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आवासीय भूमि पर कॉमर्शियल निर्माण का मामला:लोकायुक्त अफसर बोले इंदौर की कंपनी, उज्जैन से काम

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उज्जैन

देवास रोड स्थित आवासीय भूमि पर कार्मिशयल निर्माण की अनुमति देकर फंसे नगर निगम के चार अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने जांच शुरू कर दी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम समेत षड्यंत्र की धारा में चारों नगर निगम अधिकारी पर शनिवार को ही केस दर्ज हुआ है। इनमें प्रभारी कार्यपाल यंत्री का पद संभालने वाले अरुण जैन पर तो लोकायुक्त की यह दूसरी कार्रवाई है।

इधर, ऋषिनगर निवासी दिव्यासिंह ने जो शिकायत की उसमें मुख्य रोल आरएम विनो इस्टेट डेव्हलपर्स प्राइवेट लिमिटेड इंदौर का है। कंपनी डायरेक्टर सुशील जैन ने इंदौर के नाम से उक्त कंपनी बना रखी है और खुद उज्जैन में ही रहकर इस तरह की जमीनों को टारगेट करने का काम करता है। लोकायुक्त अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के अन्य लोगों की संलिप्तता इसमें पता की जा रही है। उनकी भूमिका सामने आई तो वे भी आरोपी बनेंगे।

अरुण जैन इससे पहले पद के दुरुपयोग में फंस चुके है। साल 2010-2012 के बीच जैन ने मेघा डेवलपर्स को अनरजिस्टर्ड दस्तावेज के बावजूद अनुज्ञा जारी कर दी थी। तब भी वह फंसे थे। लोकायुक्त निरीक्षक बसंत श्रीवास्त्व ने बताया कि उक्त मामले में भी अरुण जैन के खिलाफ पद के दुरुपयोग का केस दर्ज है। उक्त मामला अभी विचाराधीन है जिसमें अभियोजन स्वीकृति के लिए भी आगे की प्रक्रिया की जा रही है।

चल-अचल संपत्ति का भी पता लगा रहे
देवास रोड की करीब आठ से दस करोड़ की आवासीय भूमि पर कार्मिशयल निर्माण की अनुमति देने को लेकर भी ऋषिनगर निवासी दिव्यासिंह की रिपोर्ट पर लोकायुक्त एसपी शैलेंद्रसिंह चौहान के निर्देश पर जांच शुरू कर दी गई है। आरोपी बनाए गए अपर आयुक्त मनोज पाठक, अधीक्षण यंत्री रामबाबू शर्मा, इंजीनियर मिनाक्षी शर्मा के साथ प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरुण जैन के संबंध में नगर निगम आयुक्त से सारे दस्तावेज पता किए जा रहे है। लोकायुक्त की टीम इनकी चल-अचल संपत्ति का भी पता लगा रही है।

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