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ताजा समाचार -बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान आज,बंधकों की रिहाई के लिए तेल अवीव में प्रदर्शन,शहजाद पूनावाला का भूपेश बघेल पर निशाना

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ निकाल रही है क्योंकि सरकार ने उसे संसद में मुद्दे उठाने का मौका नहीं दिया। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई में एक राष्ट्र, एक चुनाव विषय पर गठित समिति ने देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए मौजूदा कानूनी प्रशासनिक ढांचे में उचित बदलाव करने के लिए जनता से सुझाव मांगे हैं। देश में बीते 24 घंटे के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के 774 नए मामले सामने आए और दो संक्रमितों की मौत हो गई। मुंबई पुलिस ने भगवान राम को मांसाहारी बताने वाली टिप्पणी को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। , प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल में कथित राशन घोटाले के सिलसिले में बनगांव नगर निकाय के पूर्व अध्यक्ष शंकर आद्या को शनिवार तड़के गिरफ्तार कर लिया।

बंधकों की रिहाई के लिए तेल अवीव में प्रदर्शन, नेतन्याहू सरकार को हटाने की मांग, अब तक 23,861 की मौत

इस्राइल और हमास के बीच लंबे समय से युद्ध जारी है। युद्ध में दोनों पक्षों के करीब 23 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। आतंकी संगठन हमास ने इस्राइल के कई नागरिकों को बंधक बना रखा है। जिनकी रिहाई के लिए लोगों ने इस्राइल में विरोध प्रदर्शन किया। बंधकों के परिजनों ने नेतन्याहू सरकार को हटाने की मांग की है। इसी के साथ उनकी मांग है कि गाजा में युद्ध को समाप्त कराया जाए। बता दें, हमास के चंगुल में अब भी 100 से अधिक इस्राइली लोग फंसे हुए हैं। इस्राइल के प्रमुख शहर तेल अवीव के होस्टेज स्क्वायर में इस्राइली बंधकों के हजारों समर्थकों ने शनिवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने बुशहा, बुशहा, बुशहा के नारे लगाए, जिसका अर्थ स्थानीय भाषा में शर्म, शर्म, शर्म है। 

जनता की सरकार से नाराजगी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस्राइल के प्रमुख शहर तेल अवीव के होस्टेज स्क्वायर में इस्राइली बंधकों के हजारों समर्थकों ने शनिवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने बुशहा, बुशहा, बुशहा के नारे लगाए, जिसका अर्थ स्थानीय भाषा में शर्म, शर्म, शर्म है। विदेशी मीडिया इसे सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा बता रही है। लोगों ने इस युद्ध के लिए नेतन्याहू सहित अन्य अधिकारियों को दोषी ठहराया है।

अब तक दोनों पक्ष के 22,811 लोगों की मौत
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले 24 घंटों में इस्राइली सेना के हमले में 22 फलस्तीनी लोगों की मौत हुई। सात अक्तूबर से अब तक इस्राइली हमलों में कम से कम 22,722 फलस्तीनी लोगों की मौत हो चुकी है और 58,166 लोग घायल हैं। वहीं, अब तक आंतकियों के हमलों में  1,139 इस्राइली लोगों की मौत हुई है। 

हमले के यह तीन कारण
हमास ने कहा कि ये यरूशलम में अल-अक्सा मस्जिद को इस्राइल की तरफ से अपवित्र करने का बदला है। हमास ने कहा कि इस्राइली पुलिस ने अप्रैल 2023 में अल-अक्सा मस्जिद में ग्रेनेड फेंक इसे अपवित्र किया था। इस्राइली सेना लगातार हमास के ठिकानों पर हमले कर रही है और अतिक्रमण कर रही है। इस्राइली सेना हमारी महिलाओं पर हमले कर रही है। हमास के प्रवक्ता गाजी हमाद ने अरब देशों से अपील है कि इस्राइल के साथ अपने सभी रिश्तों को तोड़ दें। हमाद ने कहा कि इस्राइल एक अच्छा पड़ोसी और शांत देश कभी नहीं हो सकता है।

अंशकालिक कर्मचारी भी समान वेतन के हकदार, याची को समान वेतन देने का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बहुत ही अहम फैसले में स्पष्ट किया कि अंशकालिक कर्मचारी भी पूर्णकालिक कर्मचारी के समान वेतन के हकदार हैं। यह सिद्धांत उन दैनिक, अस्थाई और अनुबंधित कर्मचारियों पर भी लागू होता है, जो नियमित कर्मचारियों की तरह ही ड्यूटी करते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला ने भारत गिरि की याचिका पर आदेश पारित करते हुए टिप्पणी की है, जिसमें लवलेश शुक्ल अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने बहस किया है।

याची की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता लवलेश शुक्ल ने तर्क दिया कि याची अंशकालिक माली है, लेकिन उसे न्यूनतम वेतन भी नहीं मिलता है, जबकि याची के कार्य की प्रकृति पूर्णकालिक है, लेकिन वह कम पैसे में अपनी इच्छा के विरूद्ध कार्य करने को मजबूर है।

अतः समान वेतन देने से इन्कार करना शोषणकारी, दमनकारी और विभेदकारी है। साथ ही संविधान में उल्लिखित समान कार्य के लिए समान वेतन के लक्ष्य का भी घोर उल्लघंन है।

न्यायालय ने इस विभेद को संविधान की मूल भावना के विपरीत माना और कहा कि यदि कोई कर्मचारी दूसरे कर्मचारी के समान काम या जिम्मेदारी निभाता है तो उसमें विभेद नहीं किया जाना चाहिए और वह समान वेतन का हकदार हैं और आदेशित किया कि याचिकाकर्ता भी समान वेतन पाने का हकदार हैं। अधिवक्ता ने अपने तर्क के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की कई नजीरों का हवाला दिया।

 लाहौल में कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ हिम तेंदुआ, फिर होगी गणना

दुर्लभ प्राणियों में शुमार हिम तेंदुए को लाहौल में एक वन कर्मी ने अपने कैमरे में कैद किया है। अब वन विभाग फिर से संभावित इलाकों में कैमरे से ट्रैप कर हिम तेंदुए की गणना करने जा रहा है। 5 जनवरी को वन विभाग में तैनात खंड अधिकारी ने लाहौल में एक हिम तेंदुए को अपने कैमरे में कैद किया है। विश्व में हिम तेंदुए की संख्या लगाातार कम हो रही है, वहीं हिमाचल में इस दुर्लभ प्रजाति के वन्य प्राणी के मिलने से पर्यावरण व वन्य प्राणी संतुलन के लिए अच्छी खबर है। हिमाचल के राज्य जानवर हिम तेंदुए की सबसे अधिक मौजूदगी लाहौल-स्पीति, पांगी, भरमौर व किन्नौर में पाई जाती है। इसे पहले 2018 को नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन ने ट्रैप कैमरे के जरिए गणना की थी। इस दौरान कैमरों में ट्रैप करने के बाद 52 से 73 तक हिम तेंदुए होने की पुष्टि हुई थी।

अब वन विभाग फिर से संभावित इलाकों में कैमरे से ट्रैप कर हिम तेंदुए की गणना करने जा रहा है। 5 जनवरी को वन विभाग में तैनात खंड अधिकारी ने लाहौल में एक हिम तेंदुए को अपने कैमरे में कैद किया है। 

जानकारा के मुताबिक हिम तेंदुए पर्यावरण और वन्य प्राणी को संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। तेंदुआ अब दुनिया के 10 से 12 देशों में ही पाया जाता है और यहां भी इसकी संख्या लगातार कम हो रही है। वनमंडलाधिकारी लाहौल आईएफएस अनिकेत बानवे ने कहा कि उनके वन खंड अधिकारी ने 5 जनवरी को लाहौल में दुर्लभ प्रजाति के हिम तेंदुए को कैमरे में कैद किया है। विभाग फिर से हिम तेंदुए की गणना करेगा, लेकिन इसकी कोई निर्धारित तिथि अभी तय नहीं हुई है।

3,500 से 4,000 मीटर की ऊंचाई में पाया जाता है हिम तेंदुआ
हिम तेंदुआ सूबे में 3,500 से 4,000 मीटर ऊंचे इलाकों में पाया जाता है। हिमाचल में भागा, भरमौर, कुल्लू के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, मियाड, ताबो, किन्नौर, पांगी, भरमौर, स्पीति आदि जगहों पर हिम तेंदुए पाए जाते हैं। इनके शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, लोगों में इनके संरक्षण के प्रति जागरूकता से हिम तेंदुए की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। विश्वभर में हिम तेंदुओं की संख्या 5,000 से भी कम है। जबकि, भारत में इनकी संख्या महज 300 से 500 के बीच है।

बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए मतदान आज, वोटिंग से पहले क्रैश हुआ इलेक्शन एप

बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए आज मतदान होना है। निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। बांग्लादेश संसद की 300 सीटों के लिए मतदान सुबह आठ बजे शुरू होगा। नतीजे आठ जनवरी को आने की उम्मीद है। संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसके सहयोगियों ने चुनाव बहिष्कार का फैसला किया है। बीएनपी की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद घर में नजरबंद हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेृतत्व वाली बीएनपी ने चुनाव से पहले 48 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। विपक्ष का दावा है कि प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के रहते हुए देश में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकता है। 

चुनाव आयोग का इलेक्शन एप क्रैश
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वोटिंग से पहले शनिवार शाम को बांग्लादेश चुनाव आयोग का चुनाव एप्लिकेशन ‘स्मार्ट इलेक्शन मैनेजमेंट बीडी’ क्रैश हो गया। एप काम करना बंद कर दिया है। चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों सहित चुनाव संबंधी विवरण ढूंढने के लिए एप लॉन्च किया था। आयोग का कहना है कि यह अस्थाई समस्या है। जल्द ही इसे ठीक कर लिया जाएगा। आयोग के मुताबिक, क्षमता से अधिक यूजर्स के एप आने से यह समस्या हुई।

मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त
बांग्लादेश चुनाव आयोग का कहना है कि देश भर के सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई है। सुरक्षा व्यवस्था भी चुस्त-दुरुस्त है। हिंसा को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) काजी हबीबुल अवल ने चेतावनी दी है कि अगर आम मतदान के दौरान कोई अनियमितता हुई तो चुनाव रद्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मतदान में धांधली, प्रलोभन और उम्मीदवारों के पक्ष में बाहुबल के इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

300 सीटों के लिए 1500 उम्मीदवार चुनाव मैदान में
मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी के चुनाव का बहिष्कार करने के कारण सत्तारूढ़ अवामी लीग के खिलाफ मैदान में कोई बड़ा राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं है। मुख्य मुकाबला अवामी लीग और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच है। संसद की 300 सीटों के लिए 1500 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। 42,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर रविवार को होने वाले मतदान में कुल 11.96 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस बार आम चुनावों में कुल 27 राजनीतिक दल भाग ले रहे हैं, जिनमें तृणमूल बीएनपी, इस्लामी फ्रंट, कृष्ण श्रमिक जनता लीग और गण फोरम प्रमुख दल हैं। बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव पर भारत के तीन प्रतिनिधियों सहित 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक नजर रखेंगे।

हसीना का सत्ता में लौटना लगभग तय
बांग्लादेश के मुख्य विपक्षी दल (बीएनपी) की चुनाव में अनुपस्थिति के कारण प्रधानमंत्री शेख हसीना की लगातार चौथी जीत तय मानी जा रही है। हसीना भारत की महत्वपूर्ण सहयोगी हैं, इसलिए यह चुनाव भारत के लिए महत्व रखता है। यही वजह है कि भारत बांग्लादेश के चुनाव नतीजों पर नजर रख रहा है।

चुनाव की पूर्व संध्या पर हिंसा 
बांग्लादेश में आम चुनावों की पूर्व संध्या पर चार मतदान केंद्रों को फूंक दिया गया और पांच प्राथमिक विद्यालयों को आग के हवाले कर दिया गया। इससे एक दिन पहले एक ट्रेन में आग लगाने से दो बच्चों समेत चार लोग मारे गए। घटना के सिलसिले में 8 गिरफ्तारियां हुईं। उधर, मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के चुनाव बहिष्कार के बीच कार्यकर्ताओं ने ढाका में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए। डॉ. सामंत लाल सेन ने कहा, शनिवार की हिंसा में आठों घायल गंभीर हैं। दो बच्चों सहित सभी आठों की श्वसन नलिकाएं जल गई हैं। डॉ. सेन ने संवाददाताओं से कहा, हम उन पर करीब से नजर रख रहे हैं।

विदेश मंत्री मसूद बिन मोमेन ने कहा, यह निंदनीय घटना हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के मूल पर चोट  करती है। उन्होंने वादा किया कि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। बीएनपी ने दक्षिण एशियाई देश के लोगों से चुनाव से दूर रहने को कहा है और शनिवार से देश भर में 2 दिनी हड़ताल का आह्वान किया है। आशंका है कि रविवार को मतदान केंद्रों पर वोट देने जा रहे लोगों को रोकने की कोशिश में हिंसा और अधिक भड़क सकती है।

मेट्रो रेल :विदेशी पत्रिका द इकोनॉमिस्ट के दावे को केंद्र सरकार ने किया खारिज

देश की सभी मेट्रो प्रणालियों में प्रतिदिन सफर करने वाले यात्रियों का आंकड़ा बढ़कर एक करोड़ पहुंच चुका है। मेट्रो यात्रियों की संख्या में यह वृद्धि तेजी से शहरीकरण की तरफ बढ़ते युवा भारत की उभरती आकांक्षाओं का प्रतीक है। केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने यह बात कहते हुए द इकोनॉमिस्ट के एक लेख को पूरी तरह निराधार बताया है। मंत्रालय के मुताबिक, पत्रिका ने भारत की मेट्रो रेल प्रणालियों पर अपने लेख में इस तथ्य की गलत व्याख्या की है कि भारत की विशाल मेट्रो व्यवस्था पर्याप्त संख्या में यात्रियों को आकर्षित करने में विफल हो रही है।

मंत्रालय का कहना है कि लेख में इस संदर्भ का नितांत अभाव नजर आता है कि भारतीय शहरों का विस्तार हो रहा है। वैसे भी, देश में एक करोड़ दैनिक यात्रियों का आंकड़ा पार कर चुकी सभी मेट्रो प्रणालियों में अगले एक-दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1.25 करोड़ होने की आशा है। 

मेट्रो रेल नेटवर्क का अध्ययन करना चाहिए
मंत्रालय के मुताबिक, इसमें तथ्यात्मक अशुद्धियां होने के साथ उन आवश्यक संदर्भों की भी अनदेखी की गई है, जिनके आधार पर भारत के बढ़ते मेट्रो रेल नेटवर्क का अध्ययन किया जाना चाहिए। लेख में इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया गया है कि भारत के मौजूदा मेट्रो रेल नेटवर्क के तीन-चौथाई से अधिक हिस्से की कल्पना और उसका निर्माण एवं संचालन 10 साल से भी कम समय पहले शुरू किया गया है।

लेख में दावा-अन्य साधनों का उपयोग बना पसंद
द इकोनॉमिस्ट ने 23 दिसंबर 2023 के अपने साल के आखिरी क्रिसमस डबल शीर्षक वाले अंक में प्रकाशित लेख में कहा था कि छोटी दूरी की यात्राएं करने वाले लोग परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करना पसंद करते हैं। इससे संकेत मिलता है कि महंगे परिवहन वाला बुनियादी ढांचा समाज के सभी वर्गों की सेवा नहीं कर पा रहा है।

शहरों के विस्तार की अनदेखी की
मंत्रालय का कहना है कि लेख में इस संदर्भ का नितांत अभाव नजर आता है कि भारतीय शहरों का विस्तार हो रहा है। वैसे भी, देश में एक करोड़ दैनिक यात्रियों का आंकड़ा पार कर चुकी सभी मेट्रो प्रणालियों में अगले एक-दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 1.25 करोड़ होने की आशा है। जैसे-जैसे हमारी मेट्रो प्रणाली विकसित होगी, यह संख्या और बढ़ती जाएगी।

सरकार के तर्क : युवाओं की पसंद, अर्जित कर रहीं लाभ
भारत की अधिकांश मेट्रो प्रणालियां पांच या दस वर्ष से कम पुरानी हैं, और इन्हें अगले 100 वर्षों की जरूरतों के लिहाज से योजनाबद्ध किया गया है। साक्ष्य पहले ही इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मेट्रो रेल प्रणाली महिलाओं और शहरी युवा वर्ग के लिए यात्रा का सबसे पसंदीदा साधन है।

पीओके में जरूरी चीजों की किल्लत से दूभर हुआ लोगों का जीवन, पाक सरकार के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन

पीओके में छात्र अभूतपूर्व शुल्क वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सेमेस्टर फीस बढ़ाकर उच्च शिक्षा आयोग (एचईसी) की नीति का उल्लंघन कर रहा है। सेमेस्टर फीस के नाम पर हर तीन या चार महीने में लाखों रुपए वसूले जाते हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट गहरा रहा है। भले ही पाकिस्तान ने कभी भी सीखने और ज्ञानोदय पर जोर नहीं दिया है, लेकिन जिन क्षेत्रों पर इस्लामाबाद ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, वहां शिक्षा की स्थिति विशेष रूप से भयावह है।

बेहतर सुविधाओं की सख्त आवश्यकता के बावजूद, शिक्षा क्षेत्र में छात्रों और कर्मचारियों को उनके बुनियादी अधिकारों से दूर रखा जा रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच, पीओके में शिक्षण और प्रशासनिक कर्मचारी अपने लंबे समय से लंबित वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं।

लोगों का जीवन दूभर हो गया है, इस क्षेत्र का सबसे बड़ा विभाग शिक्षा विभाग है, जिसके कर्मचारी यहां सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। शिक्षा के नाम पर एक ताकतवर माफिया कारोबार कर रहा है, जो मजदूरों का फायदा उठा रहा है।

पीओके के एक पत्रकार इश्तियाक मीर ने कहा, ‘निजी स्कूलों के मालिक सेवानिवृत्त नौकरशाह हैं, जिनका सरकार के भीतर काफी प्रभाव है।’ शैक्षणिक स्टाफ ने कई बार स्थानीय और संघीय सरकारों से अपील की है, लेकिन उनकी मांगें अधूरी हैं। इसके अलावा, शिक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें वेतन वृद्धि का भुगतान नहीं किया जाता, जिसके वे कानूनी रूप से हकदार हैं, तब तक विरोध प्रदर्शन बंद नहीं होगा।

मांगों को सुनने से किया इंकार
दूसरी ओर, पीओके में छात्र अभूतपूर्व शुल्क वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सेमेस्टर फीस बढ़ाकर उच्च शिक्षा आयोग (एचईसी) की नीति का उल्लंघन कर रहा है। सेमेस्टर फीस के नाम पर हर तीन या चार महीने में लाखों रुपए वसूले जाते हैं। यहां ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि गरीब छात्रों को शिक्षा न मिल सके। इश्तियाक ने कहा कि गरीबों के पास आजीविका के लिए पैसे नहीं हैं, वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे प्रदान कर सकते हैं? पाकिस्तानी सरकार ने अकादमिक कर्मचारियों और छात्रों की जायज मांगों को सुनने से इनकार कर दिया है। 

इसने पीओके के शैक्षणिक संस्थानों को उत्पीड़न के स्थलों में बदल दिया है। विशेष रूप से, पाकिस्तान शिक्षा को क्षेत्रों के अवैध कब्जे के लिए एक खतरे के रूप में देखता है, उसे डर है कि ज्ञान स्थानीय लोगों को उनके कानूनी अधिकारों को समझने और उनका दावा करने के लिए सशक्त बना सकता है।

राम मंदिर उद्घाटन के दिन 22 जनवरी से 26 तक घरों में ही रहें, बदरुद्दीन अजमल ने मुसलमानों को दी नसीहत

एआईयूडीएफ प्रमुख और सांसद बदरूद्दीन अजमल ने मुसलमानों से कहा कि हमें सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को 20 जनवरी से 25 जनवरी तक ट्रेन से यात्रा नहीं करनी चाहिए। राम जन्मभूमि में राम की मूर्ति रखी जाएगी, पूरी दुनिया इसे देखेगी। लाखों लोग आएंगे। भाजपा की योजना बड़ी है। इस अवधि के दौरान, हमें ट्रेन से यात्रा नहीं करनी चाहिए और घर पर रहना चाहिए। भाजपा मुसलमानों की सबसे बड़ी दुश्मन है।

छह बिल्डरों के ठिकाने से मिला तीसरे दिन भी कैश

नोएडा,दिल्ली सहित 35 स्थानों पर शुरू हुआ सर्च आपरेशन, आज साठ लाख कैश और बरामद। इसके साथ अब तक सौ करोड़ संदिग्ध निवेश के दस्तावेज भी आयकर टीम ने जब्त किया। आपरेशन सर्च अभी भी जारी।

सौरमिशन की सफलत पर क्य बोले इसरो चीफ एस सोमनाथ?

ISRO के सौर मिशन आदित्य-L1 के हेलो ऑर्बिट में प्रवेश करने पर ISRO प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा, ‘यह हमारे लिए बहुत संतुष्टदायक है क्योंकि यह एक लंबी यात्रा का अंत है। लिफ्ट-ऑफ से लेकर अब तक 126 दिन बाद यह अंतिम बिंदु पर पहुंच गया है। इसलिए अंतिम बिंदु तक पहुंचना हमेशा एक चिंताजनक क्षण होता है, लेकिन हम इसके बारे में बहुत आश्वस्त थे। तो जैसा अनुमान लगाया गया था वैसा ही हुआ।’

भारत ने दुनिया को बोला सूर्य नमस्कार! ISRO के पहले सौर मिशन आदित्य एल-1 ने रचा इतिहास

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। सोलर मिशन के तहत इसरो की ओर से भेजे गए आदित्य-L1 आज शाम करीब चार बजे के आसपास अपने गंतव्य स्थान एल-1 प्वाइंट पर पहुंच गया है। अब धरती से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर से आदित्य सैटेलाइट सूरज की स्टडी अगले पांच साल तक करता रहेगा।

महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में शहजाद पूनावाला का भूपेश बघेल पर निशाना

महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में एक आरोपी द्वारा छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल का नाम लिए जाने और ईडी द्वारा पूरक आरोपपत्र में कांग्रेस नेता का नाम लिए जाने पर बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “कांग्रेस की जहां पर भी सरकारें रहीं वहां पर उन लोगों ने केवल लूट मचाने का काम किया।….कांग्रेस के सीएम किस तरह का लूट मचा रहे थे आज ये समाने आया है। कांग्रेस के लिए मुख्यमंत्री का मतलब कभी मुख्यमंत्री नहीं था, उनके लिए इसका मतलब ‘भ्रष्ट मंत्री’ था…अब सवाल ये है कि आखिर भूपेश बघेल ने आगे पैसा किसे दिया? एक तरफ, पीएम मोदी देश के लोगों को रूपे कार्ड देते हैं और दूसरी तरफ सोनिया गांधी और राहुल गांधी ‘भूपे कार्ड’ देते हैं, जिसका मतलब है कि उस कार्ड में 508 करोड़ रुपये ट्रांसफर करें और भ्रष्टाचार और लूट करें..”

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