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ताजा समाचार:महिला आरक्षण बिल2024 तक लागू होना मुश्किल:कनाडा – भारत दोनों ने एक-दूसरे के डिप्लोमैट्स निकाले

**EDS: VIDEO GRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: Prime Minister Narendra Modi addresses during an event organised to commemorate the rich legacy of the Parliament of India at the Central Hall of the old Parliament building, in New Delhi, Tuesday, Sept. 19, 2023. Vice President and Rajya Sabha Chairman Jagdeep Dhankhar, Lok Sabha Speaker Om Birla, Leader of Opposition in Rajya Sabha Mallikarjun Kharge, Congress leader in Lok Sabha Adhir Ranjan Chowdhury and Union Ministers Pralhad Joshi and Piyush Goyal are also seen. (PTI Photo)(PTI09_19_2023_000054B)

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महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला नारीशक्ति वंदन विधेयक लोकसभा में पेश हो गया। इस बिल पर बुधवार को चर्चा होगी। विपक्ष के कई दलों ने मंगलवार को महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक को ‘चुनावी जुमला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) की महिलाओं को भी भागीदारी देकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कुर्मी आंदोलन के चलते झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में रेल सेवाओं पर असर,गुजरात, झारखंड, राजस्थान, पूर्वी भारत समेत देश के कई हिस्सों में बारिश का अलर्ट,गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग को लेकर मणिपुर के पांच जिलों में 48 घंटे का बंद,कर्नाटक के MP-मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे CM सिद्धारमैया, कावेरी मुद्दा सबसे अहम ,आंध्र उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द करने संबंधी चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। केरल के सीएम ने कहा कि राज्य में निपाह का प्रकोप नियंत्रण में है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। झारखंड में कुर्मी आंदोलन के कारण झारखंड, ओडिशा में 11 ट्रेन रद्द हो गईं। वहीं, आठ के मार्ग में परिवर्तन किया गया। एशियाई खेल फुटबॉल में चीन ने भारत को 5-1 से हराया।

आज के प्रमुख इवेंट्स

  1. आज संसद के स्पेशल सेशन का तीसरा दिन है। महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक बहस होगी।
  2. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आज 3 बड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इसमें असम में अवैध प्रवासियों की नागरिकता, लोकसभा-विधानसभा में SC-ST आरक्षण और सांसदों को आपराधिक मुकदमों में छूट के केस शामिल हैं।

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश, कानून बनने के बाद महिला सांसदों की संख्या 181 होगी

नई संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर हंगामा हुआ। जिसके बाद राज्यसभा को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश किया गया। इसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन का प्रावधान है। अगर बिल कानून बन जाता है तो भी 2024 में लागू नहीं हो पाएगा। क्योंकि ये जनगणना के आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होगा। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जनगणना और परिसीमन हो पाना मुश्किल है।

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा की। उन्होंने कहा- दलित और पिछड़ी जाति की महिलाओं को वो मौका नहीं मिलता, जो बाकी सब को मिलता है। इसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- देश की राष्ट्रपति कौन हैं? वे ट्राइबल समाज से आने वाली महिला हैं।

बिल पास होने के बाद क्या होगा: अभी लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं, इस बिल के पास होने के बाद 181 महिला सांसद हो जाएंगी। यह आरक्षण सीधे चुने जाने वाले जन प्रतिनिधियों के लिए लागू होगा। यानी यह राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों पर लागू नहीं होगा। लोकसभा में 543 सीटों में से 131 SC-ST के लिए आरक्षित हैं। इनका एक तिहाई यानी 44 सीटें SC-ST महिलाओं के लिए रहेंगी। तब बाकी महिलाओं के लिए 137 सीटें बचेंगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

महिला आरक्षण विधेयक से जुड़ी 7 जरूरी बातें, क्या महिला आरक्षण हमेशा के लिए है?

  1. महिला आरक्षण विधेयक कानून बनने के बाद 15 साल तक अमल में रहेगा।
  2. एससी-एसटी महिलाओं के लिए आरक्षण एससी-एसटी कोटे से ही मिलेगा, अलग से नहीं।
  3. विधेयक में ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।
  4. कौन-सी सीटों को महिलाओं के लिए रिजर्व किया जाए, ये परिसीमन के बाद तय होगा।
  5. एक महिला एक ही आरक्षित सीट से चुनाव लड़ सकती है।
  6. मौजूदा लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं पर इस विधेयक का कोई असर नहीं पड़ेगा।
  7. बिल लागू होने के बाद कोई महिला अनारक्षित सीट से भी चुनाव लड़ सकती है।

जब सभापति के आसन पर चढ़ गए सांसद, महिला आरक्षण विधेयक फाड़ा, माइक तोड़े

8 मार्च 2010 को राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी की टेबल से महिला आरक्षण विधेयक की कॉपी खींचने और माइक तोड़ने की कोशिश करते सांसद। ये तस्वीर राज्यसभा टीवी के प्रसारण के दौरान लिया गया स्क्रीनशॉट है।

8 मार्च 2010 की दोपहर। राज्यसभा में अफरा-तफरी मची थी। समाजवादी पार्टी के सांसद नंद किशोर यादव और कमाल अख्तर चेयरमैन हामिद अंसारी की टेबल पर चढ़ गए और माइक उखाड़ने की कोशिश की। राष्ट्रीय जनता दल के राजनीति प्रसाद ने बिल की कॉपी फाड़कर चेयरमैन की तरफ उछाल दी। ये लोग महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर रहे थे।

महिला आरक्षण विधेयक लाने की 10 कोशिशें हो चुकी हैं। 1996 में यूनाइटेड फ्रंट की देवगौड़ा सरकार बिल लेकर आई। लेकिन सरकार को समर्थन देने वाली कई पार्टियों ने विरोध किया। 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने 4 बार बिल पेश करने की कोशिश की। इसके बाद साल 2000, 2002, 2003 और 2008 में भी बिल पर हंगामा हुआ। साल 2010 में ये बिल राज्यसभा में पास हुआ, लेकिन लोकसभा में पेश ही नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा- संबंध बनाने के लिए पत्नी मना करे तो क्रूरता, इस आधार पर पति तलाक ले सकता है
दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि शादी के बाद अपने पार्टनर को सेक्स के लिए इनकार करना क्रूरता है। दरअसल, एक कपल की 2004 में शादी हुई थी। पत्नी 18 साल से मायके में हैं। पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक अर्जी दी थी। जिसके बाद कोर्ट ने तलाक का फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि शारीरिक संबंध के बिना शादी अभिशाप है। इस आधार पर पति तलाक ले सकता है।

 कर्नाटक हाईकोर्ट ने जून 2023 में एक मामले में सुनवाई के दौरान ऐसा ही कमेंट किया था। कोर्ट ने कहा था- शादी के बाद पति अगर पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करता है, तो ये हिंदू मैरिज एक्ट के तहत क्रूरता है, लेकिन IPC की धारा 498A के तहत अपराध नहीं है।

दरअसल, कपल की शादी साल 2004 में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। इसके बाद महिला मुश्किल से 35 दिन अपने पति के साथ रही। महिला शादी के बाद भी पिछले 18 सालों से अपने मायके में रह रही है। पत्नी के ससुराल न लौटने पर पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी, जिसके बाद कोर्ट ने तलाक का फैसला सुनाया था।

महिला ने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। महिला ने आरोप लगाया कि पति और ससुराल वाले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कैत की बेंच ने सुनवाई करते हुए महिला की याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि महिला साबित नहीं कर पाई है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। मामले में फैमिली कोर्ट ने सही फैसला दिया था। हालांकि यह साबित नहीं हुआ है कि महिला ने पति को छोड़ दिया था, लेकिन महिला ने पति के साथ 18 साल तक जो किया, वह क्रूरता है। इस आधार पर पति महिला से तलाक ले सकता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी एक मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा ही कमेंट किया था

कर्नाटक हाईकोर्ट ने जून 2023 में एक मामले में सुनवाई के दौरान ऐसा ही कमेंट किया था। कोर्ट ने कहा था- शादी के बाद पति अगर पत्नी को शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करता है, तो यह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत क्रूरता है, लेकिन IPC की धारा 498A के तहत अपराध नहीं है। कोर्ट ने पति और उसके परिजनों के खिलाफ दायर उस क्रिमिनल केस को भी खारिज कर दिया, जो पत्नी ने 2020 में दर्ज कराया था। कोर्ट ने हाल ही में दिए एक फैसले में यह बात कही।

शादी के 28 दिन बाद ही महिला ने पति को छोड़ा
कपल की शादी 18 दिसंबर 2019 को हुई थी। शादी के महज 28 दिन बाद ही पत्नी मायके चली गई। महिला ने 5 फरवरी 2020 को पति और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराया था। पत्नी ने हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत शादी रद्द करने की मांग करते हुए भी एक केस दर्ज कराया था। इसके बाद 16 नवंबर 2022 को दोनों के बीच तलाक हो गया था। 

संसद की पुरानी इमारत अब संविधान सदन, PM बोले- इसकी गरिमा कभी कम नहीं होगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट के साथियों के साथ नई संसद भवन जाते हुए। इसके बाद तमाम सांसद भी नई संसद पहुंचे।

संसद की 96 साल पुरानी इमारत में मंगलवार को कार्यवाही का आखिरी दिन था। आजादी और संविधान को अपनाने की गवाह इस इमारत को विदाई देने पक्ष-विपक्ष के तमाम सांसद पहुंचे। प्रधानमंत्री ने पुराने संसद भवन को संविधान सदन के नाम से बुलाने का प्रस्ताव रखा। सेंट्रल हॉल में मौजूद सांसदों ने मेज थपथपाकर इसकी सहमति दी। मोदी ने कहा- पुराने सदन की गरिमा कभी कम नहीं होनी चाहिए।

 पुरानी संसद का उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को लॉर्ड इरविन ने किया था। इसे एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने डिजाइन किया था। उस वक्त इसे बनाने में 83 लाख रुपए खर्च हुए थे। इसे संसद भवन नहीं बल्कि ‘हाउस ऑफ पार्लियामेंट’ कहा जाता था। इसके उद्घाटन के दो साल बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंका था। आजादी के बाद से यहां हमारे देश के सांसद बैठने लगे और इसे संसद कहा जाने लगा।

प्रधानमंत्री ने पुराने संसद भवन को संविधान सदन के नाम से बुलाने का प्रस्ताव रखा। सेंट्रल हॉल में मौजूद सांसदों ने मेज थपथपाकर इसकी सहमति दी। मोदी ने कहा- पुराने सदन की गरिमा कभी कम नहीं होनी चाहिए। संविधान सदन से हमारी प्रेरणा बनी रहेगी।

मोदी की 38 मिनट की स्पीच की 10 बड़ी बातें…

PM मोदी ने 38 मिनट की स्पीच दी। उन्होंने संसद भवन के इतिहास को संजोते हुए वर्तमान में चंद्रयान-3 और G20 के सफल आयोजन की भी चर्चा की।

1. देशवासियों को गणेश चतुर्थी की बधाई और शुभकामनाएं दी
मोदी ने अपने भाषण के शुरुआत में देशवासियों को गणेश चतुर्थी की बधाई दी। उन्होंने कहा कि नए संसद भवन में हम नए भविष्य का श्री गणेश करने जा रहे हैं। आज हम यहां विकसित भारत का संकल्प दोहराकर फिर एक बार संकल्पबद्ध होकर और उसको पूर्ण करने के इरादे से नए भवन की तरफ प्रस्थान कर रहे हैं।

2. संसद भवन हमें हमारे कर्तव्य के लिए प्रेरित भी करता है
मोदी ने कहा- ये भवन और उसमें भी यह सेंट्रल हॉल एक प्रकार से हमारी भावनाओं से भरा हुआ है। हमे भावुक भी करता है और हमें हमारे कर्तव्य के लिए प्रेरित भी करता है। आजादी के पूर्व ये खंड एक प्रकार से लाइब्रेरी के रूप में इस्तेमाल होता था। बाद में यहां संविधान सभा की बैठक शुरू हुई। उसमें गहन चर्चा करके हमारे संविधान ने यहीं पर आकार लिया।

3. शाहबानों केस के जरिए तीन तलाक का जिक्र किया
मोदी ने कहा कि यहीं पर 1947 में अंग्रेजी हुकूमत ने सत्ता हस्तांतरण किया। यह सेंट्रल हॉल उस प्रकिया का भी साक्षी है। हमारे राष्ट्रगान और तिरंगे को भी यहीं अपनाया गया। यहीं पर 4 हजार से ज्यादा कानून पास हुए। इसी संसद में मुस्लिम बेटियों को न्याय की जो प्रतीक्षा थी, शाहबानों केस के कारण गाड़ी कुछ उलटी पाटी पर चल गई थी। इसी सदन ने हमारी उस गलती को ठीक किया।

4. आज भारत नई चेतना और नई ऊर्जा के साथ जाग उठा है
मोदी ने कहा कि मैंने लाल किले से कहा था- यही समय है, सही समय है। एक के बाद एक घटनाओं पर नजर डालें तो हर एक घटना इस बात की गवाह है कि आज भारत एक नई चेतना के साथ जाग उठा है। भारत एक नई ऊर्जा से भर गया है। यही चेतना और ऊर्जा करोड़ों लोगों के सपनों को संकल्प में बदल सकती है और उन संकल्पों को हकीकत में बदल सकती है।

5. छोटे-छोटे मुद्दों में उलझने का समय खत्म, आत्मनिर्भर बनना होगा
हमारे लिए छोटे-छोटे मुद्दों में उलझने का समय खत्म हो गया है। सबसे पहले, हमें आत्मनिर्भर भारत बनने का लक्ष्य पूरा करना होगा। यह समय की मांग है, यह हर किसी का कर्तव्य है। पार्टियां इसके आड़े नहीं आतीं। सिर्फ दिल चाहिए, देश के लिए चाहिए।

सेंट्रल हॉल में मंच पर बाएं से लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लकार्जुन खड़गे।

6. छोटे कैनवास पर बड़ा चित्र नहीं बना सकते, इसे बड़ा करना होगा
मोदी ने कहा- जैसे छोटे कैनवास पर बड़ा चित्र नहीं बन सकता, वैसे हम भी अगर अपने सोचने के कैनवास को बड़ा नहीं करेंगे तो भव्य भारत का चित्र अंकित नहीं कर पाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अमृत काल के 25 वर्षों में भारत को बड़े कैनवास पर काम करना होगा।

7. दुनिया आश्वस्त है कि भारत टॉप 3 में पहुंचकर रहेगा
मोदी ने कहा- आज भारत पांचवी अर्थव्यवस्था पर पहुंचा है लेकिन पहले 3 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। मैं जिस स्थान पर हूं उस जानकारी के आधार और विश्व के गणमान्य लोगों से बातचीत करता हूं उस आधार पर कह रहा हूं कि दुनिया आश्वस्त है कि भारत टॉप 3 में पहुंचकर रहेगा।

8. दुनिया भारत के आत्मनिर्भर मॉडल की चर्चा करने लगी है
मोदी ने कहा- हमें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सबसे पहले परीपूर्ण करना चाहिए और यह हम से, हर नगारिक से शुरूआत होती है। एक समय ऐसा था कि लोग लिखते थे कि ‘मोदी आत्मनिर्भर की बात करता है, कहीं बहुपक्षीय के सामने चुनौती नहीं बन जाएगा।’ हमने पांच साल में देखा कि दुनिया भारत के आत्मनिर्भर मॉडल की चर्चा करने लगी है।

9. G20 समिट में नालंदा यूनिवर्सिटी की तस्वीर रखने की कहानी बताई
मोदी ने कहा- हमारे विश्वविद्यालय दुनिया के अंदर टॉप रैंकिंग में आए, अब हमें इसमें पीछे नहीं रहना है। अभी जब G20 में विश्व के मेहमान आए मैंने वहां नालंदा की तस्वीर रखी थी, जब मैं दुनिया के नेताओं को कहता था कि 1500 साल पहले मेरे देश में उत्तम से उत्तम विश्वविद्यालय हुआ करती थी तो वे सुनते ही रह जाते थे।

10. पुरानी बिल्डिंग को संविधान सदन कहें, यह हमें प्रेरणा देता रहेगा
मोदी ने कहा- मेरी प्रार्थना और सुझाव है कि जब हम नए संसद भवन में जा रहे हैं तो इसकी (पुराना संसद भवन) गरिमा कभी भी कम नहीं होनी चाहिए। इसे सिर्फ ‘पुराना संसद भवन’ कहकर छोड़ दें, ऐसा नहीं होना चाहिए। अगर आप सब की सहमती हो तो इसे भविष्य में ‘संविधान सदन’ के नाम से जाना जाए।

पुरानी संसद से जुड़ी तस्वीरें…

PM मोदी फोटो सेशन के लिए सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर पुरानी संसद पहुंचे।

संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाते अन्य सांसद।

गुजरात से BJP सांसद नरहरि अमीन की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें साथियों ने संभाला।

राहुल गांधी फोटो सेशन के दौरान। वे सबसे ऊपर सीढ़ी पर खड़े दिखे।

सेंट्रल हॉल में मोदी ने शरद पवार से मुलाकात की।

सेंट्रल हॉल में सोनिया गांधी के बगल में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठे दिखाई दिए।

प्रधानमंत्री भाजपा सांसदों के पास भी जाकर मिले और उनका अभिवादन किया।

प्रधानमंत्री मोदी विपक्षी सांसदों से भी मिलने गए। इस दौरान सोनिया गांधी, अधीर रंजन चौधरी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपनी जगह पर खड़े होकर उनका अभिवादन किया।

सभी सांसदों को संविधान की कॉपी दी जाएगी। ये सोमवार को ही संसद पहुंचा दी गई थीं।

PM मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्‌डा पैदल ही एक साथ पुरानी संसद से निकलकर नए संसद भवन पहुंचे।

विपक्ष के सांसद पुरानी बिल्डिंग से नई बिल्डिंग में गए।

नए संसद भवन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पीकर और सभी सांसदों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया। उनके साथ रक्षा मंत्री और कैबिनेट के अन्य मंत्री भी मौजूद थे।

मेनका ने कहा- महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलने जा रहा

सदन के सभी सांसदों ने फोटो सेशन कराया
लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों ने सुबह सेंट्रल हॉल के पास एक साथ फोटो सेशन कराया। इस दौरान PM मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत सत्ता और विपक्ष के सभी सांसद मौजूद रहे।पहले राज्यसभा और लोकसभा के सांसदों ने फोटो खिंचवाई। इसके बाद दोनों सदनों के सभी सांसदों का ग्रुप फोटो सेशन भी हुआ। इस बीच गुजरात से BJP सांसद नरहरि अमीन की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद सेंट्रल हॉल में मोदी देश के सभी सांसदों के पास जाकर मिले। यहां राष्ट्रगान हुआ।

नया भवन पूरी तरह हाईटेक, चेहरा ही पहचान पत्र होगा

64 हजार 500 वर्ग मीटर में बना नया संसद भवन चार मंजिला है।

अशोक गहलोत को मानहानि केस में राहत नहीं, कोर्ट ने आरोप मुक्त करने की अर्जी खारिज की
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की ओर से दायर किए गए मानहानि के केस में राजस्थान के CM अशोक गहलोत को राहत नहीं मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गहलोत की आरोप मुक्त करने की अपील को खारिज कर दिया। ऐसे में अब गहलोत पर मानहानि का ये मुकदमा चलता रहेगा।

 गहलोत ने इस साल 21 फरवरी को कहा था कि संजीवनी घोटाले में गजेंद्र सिंह के मां-बाप, पत्नी सहित पूरा परिवार शामिल है। इसके बाद गजेंद्र सिंह ने मानहानि का दावा किया और राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जुलाई को गहलोत के खिलाफ समन जारी किया था।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने दायर किया था मानहानि का केस
दरअसल, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सीएम अशोक गहलोत की ओर से संजीवनी घोटाले में उनको और उनके परिवार को आरोपी बताने के मामले में मानहानि का दावा किया था। इस पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जुलाई को सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ समन जारी किया था। इसके खिलाफ गहलोत ने सेशन कोर्ट में रिवीजन फाइल की थी, लेकिन उनको वहां से राहत नहीं मिली थी। रिवीजन कोर्ट ने सीएम गहलोत को केवल वीसी के जरिए पेश होने की छूट दी थी।

सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि संजीवनी घोटाले में गजेंद्र सिंह, उनके मां-बाप और पत्नी सहित पूरा परिवार शामिल है। इसके बाद गजेंद्र सिंह ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था।

गहलोत बोले- एसओजी ने जो बताया वो बोला
रिवीजन कोर्ट में 1 अगस्त 2023 को सुनवाई के दौरान सीएम अशोक गहलोत ने कहा था कि मेरे पास गृह विभाग भी है। गृहमंत्री होने के नाते एसओजी मुझे रिपोर्ट करती है। एसओजी ने केस को लेकर जो मुझे जानकारी दी, उसे मीडिया के साथ साझा किया। एसओजी को मिली शिकायत में गजेंद्र सिंह के परिवार का नाम भी है।

वहीं गजेंद्र सिंह शेखावत के वकीलों ने बहस करते हुए कहा था कि हमारा किसी भी शिकायत में नाम नहीं था। मानहानि का केस दर्ज होने के बाद एसओजी ने इस मामले में कथित तथ्य जुटाए।

करीब 6 महीने पहले गहलोत ने दिया था बयान
दरअसल, गहलोत ने 21 फरवरी को सचिवालय में बजट की समीक्षा बैठक के बाद कहा था कि संजीवनी घोटाले में गजेंद्र सिंह के मां-बाप, पत्नी सहित पूरा परिवार शामिल है। इस घटना से पहले भी दोनों नेताओं के बीच लगातार बयानबाजी होती आई है। करीब 5 माह पहले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ मानहानि का दावा पेश किया था। गजेंद्र सिंह ने संजीवनी घोटाले में उनके परिवार के बारे में दिए गए अशोक गहलोत के बयान को आधार बनाया था।

केस को लेकर गहलोत ने कहा था- स्वागत है
मानहानि केस को लेकर सीएम अशोक गहलोत ने भी केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह पर हमला बोला था। गहलोत ने कहा था कि पूरा घोटाला कागजों पर है। गजेंद्र सिंह के मानहानि केस का स्वागत है। कम से कम इस बहाने केस आगे तो बढ़ेगा। उन्होंने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा था कि उन्हें गजेंद्र सिंह को अपने मंत्रिमंडल से हटाना चाहिए।

कश्मीर में एनकाउंटर के 7वें दिन लश्कर कमांडर ढेर, दो आतंकियों के शव मिले

यह आतंकी उजैर खान है, जिसकी तस्वीर कश्मीर पुलिस ने जारी की थी।

कश्मीर के अनंतनाग में एनकाउंटर के सातवें दिन लश्कर-ए-तैयबा कमांडर उजैर खान समेत 3 आतंकी मारे गए। इनमें दो के शव मिले हैं। अनंतनाग में 13 सितंबर से एनकाउंटर जारी है। पहले दिन एनकाउंटर में कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धौंचक और डीएसपी हुमायूं भट सहित दो जवान शहीद हुए थे।

 कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच ये अब तक का सबसे लंबा एनकाउंटर है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में यह तीसरी सबसे लंबी चलने वाली मुठभेड़ है। अनंतनाग में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को जल्द खत्म करने के लिए पैरा कमांडो और सुरक्षाबलों की 10 और कंपनियां तैनात की गई हैं।

कनाडा का आरोप- भारत ने सिख नेता की हत्या कराई, अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की

18 सितंबर को कनाडा के PM ट्रूडो ने संसद में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर बयान दिया।

कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा कि भारत सरकार के एजेंट्स ने जून में ब्रिटिश कोलंबिया में सिख समुदाय के नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की थी। इसके बाद कनाडा सरकार ने एक भारतीय डिप्लोमैट को देश से निकाल दिया। वहीं भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। साथ ही देश में मौजूद कनाडा के सीनियर डिप्लोमैट को भारत छोड़ने के लिए 5 दिन का समय दिया है।

कनाडा सरकार ने भारत जाने वाले अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी भी जारी की है। कनाडा ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर में सिक्योरिटी के हालात को देखते हुए वहां न जाएं। वहां टेरेरिज्म और किडनैपिंग का खतरा है। इसके अलावा असम और मणिपुर में भी न जाने की सलाह दी गई है।

 कनाडा के डिप्लोमैट भारत से निकाले जाने के कुछ ही घंटे बाद ट्रूडो ने कहा कि वे भारत के साथ तनाव नहीं चाहते। लेकिन भारत इस हत्या को गंभीरता से ले। ट्रूडो का कहना है कि 9-10 सितंबर को भारत में G20 बैठक के दौरान उन्होंने PM मोदी के सामने इस मुद्दे को उठाया था। उनके देश लौटने के बाद कनाडा ने भारत के साथ ट्रेड मिशन पर भी रोक लगा दी थी।

मंगलवार रात दो बड़ी घटनाएं हुईं। पहली- न्यूज एजेंसी ने कनाडा सरकार के हवाले से खबर दी। इसमें कहा गया कि कनाडा ने जम्मू और कश्मीर में सिक्योरिटी की हालात को देखते हुए अपने नागरिकों से वहां न जाने को कहा है। वहां टेरेरिज्म और किडनैपिंग का खतरा है। इसमें लद्दाख को शामिल नहीं किया गया। यह पहले जारी एडवाइजरी का अपडेशन था।

दूसरी- कनाडा के सबसे बड़े अखबार ‘टोरंटो स्टार’ ने ट्रूडो का बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि कनाडा की सरकार भारत के साथ तनाव नहीं बढ़ाना चाहती, लेकिन भारत को इन मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा।

18 जून को कनाडा में भारत के मोस्ट वांटेड खालिस्तानी आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या कर दी गई थी।

अपोजिशन लीडर की ट्रूडो को नसीहत
भारत के टकराव के मुद्दे पर कैनेडियन अपोजिशन प्रधानमंत्री ट्रूडो से दूरी बनाता नजर आ रहा है। यहां के अपोजिशन लीडर पियरे पोएलिविर ने सोशल मीडिया पर कहा- हमारे प्रधानमंत्री को साफ और सीधी बात करनी चाहिए। अगर उनके पास सबूत हैं तो वो जनता के सामने रखें। ऐसा होगा तभी तो लोग फैसला ले सकेंगे कि कौन सही और कौन गलत। हैरानी की बात यह है कि ट्रूडो कोई फैक्ट्स सामने नहीं रख रहे। उनकी तरफ से सिर्फ स्टेटमेंट्स सामने आ रहे हैं, ये तो कोई भी कर सकता है।

ट्रूडो का नया बयान
टोरंटो स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक- मंगलवार रात कैनेडियन प्राइम मिनिस्टर का रुख कुछ नर्म दिखा। उन्होंने कहा- हम इस तनाव को बढ़ाना नहीं चाहते। हमने कुछ फैक्ट्स सामने रखे हैं। हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर भारत सरकार के साथ काम करें ताकि हर चीज क्लीयर हो सके।

भारत बोला- कनाडा के आरोप बेतुके
भारत ने कनाडा की तरफ से लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा- कनाडा के सभी आरोप बेतुके हैं। इसी तरह के आरोप कनाडाई प्रधानमंत्री ने हमारे PM मोदी के सामने भी रखे थे और उन्हें पूरी तरह से खारिज कर दिया गया था।

इस तरह के निराधार आरोप खालिस्तानी आतंकवादियों और चरमपंथियों से ध्यान हटाने की कोशिश है। इन्हें कनाडा में पनाह दी गई है और ये भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा हैं।

ट्रूडो बोले- जांच में सहयोग के लिए भारत पर दबाव बनाएंगे
ट्रूडो ने सांसदों से कहा- कनाडा की धरती पर किसी नागरिक की हत्या करवाने में विदेशी सरकार का शामिल होना, हमारे देश की संप्रभुता का उल्लंघन है। हम इस हत्या की जांच में सहयोग देने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाएंगे।

प्रधानमंत्री ट्रूडो ने कहा- कनाडा में रहने वाली भारतीय मूल के सिखों की बड़ी आबादी इस हत्या को लेकर गुस्से से भरी है। कई सिख अपनी सुरक्षा को लेकर डर में हैं। देश में 14-18 लाख के बीच भारतीय मूल के नागरिक हैं, जिनमें से कई सिख हैं। कनाडा की विपक्षी पार्टी न्यू डेमोक्रटिक पार्टी के लीडर जगमीत सिंह सिख समुदाय से हैं।

9 सितंबर को G20 समिट के दौरान भारत मंडपम कन्वेंशन सेंटर में कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो का स्वागत करते भारतीय PM मोदी।

पंजाब में जन्मा, यहीं आतंकवाद फैलाना चाहता था
निज्जर पंजाब के जालंधर के भार सिंह पुरा गांव का रहने वाला था। गांव के सरपंच राम लाल ने बताया कि निज्जर 1992 में कनाडा चला गया था। वो खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का प्रमुख था। वो भारतीय एजेंसियों की मोस्ट वांटेड आतंकियों की लिस्ट में शामिल था।

NIA ने 40 आतंकियों की लिस्ट जारी की थी, उसमें भी निज्जर का नाम था। ब्रैंपटन शहर में खालिस्तान के हक में रेफरेंडम करवाने में भी उसकी भूमिका थी। निज्जर के खिलाफ पुलिस ने 23 जनवरी, 2015 को एक लुकआउट नोटिस और 14 मार्च, 2016 को एक रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था।

इसमें उसके प्रत्यर्पण की मांग की गई थी। कनाडा में निज्जर के खिलाफ 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

कनाडा में रहते हुए निज्जर प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू के करीब आया। पन्नू और निज्जर की निकटता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि निज्जर की हत्या के बाद से ही पन्नू तिलमिलाया हुआ है और कनाडा में भारत के खिलाफ और खालिस्तान के समर्थन में जनमत संग्रह करवाने का दावा कर रहा है।

कैसे इन आरोपों से भारत-कनाडा के रिश्ते और बिगड़ सकते हैं
कनाडा और भारत के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। कनाडाई PM के इस आरोप से दोनों देशों के बीच संबंध और खराब होने की आशंका है।

खालिस्तान समर्थक संगठनों ने रॉ पर लगाया था निज्जर की हत्या का आरोप
खालिस्तान समर्थक संगठनों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर निज्जर की हत्या के पीछे भारत की खुफिया एजेंसी रॉ का हाथ बताया था। 23 जून को कनाडा के दो सिख संगठन ब्रिटिश कोलंबिया गुरुद्वारा काउंसिल और ओंटारिओ गुरुद्वारा कमेटी ने इस मामले में मिनिस्टर ऑफ पब्लिक सेफ्टी मार्को मेंडिसिनो को लेटर लिखा था।

इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि निज्जर की हत्या के पीछे भारत की एजेंसियों का हाथ है। ऐसे कई लेटर कनाडा सरकार को लिखे गए थे।

8 जुलाई को कनाडा में खालिस्तान फ्रीडम रैली निकाली गई थी हरदीप सिंह निज्जर की याद में खालिस्तान समर्थक संगठन ने 8 जुलाई को कनाडा में खालिस्तान फ्रीडम रैली निकाली थी। ये टोरंटो में भारतीय दूतावास पर खत्म हुई थी। यहां भारत सरकार के समर्थन में भी लोग मौजूद थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी हुई थी।

तस्वीर टोरंटो स्थित भारतीय दूतावास की है। 8 जुलाई को यहां खालिस्तान समर्थक और भारत के समर्थक आमने-सामने दिखे।

ब्रिटिश कोलंबिया के गुरुद्वारे के पास हुई थी निज्जर की हत्या
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर आतंकी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) का चीफ था। वह कनाडा में रहकर लंबे समय से पंजाब में खालिस्तानी मूवमेंट को हवा दे रहा था। 18 जून को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरी स्थित गुरुनानक सिख गुरुद्वारा के पास 2 अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर निज्जर की हत्या कर दी थी। निज्जर इस गुरुद्वारे का प्रधान भी था।

निज्जर गुरुद्वारे से बाहर पार्किंग में अपनी कार में था। इसी दौरान 2 युवक मोटरसाइकिल पर आए और फायरिंग शुरू कर दी। निज्जर को कार से बाहर निकलने तक का समय नहीं मिला और वहीं उसकी मौत हो गई। मलिक की हत्या बनी निज्जर की मौत का कारण
80 के दशक में कुख्यात आतंकी रहे रिपुदमन मलिक की हत्या ही निज्जर की मौत का कारण बनी। मलिक पर एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-182 को उड़ाने की साजिश में शामिल होने का आरोप था। NIA को मिले इनपुट्स के आधार पर बात सामने आई कि निज्जर को किसी और ने नहीं, बल्कि रिपुदमन मलिक के समर्थकों ने ही मारा। यह दो खालिस्तानी संगठनों की आपसी दुश्मनी का नतीजा था।

इंफाल में बंद रहे बाज़ार, 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द

मणिपुर में हथियार रखने और सेना की वर्दी पहनकर घूमने के आरोप में गिरफ्तार पांच युवकों की रिहाई की मांग को लेकर किए गए 48 घंटे के बंद का असर मंगलवार को इंफाल घाटी में दिखा। सुबह से ही बाजार बंद रहे और सड़कों पर इक्का-दुक्का ही वाहन नजर आए। मंगलवार और बुधवार को होने वाली मणिपुर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं भी रद्द कर दी गईं। इन्हें बाद में कराया जाएगा।

अगले साल होने वाली सीयूईटी, नीट यूजी, जेईई मेन परीक्षाओं की तारीख घोषित

अगले वर्ष, कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी सीयूईटी यूजी की परीक्षा 15 मई से 31 मई 2024 के बीच आयोजित की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के मुताबिक नीट यूजी 5 मई को आयोजित की जाएगी। वहीं जेईई मेन परीक्षा का पहला सत्र 24 जनवरी से फरवरी 2024 में आयोजित किया जाएगा। सीयूईटी, अंडरग्रैजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए है। यह परीक्षा देशभर के केंद्रीय विश्‍वविद्यालय समेत कई अन्य विश्‍वविद्यालय में दाखिला के लिए आवश्यक है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने मंगलवार को शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए सीयूईटी यूजी परीक्षा की तारीख घोषित की है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा की तारीख तो घोषित कर दी है, लेकिन इन परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन की तारीख फिलहाल घोषित नहीं की गई है। 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पास करने वाले छात्र यूजी पाठ्यक्रम में एडमिशन लेने के लिए यह परीक्षा दे सकते हैं।

आज जब हम नए संसद भवन में प्रवेश कर रहे हैं, जब संसदीय लोकतंत्र का ‘गृह प्रवेश’ हो रहा है, तब यहां पर आज़ादी की पहली किरण का साक्षी है और जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा – पवित्र सेंगोल – ये वो सेंगोल है जिसको भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. नेहरू ने छुआ है …इसलिए हमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण अतीत से जोड़ता है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत ने कनाडा के राजनयिक को निकाला, 5 दिन में देश छोड़ने का कहा

भारत में कनाडा के उच्चायुक्त को आज तलब किया गया और भारत में स्थित एक वरिष्ठ कनाडा के राजनयिक को निष्कासित करने के भारत सरकार के फैसले के बारे में सूचित किया गया। संबंधित राजनयिक को अगले पांच दिनों के भीतर भारत छोड़ने को कहा गया है। यह निर्णय हमारे आंतरिक मामलों में कनाडा के राजनयिकों के हस्तक्षेप और भारत विरोधी गतिविधियों में उनकी भागीदारी पर भारत सरकार की बढ़ती चिंता को दर्शाता है: विदेश मंत्रालय

कनाडा ने भारतीय राजनयिक को निकाला

कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्‍तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया। एक भारतीय राजनयिक को निष्‍कासित किया गया है। ट्रूडो को अपने इस फैसले के लिए सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। 

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