अग्नि आलोक

*सुनो भोपाल !नई फितरतों का शहर…..प्रदेश की राजधानी*

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क्या शानदार संस्कृति रही है वहां! हिंदू मुस्लिम अंतर्संबंध। नवाबों का शहर। मुफलिसी का भी शहर। पुरानी रवायत का शहर ।नई फितरतों का शहर ।प्रदेश की राजधानी। भोपाल ताल। साफ सुथरी सडकें ।कुदरत का करिश्मा। तात्या टोपे नगर को टीटी नगर भी कहना ।साहित्य संस्कृति कला संग्रहालय पुरातत्व सब में भोपाल ही भोपाल ।और क्या। वहां की मीठी जुबान और उसके जनता द्वारा रचे गए अद्भुत मुहावरे । गलियों और गालियों  में भी कितनी रची बसी कलात्मकता। जीना ही कितना सौंदर्य है। कितनी कलात्मकता। कितनी उर्वरता है भोपाल में।याद तो आते रहते हो। तुम्हारा कलेजा कितना बड़ा है।

कनक तिवारी 

 तुमने मेरी ज़िंदगी के 5 साल मांगे थे और मैं तुम्हारी आगोश में था‌ ।वह मेरी ज़िंदगी का बहुत महत्वपूर्ण समय रहा है। जब मैं कहता था ज़ि़दा हूं मगर जीस्त की लज्ज़त अभी बहुत बाकी।तुमने मुझे बहुत सिखाया। राजनीति के गुरु सिखाए हालांकि मैं फिसड्डी ही रहा। 

दिग्विजय सिंह की चपलता से कितने लोग धोखा खाते थे। आज भी खा रहे हैं। तेल लगाकर कुश्ती लड़ना तो कोई दिग्विजय से सीखे। वह तो लोगों को अब तक समझ नहीं आ रहा है। क्या शानदार संस्कृति रही है वहां! हिंदू मुस्लिम अंतर्संबंध। नवाबों का शहर। मुफलिसी का भी शहर। पुरानी रवायत का शहर ।नई फितरतों का शहर ।प्रदेश की राजधानी। भोपाल ताल। साफ सुथरी सडकें ।कुदरत का करिश्मा। तात्या टोपे नगर को टीटी नगर भी कहना ।साहित्य संस्कृति कला संग्रहालय पुरातत्व सब में भोपाल ही भोपाल ।और क्या। वहां की मीठी जुबान और उसके जनता द्वारा रचे गए अद्भुत मुहावरे । गलियों और गालियों  में भी कितनी रची बसी कलात्मकता। जीना ही कितना सौंदर्य है। कितनी कलात्मकता। कितनी उर्वरता है भोपाल में।याद तो आते रहते हो। तुम्हारा कलेजा कितना बड़ा है।

 भोपाल! तुम कितने लोगों को समेटते रहे और अभी भी।रमेश चंद्र शाह विजय बहादुर सिंह मंजूर अहते शाम कमला प्रसाद फ़ज़ल ताबिश अशफाक साहब विनय दुबे महेंद्र गगन चंदन सिंह भट्टी नरेश मेहता मेहरुन्निसा परवेज कैलाश चंद्र पंत बालमुकुंद भारती शरद चंद्र बेहार ज्योत्सना मिलन धनंजय वर्मा देवेंद्र दीपक महेश श्रीवास्तव लज्जा शंकर हरदेनिया शैलेंद्र शेली उमेश त्रिवेदी नवीन सागर अशोक वाजपेयी  दुष्यंत कुमार ज्ञान चतुर्वेदी कपिल तिवारी गुल दीदी हरि भटनागर देवेंद्र वर्मा बशीर बद्र हीरालाल शुक्ल भगवत रावत मुकेश वर्मा नरेंद्र दीपक रमाकांत श्रीवास्तव तरुण कुमार भादुड़ी राजेंद्र शर्मा राजेश जोशी ध्रुव शुक्ल मदन मोहनजोशी प्रफुल्ल माहेश्वरी मदन सोनी उदयन वाजपेयी पूर्ण चंद्र रथ नवल शुक्ल। कितने नाम लूं। थक जाऊंगा गिनते गिनते फिर भी पूरे नहीं होंगे।

भाई तुम्हारी छाती में तो पूरा भारत है। प्रदेश नहीं टूटता तो मैं भी वहीं रहता भाई ।मैं तो था ही। वही मेरे दोनों बच्चों की शादी ठाठ बाट बात से हुई। जो मैं सोच नहीं सकता था। 5 साल मैंने गांधी समिति चलाई। 75 किताबें छापीं। सौ कार्यक्रम किए। राष्ट्रीय स्तर के भी थे। देश के कोई बड़े बुद्धिजीवी गांधीवादी बचे नहीं जिन्हें नहीं बुलाया भोपालने। 

हाउसिंग बोर्ड जैसी संस्था संस्था का मैं अध्यक्ष रहा। बहुतों का भला भी किया। राजनीति में बहुत अपमान भी सहे। प्रदेश का विभाजन होने से मुझे लौटना पड़ा। विष्णु खरे ने तो अपनी कविता में लिख ही दिया है कि कुछ लोगों को समझ नहीं आएगा कि वह कहां जाएं जैसे कनक तिवारी। तुम्हारे कारण भोपाल मैं लघु उद्योग निगम का अध्यक्ष बना 1994 में और लघु उद्योग निगम को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर में मध्य प्रदेश का पवेलियन बनाने के नाम पर देश का पहला पुरस्कार मिला जो आज तक लघु उद्योग निगम को कभी नहीं मिला। बहुत सी असफलताएं भी हैं।

 सब कुछ मीठा-मीठा नहीं था। एक बड़े केंद्रीय मंत्री को हाउसिंग बोर्ड की 10 करोड़ की प्रॉपर्टी एक करोड़ में नहीं देने से मेरे इंकार करने के कारण मुझे जलील किया गया। इतना जलील किया गया कि मैंने राजनीति छोड़ दी भोपाल।

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