराज जंक्शन के विस्तार का भी रेलवे बोर्ड नोटिफिकेशन जारी कर चुका है।

अयोध्या, चित्रकूट रूट पर हो सकता है संचालन

इसी वित्तीय वर्ष इसका विस्तार प्रयागराज तक हो सकता है। इसके अलावा चित्रकूट से अयोध्या के बीच भी वंदे भारत वाया प्रयागराज तक चलाई जा सकती है। इसके दो रूट पर मंथन चल रहा है। पहला रूट चित्रकूट-प्रयागराज-प्रतापगढ़-अयोध्या एवं दूसरा रूट चित्रकूट-बांदा-कानपुर-प्रयागराज-अयोध्या है। वहीं लोकसभा चुनाव को देखते हुए कुछ और वंदे भारत भी प्रयागराज से होते हुए चलाई जा सकती हैं। स्लीपर कोच वाली वंदे भारत का संचालन भी प्रयागराज से पुणे होते हुए बंगलुरू तक के लिए प्रस्तावित है। 

सौ से ज्यादा औसत स्पीड वाली दो वंदे भारत प्रयागराज मंडल के ही खाते में

प्रयागराज। वर्तमान समय देश में चल रही सभी वंदे भारत ट्रेनों में मात्र दो ही वंदे भारत ऐसी हैं जिनकी औसत स्पीड सौ किमी प्रतिघंटे से ज्यादा की है। इन दोनों का ही संचालन उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में हो रहा है। वाराणसी से नई दिल्ली जाने वालीं दोनों वंदे भारत की औसत स्पीड सिर्फ प्रयागराज जंक्शन से गाजियाबाद के छिपियाना बुजुर्ग तक 100 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की है।

उम्मीद 2024: आकांक्षाओं की आकाशगंगा, अंतरिक्ष, एआई और विज्ञान महाशक्ति बनने की रखी जाएगी बुनियाद

भारतीय-अमेरिकी परियोजना नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) उपग्रह का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण जनवरी में ही होगा। करीब 150 करोड़ डॉलर की लागत के साथ इसे दुनिया का सबसे महंगा पृथ्वी की तस्वीरें लेने वाला उपग्रह माना जा रहा है। 2024 नए भारत की बुनियाद बनने जा रहा है। इस वर्ष देश अंतरिक्ष की नई ताकत बनने, अंतरिक्ष के सहारे अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर पहुंचाने के साथ उभरती तकनीकों में खुद को मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ाएगा। ये उपक्रम हमें अगले एक दशक और कुछ मामलों में आधी सदी तक फल देते रहेंगे। सिर्फ अंतरिक्ष ही क्यों भारत कृत्रिम मेधा (एआई), मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों में दुनिया के नेतृत्व के लिए मजबूती से कदम बढ़ाने की कोशिशों को परवान चढ़ाएगा। ये प्रयास हमें महज सेवा प्रदाता की सीमित भूमिका से आजाद कर नवीन प्रौद्योगिकियों और हार्डवेयर के प्रमुख वैश्विक उत्पादक के रूप में स्थापित करेंगे।

निसार
भारतीय-अमेरिकी परियोजना नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) उपग्रह का सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण जनवरी में ही होगा। करीब 150 करोड़ डॉलर की लागत के साथ इसे दुनिया का सबसे महंगा पृथ्वी की तस्वीरें लेने वाला उपग्रह माना जा रहा है। निसार हर 12 दिन में पृथ्वी का स्कैन पूरा कर लेगा। इसके जरिये पृथ्वी पर जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के असर, पर्यावरणगत और भौगोलिक बदलावों का अध्ययन होगा। इसे भारत का सबसे शक्तिशाली रॉकेट जीएसएलवी एमके 2 अंतरिक्ष में पहुंचाएगा।

एक्सपोसैट
नव वर्ष के पहले दिन एक जनवरी को ही इसरो के चार प्रमुख मिशनों में से एक एक्स-रे पोलरीमीटर उपग्रह (एक्सपोसैट) उड़ान भर रहा है। यह उपग्रह गहन अंतरिक्ष से आने वाली एक्स-रे के स्रोतों और उनकी प्रकृति के साथ ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारों और निहारिकाओं की उत्पत्ति व विकास का रहस्य खोलेगा। यह उपग्रह गहन अंतरिक्ष से निकलने वाली ऊर्जा की समग्र जानकारी जुटाने में मदद करेगा। इस काम में एक्सपोसैट में लगे दो उपकरण पोलिक्स और एक्स्पेक्ट मदद करेंगे। इनसे मिली जानकारियां और डाटा न केवल भारत बल्कि दुनियाभर के वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय तक उपयोगी साबित होंगे।

इनसेट 3डीएस…मनमौजी मौसम का मूड भांपने की कवायद
भारत के मौसम-विज्ञान उपग्रहों की सीरीज इनसेट 3 के तहत सातवां प्रक्षेपण इनसेट 3डीएस 12 जनवरी को या इसके आसपास हो सकता है। इसे जीएसएलवी एफ14 रॉकेट के जरिये करीब 35,800 किमी ऊंचाई पर स्थापित किया जाना है। यह उपग्रह शृंखला अनिश्चित मौसम के बेहतर पूर्वानुमान और प्राकृतिक आपदाओं से बचाने में मदद करती है। साल 2003 में इनसेट 3ए से शुरुआत हुई और 2016 में पिछला प्रक्षेपण इनसेट 3डीआर का हुआ। पिछला उपग्रह 2026 तक काम करने के लिए बना था। अब 907 किलो वजनी इनसेट 3डीएस मिशन 2030 तक काम करेगा।

सबसे चमकीले शुक्र पर जीवन उत्पत्ति के तत्वों की खोज
सौर मंडल के सबसे चमकीले ग्रह शुक्र के लिए शुक्रयान को दिसंबर में प्रक्षेपित करने का प्रस्ताव है। इसके लिए तैयारियां 2017 में शुरू हुई थीं। मिशन के 3 उपकरण शुक्र की चट्टानों के अध्ययन (स्ट्रेटीग्राफी), वातावरण के रासायनिक अध्ययन और ग्रह पर सौर उत्सर्जन व विद्युत-चुंबकीय प्रभाव का विश्लेषण करेंगे। सबसे अहम होगी फॉस्फाइन की जांच। फॉस्फाइन नामक कंपाउंड को जीवन की मौजूदगी का संकेत माना जाता है। कुछ समय पूर्व शुक्र के बादलों में इसके मिलने का दावा किया गया था। भारत अगर इसकी पुष्टि कर देता है, तो यह आधुनिक खगोल शोध में बहुत बड़ा योगदान होगा।

क्वांटम मिशन…अगले आठ साल के कामों की शुरुआत का समय
अगले कुछ वर्षों में जो देश क्वांटम तकनीक, इसके शोध और विकास में आगे होगा, दुनिया उसकी होगी। इस सच को स्वीकार कर 2023-24 के बजट में भारत ने करीब 6,000 करोड़ रुपये का बजट 2030-31 तक राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत रखा। मिशन का लक्ष्य है…अगले 8 साल में भारत 50 से 1,000 क्यूबिट्स के कंप्यूटर बनाना। क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट्स पर काम करते हैं। ये पारंपरिक कंप्यूटर की बाइनरी कोडिंग 0 और 1 से अलग होते हैं और कहीं तेजी से व नए क्षेत्रों में काम करने में मदद करते हैं।

आदित्य एल1- सौर संक्रांतियों पर नजर
2 सितंबर को प्रक्षेपित सूर्य मिशन आदित्य एल1 6 जनवरी को अपराह्न बाद 4 बजे अपनी मंजिल पृथ्वी से 15 लाख किमी दूर लग्रांजियन बिंदु 1 (एल1) पर पहुंचकर सौर संक्रांतियों (सूर्य की हलचलों) पर नजर रखना शुरू कर देगा।  यान के चार उपकरण सौर लपटों और उनसे उत्सर्जित ऊर्जा का डाटा जुटाएंगे, तस्वीरें लेंगे। यह सूर्य की सतह के मुकाबले उसके कोरोना का तापमान कई गुना ज्यादा होने की पहेली समझने की कोशिश भी करेगा। इसके तीन उपकरण अपने आसपास मौजूद सूर्य से निकले कणों और विकिरणों से जुड़े परीक्षण करेंगे। यह सौर वेधशाला सौर तूफानों की पूर्व सूचना भी दे सकेगी।

गगनयान: मानवरहित उड़ानों से अंतरिक्ष में बढ़ेगा एक और कदम
खुद के बूते तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में 400 किमी की ऊंचाई पर भेजने का महत्वाकांक्षी मिशन गगनयान 2025 में परवाज भरेगा। यह वर्ष इस मिशन को साकार करने की मजबूत बुनियाद रखेगा। इस मिशन को सुरक्षित ढंग से पूरा करने के लिए कई परीक्षण 2024 में होने हैं। बीते साल टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन 1 (टीवी डी1) परीक्षण सफलता से संपन्न हुए।

अब टीवी डी2 और इसी शृंखला के अन्य परीक्षण इसी वर्ष किए जाने हैं। इस दिशा में सबसे अहम जी-एक्स मानव रहित डमी उड़ान होगी। इसे एलवीएम 3 रॉकेट से प्रक्षेपित किया जाएगा। यह परीक्षण उड़ान दो बार की जा सकती है। अंतरिक्षयात्रियों के लिए बनाई जा रही जीवन रक्षा प्रणाली, तापरोधी प्रणाली और पैराशूट प्रणाली को भी परखा जाएगा। इंटीग्रेटेड ड्रॉप टेस्ट और पैड अबॉर्ट टेस्ट सुरक्षित उड़ान के लिए आवश्यक हैं। इनके जरिये क्रू बचाव प्रणाली को जटिल हालात से गुजारकर परखा जाएगा।

ऑनलाइन गेमिंग : हर तीसरे भारतीय को पसंद इसलिए तेज विकास
फिल्मों के बाद मनोरंजन का दूसरा सबसे बड़ा माध्यम बन चुके कई प्रकार के ऑनलाइन गेम साल 2023 में भारत में 154 करोड़ बार डाउनलोड किए गए। इस मामले में चीन के बाद भारत दूसरे स्थान पर है। नए साल में इनमें 22 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि की उम्मीद है। वजह, 56.8 करोड़ भारतीयों के स्मार्टफोन में ये पहुंच चुके हैं।

सोशल मीडिया पर होंगे ज्यादा भारतीय
विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साल 2023 में करीब 32.8 प्रतिशत नागरिक सक्रिय हो चुके थे, 2024 में यह संख्या 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह कम उम्र के बच्चों का इन माध्यमों से जुड़ना है। हालांकि, इसके कई खतरे भी हैं। इससे बचने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ जहां सख्त कानून बना रहे हैं और अपने बच्चों को बेहतर ऑनलाइन सुरक्षा देने में जुटे हैं, भारत भी नए साल में कानूनी प्रावधान बना कर ऐसा कर सकता है।

एआई: नौकरियों पर आपदा को अवसर बनाने का साल
एआई ने 2023 में अपना विस्तार कर चिंता के साथ उम्मीदें भी बंधाईं। नए साल में एआई सभी लोगों तक पहुंच बना सकती है। जितना बड़ा डाटाबेस उतनी ही विस्तारित एआई। इस सिद्धांत के मुताबिक, 1.40 अरब नागरिकों वाले भारत में करीब 90 करोड़ लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों और विभिन्न उपकरणों में एआई के उपयोग से जुड़े अनुभवों का डाटा आमजीवन को और बेहतर कर सकता है। 2024 एआई से पारंपरिक नौकरियों में कमी के खतरे को नए तरह के रोजगार अवसरों में तब्दील करने का साल साबित हो सकता है।

कवच: डिजिटल खतरों से बचाएगा डिजिटल इंडिया कानून
नई तकनीकों का विकास आम नागरिकों के जीवन की बेहतरी के साथ उनके शोषण का औजार भी बन रहा है। ऑनलाइन दुनिया में नए खतरे उभर रहे हैं। डीपफेक वीडियो-ऑडियो साइबर अपराधियों का हथियार बनने लगे हैं। नागरिकों को इससे बचाने के लिए सरकार 23 साल पुराने आईटी कानून की जगह नया डिजिटल इंडिया कानून लाने जा रही है। यह 2024 में आम चुनाव के बाद आ सकता है। इससे नागरिकों की निजता, डिजिटल डाटा की सुरक्षा व डीपफेक जैसे खतरों को रोकने की कोशिश होगी।

जीडीपी : प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज रहेंगे हम
2023-24 के पहले छह महीने में जीडीपी की वृद्धि दर 7.7 फीसदी। 2024-25 के लिए इसे अच्छा संकेत माना जा रहा है। विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत सबसे तेजी से बढ़ रहा है। चीन को पीछे छोड़ चुका है। नए साल में आर्थिक सहयोग व विकास संगठन (ओईसीडी) ने भारत के 6.1 और चीन के 4.7 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान दिया है। आईएमएफ का कहना है कि  भारत दुनिया की कुल जीडीपी वृद्धि में 16 फीसदी से अधिक योगदान देने को तैयार है। उद्योग संगठन एसोचैम ने भी 2024 में भारत को सबसे तेजी से बढ़ने वाला अर्थव्यवस्था करार दिया। विभिन्न विशेषज्ञ इसे 6.5 से 7.5 प्रतिशत की रेंज में मान रहे हैं।

प्रमुख क्षेत्रों में 15 से 17 प्रतिशत वृद्धि  
इस साल वित्तीय क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों, ऑटोमोबाइल, निर्माण, होटल, उड्डयन और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर के अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद जताई जा रही है। सभी प्रमुख क्षेत्रों में बिक्री पिछले वर्ष के मुकाबले 15 से 17 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू उपभोग व मांग बढ़ना है। वहीं, निर्यात आधारित उद्योगों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं में धीमी मांग के बीच भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था…नए कारोबारों को देगी बढ़ावा
सरकार का लक्ष्य डिजिटल अर्थव्यवस्था को निकट भविष्य में एक लाख करोड़ डॉलर का बनाना है। इंडिया स्टेक के जरिये नागरिक सेवाओं को सुधारते हुए अर्थव्यवस्था को भी तेजी दी जा रही है। चार साल में इसके नतीजे दिखने लगे हैं। 2024 में डिजिटल होती आर्थिक गतिविधियों का लाभ नए ढंग से उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में मिलेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात…12 हजार करोड़ डॉलर के लक्ष्य पर बढ़ेंगे आगे
2023-24 की पहली छमाही में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का निर्यात 27 फीसदी बढ़ा। नए साल में इसमें तेजी की उम्मीद है। उम्मीद है कि 2026 तक भारत 12,000 करोड़ डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद निर्यात करेगा।

अंतरिक्ष के लिए निजी क्षेत्र की उड़ान
नए साल में करीब 600 भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप नई उड़ान भर सकते हैं। भारतीय कंपनियां पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रह भेजने की क्षमता दिखा सकती हैं। इससे देश में उपग्रह प्रक्षेपण व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा। साल की पहली छमाही में स्काईरूट कंपनी के विक्रम-1 रॉकेट का प्रक्षेपण प्रस्तावित है। इसके अलावा, अग्निकुल कॉसमॉस कंपनी 3डी प्रिंटेड रॉकेट का परीक्षण कर सकती है। पिक्सल कंपनी इस साल 6 और 2025 में 18 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजेगी।

रक्षा क्षेत्र में नया भारत
अमेरिका से एमक्यू 9बी प्रिडेटर ड्रोन खरीद को 2024 के शुरुआती हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है। भारत ऐसे 31 ड्रोन खरीद रहा है, जो एलएसी और एलओसी के साथ साथ हिंद महासागर में भी देश की सुरक्षा को मजबूत बनाएंगे। रूस से भी वायु क्षेत्र रक्षा प्रणाली एस 400 की दो यूनिट मिल सकती हैं।

2023 में सरकार ने रक्षा खरीद घरेलू स्रोतों से करने के लिए खरीद बजट का 68 फीसदी निर्धारित किया था। इसे 2024 के बजट के लिए 75 प्रतिशत कर दिया गया। इसका लाभ 2024 में मिलेगा। कई नए स्टार्टअप उभरे हैं। ये 500 से अधिक प्रकार के सेंसर, कलपुर्जे और हथियार से जुड़ी प्रणालियां बना रहे हैं।

4 साल में रक्षा निर्यातक का दर्जा
2023 के खत्म होते-होते वित्त मंत्री ने दावा किया, वित्त वर्ष 2024 में भारत 288 करोड़ डॉलर (करीब 24 हजार करोड़ रुपये) के करीब रक्षा सामग्री व उपकरण निर्यात करने जा रहा है। इस सेक्टर में आयात आधारित देश से निर्यातक बनने का यह सफर हमने आत्मनिर्भर भारत अभियान शुरू होने के महज 4 साल में तय किया है। हमारी ब्रह्मोस मिसाइलों से लेकर तेजस विमानों तक को कई देश खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय समझौते भी कर रहे हैं। 2024 में इसमें और तेजी आएगी।

13 हजार करोड़ मिलने पर कुछ नहीं कर सकी सुक्खू सरकार : वीरेंद्र कंवर

वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार एक वर्ष में केंद्र से 13 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिलने पर भी कुछ नहीं कर पाई।पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के 10 वर्ष के कार्यकाल में सैकड़ों योजनाएं धरातल पर उतरी हैं। जनता को उन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। मगर प्रदेश की सुक्खू सरकार एक वर्ष में केंद्र से 13 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मिलने पर भी कुछ नहीं कर पाई। वीरेंद्र कंवर बल्ह खालसा में कुटैलहड़ भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की बैठक में बोल रहे थे। 

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड जारी, अभी नहीं मिलेगी निजात

उत्तर भारत के सात राज्यों में 2023 के आखिरी दिन गलन वाली ठंड रही। नए साल का आगाज भी कड़ाके की ठंड में हो रहा है। कई इलाकों में घने कोहरे से रेल, हवाई और सड़क परिवहन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन में लोगों को भीषण ठंड और घने कोहरे का सामना करना पड़ सकता है।सड़कों पर वाहन रेंग-रेंग कर चले। कोहरे के कारण ट्रेनें भी घंटों से गंतव्यों पर पहुंचीं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व यूपी के कुछ हिस्सों में 2 जनवरी की सुबह और कुछ क्षेत्रों में उसके बाद तीन दिन बहुत घना कोहरा छाने की संभावना है।

दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान, जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में रविवार को हाड़ कंपा देने वाली ठंड रही। बादल छाए रहे और सूरज नहीं निकला। श्रीनगर व अनंतनाग में पारा माइनस 3.4 डिग्री और गुलमर्ग में माइनस 3.5 डिग्री दर्ज किया गया।

सड़कों पर वाहन रेंग-रेंग कर चले। कोहरे के कारण ट्रेनें भी घंटों से गंतव्यों पर पहुंचीं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व यूपी के कुछ हिस्सों में 2 जनवरी की सुबह और कुछ क्षेत्रों में उसके बाद तीन दिन बहुत घना कोहरा छाने की संभावना है।  

दो दिन पड़ेगी भीषण सर्दी
मौसम विभाग के अनुसार, नए साल में पहले दो दिन पंजाब, हरियाणा, यूपी और उत्तरी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भीषण ठंड पड़ सकती है। घने कोहरे की संभावना है। यूपी, राजस्थान व मध्य प्रदेश में 1 जनवरी, पंजाब व हरियाणा में 2 से 4 जनवरी के बीच हल्की बारिश हो सकती है। वहीं, तमिलनाडु, दक्षिण केरल व लक्षद्वीप में 4 जनवरी तक बारिश का अनुमान है।  

साल के अंतिम दिन बंपर सेल, सड़क पर ट्रैफिक व्यवस्था फेल

साल के अंतिम दिन ऊना के मुख्य बाजार में लगी बंपर सेल का इतना क्रेज रहा कि रविवार के घने कोहरे और धुंध के बीच भारी संख्या में लोग सेल में खरीदारी करने के लिए पहुंचे। इस बीच ऊना की सड़कों पर भारी जाम लगने से ट्रैफिक व्यवस्था भी फेल होती नजर आई। 

इसके अलावा ऊना-संतोषगढ़ सड़क, अंब-ऊना, हमीरपुर-ऊना और ऊना-नंगल मुख्य मार्गों पर रुक-रुक कर जाम लगता रहा। सुबह सड़क पर वाहनों की आवाजाही ठीक रही। मगर दोपहर होते ही सड़कों पर जाम लगना शुरू हो गय़ा। इस बीच पैदल चलने वाले राहगीरों को भी काफी परेशानी हुई। ट्रैफिक पुलिस को भी यातायात को सुचारू रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

बाजार में ग्राहकों की लगी भारी भीड़
बाजार में पहुंचे ग्राहकों की भीड़ ने पूरे बाजार को एक मेले का माहौल दे दिया। ग्राहकों की भीड़ देख दुकानदारों के चेहरों पर भी रौनक छाई रही। सेल के इस मेले में लोगों ने जमकर गर्म कपड़ों की खरीदारी की। मुख्य बाजार में हजारों की संख्या में लोग खरीदारी करने पहुंचे थे। बाजार में हर जगह दुकानदारों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह के प्रयास किए। कुछ लोगों ने इसके लिए गानों और माइक का सहारा लिया। इस सेल में स्थानीय लोगों के साथ-साथ जिलेभर से ग्राहक ऊना बाजार में पहुंचे थे।

निजी बसों का भी हुआ संचालन
ऊना में लगी सेल के लिए लोगों के उत्साह को देखते हुए रविवार को भी निजी बसों का संचालन हुआ। अमूमन रविवार के दिन अवकाश के कारण सवारी कम होती है। ऐसे में निजी ऑपरेटर कम ही बसों को संचालन करते हैं। मगर ऊना बाजार में साल 2023 के अंतिम दिन रविवार को लगी सेल के कारण अधिकतर रूटों पर निजी बसें भी दौड़ती रहीं। इन बसों में काफी संख्या में लोग आवाजाही करते दिखे।

भारत में नए साल का आगाज हो गया है। लोगों ने पटाखे फोड़कर 2024 का स्वागत किया। इसी के साथ, लोगों ने 2023 को बाय-बाय कह दिया। देशभर में जश्न का माहौल हैं। लोग एक-दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे हैं। आधी रात के बावजूद नए साल की खुशी में देशभर के मुख्य बाजारों में रौनक देखने को मिली। 

2023 को अलविदा और नए साल के वेलकम को यादगार बनाने के लिए रविवार की शाम कनॉट प्लेस से लेकर दिल्ली के सभी बाजारों के रेस्टोरेंट, बार और होटल में खूब भीड़ देखने को मिली। लोगों को लुभाने के लिए कही खाने-पीने में विशेष ऑफर दिए गए तो कहीं किसी सिंगर का लाइव शो और डीजे की धुन। जश्न का आलम यह था कि सड़क से लेकर बार, रेस्टोरेंट और होटल दूधिया रोशनी में नहाए हुए नजर आए।

नए साल की खुशी में टीटीडी ने मंदिर को सजाया
विश्व प्रसिद्ध आंध्रप्रदेश के तिरुमला तिरूपति देवस्थानम (टीटीडी) ने नए साल के अवसर पर भगवान तिरूपति बालाजी के मंदिर को ताजे पुष्पों से सजाया है। मंदिर प्रशासन ने लाइटों का भी बखूबी इस्तेमाल किया है, जो देखने लायक है।

कनॉट प्लेस में सबसे ज्यादा भीड़
सबसे ज्यादा भीड़ रविवार को कनॉट प्लेस में देखने को मिली, जहां कपल एक दूसरे का हाथ पकड़े नए साल का बेसब्री से इंतजार करते हुए नजर आए। नई दिल्ली ट्रेडर्स असोसिएशन के जॉइंट सेक्रेटरी अमित गुप्ता ने बताया कि न्यू ईयर के लिए कई रेस्टोरेंट में नए मेन्यू तैयार किए गए थे। साथ ही कई रेस्टोरेंट, क्लब में लाइव सिंगर्स के परफॉर्मेंस का लुत्फ उठाया। नए साल के स्वागत में दुकानों के बाहर विशेष ऑफर के पोस्टर भी लगे हुए नजर आए। व्यापारियों के मुताबिक, 31 दिसंबर को हर साल कनॉट प्लेस में लोगों की भीड़ लगभग दोगुनी हो जाती है। मार्केट को आकर्षक बनाने के लिए दुकानदार एक महीने पहले से ही इसकी तैयारी में जुट जाते हैं। हालांकि, रात 8 बजे कनॉट प्लेस को बंद कर दिया गया। वहीं, दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स असोसिएशन के प्रेजिडेंट लवलीन आनंद ने बताया कि शनिवार से लेकर रविवार की रात तक लगभग सभी होटल फुल रहे।

मॉल में डेढ़ गुना भीड़
दिल्ली के सभी मॉल रंगीन लाइटों से सजाए गए। मॉल में 2024 के बड़े-बड़े कटआउट्स भी लगाए गए, जहां लोग सेल्फी लेते हुए नजर आए। एक मॉल के मालिक हर्षवर्धन बंसल ने बताया कि पिछले रविवार के मुकाबले 31 दिसंबर को मॉल में डेढ़ गुना भीड़ उमड़ी। मॉल की हर दुकान के बाहर डिस्काउंट का पोस्टर भी लगाया गया था। जिसकी वजह से लोगों ने खूब खरीदारी की।

इधर, नाखुश दिखे व्यापारी
साउथ एक्स पार्ट वन मार्केट असोसिएशन के प्रेजिडेंट अंकुश बोरा ने बताया कि 31 दिसंबर को रविवार को होने के चलते कई लोगों ने अपनी पार्टियां कैंसिल कर दी। इसका कारण सोमवार को वर्किंग डे होना बताया जा रहा है। इसके एवज में शनिवार को क्लब, रेस्टोरेंट में लोगों ने खूब पार्टी की। नतीजतन, रविवार की शाम को मार्केट में ज्यादा रौनक देखने को नहीं मिली। वहीं, कुछ लोग नए साल का जश्न मनाने के लिए शहर से बाहर जा चुके हैं तो कुछ लोगों ने अपने घरों में पार्टी की।

नए साल पर सज गए मंदिर भी
नए साल के स्वागत के लिए मंदिरों में भी पूरी तैयारी की गई है। रंग-बिरंगी रौशनी, खूशबूदार देशी और विदेशी फूलों से मंदिरों को सजाया गया है। कई मंदिरों में धार्मिक आयोजन भी किए जा रहे हैं। भीड़ को देखते हुए कुछ मंदिरों के पट समय से पहले भी खोले जाएंगे। मंदिरों के साथ चर्च में भी भीड़ रहने की संभावना है। चांदनी चौक स्थित प्राचीन गौरी शंकर मंदिर को रंग-बिरंगी लाइटों और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। यह सजावट अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर में श्रीराम की मूर्ति के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह तक रहेगी। नए साल के पहले दिन यहां काफी संख्या में भक्त पहुंचेंगे। माना जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग 800 साल पुराना है। कनॉट प्लेस के हनुमान मंदिर में भी साल के पहले दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। बिड़ला मंदिर (लक्ष्मी नारायण मंदिर) में भी साल के पहले दिन बड़ी संख्या में भक्तों के आने की संभावना है। इसके लिए मंदिर में खास तैयारियां की गई हैं।

इन मंदिरों में सबसे ज्यादा भीड़
नए साल पर दिल्ली के जगन्नाथ मंदिर में भी काफी भीड़ रहती है। यह मंदिर उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी की कॉपी है। ईस्ट ऑफ कैलाश स्थित ईस्कॉन मंदिर में साल के पहले दिन न केवल दिल्ली बल्कि एनसीआर से भी काफी लोग आते हैं। मंदिर के बीचोंबीच एक हॉल है। इस हॉल में महाभारत और भगवान कृष्ण के जीवन को चित्रित किया गया है। यहां एक संग्रहालय भी है, जहां भगवद् गीता की प्रतियां देखी जा सकती हैं। पंजाबी बाग स्थित ईस्कॉन मंदिर में भी काफी भीड़ रहती है। यहां पर सुबह से ही भक्त पहुंचना शुरू हो जाते हैं। मंदिर प्रशासन ने इसके लिए खास तैयारियां की हुई है। इसके अलावा छतरपुर मंदिर, कालकाजी मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, झंडेवाला मंदिर में भी काफी भीड़ रहने की संभावना है।

सांसद पत्नी के साथ स्वर्ण मंदिर पहुंचे एसएडी अध्यक्ष
नए साल के अवसर पर शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल स्वर्ण मंदिर पहुंचे। उन्होंने अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान बादल ने कहा कि हम दरबार साहिब में प्रार्थना करने आए हैं कि नया साल सभी के लिए खुशियां भरा हो। देश के साथ-साथ पंजाब भी विकास की बुलंदियों को प्राप्त करे। वहीं, हरसिमरत कौर ने सभी को नए साल की शुभकामनाएं दीं और कहा कि हम सभी को भगवान आशीर्वाद दें।

नए साल के अवसर पर केरल के सबरीमाला मंदिर में एक भक्तों का जनसैलाब पहुंचा। भक्तों ने भगवान अयप्पा के सामने माथा टेका और प्रार्थना की।

तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित चर्चों में नए साल की शुरुआत में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की गईं।

राजस्थान के अजमेर में लोगों ने भव्य तरीके से 2024 का स्वागत किया।

हरियाणा के गुरुग्राम में नए साल मनाया गया। कर्नाटक के बेंगलुरु में भी लोगों ने नए साल का जश्न मनाया। उन्होंने एमजी रोड पर आतिशबाजी की।

ओडिशा के भुवनेश्वर में लोगों ने आतिशबाजी कर नए साल का स्वागत किया। साथ ही कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में भी लोगों ने नए साल के जश्न में डूबे दिखे

पूरे देश के साथ-साथ उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी नए साल का जश्न मनाया जा रहा है। लोगों ने लखनऊ के हजरगंत में नए साल का स्वागत किया। राजधानी लखनऊ के साथ-साथ नोयडा में भी नया साल मनाया गया। 

मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया में भी लोग भारी संख्या में पहुंचे। युवाओं ने यहां ईश्वर के जयकारे लगाकर अपनी खुशी जाहिर की।
 


 


नेपाल में 4.3 की तीव्रता का भूकंप, किसी के जान-माल की नुकसान नहीं

नए साल के शुरू होने से पहले पड़ोसी देश नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। नैशनल सेंटर फॉर सिसमोलॉजी के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.3 मापी गई है। हालांकि किसी के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।

 तस्वीरें नोएडा से हैं। घर में इकट्ठे लोग नए साल को कुछ इस तरह जश्न मना रहे हैं।

 जलवायु परिवर्तन से चढ़ा डेंगू का ग्राफ, 10 गुना बढ़े मामले, पांच लाख से बढ़कर 52 लाख हुए केस

डब्ल्यूएचओ ने आगाह किया कि वैश्विक स्तर पर 2023 में डेंगू के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई और ऐसा उन देशों में भी हुआ है जो पहले इससे अछूते थे। वर्तमान में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़े खतरों में से एक बनता जा रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 2000 से 2019 के बीच डेंगू के मामलों में 10 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मामले पांच लाख से बढ़कर 52 लाख पहुंच गए। दुनियाभर में डेंगू के बढ़ते मामलों के लिए अलनीनो प्रभाव और जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में हो रही वृद्धि तथा बारिश के पैटर्न में हो रहा बदलाव जिम्मेदार है। शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, असल आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है, क्योंकि अधिकतर मामलों में संक्रमण के लक्षण सामने ही नहीं आते। कई देशों में डेंगू से जुड़े आंकड़ों को बीमारी के रूप में दर्ज ही नहीं किया जाता।

2020 से 2022 के बीच महामारी के दौरान इसके मामलों में कमी जरूर आई, लेकिन उसके बाद इसमें तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले 2019 में जब मामलों में आखिरी बार उछाल आया था तब यह बीमारी 129 देशों में दर्ज की गई थी। 2023 में 80 देशों में डेंगू के 50 लाख से ज्यादा मामले सामने आए। साथ ही पांच हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

अछूते देश भी चपेट में
डब्ल्यूएचओ ने आगाह किया कि वैश्विक स्तर पर 2023 में डेंगू के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई और ऐसा उन देशों में भी हुआ है जो पहले इससे अछूते थे। वर्तमान में यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़े खतरों में से एक बनता जा रहा है। जिन देशों में जलवायु परिवर्तन का असर ज्यादा है वहां यह तेजी से फैल रहा है।

400 करोड़ लोग खतरे की जद में
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में करीब 400 करोड़ लोग डेंगू के खतरे की जद में हैं। हालांकि, अधिकतर संक्रमितों में इसके लक्षण नजर नहीं आते और वे एक से दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं। 2023 के दौरान इसके मामलों में जो उछाल आया है उसके लिए इसके वैक्टरों के बदलते वितरण जिम्मेदार हैं। मुख्य रूप से एडीज एजिप्टी और एडीज अल्बोपिक्टस के लिए माहौल अनुकूल होता जा रहा है। इनके संबंध बढ़ते तापमान के साथ जलवायु घटना अलनीनो की वजह से बारिश के पैटर्न में आ रहे बदलावों से जुड़े हैं।

अमेरिकी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित
2023 में अमेरिकी क्षेत्र डेंगू से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। एक जनवरी से 11 दिसंबर के बीच इस क्षेत्र के 42 देशों में डेंगू के कुल 41 लाख संदिग्ध मामले सामने आए हैं। इनमें 6,710 गंभीर मामले थे, जिनमें से 2,049 लोगों की मौत तक हो गई। पूर्व भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सबसे पहले 1998 में डेंगू के मामले सामने आए थे। तब से यह वायरस नौ देशों में फैल चुका है। इस क्षेत्र में 2023 के दौरान पाकिस्तान, सऊदी अरब और ओमान में सबसे ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है।

अबूझमाड़ में नक्सली ठिकानों को ध्वस्त करने की तैयारी, खात्मे के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण

अबूझमाड के वन क्षेत्रों में 237 गांव आते हैं, जहां रहने वाले लगभग 35,000 लोगों की आबादी मुख्यत: आदिवासी हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में केंद्रीय या राज्य पुलिसबल का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। कहा जाता है कि सशस्त्र माओवादी कैडर राज्य के दक्षिण बस्तर क्षेत्र में ओडिशा से लगती सीमा के रास्ते इधर-उधर आते-जाते रहते हैं और प्रशिक्षण भी चलता रहता है।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कहा था कि सरकार नक्सलवाद पर नकेल कसने में जुटी है और ये समस्या खात्मे के कगार पर पहुंच चुकी है। इसी क्रम में बचे-खुचे नक्सली गढ़ों में आखिरी चरण के अभियान को गति देने के लिए करीब 3,000 बीएसएफ जवानों को ओडिशा से छत्तीसगढ़ भेजा जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बीएसएफ की इन तीन बटालियनों के अलावा इतनी ही आईटीबीपी इकाइयां भी अबूझमाड़ के नक्सली गढ़ में आगे बढ़ेंगी।

ह मंत्री शाह ने एक दिसंबर को बीएसएफ की स्थापना की 59वीं वर्षगांठ पर जवानों को संबोधित करते हुए कहा था कि वामपंथी उग्रवाद पर बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीपी जैसे बलों के आखिरी प्रहार की प्रक्रिया जारी है। सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में छह नए सीओबी या कंपनी ऑपरेटिंग बेस बनाने का निर्देश दिया गया है, जिसमें शुरुआत में ओडिशा के मलकानगिरी में स्थित अपनी एक बटालियन को अंतर-राज्य सीमा के पार ले जाया जाएगा। बीएसएफ की एक बटालियन में 1,000 से अधिक जवान होते हैं।

अभी पुलिस का कोई स्थायी ठिकाना नहीं
अबूझमाड के वन क्षेत्रों में 237 गांव आते हैं, जहां रहने वाले लगभग 35,000 लोगों की आबादी मुख्यत: आदिवासी हैं। फिलहाल इस क्षेत्र में केंद्रीय या राज्य पुलिसबल का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। कहा जाता है कि सशस्त्र माओवादी कैडर राज्य के दक्षिण बस्तर क्षेत्र में ओडिशा से लगती सीमा के रास्ते इधर-उधर आते-जाते रहते हैं और प्रशिक्षण भी चलता रहता है।

सीमावर्ती क्षेत्र पर खास निगरानी…
एक सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि नक्सली ओडिशा के मलकानगिरी, कोरापुट और कंधमाल जैसे जिलों में आने-जाने के लिए छत्तीसगढ़ के बस्तर गलियारे का उपयोग कर रहे हैं। इसलिए केंद्रीय बलों को सीमावर्ती क्षेत्र पर अधिक फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाने को कहा गया है। जनवरी में विभिन्न एजेंसियों की बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोध अभियान तेज करने पर रणनीति बनेगी जिसे कगार नाम दिया जा सकता है।

सघन क्षेत्रों की तरफ बढ़ने का निर्देश
सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के नारायणपुर, राजनांदगांव और कोंडागांव जिलों में अभी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की करीब आठ बटालियन तैनात हं, और इन्हें अबूझमाड़ के सघन क्षेत्रों में आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया है। नारायणपुर जिले में करीब 4,000 वर्ग किमी का वन क्षेत्र है, जिसे सशस्त्र नक्सली कैडरों का गढ़ माना जाता है।

आखिरी गढ़ तक सिमटी ताकत, खात्मे के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण
अधिकारियों के मुताबिक, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर से लेकर नारायणपुर और कोंडागांव और आगे उत्तर में कांकेर जिलों वाले बस्तर क्षेत्र ही माओवादियों का आखिरी गढ़ है और इनकी बची-खुची यहीं तक सिमटी हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, इन गढ़ों को ध्वस्त करने के लिए पूरी ताकत इस्तेमाल के साथ बुनियादी ढांचे का भी निर्माण किया जा रहा है ताकि राज्य सरकार विकास कार्यों की शुरुआत कर सके।

10 साल में 52 फीसदी घटी नक्सली हिंसा की घटनाएं

नीतीश की ताजपोशी के बाद अब गठबंधन की राह और कठिन, सीट बंटवारे से लेकर जदयू-राजद के बीच खटास का संकट

गठबंधन की बड़ी मुश्किल बिहार में राजद और जदयू के रिश्ते में आई खटास है। जदयू के नेता नाम न छापने  की शर्त पर बताते हैं कि राजद ने तेजस्वी की ताजपोशी के लिए ललन सिंह के साथ मिल कर पार्टी को तोड़ने की साजिश रखी। जाहिर तौर पर इसके बाद राजद—जदयू के बीच अविश्वास का वातावरण तैयार हुआ है।

विपक्षी गठबंधन इंडिया की राह आसान नहीं है। सीट बंटवारे के फार्मूले पर फंसे पेच के बीच बिहार में राजद और जदयू के बीच बढ़ी खटास ने गठबंधन की परेशानी बढ़ा दी है। महाराष्ट्र,बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ को महत्व नहीं दे रहे। दूसरी ओर दिल्ली, हरियाणा, गुजरात में आम आदमी पार्टी ने सीट बंटवारे को उलझा दिया है। मुश्किल यह है कि गठबंधन की अगली बैठक से पहले सीट बंटवारे से संबंधित फार्मूले पर रविवार तक सहमति बन जानी चाहिए थी, मगर इस दिशा में गठबंधन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया है।

इस मामले में सबसे अहम दांव बिहार के सीएम नीतीश कुमार का है। राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को चलता कर खुद इस पद पर आए नीतीश ने गठबंधन के नेता के तौर पर अपना दावा पेश कर दिया है। दावेदारी में मजबूती लाने के लिए नीतीश ने जातिगत जनगणना के सवाल पर पूरे देश में घूमने की योजना बनाई है। यह योजना ऐसे समय में बनाई गई है, जब गठबंधन की इसी महीने हुई बैठक में टीएमसी अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने गठबंधन के नेता के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकाजुन खरगे का नाम आगे बढ़ाया था।

सीएम रहते चेहरा बनना चाहते हैं नीतीश
राजद की रणनीति थी कि नीतीश को गठबंधन का नेता या संयोजक बना कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार का गठन किया जाए। इसके लिए राजद ने जदयू के अध्यक्ष पद से हटाए गए ललन सिंह को साधा था। इसके उलट नीतीश की योजना बिहार का सीएम रहते गठबंधन का नेता बनने की है। नीतीश ने राजद के दांव के काट के लिए ही अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की बलि ली है। अब खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद देशव्यापी दौरे की योजना बना कर नीतीश ने गठबंधन के नेता के तौर पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।

सामान्य नहीं रहे राजद-जदयू के रिश्ते
गठबंधन की बड़ी मुश्किल बिहार में राजद और जदयू के रिश्ते में आई खटास है। जदयू के नेता नाम न छापने  की शर्त पर बताते हैं कि राजद ने तेजस्वी की ताजपोशी के लिए ललन सिंह के साथ मिल कर पार्टी को तोड़ने की साजिश रखी। जाहिर तौर पर इसके बाद राजद—जदयू के बीच अविश्वास का वातावरण तैयार हुआ है।

अगली बैठक में साफ होगी तस्वीर
विपक्षी गठबंधन इंडिया बचेगा या नहीं इसकी तस्वीर इसकी अगली बैठक में साफ होगी। हालांकि सवाल है कि सीटों के बंटवारे पर फंसे पेच के बावजूद बैठक बुलाई भी जाएगी या नहीं? फिर नेता पद के लिए नीतीश की ओर से पेश की गई दावेदारी के इतर सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब जैसे राज्यों में खाली हाथ रहने के लिए तैयार है? जाहिर तौर पर कांग्रेस ऐसा नहीं चाहेगी। वह चाहेगी कि क्षेत्रीय दल भी उसके लिए दिल बड़ा करें।

कई राज्यों में क्षेत्रीय दल कांग्रेस से पहले ही बना रहे दूरी
विपक्षी गठबंधन कितना स्थाई है सीटों के बंटवारे का फार्मूला सामने आने के बाद ही इसका पता चल पाएगा। ताजा स्थिति यह है कि महाराष्ट्र में उद्धव गुट का शिवसेना, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, बिहार में राजद—जदयू, दिल्ली—पंजाब में आप और उत्तर प्रदेश में सपा कांग्रेस को भाव देने के मूड में नहीं है। चूंकि बिहार में गठबंधन का दायरा बहुत बड़ा है, ऐसे में राजद—जदयू कांग्रेस को दो—तीन सीटों पर, बंगाल में ममता बनर्जी दो—तीन सीटों पर, दिल्ली और पंजाब में आप कांग्रेस को इतनी ही सीटें देना चाहती हैं। मुश्किल यह है कि आप चाहती है कि कांग्रेस हरियाणा, गुजरात में उसके लिए बड़ा दिल दिखाए। ममता पश्चिम बंगाल में वाम दलों को एक भी सीट नहीं देना चाहतीं। ऐसे में सीटों के बंटवारे के फार्मूले पर सहमति बनती नहीं दिख रही।

राहुल और सोनिया गांधी क्‍या खाते हैं? अपनी किचन से दुनिया को कराया रूबरू

नई दिल्‍ली:राहुल ने ‘मां, यादें और मुरब्बा’ शीर्षक से वीडियो जारी किया। इसमें मां-बेटे की जोड़ी को नए सिरे से मुरब्बा बनाते हुए एक मजेदार मजाक करते हुए दिखाया गया है। राहुल के मुताबिक नुस्खा उनकी बहन प्रियंका गांधी का था। क्‍या आप जानते हैं कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी क्‍या खाते हैं? उन्‍हें क्‍या खाना सबसे ज्‍यादा पसंद है? उनकी पसंदीदा डिश कौन सी है? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दुनिया को अपनी किचन से रूबरू कराया है। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी विदेश से लौटते ही एक व्यंजन खाना जरूर पसंद करती हैं। वह है अरहर की दाल और चावल। नए साल की पूर्व संध्या पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के यूट्यूब चैनल पर जारी एक वीडियो में सोनिया गांधी ने अपने खाने की पसंद को साझा किया। वीडियो में दोनों नेता संतरे का मुरब्बा (जैम) बनाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में राहुल कहते हैं कि यह उनकी बहन प्रियंका की रेसिपी है।

 

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में हैं। इसमें दोनों मिलकर घर पर मुरब्बा बनाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक ऐसा मोमेंट भी दिया जब राहुल सोनिया से कहते हुए नजर आए कि अगर भाजपा वााले चाहें तो उन्हें ये मुरब्बा (जैम) मिल सकता है। इस पर सोनिया मजाक में कहती हैं- वे इसे हम पर वापस फेंक देंगे।

बता दें कि राहुल ने ‘मां, यादें और मुरब्बा’ शीर्षक से वीडियो जारी किया। इसमें मां-बेटे की जोड़ी को नए सिरे से मुरब्बा बनाते हुए एक मजेदार मजाक करते हुए दिखाया गया है। राहुल के मुताबिक नुस्खा उनकी बहन प्रियंका गांधी का था।

बीजेपी वाले भी ले सकते हैं जैम
सिट्रस क्लियर स्वीट जेली बनाते समय राहुल ने  कहा, ‘बीजेपी वालों को अगर जैम लेना है तो वो भी ले सकते हैं।’ इस पर सोनिया गांधी ने कहा, ‘वे इसे हम पर फेंकेंगे,’ इस पर राहुल ने हंसते हुए कहा, ‘हम इसे फिर से उठाएंगे’।

सोनिया बोलीं, राहुल जिद्दी हैं
सोनिया गांधी के मुताबिक राहुल की जिद उन्हें काफी परेशान करती है क्योंकि वह भी काफी जिद्दी हैं। राहुल की एक खूबी जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है, उस पर उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बहुत केयरिंग हैं।  उन्होंने कहा, ‘वह  बहुत देखभाल करने वाले हैं। खासकर जब मैं ठीक नहीं होती तो राहुल और प्रियंका दोनों मेरा ख्याल रखते हैं।’ इस बीच, घर में सबसे अच्छा रसोइया कौन है, इस पर राहुल ने कहा कि वह सोनिया गांधी की मां थीं।’ उन्होंने आगे कहा, उसने दादी के कश्मीरी रिश्तेदारों से बहुत सारी चीज़ें सीखीं,’।

ब्लैक होल के राज जानने आज उड़ेगा एक्सपोसैट, 21 मिनट में अंतरिक्ष में 650 किमी ऊंचाई पर पहुंचेगा

एक्सपोसैट में दो उपकरण लगाए गए हैं। पहला पोलरीमीटर इंस्ट्रूमेंट इन एक्सरे यानी पॉलिक्स। इसे रमन शोध संस्थान ने बनाया है। वहीं एक्सरे स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड टाइमिंग यानी एक्सपेक्ट दूसरा उपकरण है, जिसे यूआर राव उपग्रह केंद्र बेंगलूरू ने बनाया है।एक्सपोसैट में दो उपकरण लगाए गए हैं। पहला पोलरीमीटर इंस्ट्रूमेंट इन एक्सरे यानी पॉलिक्स। इसे रमन शोध संस्थान ने बनाया है। वहीं एक्सरे स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड टाइमिंग यानी एक्सपेक्ट दूसरा उपकरण है, जिसे यूआर राव उपग्रह केंद्र बेंगलूरू ने बनाया है।

आज भारत साल की शुरुआत खगोल विज्ञान के सबसे बड़े रहस्यों में से एक ब्लैक होल के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उपग्रह भेज कर करेगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के इस पहले एक्स-रे पोलरीमीटर उपग्रह यानी ‘एक्सपोसैट’ को रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) सी 58 महज 21 मिनट में अंतरिक्ष में 650 किमी ऊंचाई पर ले जाएगा। इस रॉकेट का यह 60वां मिशन होगा। इस मिशन में एक्सपोसैट के साथ साथ 10 अन्य उपग्रह भी पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होंगे।

मिशन के लिए रविवार सुबह 8:10 बजे से उलटी गिनती शुरू कर दी गई। प्रक्षेपण सुबह 09:10 बजे चेन्नई से 135 किमी दूर मौजूद श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष-अड्डे के प्रथम लॉन्च पैड से होगा। इसरो ने बताया कि एक्सपोसैट 5 साल काम करने के लिए बना है, यानी साल 2028 तक इसे काम में लिया जाएगा। प्रक्षेपण के लिए 44.4 मीटर ऊंचा पीएसएलवी-डीएल प्रारूप का रॉकेट बनाया गया है। इसका लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 260 टन होगा। यह सबसे पहले पृथ्वी से 650 किमी ऊंचाई पर एक्सपोसैट को स्थापित करेगा। यह करने के लिए इसे लिफ्ट-ऑफ के बाद 21 मिनट लगेंगे। यहां काम खत्म नहीं होगा।

इसके बाद पोयम
उपग्रहों को स्थापित करने के बाद वैज्ञानिक पीएसएलवी-सी 58 को पृथ्वी की ओर 350 किमी की ऊंचाई तक लाएंगे। इसके लिए रॉकेट में शामिल किए जा रहे चौथे चरण का उपयोग होगा। यहां पीएसएलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल – 3 (पोयम 3) परीक्षण अंजाम दिया जाएगा। यह बता दें कि अप्रैल 2023 में पीएसएलवी सी 55 रॉकेट के साथ भी इसरो ने पोयम परीक्षण किया था।

ये 2 उपकरण करेंगे मदद
एक्सपोसैट में दो उपकरण लगाए गए हैं। पहला पोलरीमीटर इंस्ट्रूमेंट इन एक्सरे यानी पॉलिक्स। इसे रमन शोध संस्थान ने बनाया है। वहीं एक्सरे स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड टाइमिंग यानी एक्सपेक्ट दूसरा उपकरण है, जिसे यूआर राव उपग्रह केंद्र बेंगलूरू ने बनाया है।

10 अन्य उपग्रह भी होंगे स्थापित

  1. रेडिएशन शील्डिंग एक्सपेरिमेंट मॉड्यूल, इसे टेक मी 2 स्पेस कंपनी ने बनाया
  2. महिलाओं का बनाया उपग्रह, जिसे एलबीएस महिला तकनीकी संस्थान ने तैयार करवाया
  3. बिलीफसैट, एक रेडियो उपग्रह जो केजे सोमैया तकनीकी संस्थान ने शौकिया तौर पर बनवाया
  4. ग्रीन इम्पल्स ट्रांसमीटर, इसे इंस्पेसिटी स्पेस लैब ने बनाया
  5. लॉन्चिंग एक्सपीडिशंस फॉर एस्पायरिंग टेक्नोलॉजीस टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर उपग्रह, इसे ध्रुव स्पेस ने बनाया
  6. रुद्र 0.3 एचपीजीपी और आर्का 200, दोनों उपग्रह बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने विकसित किए
  7. डस्ट एक्सपेरिमेंट, जिसे इसरो के पीआरएल ने बनाया
  8. फ्यूल सेल पावर सिस्टम और सिलिकॉन आधारित उच्च ऊर्जा सेल, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र ने बनाया

इसलिए खास
इसरो ने बताया कि इस उपग्रह का लक्ष्य सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली गहन एक्स-रे का पोलराइजेशन यानी ध्रुवीकरण पता लगाना है। यह किस आकाशीय पिंड से आ रही हैं, यह रहस्य इन किरणों के बारे में काफी जानकारी देते हैं। पूरी दुनिया में एक्स-रे ध्रुवीकरण को जानने का महत्व बढ़ा है। यह पिंड या संरचनाएं ब्लैक होल, न्यूट्रॉन तारे (तारे में विस्फोट के बाद उसके बचे अत्यधिक द्रव्यमान वाले हिस्से), आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद नाभिक आदि को समझने में मदद करता है। इससे आकाशीय पिंडों के आकार और विकिरण बनाने की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।


 उत्तर प्रदेश: अयोध्या के सरयू घाट पर आरती

लोकसभा का चुनाव तक PMO और सरकार अयोध्या से चलेगी: संजय राउत

शिवसेना(UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, “जब तक लोकसभा का चुनाव हो रहा है तब तक PMO और सरकार अयोध्या से चलेगी… हम भी राम भक्त हैं। हमने और हमारी पार्टी ने राम मंदिर के लिए खून, त्याग और बलिदान दिए हैं लेकिन इस तरह की राजनीति देश में न कभी हुई है और न कभी होगी… हम 5000 साल पीछे जाकर देश चला रहे हैं।

मुंबई को बम से उड़ाने की धमकी

मुंबई पुलिस कंट्रोल को कल शाम करीब 6 बजे एक धमकी भरा फोन आया, जिसमें फोन करने वाले ने दावा किया कि मुंबई में धमाके होंगे और इतना कहने के बाद फोन काट दिया। पुलिस ने कई जगहों पर जांच शुरू कर दी है लेकिन अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। पुलिस फिलहाल कॉल करने वाले का विवरण जानने की कोशिश कर रही है:

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